by — सिकंदर हयात

मध्य प्रदेश के बड़वानी के अरिहंत होम्योपैथिक कॉलेज के छात्र और दुआरा एडमिशन के बाद दाढ़ी रखने और उसके बाद छात्र का आरोप हे की प्रिंसिपल जैन साहब दुआरा उस पर क्लीन शेव करके कॉलेज आने के दबाव डाला गया इसके अलावा भी कई लोग ये आरोप लगा चुके हे की उन्हें दाढ़ी नहीं रखने दी जाती हे शायद इसी तरह का विवाद पिछले दिनों एयर फ़ोर्स में भी हुआ था जहां एक मुस्लिम कर्मचारी दाढ़ी रखना चाहता था बात करे तो मध्यप्रदेश के बड़वानी के उस छात्र की तो . ये मानकर ही सही की फ़र्ज़ करे की कॉलेज के प्रिंसिपल साम्प्रदायिक भावना से ग्रस्त होकर ही आप पर खास हुलिए को बदलने को कह रहे थे ये मानकर भी हम तो उस छात्र से यही कहेंगे की दोस्त इस्लाम के नाम पर किसी भी पँगेबाज़ी में मत पड़ो मत पड़ो कोई फायदा नहीं हे इसमें नुकसान ही नुकसान हे कुछ भी तो फायदा नहीं हे ”खुदा के लिए ” फिल्म भारत व पाकिस्तान सारी दुनिया में ही पसंद की गयी थी इस में अंत में मौलवी बने नसीरुद्दिन शाह कुछ ऐसा कहते हे की ” दाढ़ी ‘अंजाम ‘ हे इसे आगाज़ ही बना लेने की ज़िद मत करो ” बड़वानी के दोस्त पढ़ो लिखो नमाज़ रोजा करो कोई तुम्हे नहीं रोक रहा हे ना रोक सकता हे मगर इन विवादों में ना पड़ो इसमें इस्लाम इंसानियत और इण्डिया तीनो का ही नुकसान हे फायदा कुछ भी नहीं हे दाढ़ी रखने की ज़ल्दबाज़ी क्यों – ? क्यों इन बातो पर विवाद किया जाए विवाद में पड़ा जाए हे कोई लाभ कुछ भी तो नहीं दाढ़ी अनिवार्य ही हो इस्लाम में ही ऐसा भी नहीं हे करोड़ो मुस्लिम दाढ़ी नहीं रखते हे और जो लोग फ़र्ज़ करो तुम्हे दाढ़ी रखने और उस पर अड़ने के लिए उकसा रहे हे उनकी मांगे इतनी हे की दाढ़ी पर तो किसी भी बात पर ही ये कभी राजी नहीं होंगे सच्चे और असली मुस्लिम की इनकी शर्तो का कोई अंत नहीं होता हे बैंक बीमा पर्दा हर मुद्दे पर इनकी अनगिनत मांगे हे या सोच हे इतनी शर्ते हे की तुम कभी भी पूरी नहीं कर पाओगे बेहतर यही होगा की इनकी सुनो मत मेरा अंदाज़ा हे की ऐसे ही किसी न किसी से प्रभावित होकर तुमने कोर्स के बीच में ही दाढ़ी रख ली होगी चलो मानलिया की तुमने दाढ़ी रखनी ही हे , तो कोर्स पूरा करके रख लो भाई इल्तज़ा हे की इस्लाम के नाम पर पँगेबाज़ी बन्द कर दो खुदा के वास्ते बन्द कर दो !

तुम मानो ना मानो सारी दुनिया में ही मुस्लिम कटरपंथ बढ़ रहा हे गलती चाहे किसी की भी हो , ये बढ़ रहा हे और दुनिया इससे चिंतित हे हम दुनिया से अलगथलग नहीं रह सकते हे हमे इसी दुनिया में रहना हे और गेर मुस्लिमो के साथ ही रहना हे हमें उनके सामने इस्लाम के उदारवादी चहरे को पेश करना चाहिए कट्टरवादी चेहरे को नहीं अगर ऐसा करेंगे तो क्लेश बढ़ेगा और क्लेश से किसी का फायदा नहीं हे नुकसान ही नुकसान हे ये भी देखो दोस्त की दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देशो में , मुस्लिम कट्टरपंथ से परेशान होकर जनता ने भारत में मोदी और अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प जेसो को सत्ता सौप दी हे ये दोनों ही बेहद बदमिजाज असवेंदंशील और तानाशाही मिजाज के हे कितना बड़ा नुकसान हुआ हे मोदी भारत की निरीह बेकसूर जनता को खून के आंसू रुल्वा रहे हे तो उधर ट्रम्प के आने से सारी दुनिया सहमी हुई हे अगर मुस्लिम कटरपंथ ना होता या हमने उस पर काबू पा लिया होता तो आज हम मोदी और ट्रम्प जैसे छोटी सोच के छोटे नेताओ को नहीं झेल रहे होते आगे भी फ़्रांस और जर्मनी जैसे बहुत ही महत्वपूर्ण देशो में मुस्लिम कट्टरपंथ विरोध के नाम पर दक्षिणपंथियों के नयी खेप उभर रही हे यहाँ भी मुस्लिम कटरपंथ से आम जनता परेशान हे और वहां के मोदियो डोनाल्ड़ो के लिए रास्ता साफ़ हो रहा हे आखिर इस सब क्लेश से इस्लाम और इंसानियत का क्या भला होगा———- ? दोस्त अपने आस पास ही बहुत ध्यान से चेक कर लोग सबसे अच्छे और सच्चे मुस्लिम उदारवादी मुस्लिम ही होंगे जो क्लेश नहीं करते . क्लेश को टालते हे कट्टरपन्ति जिनसे शायद तुम थोड़े बहुत इम्प्रेस हुआ होंगे वो हर जगह लोगो को परेशान ही करते मिलेंगे ध्यान से गहराई से सवेंदना से देखोगे तो ये सच तुम्हे नज़र आ जायेगा !

सबसे महत्वपूर्ण बात समझ लो की इस विषय पर केवल मुल्ला धर्मगुरुओ की ही बात नहीं हे इनके अलावा भी एक और वर्ग तुम्हारा हौसला बढ़ा रहा होगा तुम्हे अपने हुलिए के लिए अड़ने के लिए तुम्हारी जयकार कर रहा होगा ”सिख भी तो ” ”मास्टर जी भी तो तिलक ” ”मुसलमानो पे जुल्म ” आदि बड़ बड़ा रहा होगा. ये लोग ही बहुत बड़ी समस्या हे ये वो लोग होते हे जो बिलकुल सामान्य लोगो की तरह जीवन में लगे होते हे इस्लाम से इनका कोई खास लेना देना नहीं होता हे ये किसी आम गेर मुस्लिम की तरह ही जीवन में आगे बढ़ने के लिए झूझ रहे होते हे उसके लिए सही गलत सब कुछ करते हे तुम्हारे लिए उछलकूद कर रहे एक क्लीन शेव सपोटर को मेने देखा इन साहब पर मेने दूसरे लोग ( ये भी दाढ़ी के मुद्दे पर तुम्हारे साथ ही होंगे ) दुआरा चंदा खाने का आरोप सूना हुआ हे कितनी सच्चाई अल्लाह जाने कहने का आशय हे की एक बहुत बड़ा वर्ग मुसलमानो में ऐसा भी हे जिसका इस्लाम और उसके उसूलो और आदर्शो से कसम खाने को भी रिश्ता नहीं होता हे मगर अगर कोई मुद्दा होगा तो ये लोग कटरपन्तियो के पक्ष में ही मुँहजोरी करते दिखाई देंगे सिर्फ मुँहजोरी और कुछ नहीं क्योकि इनकी सोच ये होती हे की दुनियादारी में तो हम लगे हुए हे ही और उसमे लगे हुए इनमे ईमानदारी सिर्फ उतनी ही बचती हे कोई उसूल कोई आदर्श कोई महानता सिर्फ इतनी ही बचती हे जितना की आज के हालात में किसी भी गेर मुस्लिम में .मगर इस्लाम के नाम पर ये वर्ग हमेशा फ़ौरन कट्टरपंथ के साथ ताल मिला देता हे और सोचता हे की चलो सस्ते में सवाब भी पा लिया फिर ये नार्मल दुनियादारी में लग जाता हे!

जहां ये किसी इस्लामी या कैसे भी उसूल आदर्श का पालन नहीं करता हे कल को प्रिंसिपल जैन साहब के साथ क्लेश में फ़र्ज़ करो तुम्हारी पढाई लिखाई बर्बाद हो गयी तो याद रखो ये दीन धर्म के ठेकेदार ये नेता ये क्लीन शेव तुम्हारे मुँहजोर सपोटर कोई तुम्हारे लिए कुछ नहीं करने वाला डॉक्टर ना बन सके सस्ते मज़दूर बन गए तो ये सब तुम्हारे से फायदा ही उठाएंगे तुम्हारे लिए कोई कुछ नहीं करेगा. मेने ऐसे ही अपने एक क्लीनशेव डॉक्टर कजिन के बारे में दर्शाया हे की वो क्यों जाकिर नायको को जबानी सपोर्ट देता हे ( सिकंदर हयात September 27, 2016अभी में वेस्ट यु पि गया हुआ था वहां एक जगह मेरा कज़िन डॉक्टर हे मुस्लिम बहुल सम्पन्न इलाका , वेस्ट यु पि की मुस्लिम आबादी का साफ़ तब्लिगीकरण हो चुका हे ( एक जाट केंद्रीय मंत्री के पिता के शब्दो में पहले तो यहाँ का मुस्लिम हमारे जैसा था अब हमसे बिलकुल अलग हो चूका हे जो भी हुआ उसका भारी फायदा लोकसभा चुनावो में भाजपा को मिला अब वही कहानी विधान सभा चुनावो में दोहराने की कोशिश जारी हे ) खेर मेरा कज़िन पढ़ा लिखा डॉक्टर , पुश्तेनी इलाका , खानदानी सय्यद यानी इलाके पर उसका खासा प्रभाव लेकिन रवैया वही अलीगढ़ जामिया या कही के भी पढ़े लिखे कल्चर्ड मुस्लिम वाला की – पैसा अच्छा खासा , खुद मॉडर्न , बच्चे पब्लिक स्कूल में , बीविया बुर्के परदे हिज़ाब से बहुत दूर , गेर मुस्लिमो से भी बेहद अच्छे रिश्ते , मगर वो कठमुल्लाशाही को ना कोई समस्या मानता हे ना उसके खिलाफ चु भी करता हे इलाके में चारो तरफ बच्चे ही बच्चे ( कठमूल्लशाही का परिवार नियोजन विरोध ) मेने मेरे कज़िन को उसी के अवचेतन मन के बारे में ये समझाया की ” तुम कठमुल्लाशाही तब्लिगीकरण के खिलाफ कुछ नहीं बोलोगे क्योकि इसी में तुम्हारा फायदा हे कठमूल्लशाही मतलब इलाके में कोई और डॉक्टर होने के चांस कम नतीजा तुम्हारे लिए कम्पीटिशन नहीं फिर इसी से अधिक बच्चे तो तुम्हारे लिए अधिक मरीज फिर अधिक आबादी यानी तुम्हारी जमीनों के दाम अधिक , फिर अधिक आबादी यानी सस्ती लेबर , पूंजी तुम्हारे पास हे ही और बस सस्ती लेबर मिल जाए तो तुम लोकल अम्बानी , यानी दुनिया में मज़े ही मज़े फिर कठमुल्लाशाही का बचाव कर करके सोचते हो की जन्नत में सीट रिजर्व और दुनिया में भी हमारी खुशाली को किसी की नज़र ना लगे यानी ये हे तुम्हारी टोटल साइकि ) में समझता हु की तुम्हारे जैसे नौजवानों को सबसे अधिक बरगलाता और कन्फ्यूज़ यही खास वर्ग करता हे तो दोस्त इनसे सावधान . तो बड़वानी के होम्योपैथिक कॉलेज के दोस्त हम तो तुमसे यही अपील करते हे की दोस्त इस्लाम के नाम पर किसी क्लेश में ना पड़ो पढ़ो लिखो नमाज़ रोजा करो अच्छे डॉक्टर बनो इस्लामी आदर्शो आदेशो के अनुसार ब्याज लूट और शोषण से भी दूर रहो और जैसा की खुदा के लिए फिल्म में मौलवी बने नसीर बताते हे की जब सही समय आएगा तो दाढ़ी भी रख लेना .