गैंगरेप!!! लिंग का सामूहिक प्रदर्शन !

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by –शुभा

लिंग का सामूहिक प्रदर्शन
जिसे हम गैंगरेप कहते हैं
बाक़ायदा टीम बनाकर
टीम भावना के साथ अंजाम दिया जाता​ है।
एकान्त मे स्त्री के साथ
ज़ोर जबरदस्ती तो ख़ैर
सभ्यता का हिस्सा रहा है
युद्दों और दुश्मनियों के सन्दर्भ में
वीरता दिखाने के लिए भी
बलात्कार एक हथियार रहा है
मगर ये नई बात है
लगभग बिना बात
लिंग का हिंसक प्रदर्शन
लिंगधारी जब उठते बैठते हैं
तो भी ऐसा लगता है जैसे
वे लिंग का प्रदर्शन करना चाहते हैं
खुजली जैसे बहानों के साथ भी
वे ऐसा व्यापक पैमाने पर करते हैं
मां बहन की गालियां देते हुए भी
वे लिंग पर इतरा रहे होते हैं।
आख़िर लिंग देखकर ही
माता-पिता थाली बजाने लगते हैं
दाईयां नाचने लगती हैं
लोग मिठाई के लिए मुंह फाड़े आने लगते हैं
ये ज़्यादा पुरानी बात नहीं है
जब फ्रायड महाशय
लिंग पर इतने मुग्ध हुए
कि वे एक पेचीदा संरचना को
समझ नहीं सके
लिंग के रूप पर मुग्ध
वे उसी तरह​ नाचने लगे
जैसे हमारी दाईयां नाचती हैं
पूंजी और सर्वसत्ताओं के मेल से
परिमाण और ताक़त में गठजोड़ हो गया
ज़ाहिर है गुणवत्ता का मेल
सत्ताविहीन और वंचित से होना था
हमारे शास्त्र पुराण, महान धार्मिक कर्मकांड, मनोविज्ञान मिठाई और
नाते रिश्तों के योग से लिंग इस तरह
स्थापित हुआ जैसे सर्वशक्तिमान सृष्टिकर्ता
आश्चर्य नहीं कि मां की स्तुतियां
कई बार लिंग के यशोगान की तरह सुनाई पड़ती हैं।
लिंग का हिंसक प्रदर्शन उस समय ज़रूरी हो जाता है जब लिंगधारी का प्रभामंडल
ध्वस्त हो रहा हो
योनि, गर्भाशय, अंडाशय, स्तन,
दूध की ग्रन्थियों और विवेक सम्मत शरीर के साथ गुणात्मक रूप से भिन्न मनुष्य
जब नागरिक समाज में प्रवेश करता है
तो वह एक चुनौती है
लिंग की आकृति पर मुग्ध
विवेकहीन लिंगधारी सामूहिक रूप में अपना डगमगाता वर्चस्व जमाना चाहता है।

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3 thoughts on “गैंगरेप!!! लिंग का सामूहिक प्रदर्शन !

  1. ramesh kumar

    BAHUT KHUB MAZA AA GAYA EK ACHCHI KAVITA KE LIYE , BAHUT JABARDAST CHITRAN— SHUBHA JI KO MUBARAKBAAD

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  2. hassan khan

    मज़ा आ गया कविता पढ़ कर जबरदस्त लिखा है और पुरषो की कलई खोल के रख दी है !

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  3. upendra prasad

    सत्य और ज्वलन मुद्दी पे कविता , बेबाकी से लिखा गया !! मुबारकबाद!!! शुभा जी को

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