ranjit-singh

महाराजा रणजीत सिंह (१७८०-१८३९) पंजाब के महान राजा थे। वे शेर-ए पंजाब के नाम से प्रसिद्ध हैं। महाराजा रणजीत एक ऐसी व्यक्ति थे, जिन्होंने न केवल पंजाब को एक सशक्त सूबे के रूप में एकजुट रखा, बल्कि अपने जीते-जी अंग्रेजों को अपने साम्राज्य के पास भी नहीं फटकने दिया ।. रंजीत सिंह को मुसलमानों का दुश्मन कहा जाता है जाहिर है कि वास्तविकता के विपरीत है . मुगल साम्राज्य के पतन के बाद अराजकता फैल गई , राज्य स्वतंत्र हो गए . अफगान लुटेरों अबदाल और नादरशाह दुर्रानी ने पंजाब पर हमला करके पंजाबियों जीना मुश्किल कर दिया . ऐसे में रणजीत सिंह ने पंजाब से छोटी राज्य समाप्त कर शांति शांति बहाल किया तो लोगों ने शांति की सांस ली . हिंदू , मुस्लिम , सिख सभी रंजीत सिंह के नेतृत्व में एकजुट हो गए .रणजीत सिंह ने पंजाब को न केवल अफगान हमलावरों से बचाया बल्कि पहली बार पंजाबी सेना ने अफगान क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया और एक हजार साल के इतिहास का रुख मोड़ दिया .
रंजीत सिंह ने राजनितिक और सरकारी काम निपटाने के लिए एक दिलचस्प तरीका खोज था वह इस को “लिम्काउ” कहता था . लिम्काउ पंजाबी शब्द है जिस का मतलब खींचना , लटकना या घसीटना होता है . रंजीत सिंह के सामने जब कोई ऐसा मसला आता था जिस के पक्ष में फैसला नहीं देना चाहता था और उस का ख्याल होता था के फ़ौरन इस पर फैसला देने से  सल्तनत में फसाद फ़ैल जाये गई या जनता में उस की छवि ख़राब हो जाए गई तो  वह अपने वज़ीर  को कहता था  लिम्काउ, इस का मतलब होता था के इस समस्या को इतना उलझा दिया जाए के जनता इसे भूल जाए और बाद में राजा अपने सुविधा अनुसार इस पर फैसला करता था . रंजीत सिंह की दूसरा तरीका था “डरावु” उस का कहना था के अगर हुकूमत पर पक्कड़ रखनी है तो जनता को डरा कर रखो कभी उन्हें दुश्मन , कभी सुखा , बिमारी से डरा कर रखता था .
अब देखिये आजादी के बाद भारत में किसी भी पार्टी की सत्ता में आई उस ने महाराजा रंजीत सिंह की स्टाइल को ही अपनाया .जनता की कोई भी समस्या हो या कोई मसला उसे हर पार्टियो ने ही लटकाया . अब के दौर में थोड़ा इस टेक्निक को एडवांस कर दिया गया है जैसे किसी के खिलाफ इंक्वॉयरी करनी है तो सीबीआई  को सौंप दो , कोई मसला है तो एक कमिटी बैठा दो — २०-२० साल तक कमिटी रिपोर्ट नहीं सौंपती और धीरे धीरे जनता उस को भूल जाती है बाद में हुकूमत अपने हिसाब से फैसला करती है .
रंजीत सिंह का दूसरा तरीका भारतीय राजनीति में हर पार्टी ने इस का भरपूर इस्तेमाल किया . जनता को डराने का जैसे कांग्रेस ने मुसलमानो को सम्प्रदायिकता और सेक्युलर के नाम पे डराती रही और अब भाजपा हिन्दुओ को मुसलमानो के नाम पर डरती है . ये यही फार्मूला है जो आज कल भारतीय राजनीति में सब से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है .