irrfan-khan-and-salman-khan

भारतीय उपमहादीप में दुनिया की सबसे अधिक आबादी और दुनिया की सबसे बेहतरीन जमीन हे कुदरत ने अपने सारे खजाने इस इलाके को भर भर के दिए हे दुनिया की ऐसी कोई नेमत नहीं हे जो यहाँ मौजूद ना हो सब कुछ हे यहाँ फिर भी इस इलाके में दुनिया की सबसे अधिक गरीब और शोषित आबादी हे लगभग सौ करोड़ लोग यहाँ गरीबी मुफलिसी शोषण अपमान में जीते हे इंसानो और इंसानियत की जैसी दुर्गत भारतीय उपमहादीप में देखने को मिलती हे वो किसी अफ़्रीकी देश में भी नहीं दिखती हे उनका ये हाल इसलिए हे की लोग एकजुट नहीं हे और लोगो को बाटने वाले उन्हें हक़ और इन्साफ के लिए एक ना होने देने वाला सबसे बड़ा कारण हे हिन्दू मुस्लिम कट्टरपंथ कट्टरपंथी और कट्टरपंथ . पिछले सालो में इन कटटरपन्तियो की हेल्थ और वेल्थ और भी तूफानी रफ़्तार से बढ़ी ही हे भारत में तो इनकी भारी बहुमत से सरकार तक बन गयी हे पाकिस्तान बांग्लादेश आदि तो हे ही इनके जूते के नीचे . यहाँ लोग इनसे ( कटटरपन्तियो ) डरते हे आम आदमी को रोजी रोटी से फुरसत नहीं हे तो खास आदमी सोचता हे की में भला इस सरदर्दी में क्यों पडू में क्यों पंगे लू और कटटरपन्तियो के ”मधुमक्खी के छत्ते ” को छेडने का जोखिम लू जाने इसका क्या नतीजा हो — ? ऐसे में तारीफ करनी होगी सलमान खान और इरफ़ान खान जो अपने कैरियर और खुशहाली के पीक पर होते हुए भी एक ने मुस्लिम कटटरपन्तियो तो दूसरे ने हिन्दू कटटरपन्तियो के आँखों में आँखे डाल कर ना केवल अपनी बात रखी बल्कि बल्कि बाद में भी धर्मविरोधी देशविरोधी गद्दार आदि तानो तिश्नों के बाद भी पीछे हटने से साफ़ इनकार कर दिया इसलिए हम तो यही कहेंगे बहुत अच्छे सलमान इरफ़ान ऐसे ही आगे बढ़ो , धर्म देश इंसानियत तीनो का भला ही होगा!

बात करे इरफ़ान खान की तो उन्हें बकरीद की कुर्बानी पर अपनी असहमति जताई . बात ये नहीं हे की में या कोई भी उनसे सहमत हे या नहीं में खुद उनसे सहमत नहीं हु धार्मिक मान्यताओ से इतर भी बात करे तो क्योकि में समझता हु की कुर्बानी के माध्यम से एक तो गरीब पशुपालको का बहुत फायदा होता हे उन्हें सामान्य से दुगने दाम अपने पशुओ के मिलते हे फिर दूसरे – दूसरा की गरीबो को ”प्रोटीन ” खाने को मिल जाता हे लेकिन वो सब अलग बात हे तारीफ हम इरफ़ान खान की इसलिए करते हे की उन्होंने अपने ब्यान पर अडिग रहने की हिम्मत दिखाई जैसा की उपमहादीप का चलन ही हे की धार्मिक मान्यताओ या धर्म से जुडी किसी बात पर किसी के ऐतराज़ या असहमति जताने पर ना तो धर्म को ना ही आम आदमी को कोई फर्क ही पड़ता हे कुछ नहीं . फर्क तो पड़ता हे पेट में मरोड़ तो उठती हे उन धर्म के व्यापारियों और ठेकेदारो को जिन्हें इस आज़ाद सोच और नए विचारो से , देरसवेर अपने हित खतरे में नज़र आने लगते हे यही लोग आम आदमी को कान में चीख चीख कर बताते हे की तुम्हारा धर्म अक़ीदा ( या देश या कुछ भी ) खतरे में हे जिससे उत्तेजित वो कोई काण्ड कर बैठता हे और फिर अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेता हे इसी खतरे के कारण उमीद तो यही थी की इरफ़ान अगले ही दिन अपने बयान को वापस लेने की या माफ़ी मांगने की या मेरे ब्यान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया की ही बात करेंगे सभी को यही उमीद थी पर तारीफ करनी होगी इरफ़ान खान की की उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा और साफ़ कर दिया की भारत कोई धर्म राज्य नहीं हे और वो किसी धर्माधिकारी या धर्म के ठेकेदार से नहीं डरते . यही यही तो चाहिए हमें खास लोगो से की वो धर्म समाज के ठेकेदारो के खिलाफ डट कर खड़े तो हो इंशाअल्लाह फिर जो भी होगा अच्छा ही होगा इरफ़ान के ब्यान से ये तो अच्छा हो ही सकता हे की लोग विचार तो करे की धर्माधिकारी लोगो पर अधिक से अधिक से अधिक कुरबानी करने का दबाव बना रहे ही हे ज़ाहिर हे की पर्यावरण से जुड़े क्या मुद्दे हे वो कभी नहीं सोचेंगे दूसरा की अगर अधिक से अधिक क़ुरबानी होगी तो क्या गरम इलाको में गरम मौसम में खाद्य वस्तु ( खाने की चीज़ ) की बर्बादी तो नहीं होगी — ? कुछ लोग महंगे महंगे बकरो से झूठी शान तो नहीं दिखाते हे आदि — ? ज़ाहिर हे की वो तो किसी मुद्दे पर कुछ भी नहीं सोचने वाले हे सोच विचार विमर्श की दुनिया में तो आम आदमी को ही लाना ही होगा बात यही हे की लोग आज़ादी से सोच विचार तो करे बात तो करे बहस तो करे बात करने पर किसी को” डंडा ” तो ना दिखाया जाए या फिर उस ” डंडे ” को तोड़ा कैसे जाए विचार तो हो इरफ़ान ने यही तो किया हे भले ही में भी उनसे सहमत ना हु मगर बिना डरे विचार रखने के लिए इरफ़ान बहुत खूब .

बात करे सलमान की तो उन्होंने तो कमाल ही कर दिया मुम्बई में रहते हुए भी उन्होंने पाकिस्तानी कलाकारों के मुद्दे पर शिवसेना और एम् एन एस से साफ़ और अलग स्टेण्ड लिया उसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम होगी जिस राज ठाकरे के सामने कुछ साल पहले ” महानायक ” थर थर से थे और चुपचाप अपनी बीवी के खिलाफ ” गुड्डी बुड्ढी हो गयी पर अक्ल नहीं आयी ” जैसे ब्यान सुन लिए पर कुछ अलग बोलने की हिम्मत नहीं दिखाई थी उसी राज़ ठाकरे के सामने उन्होंने ना केवल ब्यान ही दिया बल्कि बाद में भी उस पर अडिग ही रहे कोई सफाई नहीं कोई देशभक्ति का सर्टिफिकेट नहीं पेश किया कोई डर नहीं दिखाया उनका साफ़ कहना था की जो कोई भी वीसा और वर्कपरमिट ले चुका हे उसे काम करने या देने का किसी को भी हक़ हे और शिवसेना या राजठाकरे के गुंडे भला उस पर रोक कैसे लगा सकते हे ? ध्यान रहे की ये स्टेण्ड उन्होंने तब लिया जबकि राज़ ठाकरे से उनकी पुरानी दोस्ती भी हे तब भी . सलमान को ये भी अच्छी तरह पता था की मुसलमान होने और जब पाकिस्तान बॉर्डर पर ऐसा बड़ा तनाव हो तब तो ऐसी बात कहने से और भी अधिक खतरा होगा और उन्हें पाकिस्तानी पाकिस्तानपरस्त होने के ताने दिए जायेंगे भारत के सबसे अधिक चेरिटी करने वाले सेलिब्रिटी सलमान को देश का खून चूसने वाले , उनके गद्दार होने का ऐसा शोर मचाएंगे जिसे झेलना आसान नहीं होगा . लेकिन असल में यही चाहिए की बात कुर्बानी या पाकिस्तानी कलाकारों तक सीमित नहीं हे ये बाते बहुत दूर तक जाती हे बात हे असल इन धर्म जाती देश के ठेकेदारो और व्यापारियों के सामने डट कर खड़े हो जाने की. इसी से इनका खोफ और ताकत कम होनी शुरू होगी और इसी से हिन्दू मुस्लिम यूनिटी भारत पाकिस्तान एकता , आम आदमी शोषित आदमियो की एकता की राह निकलेगी इसलिए सलमान इरफ़ान से उमीद यही हे की वो आगे भी इन कटटरपन्तियो की आँखों में आँखे डाल कर बात करते रहेंगे . इस लड़ाई में कोई नुकसान भी होता हो तो हो जाए ( वो नुक्सान भी बाद में फायदा ही देगा ) दोनों उसके लिए भी तैयार से दिखते हे बहुत खूब !