muslims-against-ISIS

अगर .. अगर वास्तव में हम आईएसआईएस को सदा सदा के लिए नेस्तनाबूत करना चाहते हैं तो यहाँ आई इस आई इस इस्लाम के अनुसार या खिलाफ है या नहीं इससे ज्यादा आईएसआईएस के खात्मे की जिम्मेदारी किसकी है यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है !

क्यों की इसमें अगर हम इस्लाम पर अटके रहें तो खुद आई इस आई इस में शामिल होने के बराबर होगा ! जी हाँ !! वो चाहते ही हैं की ऐसा विवाद हो !! और हर वारदात के बाद हो ! इस्लाम पर ,कुरआन पर ऊँगली उठती रहे ताकि पहले से ही इनकी वजह से आहत ,जलालत झेलते लोग केवल इस बात के लिए आई इस आई आई में बिना सोचे समझे शामिल होते रहे की जैसे अब इस्लाम के लिए यह अस्तित्व का सवाल हो ! और इस निर्णायक मोड़ पर isis में शामिल हो इस्लाम को बचाना उनके जीवन का अंतिम उद्देश्य हो !!

याद रहे जब भी धर्म पर अस्तित्व का सवाल आता है धर्म प्रतिष्ठा की नहीं सोचता ! पहले धर्म बचे बाकी बाद में देखि जायेगी ! बेशक कुछ ऐसी ही मिलती जुलती सीख इन आतंकवादियों की किस्मत से कुरआन में भी हैं !……….. इतना कहने भर से धर्म के अस्तित्व के सवाल पर दौड़ पड़े धार्मिकों के हाथ में बंदूके उठ जाती हो और आतंक का अपना मकसद सक्रीय हो उठता हो तो किसके पास फुरसत है उसके सही सन्दर्भ तक पहुँचने की ? वो आप चर्चाओं में करते रहो ! इस्लाम को बचाने के लिए आसमान उठाते रहो ! वो तो अपना काम कर चुके !!

और हम हर हमले के बाद इस्लाम को दोष देने या बचाने में लग जाते हैं ! लेकिन कभी देखा है आपने जो भी देश इन आतंकवादियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाही करता है फिर ओसामा का खात्मा हो ,सीरिया पर हमला हो या अभी अभी फ़्रांस की प्रतिक्रिया में उठे आंतरराष्ट्रीय ध्रुवीकरण ! ,या फिर खुद हमारा भारत ,अब पाकिस्तान का तो सवाल ही नहीं उठता !! कहीं भी ,कभी भी किसी भी देश ने इसका न तो इल्जाम इस्लाम पर लगाया और न ही इसकी पूर्ण जिम्मेदारी इस्लामिक कंट्री पर छोड़ अब वही इसपर कार्यवाही करेंगे इस इंतजार में बैठे रहे ! या फिर उनपर प्रतिबन्ध लगाते रहे !! याद रहे मैं सिर्फ आतंक्वाद की बात कर रहा हूँ ! राजनैतिक सत्ता संघर्ष की नहीं ।

इसीलिए इस्लाम पर इल्जाम लगाने से पहले सोचने वाली बात यह भी है की अगर इस्लाम ही इसके केंद्र में होता तो दुनिया के देश सीधे इस्लाम से ही हर कार्यवाही शुरू करते ! उन आतंकियों पर बम बरसाने की जगह कुरआन के पन्ने उसके सही अर्थों के साथ बरसाए जाते ! उनके हैवानियत के वीडियो के जवाब में इस्लाम के सर्वमान्य न सही लेकिन आतंकवादी जिन धर्मगुरुओं के कहे पर चल रहे हैं पहले उनको पकड़ा जाता और उनके ही द्वारा कहलवा कर या ब्लैक मेल कर आतंकियों से हथियार डलवाये जाते ! लेकिन ऐसा कुछ करने की जगह आतंकवादियों पर सीधी कार्यवाही जैसे कदमो और साथ साथ खुद की सुरक्षा पहले खुद कैसे करें इसको प्रार्थमिकता दी जा रही है ! क्यों की आतंकवाद किसी धर्म की सिख से ही पैदा होता तो उसी धर्म के लोगों के उनके खिलाफ हो जाने से वो खत्म भी हो जाना चाहिए ! लेकिन दुनिया देख रही है की आतंकी खुद ये कह रहा है की आतंकवाद तो बन्दुक की आवाज से ,मौत के डर से भी खत्म नहीं होगा फिर वहां इस्लाम की क्या औकात ? और इनके खिलाफ होने वाले मुसलमान भी फिर किस खेत की मूली ?

इसीलिए आतंकवाद के खिलाफ कार्यवाही किसी धर्म के हवाले से या भरोसे नहीं की जाती ! क्यों की वहां धर्म की कोई कीमत नहीं ये खुद आतंकी साबित कर रहा होता है ! असल में वो आपको धर्म में उलझा कर अपनी हठवादिता को अंजाम देने निकला होता है इसीलिए उनका खत्मा ये हमारा पहला कदम होना चाहिए ! लेकिन हम उनकी जगह वो जिस धर्म का नाम लेकर घिनौने काण्ड जानबूझकर करते है हम उन्ही के प्लान के अनुसार उस धर्म या उस धर्म के लोगों को बिना यह देखे की उस धर्म के आम लोग भी आतंकवाद के खिलाफ हैं या नहीं उन्हें सजा देने,बदनाम करने ,जलील करने निकल पड़ते हैं और जिसका सीधा फायदा आतंकियों के बढ़ोतरी से आतंकवादियों को ही होता है ! इसी तरह धर्म को बचाने की बेवजह कोशिश इसके धर्म से सम्बन्ध को पहली स्वीकृति देती है और जाहिर है नाकामयाब होने पर अंतत: आतंकवादियों को ही फायदा पहुंचाती है ! .

अब यहाँ इस्लाम पर सवाल है तो यह स्वाभाविक है आतंकवादियों द्वारा बताये जा रहे इस्लाम को सही मानकर इस्लाम पर सवाल उठाने वाले की गलतफहमी को दूर करने की कोशिश खुद को इस्लाम का ठेकेदार कहने वालों द्वारा होगी ही ! लेकिन ये लोग प्रत्यक्ष आतंकियों से कोसो दूर ऐसी कोशिश कर आम लोगों की इस्लाम के प्रति गलत फहमी दूर कराने की विफल कोशिश करने की जगह वो जो इस्लाम को लेकर गलतफहमी की वजह से खून खराबा कर रहे हैं उनकी गलतफहमी दूर करने के लिए उनके सामने जाकर अपनी आतंकवाद के खिलाफ मंशा का सबूत दें ! ऐसे भी वो मारते वक्त किसी के मुसलमान होने भर से उन्हें बक्श नहीं रहे तो भेजें अपने फतवे निकालने वाले ,धर्मांतरण करवाने वाले मुल्ला मौलवियों और जाकिर नाईक जैसे प्रचारकों को उन्हें समझाने , बंधकों को छुड़वाने या फिर उन्हें बातचीत की टेबल तक लाने के लिए ! अगर सच्चे इस्लाम पर सवाल से इतने ही आहात हो तो इस्लाम के लिए इतनी कुर्बानी तो लाजमी है ! यहाँ बहस में क्यों लगे पड़े हो ? बहस करने वाला ज्यादा से ज्यादा इस्लाम को गाली देगा ,लेकिन किसी भी वजह से हो जो खुद इस्लाम को ही एक गाली बनाने पर तुले हैं उनका केवल मुंह ही नहीं ,हाथ ,पैर ,शुक्राणु तक सब हमेशा के लिए बंद करना किसी भी बहस के ,आरोप प्रत्यारोप के नतीजे से कहीं ज्यादा बेहतर इस्लाम को निर्दोष साबित करेगा ! यह क्यों नहीं समझते ?

यहाँ आतंकवाद पर किसी धर्म को घसीटने और बचाने में अपनी अपनी शक्ति व्यर्थ गंवाने वालों को यह समझना जरुरी है की आतंकवाद एक प्रक्टिकल प्रॉब्लम है जिसका सिर्फ और सिर्फ प्रक्टिकल सलूशन ही एकमात्र उपाय है ! ठीक वैसे ही जैसे जंग में दुश्मन सामने हो तो किया जाता है ! और उनकी और से जंग कब की शुरू हो चुकी है | बस, हमें अब पता चल रहा है ! वह इसीलिए क्यूँ की हम उन्ही की रणनीति के शिकार थे ! मित्रों अंत में केवल इतना कहना चाहूँगा की चर्चा ,धर्म यह सब इंसानों के लिए लागू होने वाले उपाय हैं और आतंकवादी किसी सूरत में इंसान नहीं इसपर फिर से किन्तु, परन्तु लगाओगे तो याद रहे जाने अनजाने फिर से आप खुद आई एस आई एस की चाल में फंसोगे !