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सुल्‍तान की रिलीज के कुछ दिनों पहले सलमान खान के एक कथन से हंगामा मच गया था। उनके पिता सलीम खान ने माफी मांगी,फिर भी एक समूह सलमान खान से नाखुश है। यह वाजिब भी है। सलमान खान सरीखे पॉपुलर स्‍टार की जुबान कैसे फिसल सकती है? क्‍या बोलते समय उन्‍हें अहसास नहीं रहा होगा कि उनके इस कथन के कई अभिप्राय निकलेंगे। सच कहें तो सलमान खान इतना नहीं सोचते। और फिर इन दिनों बातचीत को मसखरी बना दिया गया है। कोशिश रहती है कि ऐसे सवाल पूछे जाएं कि स्‍टार को हंसी आ जाए। स्‍टार भी पत्रकारों का मनोरंजन करते हैं। कभी अपनी हरकतों से तो कभी अपनी बातों से। इन दिनों हर इवेंट में सवालों का मखौल बना दिया जाता है। मंच पर बैठे स्‍टार और उनके सहयोगी तफरीह लेने लगते हैं।

दरअसल,अधिकांश फिल्‍म स्‍टार और डायरेक्‍टर पब्लिक स्‍पीच में अनगढ़ होते हैं। सभी को अमिताभ बच्‍चन और शाह रुख खान की तरह सटीक जवाब देना नहीं आता। अधिकांश हिंदी में तंग हैं,इसलिए वे हिंदी में खुद को एक्‍सप्रेस नहीं कर पाते। ऐसा नहीं है कि उनकी अंग्रेजी बहुत अच्‍छी होती है। सीमित शब्‍दों में सीमित भावों के साथ ही वे अपनी बातें कहते हैं। उनकी समस्‍या बालने की है। बगैर स्क्रिप्‍ट के वे कुछ बोल नहीं पाते। कई तो सोच के स्‍तर पर गरीब हैं। वे लोकप्रिय चीजों की जानकारियां रखते हैं,लेकिन किसी विषय पर गहन-गंभीर बात होने लगे तो टालने या छिटकने की कोशिशें करते हैं। यही कारण है कि वे विभिन्‍न सामाजिक,राजनीतिक और ज्‍वलंत मुद्दों पर तोतारटंत की तरह एक ही तरह की बात बोलते हैं। प्राय: सभी स्‍टैंड लेने से बचते हैं। उनके पास एक ही कवच है। हम तो एंटरटेनर हैं। हमारा काम दर्शकों का मनोंरंजन करना है। मैंने पाया है कि थिएटर के बैकग्राउंड से आए एक्‍टर साफ बोलते हैं और मन खोलते हैं।

अभी सोशल मीडिया पर लगभग सभी स्‍टार एक्टिव दिखते हैं। कई बार वे अपने फालोअर्स से इंटरैक्‍ट करते हैं। शाह रुख खान और प्रियंका चोपड़ा फुर्सत मिलने पर ट्वीटर पर चैट करते हैं। अमिताभ बच्‍च्‍न गाहे-बगाहे एक्‍छेंडेड फमिली के सदस्‍यों से बातचीत करते हैं। वे सोशल मीडिया के अपने फॉलोअर्स को अपनी एक्‍सटेंडेड फमिली मानते हैं। यहां भी ज्‍यादातर सेलिब्रिटी के अकाउंट उनके स्‍टाफ हैंडिल करते हैं। उन्‍हें हिदायत रहती है कि सामान्‍य जवाब कैसे देना है और कैसे एवं किस हद तक फैंस को एंटरटेन करना है। सेलिब्रिटी के नियुक्‍त व्‍यक्ति उनके स्‍टेटस लिखते हैं। उनके मूवमेंट्स के बारे में बताते हैं। सोशल मीडिया की उनकी एक्टिविटी वास्‍तव में इमेज बिल्डिंग का ही हिस्‍सा है। अभी तो ऐसे क्रिएटिव रायटर आ गए हैं,जो एक साथ कई सेलिब्रिटी के अकाउंट हैं‍डिल करते हैं। यों लगता है कि हमारे सेलिब्रिटी कितने जागरुक हैं। सच्‍चाई यह है कि कोई ‘कांट्रैक्‍ट रायटर’ उनके लिए माथापच्‍ची कर रहा होता है। वे उसी समय कहीं गुलछर्रे उड़ा रहे होते हैं।

अभी ऐसे सलाहकार आ गए हैं,जो स्‍टार और सेलिब्रिटी को बताते हैं कि कब,क्‍या और कैसे बोलं? स्थिति इतनी विकट हो गई है कि अगर कभी ये सलाहकार और रायटर नहीं होते तो स्‍टार मूक हो जाता है। ब्रीफिंग नहीं हो पाई हो तो इन स्‍टारों के इंटरव्‍यू बकवास होते हैं। उन्‍हें सिर्फ यह मालूम रहता है कि फिल्‍म की कहानी नहीं बतानी है। उन्‍हें क्‍या बताना है,यह बताने वाला कोई चाहिए। कई बार लाइव या टीवी इंटरव्‍यू में हम देखते हैं कि स्‍टार बेतुके जवाब दे रहे हैं। एंकर और रिपोर्टर सफाई देते हैं कि स्‍टार और सेलिब्रिटी के इंटरव्‍यू में उनके जवाब और बातों पर शायद ही कोई गौर करता है। ज्‍यादातर उनकी मौजूदगी और दर्शन से ही आह्लादित रहते हैं। सचमुच, फिल्‍म पत्रकार भी तो बिछे जाते हैं।

दरअसल,ज्‍यादातर सेलिब्रिटी और स्‍टार कम पढ़े-लिखे हैं। उनके सामान्‍य ज्ञान का स्‍तर भी नीचे रहता है। सभी के बॉयोडाटा पर गौर करें। पाएंगी कि कम ही कॉलेज और स्‍नातक की पढ़ाई कर सके। शिक्षा-दीक्षा का अपना महत्‍व होता है। सलमान का विवादास्‍पद कथन वास्‍तव में उनकी कल्‍पना की गरीबी है। वे थकान के एक्‍सप्रेसन के लिए कोई और बिंब नहीं सोच सके। वे कह सकते थे कि किसान या मजदूर जैसी हालत हो जाती है। उसके लिए उनके अनुभव में मजदूर और किसानों का होना जरूरी था