अलास्का में रौशनी नही होती थी , ज़मीन रोजाना रौशनी की खैरात लेने के लिए घर से निकलती थी लेकिन जब अलास्का का कटोरा आगे बढ़ता तो रौशनी की देग ख़त्म हो जाती थी इसलिए अलास्का के लोगो ने अंधरे को अपना मुक़द्दर मान लिया, लेकिन फिर एक दिन कौवे को उन पर तरस आगया और उनसे कहने लगा में तुम्हारे लिए थोड़ी सी रौशनी का बंदोबस्त करता हु लोगो के आँखो में ख़ुशी के आंसू आ गए, कौवा रौशनी की तलाश में निकल खड़ा हुआ और तलाश करता हुआ यहाँ तक के इस्कीमो सरदार की झोपडी तक पहुँच गया. रौशनी झोंपड़ी से बहार निकल रही थी, कौवे ने अपनी खाल उतार कर पेड़ पे लटकाई ,जिस्म को मिटटी बनाया, ये मिटटी धूल बनाऔर ये धूल सरदार के छोटे बेटे के कान पे लग गयी, मिटटी ने बच्चे के कान में सरगोशी की ” बाप से खेलने के लिए रौशनी मांगो ” बच्चे ने रोते रोते बाप से खेलने के लिए रौशनी मांगी बाप ने बक्से से थोड़ी से रौशनी निकाल कर उसका गोल बनाया और गोले को धागे से बाँधा और बच्चे को खेलने को देदी, अब मिटटी ने बच्चे के कान में कहा के रौशनी के गोले को बाहर लेकर चलो , बच्चा गोला बहार लेकर आया, मिटटी ने अंगड़ाई ली वह कौवा बना और पेड़ से खाल उतार कर पहना और बच्चे के हाथ से रौशनी का गोला छिना और अलास्का की तरफ उड़ गया ! कौवे की मेहरबानी से अलास्का के लोगो को रौशनी मिल गयी! इसलिए वह दिन है और आज का दिन है अलास्का में कौवे को छेड़ना, कौवे को भला बुरा कहना और कौवे को मारना सब से बड़ा पाप समझ जाता है !

हमें भी रौशनी चाहिए , हम भी अँधेरे में ठोकरे खा रहे है और हमारा कश्कोल भी खाली है लेकिन हमारे मुक़द्दर के किसी कौवे को हम पर तरस नहीं आ रहा है , हमारे कौवे हम से भी ज्यादा बेईमान है.हमारे सारे वर्ष , हमारे अतीत के सारे साल बर्बाद हो रहे है और आज का दिन भी खराब चला गया, हमें आज भी रौशनी की खैरात नहीं मिली लेकिन क्या कल अपना ठीक होगा?क्या कलतक भी यही इंतज़ार, यही टोकडे,और रौशनी के लिए रोना हमारा मुक़द्दर होगा ? हमारे कौवो को हम पर कब रहम आएगा?

स्वर्ग और नरक में बस कर्मो का फ़र्क़ है !

एक गुनाहगार ( पापी ) ने अल्लाह से स्वर्ग और नरक देखने की फरमाइश की, अल्लाह ने उसे फरिश्तो के हवाले कर दिया, फ़रिश्ते उसे नरक में ले गए , नरक में एक बहुत बड़ा डाइनिंग हॉल था जिसमे शानदार कुर्सियाँ लगी थी और इन कुर्सियों पे कमजोर झुके लोग बैठे थे उनलोगों के सामने सुप के बड़े बड़े प्याले थे और उनके हाथो में लंबे लंबे चमचे थे , पापी ने देखा के उनलोगों की कुहनियाँ नहीं थी इसलिए वह अपने बाजू को मोड़ नहीं सकते थे इसलिए ये लोग प्याले से चम्मच भरते है और मुंह तक लाने की कोशिश करते है लेकिन सुप होंटो तक आने से पहले इधर उधर गिर जाता है और सदियो से सुप पिने की कोशिश कर रहे है लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल रही है ! उसके बाद फ़रिश्ते उसे स्वर्ग ले गए यहाँ भी एक डाइनिंग हॉल था उसमे भी लोग बैठे हुए है उनसब के सामने भी सुप के प्याले रखे हुए है लेकिन ये लोग स्वस्थ ,खूबसूरत और मुत्मइन है और एक दूसरे के साथ हंस खेल रहे थे ! गुनाहगार ने फ़रिश्ते से स्वर्ग और नरक का फ़र्क़ पूछा तो फ़रिश्ते ने बताया इनके हाथ में भी कुहनियाँ नहीं है लेकिन उन्हों ने इसका बड़ा दिलचस्प हल निकाल लिया है ये प्याले से चम्मच भरते है और चम्मच अपने पडोसी के मुंह में दाल देते है और पडोसी उनके मुंह में इसतरह दोनों की भूख मिट जाती है !

वह गुनाहगार वापस आया और दुनिया वालो को बताया के स्वर्ग और नरक में सिर्फ अम्ल ( कर्म ) का फ़र्क़ होता है नरक के लोग अपना चम्मच अपने मुंह में डालने की कोशिश करते है जबके स्वर्ग के लोग अपने प्याले से चम्मच भरते है और दूसरे के मुंह में डाल देते है ! मेने गुनाहगार की बात सुनी तो मुझे उस वक़्त मालुम हुआ के जिसे हम आसमानो में तलाश करते है वह जन्नत जिंदगी भर हमारी डाइनिंग टेबल पर पड़ी रहती है हमें बस एक चमचा भरना है और अपने पडोसी के मुंह में डालना है और अल्लाह का क़ुर्ब हासिल कर लेना है , बस इतिनी सी बात है लेकिन हम इतनी सी बात के लिए उम्र भर मारे मारे फिरते है ! हम कितने बेवक़ूफ़ है !