आज हम बात करेंगे बीते दिनों की दो मशहूर अदाकाराओं की जिन्हें कुदरत ने जब धरती पर बुलाया तो अलग अलग समय काल में लेकिन तारीख़ एक थी…सिर्फ जन्म तारीख ही नही दोनों के जीवन के सफर से लेकर फिल्मी सफर में भी काफी समानताएं हैं..इतनी समानताएं कि आप हैरान होने पर मज़बूर हो जाएंगें…
तो आइए आपको सबसे पहले बता दें कि कौन हैं वो सिने-तारिकाएं ..जी हां,हम बात कर रहे हैं..

80 साल की वैजयंती माला और 53 वर्षीय श्रीदेवी.

दोनों ही हिंदी सिनेमा की अपने समय की मशहूर,शोख और चंचल अदाकाराएं….

दोनों अदाकाराएं यानि वैजयंती माला और श्रीदेवी एक ही राज्य तमिलनाडू से हैं…

दोनों ही अदाकाराएं एक बेहतरीन अदाकारा होने के साथ हीं गजब की नृत्यांगना भी रह चुकी हैं…

एकतरफ वैजयंती माला ने आम्रपाली,प्रिंस,सूरज,संघर्ष जैसी कई मशहूर फिल्मों में अपने क्लासिक नृत्य से लोगों के दिलों पर सदियों तर छाईं रही तो वही संगम जैसी सुपर हिट फिल्म में अपनी रॉकिंग अंदाज से लोगों को एंटरटेंनमेंट शॉक लगा गईं…अपने बेहतरीन वेसटर्न स्टेप्स का जलवा दिखा कर युवा दिलों की धड़कन तेज कर दी और वो गीत मै का करूं राम मुझे बुड्ढा मिल गया..लोग आज भी नही भूल पाएं हैं…अब बात श्रीदेवी की कर लें तो फिल्म चांदनी में उनके द्वारा किए गए अनोखे कलासिक डांस को उनके फैंस आज भी याद करते हैं..और फिल्म चालबाज के एक गीत ना जाने कहां से आई है ना जाने कहां को जाएगी..किसी के हाथ ना आएगी यो लड़की..उनके रॉकिंग स्टेप्स ने युवाओं के बीच खूब पॉप्यलर बना दिया था..और मिस्टर इंडिया में उनकी नीली साड़ी में फिल्माए गीत काटे नही कटती ये दिन ये रात ने तो उन्हे शोहरत के बुलंदियों तक पहुंचा दिया था यानि श्रीदेवी और वैजयंतीमाला दोनों के फिल्मी सफर में एक्टिंग के साथ उनके नृत्य शैली का भी एक जैसा ही अहम रोल था…

अब बात करते हैं…एक ऐसी फिल्म की जिसका नाम भी एक ही था और एक ही नाम की इस फिल्म ने दोनों के लिए सफलता का एक ऐसा दरवाजा खोला जिसके बाद इन दोनों अभनेत्रियों ने कभी पीछे मुड़ कर नही देखा….जी हां,अब नाम भी जान लिजिए…ये फिल्में थी 1954 की नागिन और 1986 की नगीना ,जी हां,दोनों ही फिल्मों एक्ट्रेस के साथ ही बीन और संपेरों का जलवा भी दर्शकों को खूब पसंद आया था ..1954 की फिल्म नागिन ने जहां वैजयंती माला के लिए सफलता के सभी द्वार खोल दिए तो वहीं 1986 की नगीना ने श्रीदेवी को सफलता की बुलंदियों पर पहुंचाकर फिल्मकारों की 80 के दशक की पहली पसंद बना दिया….

इतना ही नही करियर के अलावा निजी जिंदगी में भी दोनों अदाकाराओं के बीच बहुत समानताएं पाई गई हैं…जैसे दोनों अपने समय में लाखों युवा दिलों की धड़कन थीं… लेकिन इतना मशहूर होने के बाद भी दोनों ने ही एक शादीशुदा व्यक्ति के साथ घर बसाना पसंद किया..साल 1968 में वैजयंती माला ने डॉ.चमन लाल बाली के साथ घर बसा लिया और फिल्मों से सन्यास ले लिया…

कहा जाता है 1964 में बनी फिल्म संगम बनने के दौरान उनके और राजकपूर के नजदकियों के चर्चे ज़ोर पकड़ने लगी और इससे पहले कि राज कपूर के शादीशुदा जिंदगी में एक बार फिर से कोई भूचाल आ जाता वैजयंतीमाला ने डॉ बाली के साथ घर बसा लेना बेहतर समझा…वैसे ही श्रीदेवी की जिंदगी में कुछ ऐसा ही हुआ…फिल्मी सफर क दौरान माना जाता है मशहूर मिथुन चक्रवर्ती उनके जिंदगी में आए माना तो यहां तक जाता है कि दोनो ने चुपके सो शादी भी कर ली थी जिससे मिथुन चक्रवर्ती जो कि पहले से ही शादीशुदा थे,उनके जिंदगी में भी भूचाल आ गया यहां तक सफाई देने के लिए मिथुन दा को प्रेस-कॉंफ्रेस भी बुलानीपड़ा.और फिर श्रीदेवी ने बोनी कपूर के साथ 1994 में घर बसा लिया.

तो इस तरह कभी-कभी कुदरत किस्मत का कनेक्शन कब क्यूं और कहां और किसे जोड़ दे कहना मुश्किल हो जाता है….कहीं कहीं तो एक ही मां के औलाद में भी एक गुण भी एक समान नही होती और कभी-कभी तो हर युग में बहुत कुछ एक जैसा ही हो जाता है…मुहावरें यूं ही नही बनते..जैसे
एक मुहावरा ये भी प्रचलित है कि इतिहास खुद को दुहराता है….