सिकंदर हयात

अरुणाभ कुमार कपिल शर्मा की समस्या !

टीवी ऍफ़ के सी ई ओ अरुणाभ कुमार और कपिल शर्मा का मामला पिछले काफी दिनों से चर्चा में हे इनमे से एक को जहां पिछले सालो में टीवी पर सबसे अधिक देखा गया तो दूसरे के यु ट्यूब चेनेल को इन्टरनेट पर सबसे अधिक देखा गया दोनों ही तीस के वय करोड़ो के आदमी हो चुके हे दोनों पर ही लगे आरोपो की बात करे तो वो लगभग सच ही दीखते हे कपिल ने तो खुद ही सब कुछ मान लिया हे तो वही कई लड़कियों दुआरा यों उत्पीडन का आरोप लगने पर अरुणाभ खुद कह चुके हे की वो किसी लड़की के अच्छा लगने पर उसे सेक्सी कहने से नहीं चूकते हे उनका यह बयान खुद ही दर्शाते हे की जब आपके चेक पर साइन करके तन्खा देना वाला आदमी आपको सेक्सी कहे तो उसकी मंशा क्या हो सकती हे———– ? समझा जा सकता हे यानि दोनों ही बेहद सक्सेसफुल यंग और कुंवारे स्टारो पर लगा आरोप सच ही हे समझते हे की आखिर समस्या क्या हे क्या राज़ हे इनकी बदमिजाजी का —-?

गौर करे तो दोनों ही मामलो में शराब की भूमिका दिखाई पड़ती हे शराब इन लोगो की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी हे आगे और बनेगी कपिल पहले भी शराब पीकर कुछ अभिनेत्रियों से बुरा व्हवहार कर चुके हे मगर उस मसले ने ज़्यादा तूल नहीं पकड़ा था इस बार क्योकि उन्होंने प्लेन में सेकड़ो लोगो के सामने तांडव किया उसके बाद कहा तो ये जा रहा हे की उन्होंने सुनील ग्रोवर की बहुत ही बेरहमी और बुरी तरह से अपमानित करने वाली पिटाई की , हो क्या रहा हे की शराब सिगरेट और ड्रग्स इन कामयाबी की ऊँची उड़ान भरने और उससे भी अधिक भरने की चाहत रखने वाले लोगो के जीवन का अटूट हिस्सा बन चुकी हे वो इसलिए की कामयाबी कामयाबी और अधिक कामयाबी के लिए ये लोग रात दिन मेहनत करते हे रात दिन ये शारीरिक और मानसिक काम करते हे उसके लिए एनर्जी चाहिए होती हे साथ ही साथ ये अपने शरीर को फिट भी रखना चाहते हे स्लिम रहना चाहते वेट कंट्रोल चाहते हे ऐसे में ये लोग शराब का जमकर सहारा लेते हे!

अब होता ये हे की शराब एक से बढ़कर एक महंगी शराब इनके रग रग में जोश भर देती हे ताकत एनर्जी भर देती हे खाना ये लोग कम खाते हे शराबियो की इस बात को प्रेमचन्द ने अपनी एक कहानी में http://hindisamay.com/contentD etail.aspx?id=436&pageno=19 और रविंदर कालिया ने अपनी किताब ग़ालिब छुटी शराब में कई जगह खूब समझाया हे ( लिखते हे में कभी खाता पीता आदमी नहीं रहा में तो पीता पीता आदमी रहा ) तो ये लोग जमकर शराब का सेवन करते हे ताकि जोश भी रहे एनर्जी भी रहे तन मन तेजी से काम करता भी रहे और खाने से पैदा होने वाली चर्बी और मोटापे से भी ये लोग बचे रहे . हां कुछ लोग शराब की जगह सिगरेट और ड्रग्स का भी सहारा लेते हे वो भी सेम यही नतीजे देती हे बेहद एनर्जेटिक और फेट ( और शायद व्यायाम से भी ) से हमेशा कोसो दूर ही दिखने वाले अथाह ऊर्जा से काम करके भारत के सबसे अमीर सितारे बने शाहरुख़ खान बीसियों बरसो से सौ पचास सिगरेट पीते हे ताकि तन और मन को ताकत स्फ्रूति उत्साह मिलती रहे दिमाग और मन तेजी से दौड़ाता रहे यही नहीं कोई चिंता हो तो शराब उसे भी भुला देती हे और फिर खाना कम ही खाकर फेट और मोटापे से भी मज़े से दूर रहे . तो ये दोनों सितारे भी शाहरुख़ के ही तो रास्ते पर चल रहे होंगे आज ये करोड़पति हे कल को इन्हें खरबपति बनना हे इसके लिए इन्हें रात दिन पी पा के काम करना हे कपिल की लत तो सबको पता ही हे अरुणाभ भी इसके शिकार हे क्योकि उन पर आरोप लगाने वाली सभी लड़कियों ने कहा की छेड़ छाड़ के बाद वो हमेशा खुद के नशे में होने की बात कहते थे सच ही होगा वो वाकई में नशे में ही होंगे वैसे भी देखे तो उन के टी वि एफ के लगभग हर हर विडियो में शराब सिगरेट का महिमांडन अनिवार्य रूप से किया जाता हे शराब सिगरेट ( कुछ मामलो में ड्रग्स भी वो और भी अधिक एनर्जी देती हे ) इन लोगो के जीवन का इनकी रचनात्मकता का इनके उत्साह का अभिन्न अंग हे बाद में चाहे जो होता रहे इस समय इनकी नज़र सिर्फ कामयाबी पर हे ये सब ना ये सोचते हे न कोई और सोचने को कहता हे क्योकि आज कामयाबी ही सब कुछ हे!

शराब सिगरेट के बाद दूसरी जिस चीज़ का लोग आज कामयाबी के लिए सहारा ले रहे हे वो हे अपने जीवन में कम से कम लोग रखने का ये लोग अपने जीवन में कम से कम लोगो का अम्ल दखल रखते हे ताकि किसी अपने प्रिय की चिंता में समय और एनर्जी बर्बाद न हो अधिकतर ये लोग अकेले रहते हे या अपने आस पास कम से कम प्रियजन अपने आदि रखते हे बिलकुल मिनिमम . विराट कोहली ने पिछले दिनों बयान दिया था की दोस्त भी कम होने चाहिए वार्ना कामयाबी पर से फोकस में कमी आती हे वास्तव में कामयाबी की सीढ़ी चढ़ने के साथ साथ इनके आस पास दोस्त स्वतः ही पीछे छुटथे जाते हे मुड़कर उनकी तरफ देखने का इनके पास समय नहीं होता हे धीरे धीरे दोस्त के नाम पर इनके चारो तरफ सिर्फ चमचे और चापलूस रह जाते हे जिनकी सच्चाई इन्हें भी पता होती हे सो इनसे इन्हें कोई उष्मा कोई आंनद नहीं मिलती हे शायद ये दोनों पहले से ही कोहली को फॉलो करते हो कपिल के आस पास सिर्फ उनकी माँ दिखाई देती हे और कोई नहीं वो खुद कह चुके हे की अपने भाई से भी उनकी साल में ही मुलाकात होती हे तो इंसानो का तो ये हाल हे उधर हाल ये हे की अपने शो पर कपिल का किसी के लिए सबसे अधिक भावुक और गला रुंधा हुआ देखा तो कुत्तो और अपने कुत्ते की बात करते हुए ही . कुत्तो और अपने कुत्ते की बात करते हुए कपिल की डबडबाई आँखे उनका प्रेम देखते ही बनता हे तब कपिल की भावुकता और चिंता देखते ही बनती हे वास्तव ये वो खाली जगह हे जो इंसानो को हटाने से पैदा हुई हे कुत्ते की देखभाल और चिंता कामयाबी में रोड़ा नहीं बनती इंसानो की बनती हे सो — सुनील ग्रोवर ने भी कपिल से पिटने और अपमानित होने के बाद इसी मानसिकता की तरफ इशारा किया की ”कुत्तो से ज़्यादा इंसानो से प्यार करना सीखिये . —————– ? हो सकता हे अरुणाभ के जीवन में भी ऐसा ही सब हो . दोस्त यार भाई परीजन ही नहीं प्यार और रिश्ते से भी ये लोग बचने लगे हे क्योकि इन्हें लगता हे की किसी भी तरह का कमिंटमेंट कामयाबी में रोड़ा बनेगा कपिल ने भले ही अपनी होने वाली पत्नी की फोटो पोस्ट की हो मगर लोग इसी पिटाई कांड पर से ध्यान हटाने का प्रयास भी मान रहे हे इसी तरह अरुणाभ जैसे लोग भी कोशिश करते दिख रहे हे की ऑफिस की लड़की हो काम आये और जाए दिमाग ना खाये कोई दबाव या समय ना देना पड़े लड़कियों ने जो ब्यौरा दिया हे अगर वो सच हे तो यही सोच लगती हे . ज़ाहिर हे की कोई भी स्वाभिमानी लड़की ये सब अपना घोर अपमान समझेगी . जब जीवन में कामयाबी तो हो मगर कोई आंनद न हो तो फिर ये आंनद के लिए केवल उतेज़ना पर निर्भर रह जाते हे जिसमे सेक्स हुड़दंग आदि एक अनिवार्य तत्व हे ही .

कपिलो और अरुणभो जेसो की समस्या आज भारत के लाखो कामयाब और अचीवर लोगो की दिखेगी कामयाब होने के लिए ये खुद ही अकेलेपन को गले लगाते हे इंसानो से दुरी बनाकर चलते हे जानवरो से इनका प्रेम लगातार नयी ऊंचाइयां छू रहा हे . लेकिन कब तक चलेगा ये सब बाद में ये अकेलापन जो जो न करवाये वो कम हे कामयाबी के बावजूद इनकी जिंदगी बहुत बेहतर भी नहीं रहती हे शादी होती टूटती रहती हे शराब के बिना तो गुजरा ही नहीं फ्री सेक्स तो चाहिए ही और बहुत सी विसंगतिया . भारत के सबसे बड़े सुपरस्टार राजेश खन्ना के जीवन से भी इस सबको समझा जा सकता हे मगर ये ”अरुणाभो कपिलो ” को कभी समझ नहीं आएगा कुछ भी सोचने समझने का इनके पास अब न समय हे न ठहराव

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7 thoughts on “अरुणाभ कुमार कपिल शर्मा की समस्या !

  1. ramesh kumar

    बहुत लोगो को शोहरत और पैस हजम नहीं होता इसी कैटोगरी में ये लोग आते है ! टीवी फिल्म की दुनिया में महिलाओ का शोषण होना आम बात है और ८०% इसे मान कर भी चलती है के शोषण होना ही है कोई हजार में एक विरोध करती है उनका करियर भी ख़त्म हो जाता है !

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  2. सिकंदर हयात

    अरुणाभ की तरह सेम यही हरकत तरुण तेजपाल ने भी की थी नतीजा सब कुछ तबाह हो गया ( टी वि ऍफ़ की भी नयी सीरीज भी पेंडिंग पड़ी हे ) तेजपाल खुद तो बर्बाद हुआ ही वो तो खेर जो भी हे साथ ही में इतना बढ़िया पत्रकारिता करने वाला” तहलका ” जैसा ब्रांड भी गया तहलका अब कोई और चला रहा हे ये लोग शायद भाजपा समर्थक हे सो अब कोई दम नहीं रहा अब में नहीं लेता . मेने इन्टरनेट पर पढ़ने की सुविधा होते हुए भी हमेशा तहलका खरीद के पढ़ा ताकि अच्छी चीज़ को बढ़ावा मिले आज के डरावने समय में ही तो तहलका की सबसे अधिक जरुरत थी और आज ही कही तहलका की बेख़ौफ़ निष्पक्ष विचारो वाली पत्रकारिता नहीं दिखती हे तहलका से जुड़े पत्रकार अब और कोशिश कर रहे लेकिन सब जानते ही हे की किसी भी नए ब्रांड को बनाना जमाना पब्लिक को लाना किस कदर मुश्किल काम होता हे पैसा भी चाहिए समय भी प्रतिभा भी एनर्जी भी किस्मत भी , सो बहुत नुक्सान हुआ . अच्छा ये भी देखने वाली बात हे की दोनों ही यानि अरुणाभ और तेजपाल दोनों ने ही अपने लिए किसी अपने साथ की नहीं बल्कि , कम उम्र लड़की पर हाथ साफ़ करने की कोशिश की , बहुत से लोग इनके ( तेजपाल अरुणाभ एन्ड पार्टी ) बचाव में ये भी प्रचार- तर्क करते हे की हेल्थी फ्लर्टिंग में बुराई नहीं हे लड़कियों को भी अच्छा लगता हे वगेरह अब लड़कियों को क्या अच्छा लगता हे में तो लड़की नहीं हु मुझे इतना नहीं पता , मगर में अपने अनुभव से बता दू की – दोनों ( तेजपाल अरुणाभ एन्ड पार्टी ) ही ये भूल गए की ये पब्लिक स्कुलो की पढ़ी तेजतर्रार लडकिया हे जो अपने से तीन -चार साल बड़े लड़के को भी ”अंकल ” कहने के लिए कुख्यात हे वो तुम्हारे दुआरा पीछे पड़ने पर किस कदर मानने को बुरा भी मान सकती हे वही हुआ भी , वैसे भी मेरी सलाह हे की कम उम्र में हम सभी सबसे अधिक सुन्दर होते हे कम उम्र में फेट आसानी से नहीं चढ़ता लगभग हम सभी कम एज में बेहद खूबसूरत होते हे तो कैसे भी आकर्षण -रिलेशन से लेकर शादी तक बहुत से लोग कम उम्र लड़की के दीवाने होते हे वो भूल जाते हे की कम उम्र इंसान सुन्दर होने के साथ साथ कमअक्ल और भावनाव में , गुस्से में फ़ौरन बह जाने वाला भी होता हे अब एक कमउम्र लड़की वेट कर रही हे सपनो में खोयी हे अपने सपनो के राजकुमार के , और आ गए फ्लर्ट करने आप गंजी टाट लिए अरुणाभ या तोंद और खिचड़ी दाढ़ी लिए तेजपाल तो हो सकता हे की वो इसे अपना घोर अपमान समझ कर बदले पर भी उतारू हो जाए ——– ? आगे भी मेरा तजुर्बा कहता हे की कम उम्र सुन्दर लडकिया जिन्हें मिलती हे ( हमारे दो दूर के रिश्ते के बड़े भाई ऊँची सरकारी नौकरी वाले दोनों ने अपने लिए कम उम्र बेहद सुन्दर लडकिया पसंदकी एज डिफ़रेंस के बाद भी डॉक्टरों इंजीनियरों को कौन मना करता हे— ? दोनों को मिली , दोनों बर्बाद हुए एक की तो डेथ ) वो भी और जो इस दौड़ में होते हे और रह जाते हे वो भी , दोनों इसकी भारी कीमत चुकाते हे सो सयम और सुंदरता के साथ साथ मैच्योरिटी के भी महत्व को पहचाने वार्ना —————- जा

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  3. सिकंदर हयात

    ऊपर कमेंट के आखिर में टाइपिंग मिस्टेक हो गयी हे ”जा ” नही ” जारी ” हे . आज राजू श्रीवास्तव ने जो कहा उसके माध्यम से में बताता हु की ये लोग तो शराब आदि चीजो से कैसे ”फायदा ” लेते हे पिछले दिनों नसीरुद्दिन शाह साहब ने अपनी क्रिएटिविटी में गांजे का अहम रोल बताया था और उधर हम जैसे आम लोग जो शराब सिगरेट तम्बाकू हर प्रकार के नशे की चीज़ से दूर रहते हे टेस्ट भी नहीं किया कभी भी नशे की चीज़ का , तो हम जैसे लोग कितने नुकसान में रहते हे ये दर्शाता हु . तो आज राजू ने कहा ” हाल ही में कपिल के बारे में फेमस कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव ने भी एक बड़ा बयान दिया है। राजू के अनुसार, कपिल कामयाबी के दबाव को झेल नहीं पा रहा है। मुझे नहीं लगता है कि वह बदतमीज है, मुझे बस लगता है कि वह आने वाले दबाव को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है।राजू आगे कहते हैं, ‘उन्होंने कभी भी मुझसे बदतमीजी नहीं की है, लेकिन शो के सेट पर काम करने वाले टेक्नीशियन और बाकी कलाकारों ने मुझे बताया है कि वह किस कदर शराब पीने के बाद गुस्सैल हो जाता है। सभी कहते हैं कि होश में वह पूरी तरह ठीक होता है, बदलाव उसमें शराब पीने के बाद आते हैं। यह बहुत बुरा है। लोग हमसे तब प्यार करेंगे यदि हम शराब पीने के बाद भी वैसा ही बर्ताव करें।’मिडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कपिल अपनी टीम के अलावा शो पर मौजूद ऑडियंस के साथ भी बुरा बर्ताव करते हैं। पिछले दिनों जब शाहरुख उनके सेट पर आए थे तो उन्होंने किसी भी ऑडियंस को उनसे मिलने नहीं दिया था साभार अमर उजाला ” तो समझिये की कपिल किस चीज़ के लिए दबाव में हे तो वो हीरो बनना चाहते हे उसके लिए अच्छा दिखना और अच्छा दिखने के लिए वेट और फेट कंट्रोल बहुत जरुरी होता हे ये फेट और वेट कंट्रोल बीस पचीस की एज में तो आसान और कुदरती होता हे मगर तीस चालीस के बाद तो बेहद मुश्किल होता हे तो काम के बाद खाने की तो बेहद चाह होती ही हे लेकिन उससे फेट चढ़ता तो यानि की एनर्जी भी चाहिए और वेट कंट्रोल भी अब इसलिए ये लोग ( ग्लेमर वर्ल्ड और दूसरे क्रियेटिव फिल्ड के लोग भी ) दबाकर शराब ड्रग्स सिगरेट आदि का सहारा लेते हे इसलिए नेहा धूपिया ने पिछले दिनों बेहद सटीक बयान दिया था की ”एक एज के बाद सुन्दर दिखना बेहद कठिन काम हे रात दिन व्यायाम करो मेहनतकरो उसके बाद उबली हुई भिन्डी खाओ बहुत बुरी लाइफ ” ———————————— जारी

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  4. सिकंदर हयात

    अब कपिल को हीरो बनना हे उसके लिए वजन कम रखना हे उसके लिए कम खाना हे तो फिर काम कैसे हो हो ——- ? तो ये लोग दबाकर पीते है और उससे एनर्जी पाते है देखा गया है की इन दारूबाज़ो नशेबाज़ों को फेट भी कम चढ़ता है ( सबसे बड़ी हीरोइन पर भी अभी कोकीन का आरोप ) ये सभी खाते कम है प्रेमचन्द ने भी इन लोगो की साइक्लोजी का बहुत ही ज़बरदस्त वर्णन अपनी एक कहानी ”दीक्षा ” में किया था तो फिट रहना क्रियटिव रहना तन और मन दोनों को चलाना आसान नहीं होता हे एकाग्रता बनाना आसान नहीं होता हे इसलिये आपने देखा होगा की केवल कपिल अरुणाभ जैसे लोग ही नहीं बल्कि बहुत से लेखक पत्रकार बुद्धजीवी कलाकार भी एक नंबर के नशेबाज़ सिगरेट बाज़ तम्बाकू पान बाज़ होते हे तो ये हे की ये लोग इन चीज़ों से एनर्जी लेते हे एकाग्रता पाते हे अब हम जैसे लोगो की दुर्गत देखिये की हमने तो जीवन में किसी भी प्रकार के नशे का टेस्ट भी नहीं किया ले दे सिर्फ चाय का सहारा था वो भी हाफ कर दी है क्योकि चाय और बिस्किट स्नेक्स सभी में चीनी और केलोरी होती है मेरा आदर्श वेट ( लंबाई , सेमी में से सौ घटा दे वो आदर्श होता है ) 180 सेमी के हिसाब से 80 किलो होना चाहिए मगर दो साल से डेली दस किलोमीटर रनिंग करके बीस बीस किलो के डंबल करके स्लम की औरतो बच्चो का सुबह सुबह पानी झुगी तक पंहुचा करके भी में वेट 90 से नहीं घटा पा रहा है कारण वही की आम आदमी हम जैसा वो एनर्जी कहा से ले ——– ? नशा हम करते नहीं खाने पर कंट्रोल करे तो जियेंगे कैसे कैसे भागदौड़ कैसे करेगे ———– ——- ? इतने सारे अपनों की चिंता ——- ? इतना तनाव झेले कैसे , ————- ? जिसमे खाना आदि भी एक तरह से स्ट्रेस बस्टर का सा काम कर देता है एकतरफ जिन्दा रहने को भागदौड़ करनी पड़ती है जिसमे तन थकता हे दूसरी तरफ राइटिंग में मन थकता है जिसमे दुनिया भर के गम और चिंताए भूल कर लिखना होता है और गम भुलाने का हमारे पास कोई साधन नहीं है तो हम जैसे आम शरीफ लोगो पर तो इतना जुल्म है दूसरी तरफ ये नशेबाज़ इसका पूरा फायदा उठाते है नशा न केवल इनकी एकाग्रता बनाता है वही इनकी एनर्जी भी बढ़ाता है तो आजकल ये सब आम बात है . मगर आगे कुदरत का कानून काम करता है की कुछ पाओगे तो कुछ खोना भी पड़ेगा तो ये आज पा रहे है मगर इसी नशे की वजह से कल को बहुत कुछ आपको खोना भी होगा . बाकि हम तो खेर कुछ पाए न पाए मगर किसी नशे को हाथ नहीं लगाने वाले हम तो इन गर्मियों में फुल मैराथन ( हाफ तो दौड़ ली ) दौड़ने की तैयारी करके अपना वेट कम करेंगे

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  5. सिकंदर हयात

    अब ये जो कौम हे नयी , जो रिश्तो नातो दोस्ती यारी परिजन प्रियजन परवाह हर चीज़ से भावनाव से लोगो से उनकी फ़िक्र से उनकी केयर के दबाव से पिंड छुड़ा कर तरक्की हासिल कर रही हे इण्डिया टुडे में एक कम उम्र लड़की , जिसने बिजनेस में भारी सफलता हासिल की हे उसने कहा की उसका अब कोई दोस्त नहीं हे क्योकि उसके पास अब किसी के लिए समय नहीं हे विराट कोहली का विकास सब जानते ही हे वो भी जीवन में कम दोस्त की सलाह देते हे अब यही विराट लगातार अनुष्का की शादी के लिए जान खा रहे हे शादी शादी शादी फिर इस ” कौम ” ( तरक्की पसंद मगर सिर्फ व्यक्तिगत ) का एक डायलॉग आपने बहुत सुना होगा कई कई बार कई लोगो के इंटरव्यू में सुना होगा की ”में ढेर सारे बच्चे चाहता बच्चे चाहता हु चाहती ” अब ये क्या साइकि हे ——— ? वैसे तो खेर अमीर लोग ना अधिक बच्चे चाहते हे चाहे भी तो उन्हें होते नहीं फिर भी इस डायलॉग का क्या मर्म हे ———– ? में ढेर सारे बच्चे चाहता बच्चे चाहता हु चाहती हु . इस डायलॉग से इनका आशय ये होता हे की विकास तो हुआ मगर एक ज़बर्दस्त इमोशनल वेक्यूम के साथ बहुत ज़्यादा इमोशनल वैक्यूम , अब ये जो वेक्यूम भावनातमक खालीपन होता हे इसको बच्चो से बेहतर कोई नहीं पूरा कर सकता हे बच्चा एक ही क्यों ना हो वो ना केवल माँ बाप को पुरे दिन हिल्ले में लगाय रख सकता हे बल्कि उसके रहते माँ बाप की जिंदगी में कोई इमोशनल वेक्यूम भी नहीं रहता एक भी बच्चा माँ बाप की सारी भावनातमक आवशयक्ताय पूरी कर सकता हे इसलिए ये कामयाब लोग ढेर सारे बच्चे चाहता हु का बयान देते रहते हे लेकिन इन्हे पूरी बात फिर भी नहीं पता होती हे की बच्चे आपकी सारी भावनात्मक आवशयकताये पूरी कर सकते हे मगर सिर्फ तभी तक जब तक वो आठ से बारह साल आस पास के नहीं होते हे इस ऐज तक बच्चे बंदरिया के बच्चे की तरह माँ बाप से चिपक कर उनकी सारी इमोशनल आवशयकते पूरी करते रहते हे मगर फिर एक एज के बाद वो अपनी अलग दुनिया बसाना शरू करने लगते हे और आपके जीवन में फिर से खालीपन आ जाता हे यानि दोस्त यार प्रियजन आत्मीय जन तो चाहिए ही चाहिए होते हे ये बात समझायी शाहरुख़ खान के एक बयान से उन्होंने बताया की तीसरा बच्चाउन्हें गौरी को इसलिए पैदा करना पड़ा की उनके दोनों टीन बच्चो ने उनसे चिपकना छोड़ दिया था घर में सन्नटा हो गया था वही संजय सिन्हा ने एक कामयाब कपल के बारे में बताया जो किसी को घास नहीं डालता था अपनी कामयाबी और अपने दो बच्चो में मग्न रहता था मगर बच्चो के टीन ऐज होते ही उन कामयाब कपल की जिंदगी में भावनातमक सन्नाटा हो गया तो ऐसे लोग आज चारो तरफ हे जो कामयाबी के लिए रिश्तो दोस्ती प्रियजन को लात मार रहे हे बाद में पछतायेंगे

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  6. सिकंदर हयात

    अधिकतर कामयाब लोग बहुत छोटी फेमली से ही क्यों होते हे ” निश्चिंत होकर काम करने ” मौका हमें कभी भी नहीं मिल पाता हे मोदी जी ने ये मौका हासिल करने को ही घर छोड़ा था और खुद और इनामदार साहब की छोटी से फेमली का हिस्सा बने पढ़े —————– ? दरअसल :
    मध्‍यवर्गीय कलाकारों के कंधों का बोझ-अजय ब्रह्मात्‍मज
    हिंदी फिल्‍मों में मध्‍यवर्गीय पृष्‍ठभूमि के परिवारों से आए कलाकारों की संख्‍या बढ़ रही है। दिल्‍ली,पंजाब,उत्‍त्‍रप्रदेश,राजस्‍थान,उत्‍तराखंड,हिमाचल प्रदेश,बिहार और झारखंड से आए कलाकारों और तकनीशियनों हिंदी फिल्‍म इंढस्‍ट्री में जगह बनानी शुरू कर दी है। ठीक है कि अभी उनमें से कोई अमिताभ बच्‍च्‍न या शाह रूख खान की तरह लोकप्रिय और पावरफुल नहीं हुआ है। फिर भी स्थितियां बदली हैं। मध्‍यवर्गीय परिवारों से आए कलाकारों की कामयाबी के किससों से नए और युवा कलाकारों की महात्‍वाकांक्षाएं जागती हैं। वे मुंबई का रुख करते हैं। आजादी के 7व सालों और सिनेमा के 100 सालों के बाद की यह दुखद सच्‍चाई है कि मुंबई ही हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री की राजधानी बनी हुई है। उत्‍तर भारत के किसी राज्‍य ने हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री के लिए संसाधन जुटाने या सुविधाएं देने का काम नहीं किया।
    बहरहाल, हम बात कर रहे थे हिंदी फिल्‍मों में आए मध्‍यवर्गीय कलाकारों की कामयाबी की। लगभग सभी कलाकारों ने यह कामयाबी भारी कदमों से पूरी की है। किसी से भी बाते करें। संघर्ष और समर्पण का भाव एक सा मिलेगा। हम सभी जानते हैं कि उत्‍तर भारत में आज भी कोई किशोर-किशोरी फिल्‍मों में जाने की बात करे तो उसके साथ परिवार का क्‍या रवैया होता है? उनके प्रति सख्‍ती बढ़ जाती है। तंज कसे जाने लगते हैं। अगर वह ड्रामा या थिएटर में एक्टिव हो रहा हो तो दबाव डाला जाता है कि वह उसे छोड़ दे,क्‍योंकि उसमें कोई भविष्‍य नहीं है। सकल मध्‍यवर्गीय परिवारों में भविष्‍य का तात्‍पर्य सुरक्षित करियर और जीवन है। आप 10 से 5 की बंधी-बंधयी नौकरी कर लें। ऊपरी आमदनी हो तो अतिउत्‍तम। खयाल रहे कि पेंशन वाली नौकरी हो। इन दबावों से बचजे-निकलते कोई निकल आया तो तानों की शुरूआत हो जाती है। गली-मोहल्‍ले में कहा जाने लगता है कि फलां बाबू का बेटा अमिताभ बच्‍चन बनने गया है या फलां बाबू की बेटी को लगता है कि वही अगली कंगना रनोट होगी। सभी को उन युवक-युवतियों की असफल वापसी का इंतजार रहता है। अजीब समाज है अपना। सपनों को पंक्‍चर करने में माहिर इस समाज में अपनी उम्‍मीदों को बचाए रखना भी एक संघर्ष है।
    बात आगे बढ़ती है। ये कलाकार सिर्फ अपनी लिद की बदौलत मुंबई आ धमकते हैं। धक्‍के खाते हैं। खाली पेट रहते हैं। सिर्फ अपनी आंखों की चमक बरकरार रखते हैं। संघर्षशील कलाकारों की अक्षुण्‍ण ऊर्जा पर कभी बात होनी चाहिए। मुंबई में उनके साथी ही उनके हमराज,हमखयाल और बुरे दिनों के दोसत बनते हैं। किसी प्रकार एक-दो काम मिलता है। कुछ पैसे आते हैं। फिल्‍में रिलीज होती हैं। पत्र’-पत्रिकाओं में तस्‍वीरें छपती हैं। फिर भी यह कहना बंद नहीं होता कि अभी देखिए आगे क्‍या होता है? परिवार भी आश्‍वस्‍त नहीं रहता कि कुछ हो ही जाएगा। दूसरे दबी इच्‍छा रहती है कि बेटा या बेटी आज के सफलतम स्‍टारों की तरह चमकने लगे,जबकि उसे गर्दिश में रखने या धूमिल करने की उनकी कोशिशें जारी रहती है।
    फिर एक दौर आता है। उनमें से कुछ कलाकार पहले टिमटिमाते और फिर चमकने लगते हैं। उनकी इस कौंध के साथ ही कंधों पर रिश्‍तेदारी उगने लगती है। न जाने कहां-कहां से परिचितों और रिश्‍तदारों की भीड़ मंडराने लगती है। होता यह है कि पहचान और नाम होते ही इन कलाकारों से इन रिश्‍तेदारों की भौतिक उम्‍मीदें बढ़ जाती हैं। उनके परिवारों के अधिकांश सदस्‍य उनकी तरह संपन्‍न और प्रभावशाली नहीं होते,इसलिए उन पर नैतिक दबाव बढ़ता है कि वे मित्रों और परिजनों की आर्थिक एवं अन्‍य मदद करें। यकीन करें बाहर से आए सभी कलाकारों को अपने परिवारों से मिले गडढोंंको भरने मेंही आधी एनर्जी और आमदनी खर्च हो जाती है। निश्चिंत होकर काम करने के बजाए उन्‍हें सभी परिजनों की अपेक्षाओं के दबाव में रहना पड़ता है। इस अपेषित दायित्‍व से उनके कंधे झ़ुकते हैं और करियर भी।अजय ब्रह्मात्‍मज

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  7. सिकंदर हयात

    नवभारत पर रेखा खान को दिए इंटरव्यू में कपिल शर्मा ने वही बाते कही जो हमने ऊपर और अमिताभ वाले लेख में कही थी की ये लोग कामयाबी के चक्कर में बहुत अकेले पड़ गए हे इनके घरो में सनाट्टा पसर गया हे अमिताभ के भी अथक परिश्रम का राज़ यही हे की इनके घर में कुछ नहीं हे इसलिए इन्हे बाहर अच्छा लगता हे कपिल ने कहा ” कई बार यह इतना ज्यादा हो जाता है कि आप अपने आस-पास के लोगों पर शक करने लगते हैं कि मैं किस पर भरोसा करूं और फिर आपको अकेलापन लगने लगता है। आप डिप्रेशन की गर्त में कैसे डूबे?
    किसी डिजिटलवाले ने जूता मारनेवाली खबर छापी और फिर किसी चैनल ने नाट्यरूपांतरण करके मुझे विलन बनाकर पेश किया। मेरे पास प्रेस कॉन्फ्रेंस का समय नहीं था। जब मैने अपने न्यूज देखने शुरू किए तो देखता हूं, मेरे बारे में गंदी बातें फैलाई गईं। उन बातों ने मेरे दिमाग पर बुरा असर डाला। नेगेटिविटी दिल और दिमाग पर असर कर गई। मैं सोच रहा था कि ये मैंने कब कहा? यही सोच-सोच कर मैंने अपनी हेल्थ खराब कर दी और जबरदस्त पीना शुरू किया।

    आपने सबसे ज्यादा अकेलापन कब महसूस किया?
    जब मैं काम में होता हूं, स्टूडियो में लाइट्स और कैमरे के बीच रहता हूं तो मुझे अकेलापन नहीं सालता। मैं बहुत खुश रहता हूं, मगर जब मैं घर पर जाता हूं तो तन्हाई सताने लगती है। पिछले कई सालों से लगातार व्यस्त रहने के बाद मुझे अकेलापन महसूस करने का वक्त नहीं मिला था, मगर पिछले एक साल में जब मुझे लेकर तरह-तरह की नेगेटिव खबरें आने लगी तो मैं बहुत अकेला महसूस करने लगा। मुझे लगा मेरा अपना कोई नहीं है। ” वास्तव में ये अकेलापन लोग खुद ही चूज़ कर रहे हे कामयाबी पर फोकस के लिए ये खुद ही मोदी जी की तरह किसी की परवाह नहीं करते हे लोगो के लिए कुछ करके उन्हें अपना बनाकर अपना अकेलापन दूर करने की जगह ये चाहते हे की इनके आस पास के सभी लोग बिना चोंच हिलाये या कुछ मांगे बिना ही इनकी शीर्ष की यात्रा में सहयोग करे अब इस एटीट्यूड के साथ रिश्ते जम नहीं पाते नतीजा वही जो कपिल ने कहा और जो अमिताभ के इतने सारे बेमतलब के काम का राज़ हे और वो जिससे मोदी जी हर समय घबराते हे भयावह अकेलापन

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