earth_from_space

ओ मेरे प्रिय मनुष्य, ये तो हम सभी जानते ही है कि आज पूरी पृथ्वी (जिसका surface area 510,07200 km2 है) पर हम मनुष्यों कि संख्या 7.2 बिलियन हो चुकी है | हमारी ये पृथ्वी इस भ्रमांड में उपस्थित सबसे सुंदर , जीवन के लिये उपर्युक्त तथा मानव की मूलभूत उपयोगी सामग्री का साधारण व् सरल माध्यम है | एक करोड़ तीस लाख साल पुराना हमारे भ्रमांड में पृथ्वी के आलावा कही भी अभी तक मानव सभ्यता के पाए जाने का कोई प्रमाण नहीं मिला है |ये संभव है कि भ्रमांड में सायद कही किसी अवस्था में जीवन हो| खगोलशास्त्र मानता है कि जीवन के लिय जरुरी तत्व सल्फर, फास्फोरस, ओक्सिजेन, कार्बन, व् नाइट्रोजन पूर्ण और संतुलित अवस्था में मात्र हमारी धरती पर ही मोजूद है| GRB- Gama rays bust theory के अनुसार भी यही बात सामने आई है की हमारी पृथ्वी पर ही जीवन संभव है| Paleontologist भी फोसिल्स कि स्टडी के आधार पर प्रमाणित कर चुके है कि पुरे ब्रमांड में जीवन के लिय आवस्यक तत्वों का बेजोड़ संगम सिर्फ पृथ्वी पर ही है| SAP- STRONG ANTHROPIC PRINCIPLE तो यहा तक मानता है कि ब्रमांड न केवल जिन्दगी के लिए निर्मित हुआ है बल्कि यह केवल और केवल मनुष्य के निर्मित हुआ है| प्रसिद्ध American खगोलसास्त्री Michal hart कहते है- इस ब्रमांड में हम अकेले है यह कोई ailen नही है.

आज मानव सभ्यता वैगानिक, तकनीकी, व् भोतिक, उन्नति के सिखर पर जा पहूची है| मनुष्य, चाँद, मंगल तथा दुसरे ग्रहों पर जीवन तलासने में जुटा है| जुटा भी होना चाहिए क्युकि मनुष्य होने का मतलब ही आगे बढते रहना है रहस्यों की खोज के लिए| किन्तु कभी कभी दिल में एक दर सा खाए जाता है, एक शूल सा चुबता है मेरे अन्तकरण में, कि कही आज का मनुष्य आधुनिकता की इस दोड़ में “पृथ्वी के लिय मनुष्य के कर्तव्यों” से एस्केप तो नहीं कर रहा है ? जी हा, मै अपने इस प्यारे घर पृथ्वी के लिय चिंतित हु, जो मुझे जीवित रहने के लिए हवा, पानी, प्रकाश व् मूलभूत सामग्री देता है | मै जन्म से लेकर आज तक इस ग्रह को सिर्फ गंदा ही करता रहा हु, और जब आज मुझे इस बात का अहसास हुआ के मेरा इस गृह के प्रीति क्या कर्तव्य है, तो मैंने ये आपसे शेयर करने का इरादा बनाया, और कसम खाई कि मै आज से इस धरती के सरंक्षण के लिए यथासम्भव प्रयास करुगा और करता ही रहूगा |

मुझे सबसे बड़ी चिंता पृथ्वी पर बढ़ रहे वातवरण के प्रदुषण तथा ग्लोबल वार्मिंग की है | पृथ्वी पर तेजी से बढ़ रही कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा तथा तेजी से घट रही समुन्दी व् जमीनी पोधो की संख्या का सीधा असर हमारे वातावरण पर पड़ रहा है जिससे हम प्रतिदिन इसे जहरीला बना रहे है| हवा में बढ़ता particulate matter हमारे lungs पर प्रितिकूल असर डाल रहा है| आप तो जानते ही है हवा में present particulate matter के कारण दुनिया में १० लाख लोग मरते है | natural accuring green houses गैसेस कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन, वाटर वपोर्स, nitros oxide तथा man made green houses गैसेस CFCs, PFCs, SF6 हर मिनट मेरी पृथ्वी के वातावरण को प्रदुषित कर रही है जिससे प्रथ्वी की ओजोन पर्त पतली हो गई है जिसके कारण सूरज से आने वाली खतरनाक UV Rays पृथ्वी पर उपस्थित मनुष्य में विभिन्न तरह के कैंसर व् mutation पैदा करने पर तुली है | तेजी से बढती global warming से polar ice capas melt होने लगे है, coastal floods पैदा होने लगे है| अगर इसी तेजी से global warming बढती रही तो वह दिन दूर नहीं जब coastal city जैसे NewYork, Bostan, Mumbai, colcatta का अस्तित्व ही खत्म हो जायगा|

Earth is moving towards a 4.0 temparture rise, और ये एक बहुत बड़ा खतरा है पृथ्वी पर मानव व् दुसरे जीवो के जीवन के लिए|

मै तो सलाम करता हू मनुष्य के विकास क्रम को, आज के मनुष्य की भोतिक, तकनीकी, व् आर्थिक उन्नति को | मगर अंदर ही अंदर रोती, बिलखती, चीखती प्रथ्वी की पीड़ा मेरे दिल पर मानो एक बोझ सा है, विकास के इतने ऊँचे सिखर पर पहुचने के बाद उस उन्नति का क्या मतलब जिसे पाने के लिय हमने पूरी पृथ्वी को दाव प् लगाया हो | अपने खुद के जीवन को दाव पर लगाकर व् स्वर्ग से सुंदर अपनी धरती को बंजर, प्रदुषित बनाकर अगर हम मंगल पर घर बना भी ले तो यह मानव की चेतना का ऊपर उठना नही बल्कि नीचे गिरना है, ये तो पलायन हुआ मानव का पृथ्वी से, मनुष्यता से| यदि आज पूरी दुनिया का मनुष्य इस पृथ्वी के वातावरणी ह्रास के खिलाफ नहीं उठा तो याद रखना आने वाली पीढियों में हमारी नस्ले हमें गालिया देंगी, हमे झूटे, आडम्बरी, ढोंगी, दिखावा करने वाला मुर्ख समझा जायगा, और ये बात छोड़ भी दे तो हमारा हमारी पृथ्वी के लिय तो कर्तव्य तो अधुरा रह ही जायगा न.

Fish, amphibian , reptiles, birds, mammals then apes, prehistoric man, java man, paking man, Neanderthal, cromagnon and then finally modern man यानी हम, आज का मानव | इतनी लम्बी हमारी evolution journey रही है, हमने इस जमीन पर बडे बडे कार्यो को अंजाम दिए है, हमारी शक्तिया असीम है, आज हम आसमान में उड़ रहे है, समुन्द्रो पर दोड़