JNU-Controversy-1

नीरेंद्र नागर

सोमवार के पटियाला हाउस कोर्ट में कुछ ‘देशभक्त’ वकीलों या वकीलों के लिबास में कुछ ‘देशभक्त’ गुंडों ने पत्रकारों और जेएनयू के कुछ छात्र-छात्राओं को पीट दिया, उनके मोबाइल छीन लिए ताकि वे उनकी ‘देशभक्ति’ के विडियो नहीं ले सकें, महिला पत्रकारों के साथ बदतमीज़ी की। जज साहब अपने कमरे में दुबके रहे और  बस्सी साहब की पुलिस तमाशा देखती रही। देश के गृह मंत्री जो जेएनयू मामले में इतने उत्तेजित थे कि तुरंत प्रेस के सामने आकर अपनी बात कही, अपनी पार्टी के विधायक ओ.पी. शर्मा की गुंडागर्दी पर मौन धारण किए हुए हैं। शायद फ़ोन पर उनको बधाई भी दी हो। आज पत्रकारों का एक दल गृह मंत्री से मिलने की कोशिश करेगा और उम्मीद है, गृह मंत्री ‘कानून अपना काम करेगा और दोषियों को कतई नहीं बख्शा जाएगा’ टाइप का कोई बयान दे देकर फ़ारिग हो लेंगे।

ओ. पी. शर्मा एक कार्यकर्ता को पीटते हुए।

ओ. पी. शर्मा एक कार्यकर्ता को पीटते हुए।

‘देशभक्तों’ का कहना है कि इन छात्रों और पत्रकारों की पिटाई इसलिए हुई कि वे सब देशद्रोही थे। देशद्रोही थे क्योंकि वे देशभक्ति के मामले में भगवा लाइन को सही नहीं ठहरा रहे।

आप पूछेंगे, भगवा लाइन क्या है? भगवा लाइन यह है कि यह देश हिंदुओं का है और केवल हिंदुओं का है। भगवा लाइन यह है कि हिंदू संस्कृति और धर्म विश्व में सर्वश्रेष्ठ हैं इसलिए यह देश भी सर्वश्रेष्ठ है। भगवा लाइन यह है कि इस देश में जो भी अच्छाई है, वह हिंदुओं और हिंदुत्व के कारण है और जो बुराई है, वह दूसरे धर्मावलंबियों और मतों-मान्यताओं के कारण है। जो इस विचारधारा को मानता है, वह हुआ देशभक्त। और जो नहीं मानता, वह हुआ देशद्रोही।

इसके अलावा देशभक्तों के कुछ और भी गुण हैं।

  • जो गाय को अपनी माता मानता हो भले ही पैरों में गऊमाता के चमड़े से बना चमचमाता जूता या चप्पल पहनता हो, वह हुआ गऊभक्त और दूसरे शब्दों में देशभक्त।
  • जो मुसलमानों, ईसाइयों तथा दलितों और पिछड़ों से ऊपरी तौर पर न सही, मगर मन-ही-मन घृणा करता हो, वह हुआ सनातनी हिंदू और दूसरे शब्दों में देशभक्त।
  • जो देववाणी संस्कृत को विश्व की सर्वश्रेष्ठ और वैज्ञानिक भाषा मानता और भांजता हो, और जो हिंदी के चार शब्द सही-सही लिख-बोल न पाता हो मगर जिसे महिलाओं के गुप्तांगों से जुड़ी सारी गालियां शिशुपाल की तरह कंठस्थ हो, वह हुआ परम संस्कारी और दूसरे शब्दों में देशभक्त।
  • जो हर पाकिस्तानी मां-बहन के साथ सहवास करने (मूल शब्द मैं नहीं लिख सकता) की दिली ख़्वाहिश रखता हो और साथ ही भारत माता की जय के नारे भी बहुत ज़ोरशोर से लगाता हो, वह हुआ भारत माता का सच्चा सपूत और दूसरे शब्दों में देशभक्त।
  • जो राह चलती लड़कियों को छेड़ता हो लेकिन सरस्वती पूजा में बढ़चढ़कर हिस्सा लेता हो, वह हुआ सरस्वतीपुत्र और दूसरे शब्दों मे देशभक्त।
  • जो छोटा-बड़ा व्यापार करता हो या/और कालाबाज़ारी या मिलावट करता हो या/और सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा करता हो या/और टैक्स की चोरी करता हो या सरकारी नौकरी में है तो रिश्वत लेता हो लेकिन मंदिरों को अच्छा-खासा चंदा देता हो, भगवती जागरण करवाता हो, माथे पर तिलक लगाता हो, संतों का आतिथ्य-सत्कार करता हो, सत्संग करता-करवाता हो, हर व्रत-त्यौहार रखता हो, वह हुआ आदर्श हिंदू और दूसरे शब्दों में देशभक्त।
  • संक्षेप में कोई चाहे जितने कुकर्म करता हो लेकिन हर चुनाव में बीजेपी या उसकी सहयोगी पार्टियों का प्रचार करता हो या उसको वोट देता हो तो वह हुआ भारत का सच्चा नागरिक और दूससे शब्दों में सच्चा देशभक्त।

अब देखिए, मैं तो ऊपर की सारी परिभाषाओं में से एक पर भी खरा नहीं उतरता।

  • मैं हिंदुत्व समेत सभी धार्मिक मान्यताओं को बराबर की बेवकूफ़ी (यदि बेवकूफ़ी शब्द से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत होती हों तो वे इसे नादानी या नासमझी पढ़ें) मानता हूं लेकिन सभी धर्मावलंबियों को अपनी मान्यता रखने का समर्थन करता हूं तो मैं हो गया धर्मनिरपेक्ष और दूसरे शब्दों में देशद्रोही।
  • मैं मंदिर-मस्ज़िद-गुरुद्वारा या चर्च को एक पैसा चंदा नहीं देता न ही किसी धर्मस्थल में आता-जाता हूं लेकिन कई सालों से हम पति-पत्नी तीन अनाथ बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठा रहे हैं तो मैं हो गया कम्युनिस्ट और दूसरे शब्दों में देशद्रोही।
  • मेरी भाषा में हिंदी, उर्दू, संस्कृत, अंग्रेज़ी सारी भाषाओं के शब्द होते हैं और मैं सभ्य-शालीन भाषा में बात करता हूं और गाली-गलौज की भाषा नहीं बोलता तो मैं हो गया म्लेच्छभाषी और दूसरे शब्दों में देशद्रोही।
  • मैं ब्राह्मणों द्वारा बनाए गए जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच के नियम नहीं मानता और अपनी जातिनिरपेक्षता का परिचय देते हुए मैंने यज्ञोपवित के अगले ही दिन जनेऊ को उतारकर फेंक दिया तो मैं हो गया नास्तिक और दूसरे शब्दों में देशद्रोही।
  • मैं पिछड़ों, दलितों और स्त्रियों का सम्मान करता हूं और उनको बराबर के अधिकार देने की बात करता हूं तो मैं हो गया शास्त्र- और परंपरा का विरोधी और दूसरे शब्दों में देशद्रोही।
  • और सबसे बड़ी बात, मैंने आज तक कभी भी बीजेपी को वोट नहीं दिया… तब तो मैं  गया न पक्का देशद्रोही!

Lok-Sabha-Poll-Percentageहां, भगवा संविधान के अनुसार मैं हूं देशद्रोही जिसको सज़ा के तौर पर या तो मॉर्निंग वॉक पर निकलते समय गोली मार देनी चाहिए या फिर देशद्रोह का चार्ज लगाकर जेल में ठूंस देना चाहिए। कम से कम पिटाई तो होनी ही चाहिए। लेकिन सोचता हूं, ये कितनों को मारेंगे, कितनों को जेल में ठूंसेंगे, कितनों को पीटेंगे? यदि बीजेपी को वोट न देनेवाले सारे देशद्रोही हैं तब तो भगवा दल के लिए आगे की राह बहुत मुश्किल है। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। तब बीजेपी और उसके सहयोगियों को 38 प्रतिशत वोट मिले थे। यानी दूसरे शब्दों में कहें तो 2014 में देश में 62 प्रतिशत देशद्रोही थे। उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में तो बीजेपी के वोट घटे ही हैं यानी देशद्रोहियों की संख्या बढ़ी है।

देशद्रोहियों की इस बढ़ती संख्या को रोकने के लिए क्या करेगा भगवा ब्रिगेड? मुझे तो एक ही रास्ता दिखता है देशद्रोहियों को नेस्तनाबूद करने और देशभक्तों की संख्या बढ़ाने का। वही फ़ॉर्म्युला जो गुजरात में अपनाया था, मुज़फ़्फ़रनगर में अपनाया था – किसी मंदिर में गाय का मांस रखवा दो, किसी मस्ज़िद में सूअर को गोश्त फिंकवा दो, किसी मुहम्मद का भीड़ द्वारा कत्ल करवा दो, किसी हरिराम को सपरिवार फुंकवा दो, यहां कुरआन जलवा दो, वहां गीता फड़वा दो, पाकिस्तान या बांग्लादेश का कोई फ़ोटो-विडियो आजमगढ़ का बताकर सुब्रमण्यन स्वामी के ट्विटर हैंडल से जारी कर वाइरल करवा दो। दूसरे शब्दों में ऐसा कुछ करो कि आग लग जाए पूरे देश भर में और लाशें बिछ जाएं गली-गली में। ऐसा करो कि देश दो हिस्सों में बंट जाए – एक तरफ़ बहुसंख्यक हिंदू, दूसरी तरफ़ अल्पसंख्यक मुसलमान, ईसाई और हम जैसे अधर्मी जो कबीर की तरह न हिंदू हैं न मुसलमान हैं, बस इंसान हैं।

ऐसा कोहराम मचाओ कि गंगा-यमुना और नर्मदा-गोदावरी विधर्मियों और अधर्मियों के खून से लाल हो जाएं, ऐसी आग लगाओ कि ISIS भी तुमको अपना गुरु मान ले। ऐसा तांडव रचाओ कि भारत का हर मुसलमान ज़िंदा रहने के लिए जय श्रीराम कहने को बाध्य हो जाए और जो न बोले, उसकी छाती का रक्त तुम्हारे भाल का तिलक बन जाए।

ऐसा करोगे तभी इस देश को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने का तुम्हारा सपना पूरा होगा। लेकिन अभी तनिक रुक जाओ। अमेरिका में बराक ओबामा को जाने दो और डॉनल्ड ट्रंप को आने दो। वह न केवल तुम्हारे काम में मदद करेगा बल्कि तुम्हारी पीठ भी ठोकेगा।

http://blogs.navbharattimes.indiatimes.com/ekla-chalo