Arab-League-Members
६ अक्टूबर १९७३ विशव की इतिहास का एक ऐसा दिन जिस ने पूरी दुनिया  का मिजाज बदल दिया था .उस दिन इजराइल और अरब के बीच युद्ध शुरू हुई थी ये युद्ध जंगे यौमे कपूर या जंगे रमजान कहलाता है . इस जंग के दौरान जापान ,अमरीका और यूरोप ने इजराइल की मदद की थी जिस के परिणामस्वरूप अरब देशो ने इन देशो को तेल बेचना बंद कर दिया था जिस के कारण इन देशो की अर्थयवस्था  बर्बाद हो गयी , कल कारखाने बंद हो गए , विधुत संचार में बाधा पड़ने लगी ट्रैन , बस गाड़िया रुक गयी मतलब इन देशो का पूरा निजाम अस्त बयस्त हो गया . ये संकट १९७६ यानी  ३ साल तक जारी रहा उअर इस संकट ने दुनिया में कई तरह की तब्दीलियाँ लायी जो आगे चल कर इंसानो को लाभ ही हुआ .
इस युद्ध से पहले दुनिया में सिर्फ एक छुट्टी होती थी , इस संकट के बाद तेल बचने के लिए जापान ,अमरीका और यूरोप ने दो छुट्टियों का एलान कर दिया जो आज कल लगभग सभी देशो में लागु है . उस समय बड़ी बड़ी और लग्जरी गाड़ियों का रिवाज था इस युद्ध के बाद छोटी गाड़ियों का चलन हो गया क्यों के इस में तेल काम खर्च होता था , छोटी गाड़ियों खास तौर जापान ने इस में सब से ज्यादा तरक़्क़ी की. पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग बाद गयी . इस संकट का सब से अधिक लाभ अमरीका ने उठाया उस ने वित्तीय भण्डार जो पहले सोने में रखे जाते थे अमरीका ने उसे डॉलर में करा लिया .
इस के अतिरिक्त इस संकट ने इन देशो में बहुत सी सामाजिक तब्दीलियाँ भी लायी , जैसे जापान ,अमरीका और यूरोप के प्रधानमंत्री , राष्ट्रपति , मंत्री अफसर आदि ने सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल बंद कर दिया , बयपारी, उधोगपतियों और आमिर लोगो ने अपनी गाड़िया गैरेज में बंद कर दिया और साइकिल इस्तेमाल करने लगे . जनता से पेट्रोल बचत की पिल की और जनता ने सरकार को पूरा सहयोग दिया .उन देशो की जनता ने भी अपनी गड्डियां बंद कर दी . उन्ही दिनों शेयरिंग ट्रांसपोर्ट का तसव्वर आया . लोग अपने घर से निकलते तो रास्ते में खड़े लोगो को अपने गाड़ियों में बैठा लेते थे और उन के जगह पे छोड़ देते थे . इस संकट के दौरान जापान ,अमरीका और यूरोप की जनता में इतना इत्तहाद था के उन को पेट्रोल की जरुरत होती थी मगर वो लेने नहीं जाते थे . यूरोप में उन दिनों ये नारा लगते थे के ‘ हम पेट्रोल के बिना भी जिन्दा रह सकते है ” . पेट्रोल बचाव की ये तहरीक इस क़दर कामयाब हुई के १९७६ में अरब देशो को मजबूरन पेट्रोल की पाबन्दी हटानी पड़ी