Haider Rizvi
17 April at 23:58 ·
मेरा धर्म बेस्ट, मेरी किताब बेस्ट, मेरा पैग़म्बर बेस्ट, मेरा धार्मिक स्थल बेस्ट यहाँ तक कि मेरे धार्मिक स्थल का लाउडस्पीकर बेस्ट…….. तुम्हारा सब कुछ बेस्ट है क्यूनकि तुम्हारा है …. तो फिर मोदी-योगी का सूर्य नमस्कार, योगा, आरती, मूर्ति विसर्जन, गीता, वेद, संस्कृत, भगवा, मटर पनीर, धोती, चोटी वग़ैरह वग़ैरह बेस्ट होने पर इतनी आपत्ति क्यूँ……
तुमहे दूर से देखता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे मुहल्ले के छोटे बच्चे मेरे पापा बेस्ट मेरे पापा बेस्ट कहकह कर बाल नुचववल कर रहे हों….. कोई अम्बेडकर को इतना बड़ा बनाए जारह है की क्षितिज छोटा पड़ जाय, कोई परशुराम जी पर मोहित है, कोई गांधी को पैग़म्बर बनाए दे रहा है तो किसी के भगत सिंह भगवान बने जारहे हैं….. जिसे कुछ नहि मिला वो गय्या की अलापे पड़ा है…..
शुक्र मनाओ तुम्हें कांग्रेस भाजपा जैसे नेता मिलते हैं… मेरे जैसा कोई सरफिरा मिलता तो तुम्हारे धर्मों को तुम्हारे घर से बाहर निकलते ही जेल में डाल देता….. भाड़ में गयी तुम्हारी आज़ादी भाड़ में गयी तुम्हारी आस्था……. पूरी की पूरी जेनरेशंस का सत्यानाश किए बैठे हो…….
एक दहेज लिए बिना बहु नहि लाता तो एक तीन तलाक पर औरत को नचाए फिरता है…. और बेशर्म दोनो ऐसे लड़ते हैं एफ़बी पर जैसे इनहि के घर सब पैग़म्बर और अवतार जन्मे हों….. जो अपनी मा बहनो के सगे नही हुए मुल्क और क़ौम के सगे होने की पोस्ट लिख कर लाइक कमेंट बटोर रहे हैं…..
और नास्तिक….. इनकी बता रहा हूँ, ये आने वाले समय में ख़ुद एक बीमारी बनेगे… यह आस्टिकता से ज़्यादा नास्तिकता की ढपली बजाए पड़े हैं… अगर यह शरीफ़ होते तो चुपचाप अपनी आस्था या अनास्था घर में लिए बैठते… लेकिन इन्हें सिर्फ़ पब्लिसिटी चाहिए……
दरअसल तुम लोग लोकतंत्र में रहने के लायक ही नहि हो… तुम्हें वो शसक चाहिए जो ख़ुद को भगवान का अवतार या पैग़म्बर बता दिन भर तुम लोगों से अपने चरण धुलवाए और जयजयकार करवाए…. तुम ग़ुलाम थे और ग़ुलाम ही रहना, क्यूँकि तुमने आज़ादी का मतलब ही नहि सीखा……
सनातनियों ने अपनी इतनी प्यारी आज़ादी की मट्टी पलीद कर दी कर्मकांडों में फँसकर….. मुहम्मद साहब की दी आज़ादी को तुमने मुल्लों की शरीयत की रस्सी से जकड़ दिया…. गांधी की दी हुई आज़ादी को सत्ता की दलाली बना डाला….. और उस पर तुर्रा यह कि कोई सनेपचैट का मालिक तुम्हें जाहिल क्यूँ कह गया…..न तो क्या कहे तुम्हें????? एडिसन कहे? आइंसटाइन कहे? न्यूटन कहे?जब दुनिया भाप का इंजन बनारही थी तो तुम्हें यह सिखाया जारह था की अपने बाप के मरने पर अपनी मा को ज़िंदा न जलाओ…… जब दुनिया चाँद पर पहुँच रही थी तब तुम बरखे और पैजामे की लंबाइयाँ नाप रहे थे….. तुम्हारे जैसे ही देश्वासी होते हैं जिनका प्रधानमंत्री हर भाषण में पहले उन्हें ये सिखाता है कि बेटा देखो हगना कहाँ चाहिए, थूकना कहाँ चाहिए, मूतना कहाँ चाहिए…..और जब दुनिया सड़क पर उतरने की ज़रूरत महसूस कर रही है तब तुम बैठे फ़ेसबुक के लाइक्स गिन रहे हो…..
बड़े आए हैं सनेपचैट पर देशभक्ति पेलने वाले……इतिहास गवाह है कि भारतीयों ने जितने चुटकुले इन तीन सालों में गढ़े उतने शायद कभी न गढ़े गए होंगे….. मतलब तुम डोनो पार्टियों को राजनीति, विकास या आज़ादी नहि केवल मनोरंजन की दरकार है……. हँसो, पियो, खाओ, सो और जब जागो तो धर्म का नाम लेकर लड़ मरो…..
मरते भी तो नहि हो कंमबख़्तों…….हैदर रिज़वी———————— ———————–

-Krishn a Kant
19 hrs ·
हमने कहा ‘माइक का शोर अच्छा नहीं’ तो मुल्ला जी लोग लेकर उड़ लिए. कुछ भक्त आ गए, इस पर क्यों नहीं कहते, उस पर क्यों नहीं कहते. जबकि दुनिया जानती है कि माइक और ऐसे संसाधनों से सबसे ज़्यादा दुरुपयोग और शोर हिंदू करते हैं. हर मंदिर पर सवेरे भजन लगा देंगे और दो घंटे बजता रहेगा. हर अवसर पर डीजे, माइक, कानफोड़ू भद्दे गाने. अब उनकी नकल में मुसलमान भी डीजे फीजे बजाकर यात्रा और जुलूस निकलने लगे हैं. दोनों में मूर्खताओं की तगड़ी होड़ है. हमने कहा तो दोनों के लिए, लेकिन आप लेकर उड़ लिए. मेरी समझ है कि कट्टर हिंदू शातिर मूर्ख है, लेकिन कट्टर मुसलमान सिर्फ़ मूर्ख है. महामूर्ख.
जो यहां पर हमसे जुड़े हैं, वे जानते होंगे कि मैं नास्तिक हूं. नास्तिक होकर हमारे लिए एक ही कसौटी है, संविधान और मानवता की भलाई. सबकी बराबरी. जो कहूंगा सबके लिए कहूंगा. हमारे दिमाग में किसी धर्म के खिलाफ वह बजबजाहट नहीं है जो आपके दिमाग में है. हममें और आपमें यही फर्क है साहबान! यदि आप हमें जानते नहीं तो हमसे जुड़े क्यों हैं?
मेरी स्पष्ट राय है कि धर्मांधता आपको 500 बरस पीछे ले जाकर खड़ा करती है. कोई शक?Krishna Kant
20 hrs ·
हम नही सुनना चाहते
■ मानस पाठ के नाम पर बेसुरी आवाज़ और ग़लत उच्चारणों से भरी बोरिंग आवाज़ें जो पूरी रात माइक पर गूँजती हैं।
■ झूठे वादों और घटिया पैरोडी वाले चुनावी प्रचार जो दिन दोपहरी आराम नहीं करने देते।
◆ कपिल शर्मा की अश्लील और घटिया कॉमेडी जो पड़ोसी की टीवी पर चलती रहती है।
■ किरपा बरसाने के दावे करने वाले बाबाओं के प्रवचन।
■ अन्नू मलिक के साथ बैठकर फरहा और सोनू मलिक की घटिया बकवास और एक दूसरे की झूठी तारीफ़ें।
■ मन की बात तो हम कतई नहीं सुनना चाहते। लगता है चुनाव पांच साल पर नहीं हर घण्टे होते हैं।
■ हाँ हम भी सुबह सुबह अजान का शोर नहीं सुनना चाहते लेकिन उसी वक़्त हनुमान चालीसा का बेसुरा पाठ भी हमारी नींद और मूड ख़राब करता है। अगर अजान से आपको दिक़्क़त है और चालीसा का बेसुरा पाठ सुन्दर लगता है तो माफ कीजिये हम आपकी बकवास नहीं सुनना चाहते।Krishna Kant
22 hrs ·
महाकवि कुमार विश्वास ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें वे सैनिकों को वीर सिपाही कह रहे हैं और सैनिकों के साथ बदसलूकी कर रहे कुछ लड़कों को शोहदा कह रहे हैं. कश्मीर की जनता अपने बच्चों के साथ है। उनको आतंकी घोषित करके, गोली मार के कुछ हासिल नहीं होगा। एक युवक मरता है तो हजारों की भीड़ उमड़ती है, यह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। सोशल मीडिया ट्रायल से और बात बिगड़ेगी ही।
आपको याद है जंतर मंतर? मुझे याद है। हमारी उम्र में पहली बार हमने सुना था कि सरकार जनता की नौकर है। सरकार को गालियां दी जा रही थीं। पुलिस से लोग भिड़ रहे थे, गालियां दे रहे थे, प्रधानमंत्री तक को लोग गालियां दे रहे थे, वह सब जनता का लोकतांत्रिक अधिकार था।
कश्मीर का मामला राजनीतिक है और बेहद जटिल भी। कश्मीरी अलगाववादी अलग देश मांग रहे। यह नहीं स्वीकार हो सकता। लेकिन सड़क पर उतरे कश्मीरी युवाओं को दिल्ली से कोई संबोधित कर रहा है क्या? उन्हें गोली मारकर या आतंकवादी घोषित करके आप उनसे चाहते हैं कि भारत माता के नारे लगाएं तो यह असंभव है।
एक मामले में जवानो ने संयम बरता, काबिलेतारीफ है, लेकिन एक अन्य युवक को गोली भी मार दी गई, जिसके विरोध में पूरा कश्मीर सड़क पर है। एक युवक को जीप में बांधकर 5 घंटे घुमाया गया, यह आपको उचित लग रहा है, लेकिन कश्मीर के भारत समर्थक भी इससे बिदक जाएंगे। दिल्ली का लोकतंत्र कश्मीर जाकर क्रूर हो जाएगा, इससे कुछ हासिल होगा, ऐसा सोचने वाले मूर्ख हैं।
कश्मीर समस्या से हम साठ सत्तर साल से ऐसे ही निपट रहे हैं. हम यहां से ऐसे ही देखते हैं कि जो भारतीय लोकतंत्र से असंतुष्ट है, वह शोहदा है, राष्ट्रद्रोही है, आतंकवादी है. यह नजरिया कश्मीरियों में और नफरत भरता है. आपका वीडियो कश्मीरी भी सुनते होंगे. जब आपके मुंह से अपने लिए वे शोहदा, आतंकी, देशद्रोही सुनते होंगे तो कैसा लगता होगा? क्या जो असंतुष्ट है वह देशद्रोही है?
भारत की सरकारों ने कई दशक तक सत्ता के लिए कश्मीरियों का सम्मान नहीं किया, उनके जनमत का सम्मान नहीं किया. आज भी उनको बातचीत की टेबल पर लाने की कोई पहल नहीं दिख रही। कश्मीर सड़क पर है और देश का प्रधानमंत्री निगम चुनाव में ताकत लगाए है। देश को चलाने और एकजुट बनाये रखने के लिए सिर्फ चुनावी हवस ही काफी होती तो कोई भी इसे विश्वगुरु बना चुका होता।
दुनिया में कोई भी देश, कोई भी हिस्सा, कोई भी जनता बंदूक से एकजुट नहीं की जा सकी है.
काश! भारत के सभी दल मिलकर कश्मीर में ज़्यादा दिलचस्पी लेते और कश्मीरियों को विश्वास में ले पाते. सैनिक बेशक भारत मां का लाल है, लेकिन क्या इसी धरती पर जुर्म में मुब्तला कोई बच्चा भारत मां का लाल नहीं है? खोट कश्मीरियों में होगा, अलगाववादियों में होगा, लेकिन हमारे नजरिये में भी है. जिसे इस बात की तस्दीक करनी हो, वह पडगांवकर की रिपोर्ट और सरकार का नजरिया पढ़—जान सकते हैं.
कश्मीर पर मीडिया जो भी प्रसारित कर रहा है, ऐसा करके वह अलगाववादियों की मदद कर रहा है। यहां से आप जितनी नफरत प्रसारित करेंगे, कश्मीरियों को उतना ही दूर धकेलेंगे। जिन्हें कश्मीर और पाकिस्तान में अंतर करना न आता हो, वे यह कहना छोड़ दें कि कश्मीर हमारा है। कश्मीर हमारा है तो पूरा भारत भी कश्मीरियों का है, जैसे यूपी या बिहार वालों का। उन्हें यह भरोसा दिलाने के सिवा कोई दूसरा चारा नहीं है।Krishna Kant
17 April at 23:36 ·
संघ काहे का हिन्दू है?
■ संघ का गणवेश देखिए। खाकी पैंट (पहले आधा फिर पूरा) सफेद शर्ट। काली टोपी। अब आंख मूंद कर दो मिनट सोचिए। किस हिन्दू धर्मशास्त्र में यह गणवेश लिखा है। जवाब मिलेगा कहीं नहीं।
■ तब सोचिए यह वेश कहां से आया? सर्च कीजिये गूगल या किताबें पलटिये तो पता चलेगा कि खाकी कच्छा और सफेद शर्ट आया हिटलर के यहां से। जबकि काली टोपी मुसोलिनी के सैनिकों का वेश थी। यानी देशभक्ति का दावा करने वालों का गणवेश ही जर्मनी और इटली की खिचड़ी है! फिर काहें के भारतीय और काहें के हिन्दू!
■ अब आइये इनकी शाखा पर। सोचिए किस हिन्दू ग्रंथ में शाखा का वर्णन है। कहीं नहीं मिलेगा। लट्ठ चलाने की प्रैक्टिस को शाखा कहने वाले आपको कभी नहीं बताएंगे कि यह तकनीक भी सीधे जर्मनी से आई है।
■ हिन्दू आदर्शों पर बना आज़ादी के पहले का एक क्रांतिकारी संगठन था अनुशीलन। उसके बारे में तलाशेंगे तो वह आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय था। लेकिन संघ आज़ादी की लड़ाई से दूर रहा। जिस राम की बात करते हैं संघी वह कहते हैं – जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। तो अगर इस आदर्श को मानते संघी तो जन्मभूमि को अंग्रेज़ों की दासता से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे होते। लेकिन वे तो आज़ादी से पहले बस दंगे करा रहे थे। ज़ाहिर है उनका इस आदर्श से कोई लेना देना नहीं।
◆ एक और महान हिन्दू आदर्श है वसुधैव कुटुम्बकम का। इसका अर्थ है पूरी धरती ही अपना परिवार है। सोचिए क्या संघ इस आदर्श को मानता है?
◆ हां बस एक चीज़ मानता है संघ हिन्दू परम्परा की। वह है वर्ण व्यवस्था या जातिवाद। इसलिए उसका सर संघचालक एक राजेन्द्र सिंह को छोड़कर हमेशा उच्च गोत्र के ब्राह्मण होते हैं।
■ तो आप सोचिए क्या आपके लिए भी हिंदुत्व का मतलब केवल जातिपाति बनाये रखना, दलितों पर अत्याचार और धर्म के आधार पर नफरत करना है या “वसुधैव कुटुम्बकम” “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “अहिंसा परमो धर्म:” जैसे उच्च आदर्श आपको बेहतर लगते हैं?
【आंखें न बंद कीजिये। धर्म के नाम पर बेवकूफ़ बनाने वालों को पहचानिए और अपनी महान परम्पराओं को याद कीजिये। धर्म किसी का ठेका नहीं आपकी अपनी परम्परा है। 】
जय हिंद
#InDefenceOfDemocracyKrishna Kant
17 April at 21:37 ·
ईश्वर यानी खुदा सर्वशक्तिमान है। तो आपको अपनी बात सुनाने के लिए लाउड स्पीकर क्यों लगाना पड़ता है? डीजे, माइक, लाउड स्पीकर नहीं था तब इबादत कैसे होती थी? लाउड स्पीकर इंसान का बनाया है। क्या सच मे उसकी मदद से खुदा सुनता है? सच में इंसानी आविष्कार पर निर्भर खुदा सर्वशक्तिमान है? अगर आप ऐसा मानते हैं तो आपके दिमाग मे कुछ लोचा है।
Krishna KantJournalist at The Wire Hindi