AmitabhBachchan
by — सिकन्दर हयात

मरहूम शायर लेखक निश्तर खानकाही ( 1930- 2006 ) एक जगह लिखते हे की ” कहते हे की प्राचीन अरब देश में वीररस का एक बहुत बड़ा कवि हुआ हे उसकी कविताओं में इतना जोश ,खून में गर्मी देने वाली ऐसी तेज़ जवाला की होती थी की रन स्थली में जब उन्हें एक विशेष अंदाज़ में पढ़ा जाता था तो सैनिक उन्मादित होकर अपनी गर्दने कटवाने के लिए तैयार हो जाते . मैदान छोड़कर भागने वाले सिपाही पुनः मोर्चा संभल लेते और जंग की हारी बाज़ी जीत में परिवर्तित हो जाती . सोचा गया की जिस कवि की लेखनी में शब्दों में काव्य में इतना बल हे वह स्वय कितना बलवान होगा , कितना शूरवीर कितना साहसी होगा . एक बार युद्ध के अवसर पर राजा ने आदेश दिया की उस बहादुर कवि को भी युद्ध के मैदान में उतारा जाए और देखा जाए की वह कितना कर्मठ योद्धा हे . चार सिपाही युद्ध लड़ने का निमत्रण लेकर उसके पास पहुंचे औरकवी को जंग के मैदान में अपना जोहर दिखाने के लिए कहा तो इतिहास बताता हे की वीरस के उस महाकवि की घिग्घी बंध गई भय से पत्ते की तरह काँपने लगा वह . ज्ञात हुआ , वह कलम का वीर था तलवार का वीर नहीं था माफ़ कीजिये में उस कवि से अपनी तुलना नहीं कर रहा हु की कई लोग , बल्कि कई ,महान लोग भी अपने भीतर के अस्तित्व में ठीक वैसे ही होते हे जैसे वह अपने शब्दों या वाणी में दिखाई देते हे विश्वास कीजिये की इन गुनहगार आँखों ने कई ऐसे आदर्श महापुरषो को देखा हे , जो अपने व्यक्तिगत और भीतरी जीवन में अत्यन्त आदर्शहीन , सिद्धांतहीन एव घोर अनैतिक जीवन गुजारने वाले लोग थे लेकिन वे अपने भीतर की वास्तविकताओं को छिपने में सफल हुए और आदर्श आदमी कहलाए , ऐसे व्यक्ति मेने धर्म साहित्य कला राजनीति तथा जीवन के अनेक क्षेत्रों में देखे और पाया की उनकी पूरी आयु उन पहलुओं को छिपने में लग गई जो दुर्बल थे या अवगुणो से भरे थे में यह मनोवैज्ञानिक धोखाधड़ी नहीं करूँगा . चूँकि में कोई आदर्श आदमी नहीं हु मुझे अपने ही घाव कुरेदने में आनद आता हे——- ”

अब यह पढ़ने पर ख्याल आया की देखा जाए तो भारत के ”महापुरुषों ” में जितने आदर्शविहीन और भीतरी जीवन में जिस कदर साधारण मिजाज के अमिताभ बच्चन हे उसका शायद ही कोई और उधारण हो अमिताभ एक ऐसे अजीबो गरीब परदे के तो ” महानायक ” हे जो परदे के बाहर एक भी ऐसा काम नहीं करता हे जिससे उनके रियल लाइफ के भी हीरो होने का ज़रा भी संदेह हो हाल ही में हुए राष्ट्र गान के लिए पैसे पनामा पेपर्स लीक किसान चैनल के प्रचार के लिए छह करोड़ ( आमिर खान अतुल्य भारत मुफ्त में ) आदि में उन्हें क्लीन चिट दे भी तो इतर भी देखे अमिताभ जितने परदे के बाहर महानता से दूर बहुत दूर ही रहे हे उतना शायद ही भारत का कोई और नायक हो ? जैसे देखे शत्रुघ्न सिन्हा तक ने भी अाज के सबसे बड़े नेता के खिलाफ आवाज़ उठाने का साहस तो दिखाया मगर अमिताभ ने चाहे वो इमरजेंसी हो या चालीस साल बाद अब जब पिछले दिनों देश में उठा असहिष्णुता के खिलाफ आंदोलन जिसमे बोलकर शाहरुख़ आमिर ने भी नुकसान उठाया मगर अमिताभ ने हमेशा की तरह चुप्पी ही साधे रखी ये होना भी था ही क्योकि विशाल बहुमत प्राप्त केंद्र और महाराष्ट्र सरकारों की तो बात ही क्या जब वो कुछ वर्ष पूर्व विवाद में लोकल राज़ ठाकरे तक से डर गए थे तब ही कुछ समय बाद करीना और शिव सेना का विवाद हुआ था जिस पर करीना ने कोई भय नहीं दिखाया था तब फिल्मों के बहुत अच्छे लेखक दीपक असीम उर्फ़ अनहद ने करीना के साहस की तारीफ करते हुए लिखा था ” इसी फिल्म इंडस्ट्री में करन जौहर और अमिताभ जैसे बिजूके भी हैं, जो दिखने में तो बहुत बड़े हैं पर अंदर सड़े हुए फूस के सिवा कुछ नहीं है ” यही अमिताभ पिछले दिनों क्रिकेट जैसे बकवास खेल पर टिवीटर पर एक बहस में जड़ से उखाड़ देंगे उखाड़ देंगे की बाते कर रहे थे जो कॉलिज के बचकाने लड़को को ही शोभा दे सकती हे ? यही नहीं एक मसले में तो बच्च्न दम्पति ने साधारण लोगो से भी अधिक साधारण वयवहार किया साधारण लोग यहाँ तक की कुछ बुरे या स्वार्थी लोग भी उस व्यक्ति के अहसान का मान तो रख ही लेते हे जो उनके बहुत ही बुरे समय में उनके काम आया हो लेकिन बच्चन दम्पति ने उस व्यक्ति के साथ भी क्या किया जिसने उन्हें उनके बहुत ही बुरे समय में लगभग दिवालिया होने से बचाया था ? उसका भी साथ उन्होंने छोड़ दिया था बात हो रही हे अमर सिंह जिनके ऊपर चाहे जितने आरोप हो वो चाहे कैसे भी गलत ही व्यक्ति क्यों न हो जो भी हो ये तो दुनिया जाती ही हे की उन्होंने बहुत ही आड़े समय में बच्चन परिवार की मदद की थी ( वो तो यहाँ तक कहते हे की अगर उन्होंने सही समय पर पर उन्हें सहारा परिवार के प्रति आगाह नहीं किया होता तो सहारा श्री और उनके अधिकारियो की तरह अमिताभ भी जेल में होते ) बाद में जब अमर सिंह को मुलायम परिवार के कुछ लोगो ने बेइज़्ज़त करके पार्टी से निकाल दिया तो भला क्या गलत था की अमर सिंह चाहते थे की जया बच्चन उनके समर्थन में सपा और सपा की राजयसभा सीट छोड़ देंगी या अमिताभ उनसे छुड़वा लेंगे मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ (और कोई नहीं जानता की आखिर सांसद के रूप में जया जी का योगदान क्या हे ? )

अमिताभ भी एक खास अदा ये भी हे जिसकी तरफ वरिष्ठ फिल्म लेखक अजय बरहमताज ने ध्यान दिलाया था की फिल्म इंडस्ट्री में जब भी कोई नयी प्रतिभा हिट हो जाती हे तो अमिताभ उसकी तारीफ भी करते हे उसके साथ काम भी करते हे उसका महिमांडन भी करते हे मगर हिट होने से पहले किसी भी प्रतिभा पर अमिताभ की नज़र गयी हो उन्होंने उसे तलाशा तराशा या उसकी कोई हौसला अफ़ज़ाई की हो इसका कोई किस्सा कभी सुनने को नहीं मिलता हे ? अभिषेक को छोड़ कर उन्होंने कभी किसी को बढ़ावा नहीं दिया . पिछले कई सालो से 73 साल की आयु तक भी अमिताभ अधभुत ऊर्जा के के साथ काम करते रहते हे पैसा बनाते रहते हे किसी भी चीज़ का विज्ञापन करते रहे मगर समझ नहीं आता की किस लिए ? न तो कभी उनकी सलमान के जैसी कोई चेरिटी की खबर आती हे ना वो आमिर की तरह रचनातमक हे हाल ही में उन्हें राष्ट्रिय पुरस्कार दिलवाने वाली पीकू जैसी फिल्म को छोड़ दे तो पिछले कई सालो में जितनी फालतू फिल्में अमिताभ ने दी हे उतनी शायद ही किसी और कलाकार ने दी हो अमिताभ इलाहबाद के हे और इलाहबाद के लिए या इलाहबाद के किसी आदमी के लिए अमिताभ ने कुछ किया ऐसी भी कोई बात कभी नहीं रही उधर धर्मेंद्र का घर बरसो तक उनके इलाके के सभी लोगो के लिए खुला रहा बताया जाता हे . अमिताभ हमेशा अपने पिता की कविताओं का प्रचार करते रहे और गाते रहे ऐसा भी एक शायद एक किस्सा बताया जाता हे की जब शायद अशोक वाजपेयी ने उनसे उनके पिता के समकालीन कुछ कवियों का भी प्रचार को कहा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया . कुल मिलाकर हमें तो यही लगता हे की अमिताभ बच्चन की ऐसी साधारण मानसिकता क्यों हे ? इस पर मनोवैज्ञानिकों को शोध करना चाहिए ये भी की आखिर वो क्या चीज़ हे वो क्या प्रेरणा जो इस उम्र में भी अमिताभ से इस एनर्जी से इतना सारा और इंतना साधारण काम करवाती हे ? वो क्या बात हे क्या साइकि हे जो उन्हें असली महानता से इतनी दूर रखती हे ——- -?