अरुण माहेश्वरी

डोकलाम संकट: भारत को बेखबरी से निकलने की ज़रूरत

थोथी बहादुरी का प्रदर्शन करने की अभ्यस्त फ़ौज की सेवा निवृत मूंछें अभी भी कह सकती हैं कि चीन जो कह रहा है, कोरी गीदड़ भभकी है। भारत की ताकत का उसे पूरा अनुमान है, इसीलिये वह ऐसा कोई कदम नहीं उठायेगा, जो दोनों देशों के बीच सीमित अथवा विस्तृत किसी भी प्रकार के युद्ध का कारण बन सकता है। और इसीलिये जब तक वैसा कोई अघटन नहीं घटता है, ये बैठे-ठाले फ़ौजी और शासक दल के मुखापेक्षी चैनल के ज़रख़रीद ऐंकर कहते रहेंगे – डोकलाम में हम अभी चालीस ही हैं तो क्या हुआ, चीन की समूची फ़ौज के लिये ये चालीस ही बहुत भारी हैं ; डटे रहो ! कोई तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता।

भारत और चीन के झंडे।

किसी तरह की भूल बेहद खतरनाक

लेकिन हक़ीक़त में परिस्थिति इतनी आसान दिखाई नहीं देती है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के द्वारा संचालित अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ की बातों को यदि हमारी तमतमाती हुई सेवानिवृत फ़ौजी मूंछों की तरह गीदड़ भभकी मानने की भूल न करें तो कल ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने बहुत ही साफ शब्दों में डोकलाम में चीन की आगे की सैनिक रणनीति का पूरा नक़्शा बता दिया है। इसमें दो हफ़्ते के अंदर ही एक सीमित सैनिक कार्रवाई के जरिये भारतीय सैनिकों को डोकलाम के विवादित क्षेत्र से हटा देने की बात कही गई है।

पिछले चौबीस घंटों में चीन के छ: मंत्रालयों और संस्थाओं द्वारा जारी किये गये बयानों के आधार पर ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अपना यह अनुमान पेश किया है। आज के ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित ‘ग्लोबल टाइम्स’ की टिप्पणी के बारे में रिपोर्ट में संघात एकेडमी आफ सोशल साइंसेस के अन्तरराष्ट्रीय संबंधों के शोधार्थी हू झियोंग के एक लेख को उद्धृत किया गया है जिसमें वे लिखते हैं कि ,” चौबीस घंटों के अंदर चीन की ओर से की गई एक के बाद एक टिप्पणियों के जरिये भारत को यह साफ संकेत दे दिया गया है कि चीन ज्यादा समय तक अपनी सीमा में भारतीय सैनिकों के अनुप्रवेश को सहन नहीं करेगा।”

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज संसद में।

कार्रवाई से पहले देगा सूचना

‘ग्लोबल टाइम्स’ को उन्होंने कहा कि अपनी कार्रवाई करने के पहले चीन भारत के विदेश मंत्रालय को सूचित कर देगा। हू के शब्दों में “भारत को इसके परिणाम भुगतने होंगे।”

भारत के विदेश मंत्रालय ने यद्यपि अब तक इस नये घटना-क्रम पर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन भारत सरकार या उसके अधिकारियों के रुख़ में एक अजीब सी लापरवाही का नजरिया दिखाई देता है। वे संकट की इस घड़ी में जैसे ‘राम राम’ कहते हुए एक ही बात को बुदबुदा रहे हैं कि “युद्ध किसी चीज का इलाज नहीं है। परिस्थिति को तनाव मुक्त करने के लिये वे कूटनीतिक रास्तों का प्रयोग कर रहे हैं।”

हम नहीं जानते कि भारतीय पक्ष के इन ‘प्रयत्नों’ में  कितनी सचाई है और कितनी कोरी ख़ुशफ़हमी। लेकिन चीन की ओर से प्रतिदिन कड़े हो रहे बयानों से तो इन ‘कूटनीतिक प्रयत्नों’ की वास्तविकता की कोई झलक नहीं मिलती है। इधर के एक भी बयान में चीन ने भारत के साथ कूटनीतिक चैनल पर चल रही किसी भी वार्ता का कोई संकेत नहीं दिया है। यद्यपि इंडियन एक्सप्रेस की इसी रिपोर्ट में एक भारतीय सूत्र के हवाले से यह बताया गया है कि हू झियोंग हमेशा से एक भारत-विरोधी व्यक्ति रहे हैं और वे चीन के सैनिक संस्थान के प्रवक्ता नहीं हैं। वे वहां की केंद्रीय सरकार के ‘थिंक टैंक’ के सदस्य भी नहीं है, सिर्फ प्रांतीय स्तर के बुद्धिजीवी हैं।

नक्शे में डोकलाम।

तैयारियों का आ चुका है ब्योरा

वैसे ‘ग्लोबल टाइम्स’ के 5 अगस्त के संपादकीय में भारत के खिलाफ चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की युद्ध की भरपूर तैयारियों का एक ब्यौरा दिया गया है जिसमें कहा गया है कि यह युद्ध निश्चित परिणामों को हासिल करने के लिए लड़ा जायेगा। “यह युद्ध यदि फैलता है तो पीएलए के पास इतनी शक्ति है कि वह सीमाई क्षेत्र से भारत की फ़ौज का सफ़ाया कर दे।”

चीन की ओर से लगातार आ रहे इन भड़काऊ बयानों पर भारत की चुप्पी के कूटनीतिक महत्व को मानते हुए भी हम फिर यही दोहरायेंगे कि किसी भी स्थिति में ऐसे मामलों में भ्रम में नहीं रहना चाहिए। किसी भी राष्ट्र की बेखबरी कभी भी उसके लिये बहुत भारी साबित हो सकती है।

(अरुण माहेश्वरी एक स्तंभकार और साहित्यकार हैं। दर्जनों पुस्तकों के लेखक माहेश्वरी आजकल कोलकाता में रहते हैं।)

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