shahrukh-khan
जैसा की उम्मीद थी ही की असहिष्णुता पर मोदी सरकार को कटघरे में खड़े करने वाले अपने पर बयान के बाद , फिल्म दिलवाले के विरोध से हुए नुकसान से शाहरुख़ खान डर से ही गए और आगे आने वाली अपनी बड़ी बड़ी फिल्मों को देखते हुए उन्होंने हाल ही में पी एम मोदी की तारीफ की जो हम समझ सकते हे की वो अपनी फिल्मों का विरोध नहीं चाहते हे ठीक भी हे क्योकि फिल्मों में भारी निवेश लगता हे सही हे की शाहरुख़ दूसरों के पेसो का नुक्सान नहीं चाहते हे ठीक मगर शाहरुख़ का ये कहना निराश करता हे की बार बार जब उन्हें देशभक्ति साबित करने को कहा जाता हे तो उन्हें बहुत दुःख होता हे और उनका रोने का मन करता हे शाहरुख़ की ये बात बेहद दुखद हे भारत का वर्षो से सबसे बड़ा सितारा सबसे अधिक प्रशंसक रखने वाला ( अधिकतर सितारे समाज के विभिन्न वर्गों की पसंद ही हे मगर शाहरुख़ हर खासो आम की पसंद हे ऐसे में शाहरुख़ का ये बयान उनकी कमजोरी ही दर्शाता हे असल में जैसा की होता ही आया हे की भारत में अधिकांश कामयाब लोग बिना किसी संघर्ष के महज़ वंश या किस्मत या किसी के प्रोटेक्शन में ही आगे बढ़ते हे ( जैसे पी एम मोदी जी स्वर्गीय इनामदार साहब के ) इसलिए उनके व्यक्तित्व में वो मज़बूती हो दृढ़ता होती ही नहीं हे जो भारत जैसे समस्याओं के अम्बार वाले देश की समस्याओं के सम्बन्ध में कुछ ठोस कर सके ( बेहद संघर्ष करके आगे बढे नाना पाटेकर ही आज के भयानक सूखे में कुछ ठोस कर रहे हे ) शाहरुख़ खान भी मध्यमवर्गीय परिवार के भले ही थे मगर वो कोई आम आदमी भी नहीं थे शाहरुख़ खुद भी कहते हे की उनके जीवन में कोई ऐसा संघर्ष रहा भी नहीं की उन पर कोई बायोपिक बन सके इसलिए वरिष्ठ फिल्म लेखक जयप्रकाश चौकसे ने शाहरुख़ खान के सफर को ” मेल सिंड्रेला ” सही ही बताया हे लेकिन कोई बात नहीं की पहले आपके जीवन में कोई संघर्ष नहीं था मगर आप चाहे तो अब एक बड़े संघर्ष में आप हाथ तो बटा सकते हे ये संघर्ष आपको और मज़बूत ही करेगा वो संघर्ष शुरू करने के बजाय शाहरुख़ का यु हिन्दू कटट्रपन्तियो के सामने रोना धोना देश की सेकुलर शक्तियों को बेहद निराश ही करेगा

हम तो शाहरुख़ से यही कहेंगे की वो रोना धोना बंद करे और आप कोई अकेले या पहले नहीं हे जिन्हे मुस्लिम होने के कारण देशभक्ति का सबूत देने को कहा जाता हे किसी भी मुद्दे पर कैलाश विजयवर्गीय जैसे लोग आपका पाकिस्तान से सम्बन्ध जोड़ते हे आदि ये कोई नयी बात नहीं हे हिन्दू कटटरपंथी मानसिकता हमेशा से ये करती आई हे दिलीप कुमार पर कई बार झूठे आरोप लगे ए पि जे अब्दुल कलाम पर भी कुछ लोग शक सा करते थे और उनसे सवेंदनशील प्रोजेक्ट से दूर रखने को कहते थे तब शायद कलाम साहब के गुरु स्वर्गीय विक्रम सारा भाई उनके लिए अड़ गए थे कलाम साहब ने भी कोई रोना धोना नहीं मचाया था हमें तो ये भी याद हे की जब कलाम साहब राष्ट्रपति बन रहे थे तब वीर अर्जुन अख़बार में उनके खिलाफ भी एक हिन्दू कटटरपंथी लेखक ने लिखा था कहने का आशय ये हे की हिन्दू कटट्रपन्ति हमेशा ही ऐसा करते आये हे ये खुद को देश का मालिक और बाकी सबको घुसपैठिए समझते हे और इतिहास में पहली बार अपनी शुद्ध बहुमत की सरकार बना लेने के कारण इनका उत्साह भी चरम पर हे ही अब ये सत्ता छोड़ना ही नहीं चाहते हे वर्षो वर्षो तक सत्ता का आनंद लेना चाहते हे देश देशभक्ति हिन्दुवाद मुस्लिमवाद आदि आदि तो सिर्फ एक मुखोटा होता हे असल में तो सब सत्ता की सत्ता से जुड़े आनंद की लड़ाई हे इस सत्ता को बरक़रार रखने में इनके काम सबसे अधिक आएगी साम्प्रदायिकता और आप तीनो खान क्योंकि पुरे भारत में सारी दुनिया में भारतीय सेकुलरिज़म हिन्दू मुस्लिम एकता सहअस्तित्व के प्रतीक चिन्ह से बन गए हे इसलिए हिन्दू कटट्रपन्तियो की आप लोगो से बेहद चिढ़ हे ( पाकिस्तान में बंदरिया के मरे हुए बच्चे की तरह टू नेशन थ्योरी को साइन से चिपकाय रखने वालो को भी आपसे बेहद चिढ़ हे हिन्दू कटट्रपन्ति आपको पाकिस्तानी कहते हे तो वो आपको ” हिन्दू ” कहते हे ) इसलिए हाल ही में जब आप और आमिर ने देश में बढ़ती असहिष्णुता पर जुबान खोली तो ये आप पर ऐसे टूट पड़े जैसे किसी ने मधुमक्खीयो के छत्ते पर पत्थर चला दिया हो (सलमान जरूर इनसे बचे रहते हे कारण हो सकता हे की सलमान के पिता सलीम खान एक बड़े अनुभवी आदमी हे ) हिन्दू कटट्रपन्तियो को पता हे की शाहरुख़ आमिर के माध्यम से वो पुरे भारत के मुस्लिमो को ही पाकिस्तानी दर्शा रहे हे उन्हें उम्मीद रहती हे की इनसे जो कम्युनल वोट बैंक विस्तार लेता जाएगा वो आख़िरकार तो उन्ही की झोली में गिरेगा

शाहरुख़ आप जैसे ताकतवर लोगो से यही उम्मीद हे की आप हिन्दू कटट्रपन्तियो के सामने रोएंगे गिड़गिड़ाएंगे नहीं बल्कि परदे के आगे या चाहे तो पीछे से ही सही इन्हे कमजोर करने का और एक सवतंत्रता सेनानी के बेटे को पाकिस्तानी कहने का ”बदला ” ( लोकतान्त्रिक ) लेने की कोशिश करेंगे इसके लिए आप लोगो को करना यही होगा की देश भर में फैली सेकुलर शक्तियों को मदद करनी होगी चाहे आप असहिष्णुता पर चुप रहे मगर सहिष्णु शक्तियों के साथ को लेकर मुखर तो हो सकते हे आप आई पी एल जैसी फालतू महा फालतू चीज़ो के लिए समय निकाल सकते हे तो शुद्ध सेकुलर सहिष्णु ताकतों लोगो संघटनो की मदद के लिए भी समय निकलिए ( नहीं तो फिर रोते रहिये ) समय भी निकलिए फंडिंग भी निकालिये सबसे बड़ी समस्या आज उपमहाद्वीप की यही हे की कम्युनल ताकतों को तरह तरह से फंडिंग हो रही हे जबकि शुद्ध सेकुलर लोग वाम समाजवादी गांधीवादीउदारवादी आदि शक्तियां धन की कमी से झुझ रही हे इंटरनेट पर ही देखे तो कम्युनल ताकतों खासकर हिन्दू कटट्रपन्तियो का उत्साह और सक्रियता की कोई सीमा नहीं हे कोई अँधा भी समझ सकता हे की इसके लिए अच्छे फण्ड की वयवस्था हे कोशिश ये हे की एक बड़ी आबादी खासकर कम उम्र लोग जो नेट से जुड़ रहे हे उनके दिमागों पर कब्ज़ा किया जाए कम उम्र में वैसे भी आदमी बड़ी आसानी से प्रभावित सम्मोहित किया जा सकता हे ऐसा नहीं हे की सेकुलर शक्तियां और विचार इनकी काट नहीं कर सकते हे कर सकते हे मगर आखिर कोई कब तक पेट पर पत्थर बाँध कर काम कर सकता हे जबकि दूसरी तरफ भारी संसधान प्रोत्साहन दिख रहे हे यानी आगे खतरा बहुत बड़ा दिखाई दे रहा हे ऐसे में हम तो हिन्दू कटट्रपन्तियो के सामने रोने वाले किंग खान से यही अपील करेंगे की वो आंसू बहाना बंद करे और या तो खुद उतरे इस लड़ाई में नहीं तो इनसे लड़ने वालो की अधिक से अधिक मदद करे नहीं करेंगे तो कल को आपको और भी फूट फूट कर रोना पड़ सकता हे