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अफ़ज़ल ख़ान

तेलंगाना राज्य बनाने का एलान क्या हुआ कश्मीर से ले कर कर्नाटक तक, बंगाल से ले कर गुजरात तक पूरे भारत को बांटने की आवाज शुरु हो गयी. कश्मीरी पंडितो ने अपनी अलग राज्य पनुन- कश्मीर की मांग शुरु कर दी. महाराष्ट्र से विदर्भ राज्य की मांगे शुरु हो गयी है. गुजरात मे सौराष्ट्र की मांग हो रही है. बंगाल के गोरखे गोरखालैंड मांग रहे है. कर्नाटक मे कोराग राज्य की मांग फिर से शुरु हो गयी. असम वाले बोडोलैंड मांग रहे है. मायावती ने उत्तेरपरदेश को चार राज्यो मे पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड और पश्चिमांचल मे बांटने को कहा है. अजित सिंह ने हरित्परदेश की मांग रखी है. इस तरह अभी तक कुल 21 राज्यो की मांग हो रही है.

अलग राज्यो की मांग करने वाले सभी लोग और सभी पार्टी के लोगो का यही कहना है के अच्छा शासन और प्रशासन के लिये छोटे-छोटे राज्यो का बनना जरूरी है. अगर ये बात ठीक थी तो सरदार पटेल ने सारे राजाओ को क्यो बे-दखाल कर सब रियसतो का भारत मे विलय कर दिया. अगर नये राज्यो की मांग मान लि जाये तो भारत के टुकड़े-टुकड़े हो जाये गे इस तरह भारत के 100 टुकड़े करने पड़े गे फिर भी मांग जस की तस रहे गी. अगर सरकार अच्छी हो, और उसे चलाने वाले ईमानदार और इंसाफपसांद हो तो मुल्क को बाटने की जरूरत ही नही है.

असल मे वोट-बैंक की सियासत मुल्क तो तबाह कर रही है. भाजपा ने अपने काल मे 3 अलग राज्य बनाये उस के बाद कांग्रेस ने. भारत मे सभी पार्टिया और हमारे सभी राजनेताओ को गद्दी और कुर्सी की ललच, मुखमंत्रि और मंत्री बनने का खवाब भारत को तोड़ने पे मजबूर कर रही है. लगता है हम फिर 1857 के दौर मे पहुच जाये गे जब भरात मे 500 से अधिक राजवाडे थे और किसी मे कोई भी ताल-मेल माही था इसी कारण् 1857 की क्रांति नाकाम हो गयी थी क्यो के हर कोई अपने रियासत्र को बचाना चाहता था किसी को भी भारत की फिक्र नही थी. आज फिर वही स्थिति बन रही है और हर क्षेत्र, जात वाले अपना अलग राज्य मांग रहे है.

अगर इसी तरह छोटे-छोटे राज्यो का गठन होता रहा तो केन्द्र की शक्ति कम हो जाये गी और राज्यो पे कंट्रोल रखना मुश्किल हो जाये गा. आप स्वंय देखे के बहुत से राज्य अभी भी केन्द्र की बात नही मानते है. अगर इसी तरह मुल्क बांटता रहा तो वो दिन दूर नही जब यही छोटे-छोटे राज्य हो सकता है विदेशी मुल्को से मिल कर अपने आप को अलग मुल्क की घोषणा न कर दे. आप खुद देखिये के चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना ही मानता है कश्मीर, तमिल क्षेत्र, मणिपुर, नागा लॅंड , असम, गोरखा आदि राज्य बने तो समझिये ये मुल्क के लिये खतरा ही अगर केन्द्र कमजोर हुआ तो सोचिये बहुत से राज्य हम से अलग हो जाये गा. छोटे-छोटे राज्यो का बनने का प्रभाव दीर्घकालिक हो गा इस लिये हमे अभी से सचेत होना हो गा.

NOTE- ये लेख उस समय नवभारत टाइम्स के लिये लिखा गया था जब लोकसभा मे तिलंगना को अलग राज्य बनाने का विधयेक पास हुआ था. आज तिलंगना राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री ने शपथ लिया और एक नया राज्य अस्तित्व मे आ गया है, अभी भी ये लेख का महत्व वही है इस लिये इसे खबर की खबर मे प्रकाशित किया जा रहा है.