सिकंदर हयात

सोनिया जी ममता बनर्जी को सौंप दो कोंग्रेस की कमान वर्ना !

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यु पी विधानसभा चुनाव राहुल प्रियंका के लिए एक आखिर और अच्छा मौका था भाजपा की नोटबंदी की सनक से सपा बसपा के जातिवाद और कुशासन से लोग बेहद दुखी थे इसलिए जब यु पि चुनाव की आहट के साथ ही राहुल अपनी खाट सभा लेकर जब सबसे पहले मैदान में सकिर्य हुए प्रिंयका भी भागदौड़ करती दिखी तो भीड़ से लगा था की कोंग्रेस सौ नहीं तो पचास सीटे जीत कर अगली सरकार की चाबी अपने पास रख लेगी और भारत के सबसे बड़े सबसे महत्वपूर्ण सबसे अधिक लोकसभा और राज्यसभा की सीट , के साथ भारत के सबसे पिछड़े और परेशान राज्य उत्तरप्रदेश को पटरी पर लाने में अपना योगदान देकर अगली केंद्र सरकार का अपना दावा ठोक देंगे मगर हमेशा की तरह अचानक राहुल थक से गए और निक्कमो आलसियों और चाटुकारो की बातो में आकर ये समझ बैठे की अगली सरकार तो फर्जी विकास पुरुष अखिलेश की ही बनती दिख रही हे जो अपने परिवार और पार्टी में एक नूराकुश्ती के बाद हीरो से बनते दिख रहे थे इन चाटुकारो की बात मानकर राहुल प्रियंका ने जमीनी संघर्ष एकतरफ रख कर अखिलेश से गठबंधन करके सोचा की इस तरह बैठे बिठाय कोंग्रेसियो को यु पी में सत्ता मिल जायेगी लेकिन नतीजा वही आया जो आना था सबसे अधिक दंगो और परिवारवादी समाजवादी पार्टी के साथ के कारण राहुल -प्रियंका कोंग्रेस की भी लुटिया डूब गयी और इतने बड़े और महत्वपूर्ण राज्य यु पी में ढंग का विपक्ष तक नहीं बचा अब आगे क्या हो ————— ?

अब ये साफ़ हो चूका हे की राहुल प्रियंका दोनों आलसी तो हे दोनों ही इतना अधिक सत्ता देख चुके हे की दोनों में सत्ता हासिल करने की भी कोई आग कोई जोश कोई जूनून नहीं हे इनकी इस फितरत का दंड देश और कोंग्रेस को भुगतना पड़ रहा हे कोंग्रेस देश के लिए बेहद जरुरी हे आख़िरकार ये आज भी देश के हर कोने में मौजूद सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी हे लोकतंत्र में मज़बूत विपक्ष का होना बेहद जरुरी हे नहीं तो कब सत्ता अपनी सनक में क्या क्या कांड कर देगी कोई नहीं जानता और बता सकता हे दुनिया की अगर कोई सबसे बेहतर और विनम्र सरकार हो भी तो भी मज़बूत विपक्ष की जरुरत होती हे भारत में तो भृष्ट कायर और शोषक हिन्दू कठमुल्लावादी सरकार बनी हुई हे जिसे कंट्रोल करना और हटाना बेहद जरुरी नहीं तो ये सरकार देश को और अनगिनत संमस्याओं में डुबोने वाली हे मज़बूत विपक्ष आज की पहली जरुरत हे और मज़बूत विपक्ष में मज़बूत कोंग्रेस चाहिए ही चाहिए अब कोंग्रेस मज़बूत कैसे होगी ——– ? सोनिया जी बीमार हे तो राहुल प्रियंका में इस ज़हरीली सरकार से लड़ने भिड़ने का सड़को पर उतरने का , जेल भरो को दमखम नहीं हे इनसे ना हो पायेगा इसके आलावा भी कोंग्रस के सारे बड़े नेता दस साल की सरकार में खा खा कर ”अजगर ” हो चुके हे पुरे पुरे जानवर निगलने के बाद अजगर महीनो बिना हिले डुले पड़े रह सकता हे यही हाल इन कोंग्रेसी नेताओ का हे आज जबकि इस ज़हरीली हिन्दू कट्टरपन्ति सरकार से हर मोर्चे पर टक्कर लेने की जरुरत हे तो कोंग्रेसी नेताओ का हाल ये हे की ऐसे समय में वो नेट पर कुत्ते खरीदने और ठगे जाने में बीजी हे कईयो की अंदरखाने भाजपा नेताओ से साठ गाँठ बताई जाती हे बदले में इनके हितो की सुरक्षा बताई जाती हे तो ये लोग तो अजगर ही बने रहने वाले हे ये कुछ नहीं करने वाले हे ऐसे में यही सब चलता रहा तो कोंग्रेस दस साल में खत्म हो जायेगी तब क्या होगा ————– ?

राहुल सोनिया प्रियंका को सोचना चाहिए पहले भी वो एक महाभूल कर चुके हे जब कई घोटालो और लुंजपुंज छवि से अलोकप्रिय हुए मनमोहन सिंह को 2011 के बाद उन्होंने हटाकर किसी प्रणव या गुलाम नबी को पी एम् नहीं बनाया था इस डर से की ये काबू से बाहर हो जाएंगे नतीजा आज कोंग्रेस पचास सीट से भी नीचे पहुच चुकी हे इससे बुरा और क्या होना था ——- ? उस समय अगर हिम्मत करके किसी और को सत्ता सौप दी जाती तो आज कम से कम कोंग्रेस सौ सीट लेकर मज़बूत विपक्ष तो होती ही वही गलती आज फिर ये लोग कर रहे हे की किसी और को कोंग्रेस नहीं सौप रहे हे राहुल प्रियंका सोनिया को सोचना चाहिए की क्या अगर कल को कोंग्रेस मिट जायेगी तो खुद उनकी क्या अहमियत रह जायेगी क्या दुनिया भर में आप मजाक का विषय नहीं बनोगे इससे तो बढ़िया हे की आगे बढे और दिल बड़ा करके किसी और को कोंग्रेस सौप दे कोंग्रेस चाहे जिसके हाथ में हो अगर कोंग्रेस मज़बूत होगी तो आपका भी एक रूतबा तो बना ही रहना हे और इस दुनिया में कोई अपनी अहमियत खोना नहीं चाहता हे राहुल प्रियंका की अहमियत कोंग्रेस के मज़बूत होने में ही हे . अगर राहुल प्रियंका किसी और को कोंग्रेस सौपने का दिल बड़ा करना और देश हित समझदार दिखाना चाहेंगे तो इसके लिए ममता बनर्जी से बेहतर दावेदार कोई नहीं हे शुद्ध सेकुलर छवि की ममता ही देश पर छाती जा रही हिन्दू कठमुल्लाओ की फौज को कमजोर कर सकती हे . इस ज़हरीली सरकार में सबसे अधिक महिमांडन मोदी जी की फ़र्ज़ी ईमानदारी और फ़र्ज़ी सादगी का किया जाता हे ममता के सामने होने पर इस फर्ज़ीवाड़े की भी पोल खोल जायेगी क्योकि ममता बनर्जी मोदी जी तरह फ़र्ज़ी नहीं बल्कि असली सादगी पसंद ( सूती साडी रबर की चप्पल बेदाग किसी बड़े घराने का सपोर्ट नहीं ) ) और शुद्ध ईमानदार हे!

उनके आगे आने पर कोंग्रेस की महाभरष्ट छवि भी सुधरेगी . मोदी जी की हिंदी में लगातार बड़ बड़ करने की क्षमता के कारण ही मिडिया उन्हें रात दिन दिखाकर प्रचार देकर उनकी कामयाबी सुनिश्चित कर रहा हे आज का जमाना ही ऐसा हे की जो दिखता हे वही बिकता हे मोदी के सामने राहुल प्रियंका को बोलना नहीं आता हे दोनों धाराप्रवाह नहीं बोल सकते हे जबकि ममता बंगला अंग्रेजी और हिंदी भी बोल सकती हे और मोदी को कड़ी टक्कर दे सकती हे शुद्ध सेकुलर छवि की ममता ही इस हिन्दू कट्टरपन्ति सरकार के सामने सही दिखेगी सेकुलर हिन्दुओ मुसलमानो ईसाइयो का भी उन्हें एकतरफा सपोर्ट मिल सकता हे वैसा ही एकतरफा सपोर्ट जैसा कम्युनल हिन्दुओ का आज मोदी शाह को मिल रहा हे आज जरुरत इस ज़हरीली सरकार को सड़क पर कड़ी टक्कर देने की ही हे ममता से ज़्यादा इस काम में तपा तपाया शायद ही कोई और नेता हो उन्होंने बीसियों साल सड़को पर ही संघर्ष और अनशन आंदोलन करके सत्ता पायी हे साथ ही इसी कारण वो फियर लेस भी हे उन्हें किसी से डर नहीं हे ना उन्हें कोई डरा पाया हे इसके आलावा मोदी जी को गुजरात और गुजरातियो ने अँधा सपोर्ट देकर पी एम् बनवाया हे तो चालीस से अधिक लोकसभा सीट वाले बंगाल और बंगलियो से भी और महिलाओ से भी ममता को खूब सपोर्ट मिल सकता हे वैसे ही जैसा मोदी को मिला था ममता के आने से कोंग्रेस की संसद सीट में भी काफी इजाफा होगा उसमे नया आत्मविश्वास आ सकता हे ममता ही हे जो मोदी शाह की हर ” ईट” का जवाब पत्थर से दे सकती हे इस सरकार को हटाने और कोंग्रेस को नया जीवन देने में सबसे अधिक अधिक सटीक चेहरा ममता बनर्जी का ही हो सकता हे सोनिया राहुल प्रियंका जी से अपील हे की कोंग्रेस के ढहते किले को बचाने की खातिर इस किले की चाबी ममता बनर्जी को सौप दीजिये वार्ना सब कुछ खत्म हो जाएगा —

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7 thoughts on “सोनिया जी ममता बनर्जी को सौंप दो कोंग्रेस की कमान वर्ना !

  1. upendra prasad

    सिकंदर हयात जी आपसे सहमत क्योके ममता बनर्जी हिम्मती और संघर्ष करने वाली नेता है , बाकी कांग्रेस में अब सिर्फ वातनुकूलित कमरे में बैठ कर सियासत करने वाले है आप देख लीजिये दिग्विजय सिंह को गोवा में ऐश कर रहे थे और भाजपा ने सर्कार बना ली , मगर सच्चाई ये भी है के कांग्रेस भले ही ख़त्म हो जाए कांग्रेस परिवार से बहार किसी और को सत्ता की कमान नहीं सौंपेगा !

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  2. rajk.hyd

    मोदि के मुकाबले मे अखिलेश मायवति केजरिवाल नितिश लालु थेीक रहेन्गे
    उत्तर भारत का व्यक्ति हेी मोदि को हरा सक्ता है अगर् मायवति अखिलेश मिल्कर लद्ते तो मोदि कि हालत भि दिल्लि बिहार कि तरह होति
    मोदि तो आद्वानि जैसे भि बन् सक्ते है
    सन्घ किसि को भि
    मित्ति मे मिला सक्ता है
    मोदि के बजये योगि को आगे किय जा सक्ता है

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  3. rajk.hyd

    हम्ने मोदि के सत्ता मे आने के पहले कहा था
    कि देश मे ५०% से ज्यदा वोत् {मत} पाये वहेी विजयि घोशित किया जाये
    अगर तभि यह नियम बना लिया होता
    तो मोदि सत्ता मे कभेी नहि आ पाते
    अब मोदि ऐस क्यो करेन्गे

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  4. kartik kumar

    Agar Congress ladna nahi cahti hai to das sal kya agle 5 sal me hi khatam ho jayegi.Ab Samye a gya hai lado ye khatam ho jao.

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  5. umakant

    एक ४८ साल के अनमेचोर से उम्मीद रखना खुद को कुअ मे धक़ेलने जैसा है गोवा और मनिपुर इसका प्रमाण है कान्ग्रेश को यदि अपना अस्तित्व बचाना है तो गान्धी परिवार को दरकिनार करके कोइ योग्य नेता पैदा करना ही पडेगा

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  6. vijay

    बिलकुल सही पकडे है हयात भाई ममता जी घर घर मीट भिजबायेंगी अगर केंद्र में सरकार आई ममता की ?

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  7. prasad joshi

    सिकंदरजी,
    मध्यम वर्ग (middle class) भारत के आर्थीक विकास मे योगदान देते है. सरकार secular हो या हिंदुत्ववादी economic policies पर इसका कुछ भी असर नही होता है. भौगोलीक परिसीमा और कुल जन संख्या के प्रमान मे हमारी घनता जादा होने के कारण विकास lower class तक नही पोहच पाता. China की तरह हम देश नही चला सकते ये हमारी नितीयो का हिस्सा नही है.
    आपके लेख मे एक आभासी भय छुपा है. भारत के कदम ना तो रशीया की तरहा बिखरने के कगार पर है और नाही सिरीया की तरह civil war के दिशा मे है.

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