‘लालू यादव’ बनना कोई हंसी-ठठ्ठा नहीं है!

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By चंद्रभूषण सिंह यादव

लालू यादव जी के नाम पर कोई जितना भी हंस ले लेकिन याद रखिये “लालू” बनना कोई हंसी-ठठ्ठा नही है।लालू जैसा चरित्र सदियों में पैदा होता है। 1980 के दशक में जेपी अंदोलन के दौरान बिहार के राजनीतिक क्षितिज पर उभरकर आये इस अद्भुत एवं आश्चर्यजनक प्रतिभा ने पूरे देश को एक नई दिशा दिया है। सामाजिक न्याय के सबसे मुफीद और चट्टानी समर्थक के रूप में लालू यादव जी का नाम इतिहास के पन्नो में दर्ज होगा तो धर्मनिरपेक्षता के लिए पद-प्रतिष्ठा दांव पर लगा देने वाले महानतम सेक्युलर नेता के रूप में लालू जी की छबि सदैव अखण्ड रहेगी।

लालू प्रसाद यादव जी को आज हमलोग देख और सुन रहे हैं लेकिन आने वाली पीढियां उन्हें एक ऐसे चरित्र के रूप में याद करेंगी जो करिश्माई चरित्र का होगा,जिसके नाम के साथ अनेक मिथक और किम्बदन्तियाँ जुड़ी होंगी। ऐसा होगा भी क्यो नही क्योकि लालू यादव जी का चरित्र ही कुछ ऐसा है।

इस देश और खास तौर पर बिहार में जहां सामन्तवाद को खत्म करना,बिहार के वंचितों को मुख्यधारा में लाना,दबे-कुचले लोगो मे आत्मविश्वास जगाना एवं तमाम नामों से गठित विभिन्न तरह की सवर्ण आततायी सेनाओं से उन्हें संरक्षित करना दुरूह और अकल्पनीय कार्य था जो लालू यादव जी के प्रादुर्भाव मात्र से न केवल सम्भव हो सका वरन उल्टा हो गया।सामन्तवाद बिहार के वंचितों के समक्ष पानी मांगने लगा।रणवीर सेना से लेकर तमाम सामंतवादी सेनाएं जो दलितों, वंचितों को शिकार बनाती थीं,लालू यादव के सत्तासीन होने के बाद अतीत की चीजें हो गयी। बिहार और देश का वंचित यह महसूस करने लगा कि लालू यादव के रूप में उसे कोई ऐसा “शक्तिमान”पात्र मिला है जो सारी कठिनाइयां झेलते हुए उनका रक्षक है। हुवा भी ऐसा ही है क्योंकि चारा घोटाले की पोल खोल एफआईआर दर्ज कराने वाले लालू जी को 56 लाख के चारा घोटाले की चोरी का आरोप लगाके उनका चरित्र हनन कर उन्हें जेल भेजने से लेकर चुनाव लड़ने से रोकने तक जैसे कार्यो को अपने ब्रम्हास्त्र के जरिये देश का हकमार तबका करता रहा है।यह देश देखा है कि समान आरोपो में असली चारा घोटाले के गुनहगार जगन्नाथ मिश्र जी बेल पा गए हैं और लालू जी जेल चले गए हैं।लालू जी को वंचितों की बात मजबूती से रखना भारी पड़ा है वरना चारा घोटाले से लालू जी का कैसा सम्बन्ध, वह तो जगन्नाथ मिश्र जी के समय मे हुवा और उसका खुलासा लालू जी ने किया।

लालू यादव जी पटना की विधानसभा में हो तो सबकी घिग्घी बंधी,सन्सद में हो तो सारे तथाकथित बुद्धिजीवी धराशायी,फिर उन्हें क्यों न रोक दिया जाय चुनाव लड़ने से?लालू प्रसाद यादव जी ने देश की सन्सद में रहते हुए पिछडो के जातिवार जनगणना की जिस तरीके से वकालत की वह अपने आप मे ऐतिहासिक है। लालू जी ने महिला आरक्षण बिल में पिछड़ी-दलित महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की जिस तरीके से पैरवी की वह अविस्मरणीय है। लालू जी के मारक और अद्भुत व्यक्तव्यों से आहत अभिजात्य समाज ने सन्सद में ऐसा कानून बना दिया कि लालू जी की आवाज सन्सद में पँहुच ही न सके।हम इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि लालू जी की वाणी में कितना ओज, शक्ति,जादू और ताकत है कि उसे रोकने के लिए कानून बनाना पड़ता है। लालू प्रसाद यादव एक जादुई व्यक्तित्व है,ऐसा हम कह सकते हैं क्योंकि अजीब सा आकर्षण उनकी बोली,उनके व्यवहार और हाव-भाव मे है।

लालू जी ने इस देश के वंचितों के लिए और खास तौर पर शोषण के शिकार उत्तर भारत के हिंदी बेल्ट के लिए क्या कुछ नही किया है? लालू जी सामाजिक न्याय के लिए पटना से लेकर दिल्ली तक मथ डाले हैं। उन्होंने पूरे उत्तर भारत मे मण्डल कमीशन के लिए जनजागृति लाने के अभियान में अपनी सर्वाहुति दे डाली है।मैं खुद गवाह हूँ देवरिया के रामलीला मैदान की सभा का जिसका मैने ही संचालन किया था,कितना गजब का उद्बोधन था लालू जी का? सामाजिक न्याय के एजेंडे में जान डाल दिया था लालू जी ने,ऐसा ओजस्वी भाषण और जनता से खुद का लगाव लालू जी ने कायम किया था कि पूरी सभा रोमांचित हो उठी थी।लालू जी ने जब पैर से मोजा निकाल करके लोगो को अपना कुचला हुवा अंगूठा दिखाया था और कहा था कि भैंस के कुचल देने से मेरा यह अंगूठा ऐसा हो गया तो सभा मे बैठे पशुपालकों ने महसूस किया था कि वे सभी लालू हैं।लालू जी ने भीड़ मे बैठे एक बुजुर्ग की हथेली से सुर्ती निकाल करके जैसे ही खाया था, भीड़ को लगा था कि यह मुख्यमंत्री तो उनका अपना है।ऐसी सहजता और सरलता ने लालू जी को देश के करोड़ो-करोड़ उपेक्षित लोगो से जोड़ने का कार्य किया।

लालू जी के भाषण का मारक अंदाज भी कुछ कम न था।लालू जी उस समय जब मण्डल विरोध चरम पर था और कमण्डल वाले जयश्रीराम बोल करके मण्डल का प्रतिकार करते थे,उन्हें खूब कुरेदते थे।लालू जी की जिस सभा मे विरोधी जयश्रीराम नही बोलते थे तो लालू जी उन्हें यह बोलने के लिए उकसाते थे और कहते थे कि यहां कोई सियार नही दिखा जो हुवाँ-हुवाँ करे।लालू जी के इतना कहते ही ज्यो ही किसी ने कहीं से जयश्रीराम बोला,लालू जी को भाषण देने का मसाला मिल जाता था।लालू जी फिर तो शुरू कि देखिये यह सियार हुवाँ-हुवाँ कर बैठा।अब लालू जी मण्डल,आरक्षण,वंचित हित पर चल पड़ते थे।लालू नाम आज देश का ऐसा नाम वैसे ही नही हो गया है जिसे परास्त करने के लिए पूरी अभिजात्य समाज की सेना लगी हुई है।

लालू जी ने इंदिरा गांधी जी के इमरजेंसी को झेला है।देश मे लोकतंत्र बहाल रखने हेतु जवानी की कुर्बानी दी है।इंदिरा जी के बाद राजीव जी से लेकर नरसिंहराव जी तक से भागलपुर दंगो से लगायत बिहार में हुए अनगिनत शोषणों के विरुद्ध लड़ा है।मण्डल के लिए संघर्ष किया है और फिर आडवाणी जी से लेकर मोदी जी तक से साम्प्रदायिक सद्भावना एवं सामाजिक न्याय के लिए संघर्षरत हैं।

लालू जी को आज देश मे खलनायक सिद्ध करने की कोशिश हो रही है क्यों,क्योकि वे अकेले ऐसे शख्स हैं जिन्होंने अपने अब तक के राजनैतिक जीवन मे साम्प्रदायिक/सामंती ताकतो के समक्ष हथियार नही डाला है। अनवरत लड़ते हुए शहादत को तैयार हैं पर घुटने टेकने को नही,ऐसे अद्भुत योद्धा जिसने सामाजिक न्याय और साम्प्रदायिक सद्भावना के लिए गालियां खाने,जेल जाने,सीबीआई द्वारा प्रताड़ित होने,चारा चोर कहलाने,चुनाव लड़ने से रोके जाने,पत्नी,बेटा, बेटी और दामाद तक को फँसाये जाने के बावजूद उफ नही किया है,सँघर्ष जारी है।राणा सांगा को इतिहास कहता है कि असंख्य घाव थे उनके जिस्म पर,पर वे संघर्षरत थे,हमने राणा सांगा को देखा नही है पर लालू जी को देख रहे हैं जिन पर असंख्य घाव हैं पर यह योद्धा वंचित समाज के लिए अकेले दहाड़ रहा है।गजब का व्यक्तित्व है इस लालू का।

लालू जी पर वार केवल सामंती ताकतों ने ही नही किया है,अपनो ने भी किया है।रामविलास पासवान जी को ही ले लीजिए,सांसद का चुनाव हार गए,दिल्ली में ठहरने के टोटे पड़ गए,लालू जी ने रामविलास पासवान जी को राज्यसभा में भेज दिया।रामविलास पासवान जी ने लालू जी के इस अहसान का बदला उनकी पीठ में छूरा भोंक के दिया।नीतीश कुमार जी ताजा उदाहरण हैं जिन्हें लालू जी ने खुद बड़ा दल होने, ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद मुख्यमंत्री बनाया और उन्होंने जो किया वह पूरी दुनिया के सामने है लेकिन लालू सारे जख्म लिए मुस्कुरा रहे हैं।

उत्तर भारत मे भारतीय जनता पार्टी यदि किसी से सबसे अधिक डरी हुई है तथा उसके 2019 के दिल्ली फतह में सबसे ज्यादा किसी से खतरा है तो वह लालू प्रसाद यादव जी से है।इसी नाते भजपा लालू जी को हर हाल में क्रश करने को आमादा है लेकिन लालू वह लाल है जिसे जितना दबाया जाएगा,वह उतना ही ऊंचा उठेगा।
लालू जी अपने नेतृत्व में उत्तर भारत में विपक्षी एकता को मजबूत आयाम देगे। “भाजपा मुक्त-संघ मुक्त भारत” बनाने का हुंकार भर साम्प्रदायिकता से निर्णायक जंग लालू जी के सफल नेतृत्व में सफल होगा, ऐसी अपेक्षा है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। चंद्रभूषण सिंह यादव ‘यादव शक्ति’ त्रैमासिक पत्रिका के प्रधान संपादक हैं। इसके अलावा वे ‘सोशलिस्ट फैक्टर’ के कंट्रीब्यूटिंग एडिटर हैं।

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