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by — सिकंदर हयात

भारत में तीस साल के बाद पहली बार किसी पार्टी या व्यक्ति को बहुमत मिला था मोदी जी की पास बहुत अच्छा मौक़ा था वो बहुत कुछ बहुत अच्छा कर सकते थे मगर कर ही नहीं पाए . एकछत्र राज़ अब तक उनकी तीन सबसे बड़ी” उपलब्धियां ” हरियाणा हिंसा नॉट बंदी में अराजकता और कश्मीर पाकिस्तान और सीमा पर के मोर्चे पर असफलताएं ही इस तरह जीवन में हम ऐसे बहुत लोगो को देखते हे जो ऐसे मुकाम पर होते हे की बहुत अच्छा काम चाहे तो कर सकते हे मगर करते नहीं हे मोदी जी भी नहीं कर पाए . आइये हम मोदी जी की साइकी यानी मन मस्तिष्क मानसिकता मन की बुनावट उनके मन में क्या चल रहा हे इसको समझने की एक कोशिश करे इसलिए भी करे की हम खुद इस साइकी से बच सके . सबसे बड़ी समस्या ये हुई की चुनाव जीतने के बाद से ही मोदी जी कुछ अच्छा कुछ ऐतिहासिक कुछ अलग करने की जगह अगले चुनाव को जीतने की जोड़तोड़ में जुट गए . उनके कट्टर से कट्टर विरोधी को भी ये आशा थी की चुनाव जीतने के बाद एक पहले से उदार और अलग मोदी तो दिखाई देगा ही मगर ऐसा हुआ नहीं मोदी जी चुनाव जीतते ही अगले चुनाव की तैयारी में जुट गए वो हर हाल में अगला चुनाव जीतना चाहते हे बल्कि अब तो ऐसा आभास होने लगा हे की वो ताउम्र खुद को सत्ता में रखना चाहते हे ऐसी हवस तानशाहों में होती हे और मोदी जी भले ही लोकतान्त्रिक तरीको से चुनाव जीते हो मगर उनका कामकाज का तरीका तानाशाहों वाला ही हे इसी बानगी पूरी दुनिया ने देखि जब उन्होंने नोटबंदी को ऐसे तानाशाही के तरीको से लागू किया किया और भारत के इतिहास में पहली बार एक अरब लोग एक साथ संकट दुःख और तनाव में घिर गए सवाल ये हे की मोदी जी क्यों ताउम्र सत्ता में बने रहने को इस कदर दीवाने हे क्यों वो हर समय चुनावी मोड़ में दिखाई पड़ते हे तो इस विषय पर एक उदहारण देखते हे की भारत के शायद सबसे अच्छे संस्मरण लेखक स्वर्गीय रविन्द्र कालिया अपनी बेहतरीन किताब ” ग़ालिब छुटी शराब ” में अपने ससुर के बारे में बताते हे की ससुर जी आकाशवाणी में बहुत बड़े अफसर रहे सारा जीवन आराम से बिता कालिया जी उनके बारे में लिखते हे की जीवन भर ना उन्होंने किसी को आश्रय दिया ना ही किसी से लिया . कुछ भी वो अपनी बीवी के साथ खुश रहते थे कालिया लिखते हे की दोनों गुड्डे गुड़िये की तरह हमेशा साथ दीखते घूमते थे किसी तीसरे की उन्हें जरुरत नहीं थी अब हुआ हुआ ये की कालिया जी की सास का जब निधन हो गया था तो उसके बाद एक दो साल बाद ससुर जी की भी डेथ हो गयी इस दौरान वो अकेले ही रहे कालिया लिखते हे की उनके पड़ोसियों ने बताया की अकेलेपन से दुखी होकर रात को बच्चो की तरह रोया करते थे इससे लगता हे की ससुर जी ने विकास तो बहुत किया मगर उनका कोई आत्मीय नहीं था सिर्फ उनकी पत्नी थी जिनके दुनिया से जाने के बाद भी उनके पास सुविधाय आराम सब कुछ तो था उन्हें सुख देने वाला उन्हें भावनात्मक उष्मा देने वाला कोई भी नहीं था कोई भी नहीं . नतीजा शायद वो बेहद तन्हा हो गया और शायद फुट फुट कर रोते हुए दुनिया से चले गए अब इस केस में हम पत्नी जी की जगह सत्ता को रख दे तो क्या मोदी जी की भी साइकी कालिया जी के ससुर की तरह नहीं लगती हे —— ? वो हर हाल में बीवी ( सत्ता ) के साथ रहना चाहते हे इसके साथ वो बहुत खुश हे बहुत फिट हे उनकी सेहत का राज़ योग और उनके खानपान को बताया जाता हे मगर हमें लगता हे की उनकी सेहत का राज़ उनका पिछले लगभग पचीस साल से लगातार केंद्र और गुजरात जैसे भारत के सबसे अमीर राज्य की सत्ताओ में बने रहना हे देखा गया हे की लोग सत्तो में बेहद फिट रहते ही हे .

मोदी जी की साइकी के इतिहास को समझे तो लगता यही हे की किशोरवास्था में ही वो भांप गए थे की भारत में एक बड़े और निम्नमध्यमवर्गीय परिवार के साथ रहते हुए आगे की तरफ बढ़ना लगभग नामुमकिन हे वो घर छोड़ कर चले गए आज भले ही वो इस अपना त्याग बताये लेकिन ये कोई गौतम बुद्ध की तरह राजपाट सारे सुख छोड़कर जाना नहीं था ये तो परिवार से जुड़े दुःख चिंताए तनाव असुरक्षा से किया गया पलायन था ना ही ये कोई बेहद कुलीन और अमीर नेहरू जी का गाँधी प्रभाव में आकर सारे सुख छोड़ कर दस साल जेल काटने जैसी कोई बात ही थी मोदी जी का घर छोड़कर जाना कोई त्याग नहीं था महत्वाकांशाओ की उड़ान थी उसके बाद लगभग पूरी जवानी उन्होंने सत्ता की तरफ दौड़ में लगा दी जवानी बीत जाने के बाद से ही वो लगातार ”पत्नी ” यानी सत्ता ( गुजरात और केंद्र ) के साथ हे कालिया जी के ससुर की तरह वह भी ”पत्नी के साथ ” बेहद खुश हे बेहद फिट हे किसी तीसरे की उन्हें जरुरत नहीं होती हे और कोई हे भी नहीं जिस तरह से मोदी जी आगे बढे हे उस रस्ते पर चलकर आपका कोई अपना होगा भी नहीं , आज भले ही वो खुद को ”श्रवण कुमार ” की तरह पेश करे मगर इसी परिवार को समस्याओ के बीच वो छोड़ कर चले गए थे इंसान की भावनाये रिश्ते हमेशा सींचे जाते हे पोधो की तरह इन्हें बड़ा किया जाता हे देखभाल से इनकी जड़ें गहरी होती हे इनका कोई ओन ऑफ बटन नहीं होता हे अपनी मर्जी से या सिर्फ हालात बदलने से ही इनमे सच्ची गर्माहट नहीं आ सकती हे परिवार से अलग बात करे तो इस दुनिया में कोई मोदी जी का गहरा दोस्त नहीं हे क्योकि दोस्ती भी सेम उसी तरह गहराती हे जैसे ऊपर बताया गया इसके आलावा गुरुओ संरक्षकों की बात करे तो मोदी जी केशुभाई पटेल से लेकर आडवाणी जी तक तो वो किस निष्ठुरता से और खासकर आडवाणी जी के अहसानो को भूलते हुए आगे बढे हे दुनिया जानती ही हे तो कुल मिलकर मोदी जी इस दुनिया में अकेले हे उनके साथ कोई हे तो सिर्फ वो हे उनकी पत्नी ” सत्ता ”’ . अब हो ये रहा हे की शायद मोदी जी ये बात जानते हे की अगर उनकी पत्नी उन्हें छोड़ गयी तो उनके हिस्से में भी कालिया जी के ससुर की तरह तन्हाई ही होगी इसलिए वो केवल पांच या दस साल नहीं बल्कि ताउम्र सत्ता को साथ रखना चाहते हे इसके लिए ही वो हर समय चुनावी मोड़ में रहते हे हर समय उनके मन में अगला चुनाव चलता रहता हे हर समय . इसी से ये सब एक से बढ़ कर एक ”खूनी हादसे ” हो रहे हे . कारगिल यद्ध और उसके बाद भी कई हमलो के बाद भी अटल जी इंसानियत पर अड़े रहे हे और उनकी इंसानियत से कश्मीर से लेकर पाकिस्तान तक प्रभावित होकर कश्मीर और बॉर्डर पर ठीक ठाक शांति हुए सीमा के आर पर करोड़ो बेकसूर लोगो को राहत मिली मगर शायद इसी नरमी के कारण कई उग्र वोट भाजपा के हाथो से निकले भी और अटल जी चुनाव हार गए . मोदी जी भी शरू में अटल जी नीति पर चले मगर जैसे ही उनके समझ आया की नरमी से उनके ‘उग्र ” वोट हाथ से निकल जाएंगे वैसे ही उन्होंने फ़ौरन शांति पर्किर्या से हाथ खिंच लिए नतीजा हज़ारो बेकसूर लोग मारे जा रहे हे उधर मोदी जी और उनके मंत्री बार बार सबक सीखने का दावा करते रहते हे हरियाणा हिंसां में खरबो का नुकसान हुआ लोग मारे गए सिर्फ इसलिए की मोदी जी को अपने नए नए जाट वोट बैंक को कायम रखना था . इसके बाद भी बस नहीं हुआ मोदी जी को अचानक सूझ की अगर वो काले धन के खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाही दिखाए तो अगला चनाव जीतने का पुख्ता इंतजाम हो सकता हे उन्होंने रातोरात नोट बंदी लागु कर दी जिसके जटिलताओ को देखते हुए कहा जा सकता हे होने को ये फैसला कल को सही भी हो सकता हे मगर रातोरात ये फैसला बिना की तैयारी के सिर्फ महासनक के आधार पर लागू कर दिया गया क्योकि एक तो मोदी जी का तानाशाही मिजाज दुसरा की इस फैसले को गोपनीय बनाये रखने की चाह ( हलाकि बहुत से लोग कारपोरेट से लेकर भाजपा में इसके लीक होने और फायदे उठाने के आरोप लगाते हे ) इस सबके कारण इतने बड़े फैसले की कोई भी कुछ भी तैयारी नहीं हो सकी यहाँ तक की नए नोट ए टी एम् में एडजस्ट तक न हो सके जाहिर हे की मोदी जी खुद अवतार की तरह पेश करके इस फैसले से रातो रात काले धन को खत्म करना चाहते थे मगर इस महासनक के कारण सैकड़ो मारे जा चुके हे लाखो उजड़ गए करोड़ो दुःख के सागर में डूब गए याद रहे की ये तो वो लोग थे जिनका भ्र्ष्टाचार या लूट से कोई लेना देना नहीं था जिनका था उनमे किसी के मरने की खबर नहीं आयी . ज़ाहिर हे की मोदी जी इस फैसले की गोपनीयता और सफलता ही सबसे प्यारी थी इस फैसले के रास्ते में आकर जो बेगुनाह मारे गए बर्बाद हुए दुखी हुए जिनकी खुशिया ख़त्म हुई मोदी जी को इसकी परवाह नहीं क्योकि उन्हें इंसानो से अधिक अपनी सत्ता और सफलता से प्यार हे .

पाठको तरक्की हर कोई करना चाहता हे हर कोई आगे भी बढ़ना चाहते हे मगर उसके लिए इस मोदी साइकि से दूर ही रहना चाहिए कुल मिलाकर मोदी साइकी ये हे की एक तो उनकी मह्त्वकांशाओ का कोई और छोर नहीं हे आगे उनकी सोच हे की जिन्हें ऊपर की तरफ चढ़ाई करनी होती हे वो कोई भी फालतू सामान ( रिश्ते नाते दोस्ती प्यार लोग उनकी फ़िक्र उनकी चिंताए जिम्मेदारी और जिम्मेदारी से जुड़े तनाव ) नहीं लादते हे इसलिए मोदी जी कभी किसी आत्मीय रिश्ते से बंधे ही नहीं . सिर्फ ऊपर की तरफ चढ़ते आये हे इस रास्ते पर चलकर और साथ साथ अपनी मेहनत क़ाबलियत और चतुराई से मोदी जी को बेहद कामयाबी भी मिल गयी हे मगर वो अंदर से बेहद असुरक्षित भी हे और अकेले भी हे वैसे इस अकेलेपन से उन्हें कोई भी गम भी नहीं हे क्योकि सत्ता में एक ”भीड़” हमेशा साथ रहती हे मगर शायद उन्हें पता हे की कल को पत्नी (सत्ता ) साथ छोड़ देंगी तो उनका कोई नहीं हे कोई भी नहीं . मोदी जी भले ही इस साइकी के सहारे सत्ता के शीर्ष तक पहुँच गए हो और अब उनकी तमन्ना ताउम्र इस शीर्ष पर रहने की हे उनका तो जो होगा सो होगा मगर दूसरे लोगो को यह राह नहीं अपनानी चाहिए यह राह रास नहीं आएगी इसका अंजाम अंत में कालिया जी के ससुर साहब की तरह ही होगा शर्तिया . कोई शक नहीं की इस राह पे कामयाबी मिलेगी आराम की जिंदगी मिलेगी चाहते महत्वकांक्षाए भी पूरी होंगी मगर उस कामयाबी को बाटने वाला खुशियो को डबल करने वाला कोई नहीं होगा . लोगो को यही सलाह हे की वो मोदी साइकि को समझे और इससे दूर ही रहे . हर हाल में इंसानो को ही सबसे पहले रखे रिश्तो को दोस्ती प्यार वफ़ादारी आत्मीयता को ही सबसे सबसे ऊपर रखे किसी सत्ता उपलब्धि या वस्तु को इनसे ऊपर ना रखे कभी भी नहीं .