Pari-bora

पैसा खुदा तो नहीं लेकिन खुदा से कम भी नहीं. बात सही है. लेकिन क्या पैसा, रिश्तों से भी बढ़कर है??!! इंद्राणी मुखर्जी मामले में जो कुछ सामने आ रहा है, उस पर यकीन करें तो क्या पैसे के लिए एक मां, अपनी बेटी की इतनी निर्मम हत्या कर सकती है?? और पैसे-ऐशो-आराम-नाम-धाम के लिए क्या एक औरत कई-कई शादियां कर सकती है?? ये भी नहीं देखेगी कि सामने जो मर्द है, उसकी उम्र क्या है, उसके संस्कार क्या हैं और क्या वो उसे जिंदगीभर खुश रखेगा??!!!

इन दोनों बातों का जवाब हां भी है और ना भी. जिस तरह से समाज तेजी से बदला है और बदल रहा है, वह पूरी तरह से भोगवादी बनता जा रहा है. रिश्ते अब बस नाम के रह गए हैं. पैसा है तो रिश्ता है और अगर आपके पास पैसे नहीं हैं तो अपने भी दगा दे जाते हैं. यह जीवन की एक कड़वी सच्चाई बनती जा रही है.

वो दिन गए जब अपने पति सत्यवान की जान बचाने के लिए सावित्री यमराज से भिड़ गई थीं. आज तो ये हाल है कि अगर पति के पास पैसे ना हों तो पत्नी की नजर में उसकी कौड़ीभर भी औकात नहीं. चूंकि भारतीय समाज में आज भी घर चलाने की जिम्मेदारी मर्द की होती है, सो बीवी चाहे कमाती हो, अपने पैर पर खड़ी हो लेकिन समाज और पत्नी-ससुराल वालों की अपेक्षा यही रहेगी कि शौहर ही पूरा घर चलाए. बीवी की कमाई उसकी अपनी है. इसे वह अपने मायके वालों के ऊपर खर्च करना चाहेगी. अपने पति के घर या ससुराल वालों पर नहीं. और फिर शुरु होती है मियां-बीवी की अंतहीन लड़ाई और कई बार ये लड़ाई रिश्ता टूटने की दहलीज तक जा पहुंचती है. हो सकता है कि इसमें कुछ अपवाद भी हों लेकिन अपने आसपास मैंने ऐसे जितने भी मामले देखे हैं, उनमें पैसे के कारण रिश्तों को टूटते-बिखरते देखा है.

कहते हैं कि पैसे से इस दुनिया में आप सब कुछ खरीद सकते हैं लेकिन प्यार नहीं खरीद सकते. बात सौ फीसदी सच है. लेकिन क्या इस हकीकत से आज भारतीय समाज आंख चुराने लगा है??!! क्या materialism और पैसा-गाड़ी-मकान-बंगला-बैंक बैलेंस-भोग-विलास आज इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि इसके सामने मियां-बीवी, मां-बेटी, भाई-बहन और मां-बाप के रिश्ते पल में कांच की तरह टूटकर बिखर जाएं!!! अपने आसपास मैंने ऐसे कई मामले देखे हैं, जहां पैसों की ताकत ने रिश्तों को तार-तार कर दिया. सोशल नेटवर्क में एक लड़की से मित्रता हुई. बात-बात में उसने बताया कि वह शादी करना चाहती है लेकिन लड़का एनआरआई होना चाहिए और खूब पैसे वाला. मैंने उससे पूछा कि क्या पैसे वाला एनआरआई दूल्हा उसे विदेश ले जाकर खुश रखेगा तो बोली कि क्यों नहीं रखेगा??!! अगर नहीं रखेगा तो compromise कर लूंगी. पैसा होगा तो जिंदगी अच्छे से कटेगी. मैं चुप हो गया. बाद में पता चला कि उसे एक एनआरआई दूल्हा मिल गया है, उसकी शादी हो गई है. उनको शुभकामनाएं!

एक और महिला मित्र से बात हो रही थी तो बात-बात में जिंदगी में पैसे की अहमियत का जिक्र आया. उनका जवाब भी रोचक था. कहने लगीं कि नदीमजी, अगर आंसू ही बहाना होगा तो क्यों ना मर्सिडीज कार में बहाऊं!!! कम से कम आरामदायक माहौल तो रहेगा!!! धूप में आंसू बहाने से अच्छा है कि एसी में आंसू निकले. एक अन्य महिला मित्र का भी पैसों को लेकर नजरिया बिल्कुल साफ था. वो बता रही थीं कि आज के जमाने में जीवन गुजारना इतना मुश्किल है कि पैसे के बिना कुछ भी नहीं हो सकता. सो पति के पास पैसा होना बहुत जरूरी है. It matters a lot u know !!!

रुपये-पैसे-धन-दौलत की प्रतिष्ठा आज इस कदर बढ़ी है कि मियां-बीवी के रिश्तों में हर कुछ पैसों से ही तौला जाने लगा है. एक मित्र हैं, जिन्होंने एक नई गाड़ी खरीदी. लेकिन पैसे कम पड़ रहे थे तो बीवी ने भी उसमें अपने पैसे मिलाए. कुछ ही दिनों बाद उनकी गाड़ी कहीं ठुक गई. गाड़ी पर स्क्रैच आ गए, अगला भाग चपटा हो गया. इसके बाद बीवी ने घर में हंगामा मचा दिया. कहने लगीं कि ये अकेले की तुम्हारी गाड़ी नहीं है, जो एक्सिडेंट करके चले आए. इसमें आधा मेरा भी पैसा लगा है. मेरे मित्र बहुत उदास थे. कहने लगे यार, बीवी की ये बात मुझे चुभ गई. बताओ, उसकी नजर में मेरी जान की कोई कीमत नहीं. अगर एक्सिडेंट में मुझे कुछ हो जाता तो !!! लेकिन उसे मेरी कोई फिक्र नहीं, गाड़ी की चिंता ज्यादा है.

एक और मित्र हैं. उन्होंने शादी की तो एक फ्लैट खरीदा, जिसे बीवी के नाम करा दिया. कुछ दिनों बाद एक प्लॉट खरीदा तो उसे भी बीवी के नाम कराने जा रहे थे लेकिन उनके मित्र ने रोका कि सब कुछ बीवी के नाम क्यों कर रहे हो!!! ऐसा करो, प्लॉट की रजिस्ट्री जॉइंट करवा लो. उसने ऐसा ही किया. शादी के कुछ दिनों बाद तक तो सबकुछ ठीकठाक चला लेकिन अचानक उनके जीवन में तूफान उठ खड़ा हुआ. उसके जीवन में ससुराल वालों का दखल इतना बढ़ा कि उसे इलाज कराने के लिए जब अपनी बहन को दिल्ली बुलाया तो उसे किराए के मकान में रखना पड़ा. कारण ये था कि उनकी पत्नी और ससुराल वाले ये नहीं चाहते थे कि उनकी बहन वहां रुके, जहां वे रहते थे. इसके बाद उनके -ज्ञानचक्षु- खुले और उन्होंने तय किया कि जो फ्लैट उन्होंने अपनी बीवी के नाम कराया है, उसे अब अपने ऩाम कराएंगे. इसी बात को लेकर झगड़ा बढ़ गया. उनकी बीवी और ससुराल वालों ने उनको खूब जलील किया, गालियां दीं और बीवी ने डेडलाइन दे दी कि शाम इतने बजे तक तुम अपना सामान लेकर कहीं और चले जाओ. ये फ्लैट खाली कर दो. एक common friend के बीच-बचाव के बाद ही वह दुबारा अपने घर जा सके. लेकिन बात यहीं नहीं रुकी. जब वे सज्जन त्योहार मनाने दिल्ली से बाहर अपने native place गए तो उनकी बीवी और ससुराल वालों ने फ्लैट की बिजली कटवा दी. उनका मकसद सिर्फ एक था कि किसी ना किसी तरह वो बंदा फ्लैट खाली कर दे. जब वे सज्जन दिल्ली लौटे तो फ्लैट की बिजली गुल थी. उन्होंने पत्नी से बात की पर वह टस से मस ना हुई. उनका फ्लैट टॉप फ्लोर पर था और मई-जून की गर्मी में मच्छरों के बीच उस बंदे ने 20-25 दिन बिना बिजली के काटे. लेकिन फ्लैट खाली नहीं कर रहे थे. तब एक दिन पत्नी और ससुराल वालों ने मिलकर फ्लैट के लोहे के ग्रिल वाले दरवाजे का ताला ही चेंज कर दिया. मेरे मित्र दफ्तर से जब शाम को वहां पहुंचे तो ताला चेंज था. उल्टे पांव वहां से लौट गए. फिर कभी पलटकर अपने घर यानी उस फ्लैट का रुख नहीं किया. करीब डेढ़ साल से अलग रह रहे हैं, मियां-बीवी में कोई बातचीत नहीं और उन्होंने divorce देने का पक्का इरादा कर लिया है. कहते हैं जब बीवी के लिए पैसा ही important है तो उसके साथ जिंदगी कैसे कट सकती है. आगे भी ये लोग मुझे ऐसे ही धोखा देंगे.

असल जिंदगी की ये कहानियां आज तेजी से बदलते और सुविधाभोगी-महत्वाकांक्षी होते समाज की तस्वीर बयां करती हैं. इंद्राणी मुखर्जी का मामला मीडिया में छाया हुआ है तो सच्चाइयां धीरे-धीरे सामने आ रही हैं. इंद्राणी की बेटी शीना अपनी डायरी में लिखती है कि मां ने पैसे के लिए उस बुड्ढे (पीटर मुखर्जी) से शादी कर ली और नाना-नानी इसे सही ठहरा रहे हैं. उसे सपोर्ट कर रहे हैं. अब आप सोचिए कि एक किशोर बेटी के दिल पर क्या-क्या गुजरी होगी, जब उसकी मां ने पैसे-धन-दौलत और नाम के लिए एक और शादी कर ली !!! मैं तो ये सोचकर हैरान-परेशान हो जाता हूं कि क्या वाकई में इंद्राणी ने पैसों की हवस में अपनी बेटी शीना का इतनी बेदर्दी से कत्ल कर दिया होगा!!!! क्या उसके हाथ नहीं कांपे??? मां, जो ममता की मूरत होती है, क्या पैसा इतना जरूरी हो गय़ा कि जिस बेटी को कोख से जन्म दिया, बड़ा किया, उसे ही मार दिया, उसका गला दबा दिया???!!! मैं एक दिन खाना नहीं खाता हूं तो मां परेशान हो जाती हैं. रोज फोन पर उनको हिसाब देता हूं कि आज खाने में क्या बनाया है और क्या-क्या खाया. मुझे लेकर वह बहुत ही ज्यादा फिक्रमंद रहती हैं और मैं उनको लेकर. रोज उनसे पूछता हूं कि दवा ले रही हो ना. फल खा रही हो ना!!!

मेरे लिए जीवन में पैसा कभी अहम नहीं रहा. इसको लेकर ताने भी सुने. बचपन के दोस्तों ने कहा कि कमा लो, फिर मौका नहीं मिलेगा. पर हराम की कमाई को लेकर मेरा दिल कभी गंवारा नहीं किया और ना कभी करेगा. जब दैनिक जागरण कानपुर में था तो रोज शाम एक जगह बिरयानी खाने जाता था. कुछ ही दूर पर एक रिक्शे वाले का घर था. वह जब थका-मांदा शाम को घर आता तो उसके बच्चे उससे लिपट जाते. फिर वह बाहर चारपाई डालकर बैठ जाता. बीवी उसके बगल में बैठ जाती और पूरा परिवार खूब हंसता-बोलता. ये देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता. सोचता कि रिक्शा वाला कितना धनी है. उसके पास प्यार की दौलत है. जेब में ज्यादा पैसे नहीं हैं तो क्या हुआ??!! इस प्यार की दौलत के आगे दुनिया के सारे ऐशोआराम कुर्बान !!!

इसी फेसबुक पर एक मित्र ने एक दफा लिखा था कि जब वह तंगी की हालत में थे तो वह अपनी मोटरसाइकिल बेचना चाहते थे. पर बीवी ने उन्हें रोक दिया. कहा कि मेरे गहने किस काम के हैं. उसे बेचकर काम चला लीजिए. आप रोज पान की दुकान पर मोटरसाइकिल से जाते हैं. इसे बेच देंगे तो पान खाने पैदल जाइएगा. यह मुझसे देखा नहीं जाएगा…ऐसी अनगिनत कहानियां हैं जो ये बताती हैं कि प्रौढ़ हो चुकी पीढ़ी में कितना प्यार, आपसी सम्मान अभी भी बचा हुआ है. लेकिन नई पीढ़ी उससे एकदम उलट है. उसे पैसा चाहिए. पैसा है तो प्यार है. वरना सब कुछ यहां बाजार के माफिक हो गया है. मीडिया में ही एक मित्र हैं जो करीब डेढ़ लाख की सैलेरी पाते हैं. एक दिन कहने लगे कि यार, पैसा और कमाना है. मैंने पूछा क्यों?? इतना काफी नहीं है??!! वे बोले कि नहीं. यहां सब कुछ यानी हर रिश्ता पैसे पे टिका है. अगर एक दिन घर में बच्चों के लिए दूध नहीं आया तो यही बीवी गाली देगी. बच्चे जब बड़े हो जाएंगे तो कहेंगे कि बुड्ढे तुमने मेरे लिए क्या किया!!! मैं उसकी बातें सुनता रहा और सोचता रहा कि क्या वाकई पैसा इतना ताकतवर हो गया है कि अब सब कुछ उसी से तौला जाएगा!!!!

और जिनके पास पैसा है, क्या वो सुखी हैं?? फिल्म शराबी तो आपने देखी ही होगी, वही अमिताभ बच्चन वाली. उसमें पैसे के पीछे पागल बाप यानी प्राण को छोड़कर अमिताभ घर से निकल जाते हैं, मुंशी जी भी उनके साथ चल देते हैं. अमिताभ के पास बाप का पैसा तो होता है लेकिन बाप का प्यार नहीं होता. बाप का वह प्यार उसे मुंशी जी से मिलता है. सारी लड़कियां पैसे के चलते उसके आसपास फटकती रहती हैं पर अमिताभ को पैसे से प्यार करने वाली नहीं, उससे प्यार करने वाली लड़की चाहिए होती है, जो जया प्रदा के रूप में उसे मिलती है. मतलब कि अगर आपने बहुत पैसा कमा लिया तो उसका करोगे क्या??!! दाल-चावल ही तो खानी है. लेकिन उस पैसे के पीछे भागकर आपने जो रिश्ते गंवा दिए, उसे आप कभी पैसे से खरीद नहीं सकते. पर अफसोस, कम लोगों को ही ये अक्ल समय पर आती है. और जब होश ठिकाने आता है तो सब कुछ लुट चुका होता है. अखबारों में ऐसे कई मामले आपने देखे-पढ़े होंगे कि नाम-पैसा-शौहरत होने के बाद भी किसी ने खुदकुशी कर ली. क्यों कर ली, ये बात विरले ही सामने आ पाती है. मेरा मानना है कि ऐसे हर मामले में रिश्तों की टूटन एक मुख्य कारण होता है. आपके पास नौकर-चाकर तो हो सकते हैं, लेकिन प्यार करने वाला शख्स तब तक आपसे बहुत दूर जा चुका होता है. और तब तन्हाई आपको काटने लगती है. दुनिया आपको बोझ लगने लगती है. और फिर एक दिन आप इन सब से मुंह चुराने लगते हैं और खुद को ही खत्म कर लेते हैं. ज्यादातर मामलों में यही होता है.

सो दोस्तों!!! पैसे के पीछे मत भागिए. पैसा जरूरी है लेकिन इतना नहीं कि उसके लिए आप अपने रिश्तों की बलि दे दें. अपनों को खुद से दूर कर दें. जब भगवान-अल्लाह ने इंसान बनाया है तो इंसान ही बने रहिए ना. ये कैरियर, ये पैसा, ये नाम, ये शोहरत, सब बेमानी और दुनियावी बातें हैं. मुझे खुद इस बात का बहुत-बहुत मलाल है और मरते दम तक रहेगा कि कैरियर के चक्कर में मैं अपने अब्बू का ख्याल नहीं रख सका. एक बेटे का फर्ज नहीं निभा सका. और वक्त ने मुझे भूल सुधार का मौका भी नहीं दिया. अब्बू हम सब को छोड़कर चले गए पर मेरे अंदर कचोटते उस दर्द का मैं क्या करूं, जो मुझे हर सेकेंड सालता रहता है. रुपये-पैसे से दूसरों को मत तोलिए यारों. ये तो हमारे समाज की बनाई एक व्यवस्था है, जो कागज के टुकड़ों से किसी की हैसियत आंकता है. पर रिश्तों की गली में इन कागजी टुकड़ों का कोई मोल नहीं. एक मां-एक बीवी-एक शौहर-एक भाई-एक बहन की प्यार भरी आवाज आपमें वो एहसास जगा सकती है, आपको वो सुकून दे सकती है, जो सोने-चांदी के महल भी नहीं मिल सकते.

दुनिया में रिश्ते बनाइए, पैसा नहीं. रिश्ते आखिरी सांस तक आपके साथ रहेंगे मगर पैसा आपको सुकून से मरने भी नहीं देगा. इसके लिए या तो कोई मां, अपनी बेटी को मार देगी या फिर कोई बीवी अपने शौहर को घर से निकाल देगी. खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है. सो इस दुनिया में अगर कुछ कमाना है तो मुहब्बत की दौलत कमाइए. दुआएं लीजिए. ये इस दुनिया में ही नहीं, उस दुनिया में भी आपके बड़े काम आएगी