कुछ दिन पहले मैं लखनऊ में एक टैक्सी में था अपने भाई के साथ.. मेरी आदत है कि मैं कभी कुछ ग़लत सुनता या पढता हूँ तो बोलता हूं कि “ये राम क्या होगा इसका”.. या कभी “हे अल्लाह” कहता हूँ.. उस समय राम का नाम लेने पर टैक्सी वाले ने मुझे अपने धर्म का समझा और सपा के तुस्टीकरण पर अपना दर्द बयान करने लगा.. बताने लगा कि कैसे उसे दुःख होता है जब उसकी बेटी को लैपटॉप नहीं मिला.. वो भले ही किसी और वजह से न मिला हो मगर उसे ये लग रहा था कि उसके धर्म की वजह से ऐसा हुवा है.. ये बात लगभग हर बहुसंख्यक के अवचेतन में थी उत्तर प्रदेश में.. वो कहें न मगर भीतर से वो उपेक्षित और आहात थे.. लोग इस बात को भी मान रहे थे कि अखिलेश का काम अच्छा है मगर वो वोट देंगे नहीं इस उपेक्षा की वजह से!

यूपी चुनाव में बीजेपी को छोड़ अन्य पार्टियां ऐसा प्रचार कर रही थीं जैसे सिर्फ़ मुसलमान ही एकमात्र वोट देने वाला प्राणी है.. बाक़ी जातियां और क़ौम के लोग घुईया छीलने बैठे हैं.. ये तुष्टिकरण जिस हद तक कुरूप हो चुका था उसका यही परिणाम होना था.. इसमें कोई आश्चर्य किसी को नहीं होना चाहिए.. मुझे व्यक्तिगत तौर पर इस तुष्टिकरण से बहुत नफ़रत थी शायद इसी लिए किसी एक पार्टी का भी मैं खुलकर समर्थन नहीं कर पाया कभी!

आप कितना भी आंकलन कर लें मगर यूपी का प्रचंड बहुमत उपेक्षा और भय का परिणाम है.. लोकसभा चुनावों में वो भय बीजेपी दिखा पायी थी लोगों को और यूपी चुनावों में स्थानीय पार्टियों ने ख़ुद भयभीत कर दिया बहुसंख्यकों को.. जब से मोदी प्रधानमंत्री बने हैं अल्पसंख्यकों को ये लगता है कि वो गुटबाज़ी कर लेंगे तो सत्ता उनके हिसाब से होगी.. दलितों से गुटबाज़ी हुई, सिखों से, वामपंथियों से हुई और ख़ूब उधम मचा के रख दिया.. अल्पसंख्यकों में जो ख़ुद हद दर्जे के कम्युनल है वो पत्रकार बन गए और आरएसएस और बहुसंख्यकों पर कम्युनल होने का निशाना साधने लगे.. मोदी के ख़िलाफ़ एक पोस्ट आ जाए तो 99% आपको वहां मुस्लिम ही मज़े लेता मिलेगा.. ये सब काउंट करता है.. आपकी एक एक हरकत काउंट करती है क्यूंकि पूरी दुनिया में आप के अपने क़ौम के लोग बुरी तरह बदनाम हैं और आपका गुट बनना आम बहुसंख्यकों को भयभीत करता है भले वो आपसे कहें न मगर उनके अवचेतन डरा हुवा है आपसे!

इसलिए मेरे मुस्लिम भाइयों आप गुटबाज़ी बंद कीजिये.. आप जितनी गुटबाज़ी करेंगे उतना ही आप लोगों को भयभीत करेंगे.. वो चार लोग जिन्होंने आपके यहाँ की सिंवईं और बिरयानी खायी होती है और उसकी वजह से वो आपके सहनशील होने की तारीफ़ करते फिरते हैं, उनकी बातों में मत आईये.. जुम्मन चाचा और हरिया की प्रेम कहानी भी आपको शांतिप्रिय नहीं साबित करेंगी इस दौर में.. बहिष्कार कीजिये तुष्टिकरण का और सांप्रदायिकता का अपने क़ौम के भीतर.. आरएसएस की तरफ़ ऊँगली मत उठाइये.. अपने लोगों से लड़िये पहले.. आपके अपने जितने भी कट्टर धार्मिक मिलेंगे फेसबुक पर उन्हें गौर से देखिये.. वो सिवाए इस्लाम फैलाने और शरीया की तारीफ के कुछ नहीं जानते हैं और छुपे हुवे ढंके हुवे हायं सेकुलरिज्म हाय सेकुलरिज्म करते हैं.. उन्हें ज़लील कीजिये खुल के.. उसके बाद आप अन्य धर्मों के कट्टरपंथियों की बात करेंगे तो कोई सुनेगा भी!

आपके साथ गुट बनाने वाले किसी भी एक दलित, सिख, वामी, आपिये, कांग्रेसी से पूछिए कि क्या अगर भारत में आपके क़ौम के किसी कट्टर धार्मिक नेता, जितना मोदी हैं, का राज हो जाए तो क्या वो उस राज में रहना पसंद करेगा? सब का जवाब “न” होगा.. इसलिए जहाँ सुरक्षा की बात आएगी सब भाग के हिन्दुवों के पास पहुँच जाएंगे.. भले वो कट्टर ही हो.. और उनका क्या हम जैसों का जवाब भी न होगा.. क्यूंकि हमे आपके राज में रहना होता हो हमारे बाप दादा पकिस्तान चले गए होते.. शिया का जवाब “न” होगा और बहुत क़ौमों का जवाब न होगा.. जब हम जैसे आपके बीच नहीं रह सकते तो दूसरों की क्या बात करें!

यही डर है.. ये सबका साझा डर है.. और ये डर किस से है इसे आप जानते हैं.. माया और अखिलेश जी ने इस डर को बहुत बढ़ा दिया था तुष्टिकरण से और नतीजा सामने है.. और हिन्दू तुष्टिकरण से भय नहीं व्याप्त होता है विश्व में.. इसे ध्यान से समझिये और मंथन कीजिये.. इसलिए बहुत गुट बना लिया आप लोगों ने.. अब प्रेम और इंसानियत की ओर मुड़ जाईये.. आपके तरफ से दिया गया प्रेम विरोधियों को आज नहीं तो कल प्रेममय कर देगा.. तुष्टिकरण का ख़ुद विरोध कीजिये अब नहीं तो बहुसंख्यकों का भय बढ़ता ही जाएगा