सिकंदर हयात

ध्यानचंद से पहले ही धोनी का बायोपिक भी, हिट भी ” यानी आगे भी खेलो में कोई उमीद नहीं !

Category: खेल, सिकंदर हयात 620 views 2

dhyan_dhoni

हॉकी के सबसे बड़े खिलाडी ध्यांचंद से पहले सचिन को भारत रत्न देने की बेहूदगी तो कोंग्रेस सरकार ने की ही थी अब फिर से उनका अपमान हो रहा हे .कई ओलम्पिक गोल्ड दिलवाने वाले ध्यानचंद की जिस तरह उपेक्षा हो रही हे उससे साफ हे की आने वाले समय में भारत के लिए खेलो में कोई उमीद नहीं हे वरिष्ठ फिल्म लेखक जयप्रकाश चोकसे बताते हे की मुम्बई की आरती और पूजा शेट्टी बहनो ने काफी खर्चा करके ध्यानचंद पर फिल्म के लिए पटकथा लिखवाई हुई हे मगर सालो से उनकी बायोपिक पर फिल्म का काम शुरू नहीं हो पाया हे क्योकि कोई भी सितारा ध्यानचंद बनने को इसलिए राजी नहीं हे क्योकि परदे पर ही सही मगर हॉकी जैसे ताकत के खिलाडी वो भी ध्यानचंद दिखने में दांतो से पसीना आ जाएगा ये जानते हुए भी की ऐसी फिल्म उनको अनेक देशी विदेशी अवार्ड भी दिलवा सकती हे तब भी नहीं , क्योकि कोई भी सितारा ध्यानचंद बनने दिखने के लिए की जाने वाली कड़ी मेहनत करने को राजी नहीं हे इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता हे की भारत के लोगो ( ऊँचे भी ) में दमखम की कितनी कमी हे आगे भी भला कैसे मैडल आएंगे — ? ये वही सितारे हे जो रोज दावा करते मिलते हे की फला फिल्म के लिए इतना वजन बढ़ाया या घटाया या ऐसी तैयारी की वैसी तैयारी की . अब यही लोग ध्यानचंद वो भी सिर्फ परदे पर भी बनने को तैयार नहीं हे क्योकि हॉकी जैसा दमखम का खेल सिर्फ परदे पर ही खेलने के लिए भी जो तैयारी चाहिए उसके लिए भी इनमे हिम्मत नहीं हे जबकि उधर देखिये की जिस क्रिकेट जैसे फालतू खेल की फ़र्ज़ी उपलब्धियों पर हमसे ज़बरदस्ती गर्व करवाया जाता हे उसके ही एक खिलाडी धोनी पर ही कितने आराम से बायोपिक बन भी गया यही नहीं वो काफी हिट भी हो गया यानी इस खेल का खिलाडी बनना ( परदे पर ) इतना आसान हे वही ध्यानचंद बनने से कितने ही नौजवान सितारे साफ़ इनकार कर चुके हे क्योकि कोई परदे पर भी हॉकी या फुटबॉल का खिलाडी दिखने के लिए भी होने वाली मेहनत पसीने और चोटो को तैयार नहीं हे ले देकर आमिर खान से ही कुछ उमीद की जा सकती हे मगर एक अकेला भला क्या क्या कर सकता हे हाल ही में वो अपनी कुछ जान तक जोखिम में डाल कर 25 25 किलो वेट बढ़ घटाकर दंगल फिल्म के लिए पहलवान महावीर सिंह की जवानी और अधेड़ावस्था फिल्मा चुके हे .

धोनी पर बनी बायोपिक का हिट होना भी दुखी करने वाली बात हे धोनी एक अच्छे खिलाडी हे मगर कोई ऐसे महानतम भी नहीं हे की जिन पर पिक्चर बनाई जाती मगर क्रिकेट फिल्म और धर्म क्योकि भारतीय जनता की अफीम हे सो एक क्रिकेट खिलाडी धोनी पर उनके के रिटायर होने से भी पहले ही उन पर फिल्म तक बन कर तैयार हो गयी जबकि धोनी की खेल में सारी की सारी उपलब्धिया भी उस दौर की हे जब ये खेल ही सारा भारत बेस्ड हो चुका हे ऐसे में धोनी की उपलब्धियां कितनी असली हे कितनी फ़र्ज़ी हे कुछ कहा नहीं जा सकता हे भारत की 2007 वर्ल्ड कप हार के बाद जब क्रिकेट को भारी घाटा हो रहा था भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता हल्की से उतार पर थी तभी पहला टी २० आता हे जिसमे भारत की जीत के बाद क्रिकेट का ये नया फॉर्मेट सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन जाता हे आई पि एल आता हे उसमे क्या क्या गड़बड़िया होती हे कैसे धोनी की टीम चेन्नई के मालिक श्रीनिवासन बी सी सी आई के अध्यक्ष भी होते हे कैसे फिर धोनी का एकछत्र राज़ हो ता हे आई पि एल में सट्टेबाज़िया होती हे खिलाड़ियों का नाम आता हे दबाया जाता हे सब जानते हे धोनी ने जो क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 जिताया उसके फाइनल से पहले एक पत्रकार साफ़ लिखते हे की भारत की जीत तो ”तय” हे फाइनल में श्रीलंका के खिलाड़ियों की बॉडी लेंग्वेज कही से भी वर्ल्ड कप फाइनल वाली नहीं थी वेस्टइंडीज जैसी टीम का तो पिछले सालो में ये हाल हुआ की उसके खिलाडी टीम से ज़्यादा बहुत ज़्यादा भारत और आई पि एल को महत्व देने लगे क्रिकेट में पूरी तरह ही ये हाल हे की ऑस्ट्रेलिया को छोड़ कर लगभग सभी देश सिर्फ भारत के साथ और भारत में खेल को उत्सुक रहते हे हार पर भी खुश होते हे पुराने खिलाडी बी सी सी आई से पैसा लेते हे और बदले में बी सी सी आई के फर्ज़ीवाड़े के खिलाफ कुछ नहीं बोलते हे भारत को छोड़ कर सभी देशो में मैदान खाली रहने लगे हे!

क्रिकेट अब सिर्फ भारत के दम पर ज़िंदा हे अब इस खेल के सभी नियम कायदे सब कुछ भारत के हिसाब से ही बनते हे यानी इन्ही सब हालातो के बीच में ही धोनी ने अपनी कामयाबियां हासिल की ? जिन्हें कोई भी सच्चा खेल प्रेमी कभी कोई खास महत्व दे ही नहीं सकता हे जो ध्यानचंद की उपलब्धियों के सामने कुछ भी महत्व नहीं रखती हे मगर उसी ध्यांचंद का पिछले सालो में लगातार दूसरी बार अपमान हुआ हे जब उनसे पहले ही धोनी की बायोपिक फिल्म भी आ चुकी हे और हिट भी हो चुकी हे साफ़ हे की तमाम लफ्फाजियों दावो के बाद भी आने वाले समय में भी भारत के लिए खेलो में कोई उमीद नहीं दिखाई देती हे देश में भयंकर गेर बराबरी आम आदमी को जहा रोजी रोटी से ही फुर्सत नहीं हे वही ऊँचा अमीर सम्पन्न वर्ग यहाँ इतना अधिक आराम उठा रहा हे की वो बिलकुल पिलपिला और गिलगिला हो चुका हे उच्च वर्ग यही पिलपिला और गिलगिलापन फिल्म सितारों ने दर्शाया जब उन्होंने ध्यानचंद पर बनने वाली फिल्म से साफ़ पीठ दिखा दी . जिस देश में ध्यानचंद जैसे महान खिलाडी का अपमान और सचिन जेसो को भारत रत्न और धोनी जेसो पर फिल्म बनती हो वो भला खाक खेलो में कुछ कर सकता हे आगे भी खेलो में भारत के लिए कोई भी उमीद नहीं हे!
( (सिकंदर हयात से इस नंबर पे 9911631954 संपर्क कर सकते है !)

Related Articles

2 thoughts on “ध्यानचंद से पहले ही धोनी का बायोपिक भी, हिट भी ” यानी आगे भी खेलो में कोई उमीद नहीं !

  1. qutubuddin ansari

    में आप से सहमत हु के इस देश ने असली हीरो खेल में ध्यान चाँद को वह मुक़ाम नहीं दे पाया जिसका वह हक़दार था ! नकली हीरो सचिन तेंदुलकर, धोनी को हीरो बना कर पेश किया गया जबके ये हीरो बज्रवाड़ की पैदवार है ! आप ने सही सवाल उठाया है सिकंदर हयात जी . धन्यवाद

    Reply
  2. सिकंदर हयात

    बहुत ही बुरा हाल हो रहा हे अंसारी जी भारत का , चारो तरफ इतनी गेर बराबरी हे की कुछ भी अच्छा हो नहीं रहा हे ना हो सकता हे ना यहाँ कोई अछि फिल्म या सीरियल बन रहा हे न अछि किताबे हे ना लेख सुधीर चौधरी चेतनभगत अर्णव जैसे लोगो का बोलबाला हे खेल में हम अपनी एक विधानसभा से भी छोटे देश भी पीछे हे गुजराती पूंजी के धौंस से एक बेहद मामूली इंसान पि एम् बन जाता हे इतनी बड़ी फ़िल्मी दुनिया में किसी में दम नहीं हे की वो अपने देश के सबसे बड़े खिलाडी ध्यानचंद का रोल कर सके . आराम की जिंदगी इन्हें बिलकुल पिलपिला और गिलगिला घिनोना बना दिया हे चारो तरफ ऐसे ही लोग दिखेंगे

    Reply

Add Comment