कल , एम् सी डी चुनाव में जीत के बाद एक और बड़ी खुशखबरी दिल्ली भाजपा को मिली जब आप पार्टी में चल रही खींचतान में जीत कुमार विश्वास की हुई और उनके खिलाफ आवाज़ उठाने वाले और उन्हें भाजपा संघ का आदमी बताने वाले विधायक अमानतुल्लाह खान को तो पार्टी से संस्पेड कर दिया गया वही कुमार विश्वास की मनुहार करते हुए उन्हें राजस्थान जैसे बड़े और आसन्न चुनाव वाले राज्य का प्रभारी तक बना दिया गया इस पर अमर उजाला के उमाशंकर सिंह लिखते हे ” उमाशंकर सिंह2 · Mumbai · जो केजरीवाल प्रशांत भूषण जैसे न्यायविद के सामने नहीं झुके, योगेंद्र यादव जैसे समाजविज्ञानी के सामने नहीं झुके और दोनों को वाजिब सवाल उठाने पर बाहर का रास्ता दिखा दिया, उसी केजरीवाल ने जिस तरह से हल्के कवि और छिछोरे व्यक्तित्व के कुमार विश्वास के सामने जिस तरह से सरेंडर किया है वह तस्वीर के किसी दूसरे ही अनदेखे-अनछुए पहलू की तरफ इशारा करती है। विश्वास और केजरवाल पुराने साथी रहे हैं और आपके अच्छे-बुरे राज आपके पुराने दोस्तों से ज्यादा कौन जानता है?? कुछ लोगों का मानना है कि विश्वास ने केजरीवाल की कोई ऐसी नस दबा रखी है जिसकी वजह से शुरू से ही वे पार्टी में अपनी मनमानी करते रहते हैं। चाहे वो बीते लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण से पहले ही राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़कर अपना कद बढ़ाने अमेठी जाना हो या अपने जन्मदिन पार्टी में पूर्व दिल्ली पुलिस प्रमुख बस्सी और भाजपा नेताओं को बुलाना हो या समय-समय पर मोदी का गुनगान करना। विश्वास की ये हरकतें अभी नहीं रूकेंगीं। केजरीवाल ये ना सोचें कि राजस्थान का प्रभारी बनाना विश्वास को शांत कर देगा। बिगबॉस में कई साल की कोशिश के बाद भी इंट्री पाने में असफल रहे विश्वास राज्यसभा में इंट्री तक बारगेन और ब्लेकमेलिंग का खेल जारी रखेंगे। पहले की तरह हर विवादास्पद ट्वीट के बाद भारत माता की जय जोड़ते हुए! उमाशंकर सिंह ” कुल मिलाकर जीत उस विश्वास मानसिकता की हुयी हे जो आप को भाजपा की फोटो कॉपी बनाना चाहते हे एक बार आप भाजपा की फोटोकॉपी बन गयी तो यह पार्टी अपनी मौत मर जायेगी जब मार्किट में भाजपा की असल कॉपी मौजूद हे भला फोटोकॉपी का क्या काम होगा ओरिजिनल हो तो नकल को कौन पूछेगा ————- ?

कुमार विश्वास काफी दिनों से भाजपा के रुख के बचाव में ही बयान दे रहे हे यु पि चुनाव में रहस्मयी रिकॉर्ड तोड़ जीत के बाद जब इ वी एम् पर हज़ार सवाल उठ रहे हे तब उन्होंने यु दर्शाया की मानो ये कोई मुद्दा ही नहीं हे जबकि सेकड़ो सबूत मिल चुके हे की इ वी एम् में गड़बड़ हो सकती हे कितनी बड़ी हुई हे ये जरूर विवाद का विषय हे मगर कुछ न कुछ गड़बड़ तो हुयी हे ये सब जान गए हे फिर भी विश्वास अपनी ही पार्टी को इ वी एम् पर सवाल ना खड़ा करने की हिदायत देते दिखाई दिए यही नहीं सर्जिकल स्ट्राइक पर भी विश्वास का रुख यही था की इस विषय पर कुछ बोलना महापाप हे सेना के खिलाफ हे जबकि विपक्ष सेना परे नहीं सरकार पर सवाल खड़े कर रहा था लेखक प्रणव प्रियदर्शी इस विषय पर लिखते हे ”एक लोकतांत्रिक देश में इस बात पर बहस होनी ही चाहिए कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसे अहम फैसले से पड़ोसी देशों के साथ हमारे रिश्तों पर कितना और कैसा असर पड़ा, कि अंतरराष्ट्रीय हलकों में हमारी छवि को कितना फायदा या नुकसान हुआ, कि आतंकवाद पर इसका कितना और कैसा असर पड़ा। कुल मिलाकर इतने बड़े कदम का उतना फायदा हुआ या नहीं जितना ढोल पीटा गया था। क्या ऐसे कदम का ढोल पीटना उचित था या पिछली सरकारों द्वारा इस पर चुप्पी बनाए रखने की नीति ज्यादा कारगर थी।

साफ है कि कुमार विश्वास अपनी बातों से बीजेपी का बचाव कर रहे हैं। उसकी राजनीति को मजबूत बना रहे हैं, उसकी चमक बढ़ा रहे हैं। चाहे वह बीजेपी में जाएं या न जाएं।प्रणव प्रियदर्शी नवभारत ”
आप पार्टी के लिए इतने महत्वपूर्ण दिल्ली एम् सी डी चुनाव से ऐंन पहले भी कुमार विश्वास ने अपना एक सस्ती देशभक्ति से लबरेज वीडियो डाल दिया जिसमे और भी बहुत सारी घिसी पीटी बातो के साथ साथ कश्मीर पाकिस्तान आदि पर कड़ा रुख अपनाने की दक्षिणपंथी वकालत करते हुए दिखावे के लिए केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए अपनी पार्टी और केजरीवाल पर भी सवाल खड़े कर दिए जैसा की होता ही हे फ़ौरन इस वीडियो को वायरल कर दिया गया ( क्योकि पता हे की इस रुख से फायदा भाजपा को ही होना हे ) और सब तरफ चर्चा होने लगी की विश्वास ने केजरीवाल और पार्टी पर सवाल खड़े किये . समझ नहीं आता की क्यों बरसो से केजरीवाल जी इस कवि कुमार विश्वास को ढो रहे हे आखिर ऐसी क्या मज़बूरी हे —– ? एक जमाना था जब अधिकतर शायर और कवि प्रगतिशील उदारवादी होते थे अब तो ये सभी अधिकतर खुले या छिपे दक्षिणपंथी होते हे यु पी में अभी सपा की भारी दुर्गत हुई हे चुनाव हारना एक बात हे चुनाव में दुर्गत होना अलग बात हे और सत्ताधारी सपा की इस दुर्गत में उसका एक मुस्लिम दक्षिणपंथी शायर को सर पर चढ़ाना भी एक कारण रहा हे वही गलती क्यों केजरीवाल दोहरा रहे हे वो भी बरसो से , कुमार विश्वास हमेशा से ही एक नरम संघी या होने वाले भाजपाई ही समझे जाते रहे बरसो से विश्वास के भाजपा में जाने की चर्चा हे ( क्या वो दिल्ली से शायद आप की तीन राजयसभा सीटों के वेट में हे ) हमेशा ये अफवाह चलती रहती हे की विश्वास आजकल में भाजपा में जा रहे हे!

विश्वास ” ने इस वीडियो में देश की बात की थी कश्मीर पाकिस्तान की बात की लेकिन असल बात यही हे की उनका मकसद था एन चुनाव के टाइम लोगो को ये बताना की बिजली पानी स्कुल गंदगी हड़ताल अस्पताल और दस साल से भाजपा शासित एम् सी डी का दुनिया की सबसे भ्र्ष्ट संस्थाओ में होना मुद्दा नहीं हे , बल्कि एम् सी डी चुनाव का मुद्दा हे कश्मीर वहा जवानो के साथ बदसलूकी पाकिस्तान से आना वाला आतंकवाद पाकिस्तान और कश्मीरियों को सबक सिखाना आदि आदि ये सारे मुद्दे वही हे जिन पर अगर लोगो को उत्तेजित किया जाए तो आख़िरकार क्या होगा —— ? होना यही हे की आख़िरकार वो उत्तेजित आदमी भाजपा की गोद में ही जाएगा इसलिए कुमार विश्वास दिखावे के लिए केंद्र सरकार आलोचना करते करते मोदी आदि की तारीफ भी कर गए यही उनका का मकसद था जिसमे ये सफल हुए वीडियो में वही घिसी पीटी बाते की कश्मीर में झंडा फहराने पाकिस्तान के साथ सभी सम्बन्ध तोड़ने की बाते की गयी हे इन बातो से कश्मीर या पाकिस्तान या आतंकवाद की समस्या का तो कोई हल नहीं निकलने वाला हे हां इन सस्ती देशभक्ति और समस्याओं के ”रेम्बो ” हल की बातो से किसी को फायदा हो सकता हे तो भाजपा का ही!

सवाल ये हे की क्यों आप पार्टी और केजरीवाल को क्या लगता हे की ऐसे फ़र्ज़ी और सस्ती देशभक्ति के वीडियो से इम्प्रेस होने वाले लोग आप और केजरीवाल को वोट करेंगे नहीं कभी नहीं करेंगे पाकिस्तान और कश्मीर का सैनिक समाधान सोचने और चाहने वाली सोच तो भाजपा और संघ मोदी के ही खाते में जानी ही हे यही गलती मुर्ख कोंग्रेसियो ने भी की थी की मुंबई हमले के बाद लगातार छह साल पाकिस्तान के साथ शांति पर्किर्या रोक कर रखी थी अफ़ज़ल को फांसी दीं तो क्या फायदा हुआ उसका देश को या कांग्रेस को ही ——— ? ना आतंकवाद रुका ना कश्मीर में शांति हुई और ना ही पाकिस्तान और कश्मीर का सैनिक समाधान चाहने वाले उग्र हिन्दू वोट तो ना कांग्रेस को मिलने थे ना मिले वही गलती केजरीवाल और आप कर रहे हे ऐसे विश्वासों ( सोच ) को मुँह लगाकर , जिन बातो से कोई उग्र हिन्दू वोट सपोर्ट आप पार्टी को नहीं मिलने वाले हे हिन्दू उग्र वोट तो अगर जाएंगे तो संघ भाजपा के खाते में ही जाएंगे या घर बैठेंगे वो आप को वोट नहीं करने वाला चाहे आप पार्टी में कुमार विश्वास जैसे सौ कवि रख लो तब भी नहीं याद होगा की तोगड़िया अक्सर कहते हे की जो हिन्दू हित की बात करेगा वो वोट ले जाएगा क्या आप उनके झांसे में आएंगे की आप कुछ भी कर लो तो भी तोगड़िया आपको वोट डलवाने वाले हे नहीं ऐसा कभी भी नहीं होगा . आप को तो शांति की उदारता की बात करनी चाहिए और सीमा के आरपार बताना चाहिए की कश्मीर हो या कोई भी समस्या हो उसका कोई सैनिक हल नहीं हे शांति चाहने वाले असली मुद्दों को समझने वाले सहअस्तित्व वाले लोग भी कम नहीं हे जैसे मोदी जी की सफलता का राज़ हर एकएक कम्युनल और उग्रपंथी का उनके लिए घर से निकलकर वोट करना हे वैसे ही आपकी भी कोशिश होनी चाहिए हर कोई सेकुलर हर शांति प्रेमी हर कश्मीर और पाकिस्तान समस्या को बातचीत से सुलझाने की वकालत करने वाला आप और केजरीवाल के लिए घर से निकल कर वोट जरूर करे किसी भी हालत में कोई शांति चाहने वाले वोट के दिन घर ना बैठे वो चार्ज हो जैसे मोदी जी ने साम्प्रदायिक लोगो को चार्ज किया हे वैसे ही आप उदारवादियों को करना चाहिए था इन विश्वासों के बजाय आप को इन शांति प्रेमियों को गले लगाना चाहिए आप को तो बढ़ चढ़ कर कश्मीर में मानवाधिकार और पाकिस्तान के साथ बातचीत और कश्मीर का हल सविधान के ही नहीं इंसानियत के दायरे में हल करूँगा की बात करने वाले अटल की बात उठानी चाहिए इन सस्ते देशभक्त विश्वासों की बात सुनने के बजाय जो रात दिन सैनिक सैनिक सेना सेना चिलाते मगर अपने बच्चो को सेना में नहीं भेजते ( सेना में 12 हज़ार अफसरों की कमी ) आपको तो मोदी सरकार पर दबाव डालना चाहिए की वो अटल की ही पॉलिसी पर चले पाकिस्तान के साथ बातचीत ना तोड़े कश्मीर में मानवाधिकारों का हनन ना हो किसी को अँधा ना किया जाए आदि ये रुख चुनावी राजनीती में भी केजरीवाल और आप पार्टी के लिए भी बेहतर होगा क्योकि अगर मोदी इस अटल नीति पर चलेंगे तो उनका उग्र हिन्दू कटटरपन्ति वोट बैंक चुनाव के दिन घर बैठ जाएगा —– ? आप पार्टी का मुकाबला मोदी जी से हे जो हर समय चुनावी मोड़ में रहते हे हर समय उनके मन में चुनावी लाभ रहता हे आप पार्टी को उनके मुकाबले में बड़ी चतुराई से नीतिया बनानी चाहिए थी उसकी जगह आप और केजरीवाल अगर भाजपा की फोटो कॉपी बनने की नीति पर चलेंगे तो आप और केजरीवाल की ये राजनतिक आत्महत्या होगी आजकल में जो हो रहा हे उससे तो यही लग रहा हे की आप और केजरीवाल राजनितिक आत्महत्या पर उतारू हो चुके हे भाजपा बीसियों बरसो से दिल्ली की सत्ता से दूर हे ऐसे में विश्वास पर फ़िलहाल जो आप और केजरीवाल ने जो स्टेण्ड लिया हे उस हिसाब से तो दिल्ली भाजपा को ” एडवांस बधाई ” ही दीं जा सकती हे