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कल मुलायम सिंह यादव ने कहा कि अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाने पर उनको अफसोस है , ध्यान दीजिए कि उस गोलीबारी में 19 कार्यसेवक मारे गये थे। अच्छा है , व्यक्ति को अपने जीवन में ही अपने कुकर्मों का प्राश्चित कर लेना चाहिए , और उम्र के इस पड़ाव पर जबकि अब सारा जीवन अपने पापों के लिए प्राश्चित करने में ही गुज़र जाना है यही उचित भी है।

कारसेवकों पर गोली चलाना निश्चित रूप से गलत था और यदि इमानदारी से उस स्थिति की विवेचना करें तो आप पाएँगे कि ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न भी इन्हीं मुलायम सिंह यादव ने की थी जिस परिस्थिति में गोली चलानी पड़ी ।अपने भड़काऊ बयान “परिन्दा भी पर नहीं मार सकता” और उस समय मुख्यमंत्री रहते हुए दिये जा रहे इनके लगातार भड़काऊ बयानों ने ऐसी परिस्थितियाँ पैदा की कि कार सेवक उत्तेजित हुए या उनको मुल्ला मुलायम के बयानों के आधार पर संघ द्वारा उत्तेजित किया गया जिससे वह अयोध्या में वह उग्र हो गये और कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए गोली चलानी पड़ी । पुलिस को हथियार इसी लिए दिये जाते हैं , तो मुलायम सिंह यादव को केवल उस गोलीबारी की घटना के लिए ही नहीं बल्कि उस समय की पूरी राजनीति के लिए माफी माँगनी चाहिए।

दरअसल “समाजवादी पार्टी” के नेताओं से व्यक्तिगत बात करिए तो वह मुलायम सिंह यादव को इंडिया मार्क-2 हैंड पम्प कहेंगे। क्योंकि इन्डिया मार्का-2 पम्प की विशेषता यह है कि वह जितना उपर दिखता है उससे 50 गुना वह जमीन के अंदर छुपा होता है और मुलायम सिंह यादव वही राजनीतिज्ञ हैं। और दरअसल भाजपा और संघ के ज़हरीले पौध को सीचने में जो खाद पानी की ज़रूरत थी वह मुलायम सिंह यादव ने हमेशा दिया है जब ज़रूरत पड़ी तब दिया है । मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक दूसरे के पूरक हैं । भाजपा ने उस दौर में मुल्ला मुलायम से पैदा हुई घृणा का लाभ उठाकर कुछ स्वर्ण जाति के लोगों को अपनी ओर खींचा और मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों को भाजपा का डर दिखा कर अपने पाले में मिला लिया और जो वोटबैंक कांग्रेस का था उसका आपस में बँटवारा कर लिया , संभव है कि गोलीबारी और तब दिये गये उत्तेजक बयान मुलायम सिंह यादव और संघ की मिली भगत का एक कारण मात्र हो।

इस देश का दुर्भाग्य है कि जहाँ अन्य सभी जनता अपने “उज्ज्वल भविष्य” के लिए पार्टी को वोट करती है वहीं देश का मुसलमान अपने और अपने बच्चों बहन बेटियों के “सुरक्षित भविष्य” के लिए , हालाँकि “मुजफ्फरनगर” ने मुसलमानों के इस भ्रम को भी तोड़ दिया है कि “समाजवादी पार्टी” या यादव पिता-पुत्र उनके जानमाल की सुरक्षा कर सकते हैं क्युँकि जब मुजफ्फरनगर में मुसलमानों का कत्लेआम हो रहा था तो बाप-बेटे अपने दरबारियों के साथ अपनी ऐशगाह सैफई में माधुरी दिक्षित के “एक दो तीन चार पाँच छः सात आठ नौ दस इग्यारह बारह तेरह” पर बेशर्मी के ठुमके लगा रहे थे। मुसलमानों के वोट की कीमत पर अपने घमंड पर इतराने वाले आज़मखान उनकी सुध लेने तक नहीं जाते।

दरअसल समाजवादी पार्टी के मुखिया की एक बहुत बड़ी कमजोरी उनकी वह नस है जो “अमर सिंह” दबाते रहते हैं और आज़मखान की कमजोर नस अमर सिंह का समाजवादी पार्टी में प्रवेश है जिसे मुलायम सिंह यादव ही नहीं उनके सभी भाई भतीजे मिलकर दबाते रहते हैं इसलिए आज़मखान को मुजफ्फरनगर के मुसलमानों से अधिक फिक्र अपनी भैंसों की लगी रहती रही है ।

“आज़मखान” और मुलायम सिंह यादव इस वक्त मुसलमानों से एक बहुत बड़ा धोखा कर रहें हैं जबकि “अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय” और “जामिया मीलिया” का अल्पसंख्यक चरित्र खतरे में है यह दोनों मुसलमानों के घोषित मसीहा चुप हैं । दोनों के अलग अलग स्वार्थ हैं ।आज़मखान का स्वार्थ यह है कि कभी “अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय” छात्रसंघ के महामंत्री रहे आज़मखान की प्राथमिकताएं उनके द्वारा स्थापित “जौहर विश्वविद्यालय” है और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय तथा जामिया मीलिया में मुसलमानों का प्रवेश मुश्किल होगा तो “जौहर विश्वविद्यालय” में मुस्लिम छात्रों की संख्या बढ़ेगी और यह विश्वविद्यालय आज़मखान के घमंड के परचम को लहराएगा ।मुलायम सिंह यादव वही पुरानी राजनीति कर रहे हैं जिसमें मुसलमानों को भाजपा जितना नुकसान पहुँचाएगी मुसलमान उनकी तरफ डर कर उतनी ही मजबूती से जुड़े रहेंगे ।

आज मुसलमानों के साथ समस्या उनके सामने विकल्पहीनता की है और यदि वह विकल्प उत्तरप्रदेश के चुनाव में मुसलमानों को मिल गया तो जो मेरा जमीनी स्थिति के आधार पर आकलन है सैफई में फिर कभी माधुरी दिक्षित ठुमके नहीं लगा पाएँगी ।

बेहतर होता कि जीवन के इस अंतिम पड़ाव में मुलायम सिंह यादव मुसलमानों से उनके विरुद्ध साजिशें करने और झूठे वादे करने पर माफी माँगते तो परन्तु धोती के नीचे पहनी “खाकी चड्ढी” ऐसा होने नहीं देगी ।
दरअसल देश की जनता मुर्ख नहीं बल्कि महामुर्ख है और यह ये नेता अच्छी तरह से जानते हैं और मिलकर जनता को मुर्ख बनाते हैं।