syria

by — सैयद आसिफ अली

नन्हे आयलान कुर्दी की मौत ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है, उस नन्हे ने अपनी जान देकर लाखों शरणार्थियों के लिए पनाह के रास्ते मुहैया करा दिए ! युद्ध की आग में झुलसते सीरिया से शरण की आस में अपने माँ-बाप के साथ तुर्की पहुँचने की कोशिश करते आयलान कुर्दी की मौत समुद्री हादसे में तुर्की के तट पर हुई थी ! और बीच पर उस नन्हे आयलान कुर्दी के फोटोग्राफर नेलूफर डेमिर के लिए हुए उसके फ़ोटोज़ ने दुनिया में शरणार्थियों के लिए सहानुभूति की लहर पैदा कर दी !

मगर अायलान कुर्दी जैसे न जाने कितने बच्चे अपने मुल्कों में युद्ध की विभीषिका की भेंट चढ़ रहे हैं, इनमें फिलस्तीन का हाल सबसे बुरा है !

इज़राईल द्वारा पिछले साल जुलाई 2014 में फिलस्तीन पर किये गए हमलों में 529 फिलस्तीनी बच्चे मारे गए, यह फोटो भी उन बच्चों में से एक का है इसका नाम इस्माईल बाक़र था, ग़ाज़ा में बीच पर खेलते वक़्त इज़राईल के मिसाइल हमले में इसके साथ तीन और बच्चे मारे गए थे, इनकी उम्र 9 से 11 साल के बीच थी ! बाक़ी तीन के नाम मोहम्मद रमीज़ बाक़री- 11 साल, अहद अतेफ बाक़र, और ज़करिया अहद अतेफ बक़र – 10 साल !

आयलान कुर्दी हो या फिलस्तीन का यह इस्माईल बाक़र और उसके तीनो दोस्त… इन नन्हे बच्चों ने ना इज़राईल का कुछ बिगाड़ा था, ना ISIS का, न मोसाद का, ना अल-क़ायदा का, ना हूथी विद्रोहियों से इन्हे कोई मतलब ना ही यह हमास के सदस्य थे….मगर फिर भी सिर्फ पिछले एक साल में ही इन 529 बच्चों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा !

एक साल में ही इज़्राईली हमलों में मारे गए बच्चों की इतनी बड़ी संख्या के बाद भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोई प्रक्रिया नहीं हुई, ना ही कोई सहानुभूति की लहर चली, यहाँ तक कि भारत सरकार ने भी इज़राईल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव से खुद को अलग कर अप्रत्यक्ष रूप से इज़राईल का ही समर्थन किया !

आज जिन यूरोपीय देशों ने सीरियाई शरणार्थियों के लिए अपनी सीमायें खोल दीं हैं, उनकी सरकारों ने इज़राईल के विरुद्ध एक शब्द नहीं बोला !

बात आती है अरब देशों की तो आज विश्व सीरियाई शरणार्थियों के प्रति जो उनका व्यवहार है..वही उस समय भी नज़र आया था, अरब लीग हफ्ते में एक निंदा वाला बयान जारी कर इतिश्री कर लेता था, किसी भी अरब देश ने इज़राईल के खिलाफ कड़ा कूटनैतिक क़दम नहीं उठाया !

अमरीका का तेल का खेल हो या शिया सुन्नी प्रभुत्व की लड़ाई या फिर आतंकवादी संगठनो के क़ब्ज़े की लड़ाई या सत्ता उखाड़ने का प्रायोजित दंगल……जो भी है….इसके रिंग मास्टर को सभी पहचानते हैं, और उस रिंग मास्टर के इशारे पर जमूरे करतब कर रहे हैं, यह जमूरे जब तक रिंग मास्टर के इशारे पर नाचते रहेंगे……ऐसे न जाने कितने और नन्हे आयलान कुर्दी और इस्माईल बाक़र अपनी जान से हाथ गंवाते रहेंगे ! यह बच्चे नहीं मर रहे …..लहू लुहान इंसानियत सरहदों पर, तटों पर…….अपने देशों में, घरों में दम तोड़ रही है !

अब आयलन कुर्दी की मौत पीछे छूट गयी है, लोग शिया सुन्नी, सऊदी अरब, दुबई को बचाने के लिए खेमेबंदी करते नज़र आ रहे हैं, जिन्हे यह याद नहीं कि Arab Spring क्या था ? क्यों था, और किस वजह से था ! क्या वजह रही कि 2011 के बाद से अचानक मध्य पूर्व सुलग उठा, तख़्त उखड गए, सदाम हुसैन से लेकर गद्दाफी….और होस्नी मुबारक तक का ऐसा हाल क्यों हुआ ….इसके मूल में क्या है ? लगे रहिये अपने तर्कों के साथ !

करते रहिये सऊदी अरब का बचाव, असद का बचाव, ISIS का बचाव, हूथी विद्रोहियों का बचाव समर अनार्य जी ने बिलकुल सही कहा है कि ” दिक़्क़त इस्लाम में नहीं मुसलमानों में है !’

अफ़सोस !!