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देश के प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी ने चुनाव से पहले कहा था के आप सिर्फ मुझे ५ साल का मौक़ा दे फिर देखे में किस तरह आप सब की समस्या ख़त्म कर दू गा और भारत को विकास के राह पर ला दू गा.यही भाजपा सत्ता में आने के बाद अब कहने लगी है के पांच साल में कुछ नहीं होता हमें १५ साल का समय चाहिए तभी आप से किया गया वादा पूरा हो सकता है . आइये आप को इतिहास में ले चलते है .

शेर शाह सूरी जिस का असल नाम फरीद खान था उस ने भारत पे ( १५४०-१५४५ ) तक हुकूमत की और इस पांच साल में भी सिर्फ एक महीने ही राजधानी में बैठा और लगातार युद्ध में बयस्त रहा कभी बंगाल , मालवह , सिंध , कभी राजपुताना ,मुग़ल आदि से युद्ध करता रहा लेकिन इस अफरा तफरी में भी उस ने भारत में जो काम किया उस की मिसाल नहीं मिलती है. ये पहला शासक था जिस ने अपने हुकूमत और जिलो में विभाजित किया उस ने अपनी हुकूमत ४७ जिलो में बांटी थी और उन को सरकार कहा जाता था और आज भी सरकार इस्तेमाल होता है .उस ने तहसीलो को देहातो में बांटा और चौकीदार , पटवारी , नम्बरदार बादशाह की तरफ से नियुक्त होते थे और आज भी ये ओहदा पाये जाते है . उस ने देहात और गाॉव को एक अलग मान्यता दी और उन को अपनी अलग पहचान दी .

ये हिंदुस्तान का पहला बादशाह था जिस ने जमीं को बिगहो में बांटा और हर बीघे के लिए अलग खसरा नंबर बनवाया . इस ने जागीरदारी प्रथा को ख़त्म करने की कोशिश की .शेर शाह ने डिप्टी कमिसनर का ओहदा बनाया . उस के अतिरिक्त जज , सिविल जज और चीफ जस्टिस का ओहदा बनाया! शेर शाह पहला बादशाह का जिस ने केंद्रीय आर्मी का रूप रेखा दिया और उस ने फ़ौज के लिए पय -सक्ले तय किये .शेर शाह ने रुपयो को सोलह आनो, दो अठन्नियो ,चार चवन्नियो में बांटा.ये भारत का पहला बादशाह था जिस ने वित्त विभाग , रक्षा विभाग और विदेश मन्तर्ालय बनाया .

शेर शाह ने डाक बयवस्था की शुरुवात की .इस ने सेक्रेट्रिएटे के स्वरुप दिया , इस ने चीफ जस्टिस , सेशन और सिविल जजो के पद की शुरुवात की .शेर शाह शायद दुनिआ का पहला बादशाह था जिस का मन्ना था राज्य का गवर्नर सिविलियन होना चाहिए .ये पहला बादशाह था जिस ने बयपार को हुकूमत का बुनियाद बताया और विदेशी बेपारियो को पूरी सुरक्षा प्राप्त कराया. उस का मन्ना था के जब तक अर्थबयवसता हुकूमत की अच्छी नहीं हो गई

शेर शाह का नाम पूरी दुनिया में जिस के लिए प्रसिद्ध हा वह है परिवहन .उस ने पांच बरसो में चार बड़ी सड़के बनवायी .पहली सड़क आगरा -देल्ही-पेशावर -लाहोर इस को ग.टी.रोड भी कहते है . , दूसरी सड़क आगरा -बनरस , तीसरी सड़क आगरा -जोधपुर -चित्तोड़ और चौथी सड़क लाहोर -मुल्तान .उस ने इन सड़को के किनारे पेड़ लगववाये , हर दो कोस पर सराय बनवाए कुंवे खुद्ववाये औए डाक खाने बनाये . ये पहला और आखरी बादशाह था अगर कोई बयपारी लूट जाता था तो वहा की हुकूमत बर्खास्त कर दी जाती थी .शेर शाह की ५ साल की हुकूमत मुगलो के ४०० साल की हुकूमत से अच्छी थी .

मेरे कहने का मक़सद है के अगर किसी भी हुकूमत में अगर लगन और जज्बा है तो काम वक़्त में भी काम कर सकता है इस को शेर शाह ने प्रूफ किया . मगर अफ़सोस के आज के दौर के लोग सिर्फ सत्ता के लालची है और सिर्फ सत्ता पर कब्जा करना चाहते है . कांग्रेस या भाजपा सिर्फ जनता को बेवक़ूफ़ बना रही है .