heroin

अफ़ज़ल ख़ान

पुरुषो के मानसिकता पे चोट करती उर्दू की मशहूर कवित्री आज़रा अब्बास की एक नज्म आप सभी के लिये—–

गरूर- ( घमंड )

अगर तुम मुझे एक बुर्का पहना कर मुझे ढाँपना चाहो तो

क्या मेरी छातियों का गरूर
तुम्हारी आँखों से छुप जाएगा
अगर तुम मुझे दो बुर्के पहना दो
यह गरूर फिर भी तुम्हारी नज़रों से छुप नहीं सकेगा
चलो पहनते जाओ मुझे नीचे से उपर कई लबादे
छोड़ दो मेरी आँखें केवल देखने के लिए
कि तुम्हारी आँखें अब कया दीख रही हैं
मुझे विश्वास है
तुम मेरी छातियों के के गरूर को दूंढ़ रहे हो गे
उपर से नीचे लदे हुए
मेरा शरीर छुपाने वाले कपड़ों के ऊपर
तुम्हारी दृष्टि के स्क्रीन विंड पर पानी की बूँदें
छिपाके मार रहे होंगे
और मेरे गरूर से भरी छातियाँ
तुम्हारी हार पर
कभी ना खत्म होने वाले गरूर
से भरी मुस्कुरा रही होंगी