मोहम्मद जाहिद

औरंगज़ेब से संघियो को क्यों नफरत है !

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दिल्ली सरकार ने मुगल शहंशाह औरंगज़ेब के नाम की एक मात्र सड़क का नाम बदलकर डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के नाम से कर दिया तो उसे बधाई , मेरी नज़र में उसने एक बहुत अच्छा काम किया ।क्योंकि एक तो दक्षिण और वाम इतिहास कारों द्वारा इसी भारत में औरंगजेब को खलनायक बना दिया गया और ऐसी नफरत भर दी गई कि उनके नाम की सड़क पर चलने वाले या उस औरंगजेब रोड को कागज़ों पर लिखने वालों से कम से कम रोज रोज मिलने वाली नफरत और गालियों से तो औरंगजेब को छुटकारा मिला ।

इतिहासकारों में वामपंथी इतिहास कारों को औरंगजेब इसलिए पसंद नहीं थे क्योंकि वह अपने धर्म के कट्टर अनुयायी थे और वामपंथी धर्म पसंद ही नहीं करते , उन वामपंथी इतिहासकारों की बनाई ज़मीन पर फसल उगा कर काटी दक्षिणपंथी संघी इतिहासकारों ने क्योंकि औरंगजेब कट्टर इस्लामिक व्यक्ति थे और दक्षिणपंथियों को इस्लाम से ही चिढ़ ।इस तरह लगभग सभी इतिहासकारों की गलत लेखन से औरंगजेब इस देश के खलनायक हो गये , और उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल वी एन पांडे जैसे सच लिखने वाले इतिहासकार नक्कारखाने की तूती बन कर रह गये ।

औरंगजेब इस देश को तब याद आएंगे जब पता चलेगा कि इस देश के शासक आज हज़ारो हज़ार करोड़ रुपये अपने उपर खर्च कर रहे हैं वहीं इस देश में एक ऐसा मज़बूत बादशाह भी हुआ था जिसने अपने व्यक्तिगत खर्च के लिए शाही खज़ाने से एक रुपया भी नहीं लिया और अपने हाथों से कुरान लिखकर उसकी हदिया और टोपी बुनकर उससे मिली रकम अपने उपर खर्च किया करते थे।

औरंगजेब तब और याद आएंगे जब इस देश के नेता अपने खानदान और पुत्र पुत्री और भ्राता मोह में इस देश को बर्बाद करेंगें वहीं जब पता चलेगा कि इस देश में एक ऐसा बादशाह भी हुआ था जो इस देश को बर्बादी से कंगाली से बचाने के लिए अपने शराबी ऐय्याश पिता को कैद कर देता है और ऐय्याश शराबी भाईयों को कत्ल कर देता है ।औरंगजेब तब और याद आएंगे जब लोग यहाँ एक एक मंदिर मस्जिद के लिए खून बहा रहे हैं वहीं मज़ारों में लूटपाट और बलात्कार की घटनाओं पर औरंगजेब हजारों हजार मजारों को उखाड़ फेंकते हैं और यदि हज़रत गरीब नवाज़ अजमेर की मजार से औरंगजेब के सलाम का जवाब ना मिलता तो यह संख्या और बढ़ सकती थी ।

यह देश याद करेगा तब जब अत्याचार होगा और कैसे इसी अत्याचार के खिलाफ औरंगजेब ने एक ब्राह्मण की बेटी की इज्ज़त बचाने के लिए दिल्ली से बनारस आकर अपने मुस्लिम सेनापति के दोनों पैरों को हाथियों से बंधवा कर बीच से चिरवा दिया था , और यह देश जब उसी जगह ब्राह्मणों द्वारा बनवाकर औरंगज़ेब को तोहफे में दी गई वाराणसी की घनेडा मस्जिद देखेगा तो औरंगजेब के न्याय को याद करेगा कि औरंगजेब ने अपने न्याय के सामने धर्म को कभी आने नहीं दिया ।

यह देश तब औरंगज़ेब की निष्पक्षता को और याद करेगा जब उसे पता चलेगा कि मुग़लों के इतिहास में सबसे अधिक 368 हिन्दू मनसबदार ( वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ) औरंगज़ेब ने अपने शासनकाल में नियुक्त किए ।यह देश औरंगज़ेब को तब और याद करेगा जब उसे पता चलेगा कि हिन्दू धर्म की सबसे बड़ी कुरीति सती प्रथा पर रोक लगाने की शुरुआत करने वाले बादशाह औरंगजेब थे ।जब देश अखंड भारत की कल्पना में खोएगा तो उसे औरंगज़ेब याद आएंगे जिन्होने काश्मीर से लेकर कर्नाटक तक और तिब्बत से लेकर अफगानिस्तान तक भारत का विस्तार किया ।बताने को बहुत कुछ है पर दशकों से भरे विष को एक पोस्ट से निकाल दूँ संभव नहीं ।

दरअसल चेतन भगत ने एक बार एक पोस्ट किया था कि संघ कुछ हिन्दूओं के मन मस्तिष्क में यह झूठ बैठाने में सफल रहा कि मुग़लों ने उनके पुर्वजों पर बहुत अत्याचार किये और अब उसका बदला लेने का समय आ गया है । चेतन भगत सही थे पर यह ना कह सके कि औरंगज़ेब को उस अत्याचार का प्रतीक बना दिया गया जो कभी हुआ ही नहीं , औरंगजेब अत्याचारी थे ही नहीं हाँ कठोर कह सकते हैं जो अन्याय , जुर्म या राज्य विरोधी गतिविधियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई में विश्वास करते थे , हो सकता है कि उनके आदेश से मंदिर टूटे हों पर संघी चरित्र उन आदेश के कारणों को बताता तो अधिक उचित होता और यह भी बताता कि उनके ऐसे ही आदेश से कितनी मस्जिदों मज़ारों को तोड़ दिया गया ।राज्य हित में यदि ऐसा करना गलत है तो नरेन्द्र मोदी और वसुंधरा राजे सिंधिया तो औरंगजेब से भी बड़े अत्याचारी हैं जिन्होंने अपने शासनकाल में सैकड़ों मंदिरों को तोड़ दिया और फिर इंदिरा गांधी को क्या कहेंगे जिन्होंने स्वर्ण मंदिर में गोली चलवा दी ? दरअसल औरंगजेब वामपंथी और दक्षिणपंथियों के साजिश का शिकार हो गये जो उन्होने अपने राजनैतिक जमीन को बनाने में प्रयोग किया ।

जज़िया एक ऐसा कर था जिसकी आड़ में इन झूठे इतिहासकारों ने औरंगजेब को घृणित बादशाह बना दिया जबकि हकीक़त यह थी कि जज़िया भी उनके न्याय का ही एक उदाहरण है जिसमें यह राजकीय कर केवल हिन्दू धर्म की प्रजा पर लगाया गया क्युँकि मुस्लिम ज़कात के रूप में पहले से ही कर देते थे और इस कर के लगने के बाद 64 तरह के छोटे छोटे कर माफ कर दिये गये थे। कट्टरता और अन्याय तो तब होता जब ज़कात को हिन्दुओं के उपर भी अनिवार्य कर दिया जाता परन्तु औरंगजेब ने ऐसा नहीं किया और कोई ईमानदार मुसलमान ऐसा कर नहीं सकता , एक बात और महत्वपूर्ण है कि जज़िया की दर ज़कात से बहुत कम थी।

औरंगजेब को आज के विष भरे दौर में समझना आवश्यक है और समझने के लिए उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल वी एन पांडे की पुस्तक सर्वश्रेष्ठ और निष्पक्ष है ।और अरविंद केजरीवाल या एमएनसीडी ऐसी सड़क तुम्हें ही मुबारक जिसपर जूते चप्पल गंदगी फैलाकर तुम एपीजे अब्दुल कलाम को इज्ज़त देना चाहते हो । नाम बदलने के लिए पुनः धन्यवाद ।

औरंगजेब काश किसी ब्राह्मण की बहन बेटी से तुमने दबाव और जजबरदस्ती शादी की होती तो इस देश में तुम आज भी प्रिय होते ।

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50 thoughts on “औरंगज़ेब से संघियो को क्यों नफरत है !

  1. हरीश मंगल

    मैं पूरी तरह सहमत हूँ सड़क का नाम बदलने से।और यह संघी क्या होता है? नफरत के बीज तो आप लेख के शीर्षक के साथ ही बो देते हो,औरंगजेब से केवल संघी नफरत करते हैं ऐसा किसने कहा आपसे, भारत का हर नागरिक घृणा करता है उससे।1 क्योंकि उसने अपने ही पिता की हत्या कर दी, अब आप औरंगजेब को सही साबित करने के लिए शाहजहां को शराबी कह देते हैं और यही कोई हिन्दू लिख दे तो वो संघी हो जाएगा। 2 दारा शिकार तो शराबी नही था फिर भी उसे मरवा दिया क्योंकि वह हिन्दुओं के प्रति सहानुभूति रखता था, दारा को मरवाने के तरीके को यहाँ बताउंगा तो जगह कम पड़ जाएगी। 3 शिवाजी के पुत्र शंभाजी को जिस बेरहमी से मारा गया क्या वो कारण पर्याप्त नही औरंगजेब से घृणा करने के लिए?
    क्योंकि आप एक आतंकवादी की फांसी पर तो फांसी की सजा से ही विमुख हो जाते हैं परन्तु शंभाजी के शरीर में भुस भर दिये जाने को भी सही साबित कर देंगे। 4 सिख गुरुओं के साथ क्या हुआ ये इतिहास में दर्ज है। 5 वो अपने धर्म पर अडिग सच्चा मुसलमान हो सकता है परन्तु अन्य धर्म के अनुयायियों के प्रति घृणा का भाव ही रखता था। जजिया कर को आप सही ठहराते हैं तो अकबर मूर्ख था जिसने इस कर को हटा दिया था। अब अकबर को मूर्ख कहने पर भी आप मुझे संघी कह सकते हैं। और भी कई कारण हैं परन्तु मुस्लिम समाज की सबसे बड़ी समस्या ही यही है कि जो भी व्यक्ति कट्टर मुसलमान होता है उसे ही सब अपना आदर्श मानते हैं। दारा शिकोह को तो ज्यादातर मुसलमान जानते ही नही………

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    1. Azad Akram

      संघी मतलब देश में मुस्लिमो के प्रति हिन्दू मुस्लिम एकता में फुट डालकर अपना फायदा पहुँचाने वाले को ही संघी कहते हैं ।

      इनके दिलो दिमाग में हमेशा मुस्लिम समुदाय के प्रति क्रूरणा भरी होती है ।

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    2. Tahir shaikh

      Toh tum kya bolte ho kon he sahi. Jo tum bolonge wo sahi. Bus muze ye bata dena. Agar koi kisi jagah ka neta banjaye toh waha wo un logoko jada ijhat ya jada aadar nai karta jis samaz ka wo he usi samaz waloka. Or agar kisi jagah pahle se hi hindu muslim me kisi jagah wad vivad ho. Or us jagah koi hindu chunkar aaye toh wo kiske paksh me rahenga. Ye isliye bol raha hu kyo ke aaj india me anginat puratan mandir he. Bus muze anginat puratan masjid batao koi agar 850 sal raj karta he toh 850 sal me kya jada hona chahiye. Mandir ya masjid or agar arangajeb krur tha toh adwani ‘ modi’ or bakike toh tum nam jante hi honge wo kon he jisne masjid gira di or musalmano ko hinduo se dur kiya. Jab mandir giraye gaye tab toh ham nai the. But jab masjid giraye gayi tab ham the na. Toh annay kon karra he.

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  2. Harsh Singh

    देश जब ग्यान वापी मस्जिद को देखेगा तो भी याद करेग।

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  3. सिकंदर हयात

    अगर गुजरात दंगे ना होते तो अटल ही रहते अगर मुजफरनगर दंगे ना होते तो आडवाणी भी पि एम बन सकते थे गठबंधन सरकार में ? उम्र की जिस साँझ बेला में ये थे उसमे उदारता आ जाती हे इसी उदारता से अटल ने कश्मीर में शान्ति करवा दी थी ये कहकर सबका दिल जीत लिया था की कश्मीर को वो कानून से ही नहीं बल्कि इंसानियत के दायरे में हल करेंगे हल भी होने वाला था आडवाणी बनते तो वो भी अटल की तरह ही चलते जिस उम्र और अनुभव पर ये थे उसमे अगले चुनाव की गन्दी राज़नीति की इन्हे चिंता नहीं करनी पड़ती और देश की कई अहम समस्याओं पर ये बोल्ड और ऐतिहासिक स्टेप ले सकते थे कांग्रेस की बेहिसाब लूट से भी फिर हम बच जाते ? मगर ऐसा नहीं हुआ गुजरात से लेकर मुजफरनगर तक का असली ” बेनिफिशरी ” कौन हे ? कुल मिलाकार उपमहादीप की आम जनता को जिन्ना के बाद सबसे अधिक नुक्सान किसने पहुचाया किसने सबसे अधिक बाटा तनाव फैलाया ? किसने हिन्दू मुस्लिम आम गरीब जनता के हित पर सबसे अधिक चोट की हे ?

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    1. सिकंदर हयात

      अब इस विषय पर हम क्या बोले ? हमारे तो दोनों ही दुश्मन ? ज़ाहिद साहब आदमी सही हे मगर उनके अधिकाँश लेख उर्दू अखबारों से ही कही ना कही प्रेररित से लगते हे खेर वो लोग जो औरन्जेब का नाम हटाना चाहते हे और वो लोग जो नाम हटने से दुखी हे हमारी तो दोनों से ही नहीं बनती हे संघियो को जहा हर धर्मपर्याण मुसलमान खटकता रहता हे पूरा मुस्लिम शासन काल इनकी नज़र में पूरी मानवता का सबसे अन्धकार युग था ( जबकि मुस्लिम शासन में एक भी बार बड़े अकाल की नहीं सुनते जो अंग्रेज़ो में रोज की बात थी ) वही कुछ लोगो को ( उर्दू मिडिया में इनकी भरमार ) हर वो मुस्लिम जो कटटर हो उसकी बुराई इन्हे फिर इस्लाम की ही बुराई लगती हे जैसा की साज़िद रशीद ने बताया था सिमी के संदर्भ में इन कोई भी व्यक्ति या संघटन अपने नाम के साथ इस्लामी लगा ले तो वो फिर चाहे जो करे फिर ये उसकी निंदा करना ही नहीं चाहते किन्तु परन्तु से उसे महान या फिर उसका बचाव ही करते हे वो चाहे औरन्जेब हो या ओसामा या जिन्ना आदि खेर औरन्जेब का नाम हटाने का एक ही मकसद हे की कोई ना कोई ड्रामा करके इन बेकार सरकार पर से लोगो का ध्यान हटवाना बाकी औरंगजेब में जो अच्छाइयाँ आप बता रहे हे ऐसी ही अच्छाइयाँ लम्बे वक्त तक शासन करने वाले सभी क्रूरुर तानाशाहों में बताई ही जाती हे पता कर लीजिये हमारे आजकल के भी तो —– ?

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  4. kapil

    Kisi ke likhne se koi kharbb aa koi sachcha nahi ban jata samjhe janab
    Kisi ne Mugal ke anya raja ki burai nahi ki

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  5. wahab chishti

    ये जो दिल्ली में मान सिंह रोड है वो किस मान सिंह के नाम पर है? कहीं ये वही तो नहीं जिसे राजपूतों में बाकायदा गद्दार माना जाता है? सड़का का नाम ही बदलना है तो पहले गद्दार का नाम हटना चाहिए था। औरंगजेब के हिस्से में जज़िया है तो कई मंदिरों को ज़मीन देना भी तो है जबकि मान सिंह का कोई सकारत्मक योगदान नहीं दिखता। क्यों ना कलाम साहब के लिए वो सड़क चुनी जाती जो एक गद्दार के नाम पर है। वैसे ये वही मान सिंह है ना??

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    1. rajk.hyd

      अब्दुल कलाम जेी औरन्ग्जेब रोद मे रहतेथे ! उन्का मुर्दा शरेीर भेी वहि आया था ! इस्लिये औरन्ग जेब के बजये कलाम जेी का नाम रखा गया है ! अगर् उन्का मकान मान् सिन्घ रोद मे होता तो उस्को बदल दिया जाता !
      औरन्ग्जेब से मोह क्यो है / क्योकि वह ज्यादा कत्तर था ?
      जजिया और जकात दोनो बराबर नहेी है !
      जजिया गरिब हिन्दु पर भेी लग्ता था !
      क्या जकात तेक्स सर्कार लेतेी है ?तो आज क्यो नहेी लेति? क्या आज के मुस्लिम् सर्कार से कहेन्गे केी जकात तेक्स सर्कार लेले ? इस्लिये औरन्ग्जेब का तरिका गलत था ! अगर मन्दिरो मे कोइ गलत काम होता था तो सजा गलत काम कर्नने वालो को मिलेगेी या मदिर तोद दिये जायेन्गे ! तेग बहदुर सिन्घ जेी का कत्ल क्यो किया गया ! गुरु गोविन्द सिन्घ जेी के २ च्होते च्होते बचहे जिन्दा देीवारो मे क्यो चुन्वाये गये ? दारा शिकोह को क्यो मारा गया !

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  6. wahab chishti

    FROM WASIM AKRAM TYAGI FACE BOOK

    अखंड भारत का सपना देखने वाले कथित राष्ट्रवादियों औरंगजेब ने ही भारत को अखंड बनाया था, कश्मीर से लेकर कर्नाटक और तिब्बत से लेकर अफगानिस्तान को मिलाकर अखंड भारत बना था। नाम मिटा सकते हो मगर इतिहास कैसे मिटाओगे ? कश्मीर में बना हुआ मुगल रोड कैसे मिटाओगे ? एनडीएमसी, और केजरीवाल शर्म तुमको जरा नहीं आई। कलाम साहब से इतनी ही मौहब्बत है तो उनके लिये अलग से रोड बनाते, कॉलेज बनाते, यूनीवर्सिटी बनाते, कलाम भवन बनाते, उसके लिये औरंगजेब के नाम से बने रोड को मिटाने की क्या जरूरत थी।

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    1. सिकंदर हयात

      बिलकुल कोई जरुरत नहीं थी नाम बदलने की सही हे . लेकिन उसी तरह से आपको भी इतना दुखी होने की जरुरत नहीं हे औरगजेब में कुछ अच्छाइयाँ भी रही होगी एक अच्छे परशसक भी होंगे भी होंगे मगर कुल मिलाकर औरन्जेब अकबर की नीतियों को उलटने के दोषी हे जीससे भारत की एकता में दरार आई और उसी दरारों से अंंग्रेज़ आये गुरु तेगबहादुर का क़त्ल बिलकुल गलत था इसी से सिख इतने नाराज़ हुए की अगर जरा सा भी कन्धा सिख लगा देते तो 1857 में ही अँगरेज़ उखड जाते और ऊपर वाले का इन्साफ देखिये की जब कनरल हडसन मुगलो की नस्ल खत्म करता हुमायु टोम्ब से खुनी दरवाज़े तक घूम रहा था तब वो सिख अंगरक्षकों से ही घिरा हुआ था . इतना हाइपर होने की जरुरत नहीं हे हमारी इन्ही नीतियों ने उदार हिन्दुओ को भी संघी खेमे में धेकेला होगा जिससे ही ये जहरीली सरकार वज़ूद में आई एक तरफ तो हम रात दिन सेकुलर सेकुलर करते रहते हे दूसरी तरफ हम औरन्जेब के लिए भी दुखी रहते हे जो कही से भी सेकुलर नहीं थे और एक बात की शुद्ध सेकुलर लेखक कमलेश्वर अपनी किताब आँखों देखा पाकिस्तान में पाकिस्तानियो के हवाले से ही बताते हे की लाहोर का विशाल हीरा मंडी इलाका औरन्जेब की ही ”लगन ” से बसा था

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  7. hassan khan

    नाम ही बदलना था तो लेडी हार्डिंग कॉलेज का नाम भी बदला जा सकता था , औरंगज़ेब तो इसी मुल्क में रहा यही दफ़न हुआ और जो कुछ किया इसी मुल्क के लिए अंग्रेजो की तरह नहीं के सब इंग्लैंड ले कर चले गए ,.

    अब समझ में आय के संघ को अंग्रेजो के चमचे थे उन का आजादी में कोई योगदान नहीं रहा , तो वे राष्ट्र क्या समझे गए. अभी भी अंग्रेजो की चमचागिरी कर रहे है . भारत में लाखो अंग्रेजो के नाम पे जगह है जो बदला जा सकता है .

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  8. preet singh

    Auranjeb ne aisa kaya kiya ki Hume usse kuch seekha jaye,
    Apne bhaiyoun ko kese Mara jata hai,
    Bap ko or Behan ko jail main kese dala jata hai.
    Logon per atyachar kese kiya jata hai.
    Sikh dharam ka kayun janam hua agar ye itna shanti Priya THA.
    Ab itna mahan THA to apne ghar main bhi yehi karo or batana fir aap ko kon kon yaad rakta hai.
    Or auranjeb se Hume kaya shiksha milti hai.

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  9. hassan khan

    क्या क्या मिटाओगे ?:-
    चलो औरंगजेब के नाम हटा दिया कोई बात नहीं डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को भी सम्मान मिलना चाहिए । अब ये बताओ कि चित्रकूट के संकट मोचन मंदिर का क्या करोगे जिसे औरंगज़ेब ने बनवाया था और चित्रकूट के उन तमाम मंदिरों का क्या करोगे जो सभी औरंगज़ेब की दी हुई ज़मीन पर बने हैं ।
    ज़रा उज्जैन के महाकाल मंदिर का भी पता करके उसपर भी निर्णय ले ही लेना ।

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    1. DILIP PATHAK

      मिस्टर हुसैन खान जी हिंदुस्तान में औरंगजेब का जमीन कहाँ से आ गया जो वो मंदिर के लिए देने लगा जो अपने बाप और भाई का सगा नहीं हुआ तो हिन्दुस्तानियों का कैसे हो गया. डॉक्टर कलम जी इसके हक़दार थे जो उनके नाम को मिला. डॉक्टर कलाम जी तो हिंदुस्तान के निवासी थे आप हिंदुस्तानी मुसलमानो को गर्व होना चाहिए की उनको ये सम्मान मिला जबकि औरंगजेब एक विदेशी था जो हमारे देश को लूटने आया था उस दरिंदे के लिए आप हिन्दुतानी मुसलमान आपस में उलझ रहे हैं.ये बाते दर्शाता है की आप लोग हिंदुस्तान को अपना देश नहीं समझते.

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  10. Shadab Sahari

    बेह्तरेीन पोस्ट लेकिन उस पर अभेी संघेी लोग अपनेी आदत के मुताबिक चिल्लानाुरु करेंगे !

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  11. qutubuddin ansari

    MUJHE SAMAJH ME NAHI AA RAHA HAI KE AGAR NAAM BADLA JAA RAHA HAI TO IS ME HUNGAMA KYO HAI . AURANGZEB ZINDA NAHI HAI NA ABDUL KALAM.

    MUSALMANO IN FALTU BAAT PE HUNGAMA MACHANE SE ACHCHA HAI KE APNE EDUCATION AUR ECONOMY PE DHAYAN DO. FALTU BAATO SE BACHO

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    1. umakant

      य़किनन इससे अच्छ और सुलझा हुआ कोमेन्ट इस ब्लाग पर कोइ दुसरा नही है यहा पर तो महाभारत के युध मे दोनो तरफ से ब्रमास्त्र चले हुये है

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  12. Bablu Mehta

    मुग़ल, खासकर अकबर के बाद से, गैर-मुस्लिमों पर उदार रहे थे लेकिन औरंगज़ेब उनके ठीक उलट था। औरंगज़ेब ने जज़िया कर फिर से आरंभ करवाया, जिसे अक़बर ने खत्म कर दिया था। उसने कश्मीरी ब्राह्मणों को इस्लाम कबूल करने पर मजबूर किया। कश्मीरी ब्राह्मणों ने सिक्खों के नौवें गुरु तेगबहादुर से मदद मांगी। तेगबहादुर ने इसका विरोध किया तो औरंगज़ेब ने उन्हें फांसी पर लटका दिया। इस दिन को सिक्ख आज भी अपने त्यौहारों में याद करते हैं।

    उसने अनेक हिन्दू धार्मिक स्थलों को नष्ट किया! औरंगज़ेब किरकी (महाराष्ट्र) को गया जिसका नाम बदलकर उनसे औरंगाबाद कर दिया। 1668 ई. में हिन्दू त्यौहारों पर प्रतिबन्ध लगा दिया। 1699 ई. में उसने हिन्दू मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया। बड़े-बड़े नगरों में औरंगज़ेब द्वारा ‘मुहतसिब’ (सार्वजनिक सदाचारा निरीक्षक) को नियुक्त किया गया। 1669 ई. में औरंगज़ेब ने बनारस के ‘विश्वनाथ मंदिर’ एवं मथुरा के ‘केशव राय मदिंर’ को तुड़वा दिया। औरंगज़ेब ‘दारुल हर्ब’ (क़ाफिरों का देश भारत) को ‘दारुल इस्लाम’ (इस्लाम का देश) में परिवर्तित करने को अपना महत्त्वपूर्ण लक्ष्य मानता था।
    इतने बड़े-बड़े कारनामे करने वाले मुग़ल मुझे तो बिलकुल भी याद नहीं आएगा ! हाँ जाहिद साहब आपको जरूर याद आते होंगे …

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  13. Bablu Mehta

    और ये कितने दुःख की बात है की मुगलो के सबसे शांतिप्रिय, उदार, गैर मुस्लिमो की सेवा करने वाला औरंगजेब की मौत संघियो का गढ़ (महाराष्ट्र) के अहमदनगर में 3 मार्च सन 1707 ई. में हो गई।

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  14. Mukul

    यहाँ जिस तरह से औरंगजेब का महिमामंडन किया जा रहा है,
    वह साफ तौर से औरंगजेब के अबगुणों को जबरदस्ती गुणों के रुप में दर्शाने की एक नाकाम कोशिश नजर आती है।
    अपने पिता को जेल में डाल देना,
    भाईयों की हत्या कर देना
    तथा
    अत्यंत भयानक रुप से लोगों को सजा देना
    औरंगजेब के अत्याचारी होने को दर्शता है।
    और वह इतना अत्याचारी किसी खास बजह से था,
    ये कहरकर उसका बचाव करना पूरी तरह से बचकाना लगता है।
    इस तरह से तो हर प्रशासक,राजा या अपराधी के गलत कर्मों को सही ठहराया जा सकता है।
    कहा जा सकता है
    कि गुजरात में मुसलमानों ने गलत किया था इसलिये उन को घर में घुसकर मरवाया गया।
    अमृतसर में जो मांग की जारही थी वो गलत थी,
    इस लिये स्वर्ण मंदिर पर गोलियाँ चलवाई गई थी।
    इस तरह के तर्कों से गलत को सही या सही गलत नहीं कहा जा सकता।

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  15. lalit mishra

    यह किंवदंति हो सकती है। पर, यह किविदंति और किसी उदार मुगल बादशाह के बारे में नहीं, सिर्फ बदनाम औरंगजेब के बारे में सुनने को मिलती है कि वह अपने जीवनयापन के लिए शाही कोश को हाथ नहीं लगाता था और टोपियां सिल के अपना गुजारा करता था। और एक दिन जब खाना पकाते हुए उनकी बेगम का हाथ पक गया और तुनकते हुए उसने खानसामे की मांग की तो औरंगजेब ने कह कर इंकार कर दिया कि वह खानसामे का खर्च अफोर्ड नहीं कर सकता। वह पांच वक्त का नमाजी था और इस्लामी रवायत के अनुसार दरबार में शाही पोशाक नहीं पहनता था। शिवाजी को पराजित करने के बावजूद उसने उनकी हत्या नहीं की। उसने दारा शिकोह की हत्या की, पर पर दारा शिकोह के फायनेंसर जो उस वक्त के गुजरात के व्यापारी थे का पूरा पैसा चुकाया। उसने कई मंदिरों को जमीनें दान की, जिनमें मथुरा के मंदिर खास तौर पर उल्लेखनीय हैं। बनारस के जिस मंदिर को उसने तोड़ा उसके पुजारियों पर किन्हीं हिंदू महिला के बलात्कार का ही अभियोग था। जैसे आशाराम ने अपने हिंदु अनुयायी महिला का ही यौनशोषण किया वैसे ही! बाकी जैसे शासक होते थे वह वैसा ही था। थोड़ा सा निरंकुश! थोड़ा सा न्यायप्रिय! थोड़ा सा खुशामदपसंद। पर ऐसा उसमें क्या था कि आप उससे सदियों तक खुन्नस पालें और उसके नाम का रोड तक बदललते रहें!
    – Umashankar Singh

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  16. ramesh kumar

    सवाल औरंगजेब रोड का नाम बदलने का नहीं ,सवाल ये है कि अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एक वैज्ञानिक को ढाई किलोमीटर सड़क में समेटना भारत रत्न का कैसा सम्मान है। दिल्ली में अनेक हाई वे आकर मिलते हैं क्या इन में से एक को कलाम साहेब का नाम नहीं दिया जा सकता था। अच्छा तो यह होता कि इसरो का नाम एपीजे अबुल कलाम इसरो कर दिया जाता। दिल्ली यूनिवर्सिटी बिना नाम चल रही है इसे एपीजे अबुल कलम यूनिवर्सिटी नाम दिया जा सकता था। संघ और भाजपा की नजर में औरंगजेब खलनायक था ,ये उसका नाम हटाना चाहते थे इसके लिए दिवंगत राष्ट्रपति के नाम की बलि देना किसी भी हालत में उचित नहीं कहा जा सकता। सुधी जनों को इसका विरोध करना चाहिए क्योंकि सरकार ने स्वर्गीय कलाम को अपमानित किया है। यह ऐसा अपराध है जिसे क्षमा नहीं किया जा सकता।

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  17. sharad

    औरंगज़ेब से संघियो केी नफरत तो समज्ह मे आतेी है क्योकि औरंगज़ेब ने हमेश गैर्-मुस्लिमो पर जुल्म बरसाये….पर औरंगज़ेब, गजनेी, गौरेी आदि से हमारे देश के काफेी मुस्लिमो के प्यार का कोइ एक भेी कारन हमार्रेी समज्ह से बाहर हे ??

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  18. sharad

    औरंगजेब को महिमामंडित करने की कठमुल्लाशाही के चलते ब्लॉगर महोदय यह भी भूल गए कि…
    1-गैर-मुसलमान जनता पर शरियत लागू करने वाला वो पहला मुसलमान शासक था
    2-गैर-मुसलमान जनता पर जज़िया लागू करने वाला वो पहला मुसलमान शासक था
    3-जज़िया जबर्दस्ती का टेक्स होता हे और जकात का मतलब दान …टेक्स और दान को एक तराजू मे कोई पक्षपाती कठमुल्ला ही तौल सकता हे जिसका दिमाग इस्लामेी धर्मान्धता से पूरी तरह से बंद हो चुका हो
    4- जज़िया के तर्ज पर कितना जकात देना हे क्या कोई इसे निर्धारित कर सकता हे ?? हद हे यार ??
    5-औरंगजेब ने जीते जी ही नहीं मरने के बाद भी बाप की आखिरी ख्वाहिश नहीं मानी वो दूसरों का भला क्या करेगा ??। औरंगजेब अगर बाप की दिली इच्छा पूरी करता तो ताज में अकेली मुमताज की ही कब्र होती और पीछे काला ताज महल भी होता। लेखक व पत्रकार अफसर अहमद की किताब ‘ताज महल या ममी महल?’ में शाहजहां के इंतकाल के वक्त हुईं सारी गतिविधियों से पर्दा उठाया गया है।…..किताब ‘ताज महल या ममी महल?’ में इतिहास के इस मोड़ पर भी विस्तार से रोशनी डाली गई है। किताब के अनुसार शाहजहां ने वसीयत की थी कि उसे ताज के ठीक पीछे मेहताब बाग में दफन किया जाए।
    6-वो औरंगजेब ही था जिसने हिन्दू त्यौहारों को सार्वजनिक तौर पर मनाने पर प्रतिबन्ध लगाया था
    7-हिन्दू औरतों को इज्ज़त बचाने के लिए सती होने का सबसे बड़ा कारण मुस्लिम आक्रमांकारी ही थे हिन्दू औरतों को उसके राज में ही सर्वाधिक उठवाया गया था. औरंगजेब का प्रयास रहता था कि हिन्दुओं के मरने के बाद, उनकी स्त्रियाँ अपनी इज्ज़त बचाने के लिए आत्महत्या न कर सकें. इस जुल्म को भी सेकुलर इतिहासकार घिनौने तरीके से सतीप्रथा का बिरोध बताते हैं ??
    ८- औरंगजेब ने अपने सगे भाइयों और भतीजों की बेरहमी से ह्त्या की
    ९-उसेी ने गुरु तेग बहादुर का सर कटवाया,सिख् गुरु के बच्चो को ज़िंदा दीवार में चुनवाया ??

    पता नहेी ऐसा कौन सा महमानव नज़र आ जाता हे कठमुल्लों को औरंगजेब मे ??

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    1. wahab chishti

      शरद साहब

      औरंगज़ेब जैसा भी था यही रहा और यही दफ़न हुआ और सभी दौलत और जो भी था इसी मुल्कमे छोड़ गया . लेकिन अंग्रेज जो यहाँ आये लूट कर चले गए बल्कि उनके दौर में पूरी दौलत इंग्लैंड चली गए और सोने की चिडया को मिटटी की चिडया में तब्दील कर दिया .तो अंग्रेजो के नाम पर जो रोड , बिल्डिंग है उस को क्यों नहीं बदलते .

      अशोक १०० भाई मार कर महान बना , औरंगज़ेब ने सिर्फ ३ को मारा — सत्ता की लड़ाई ऐसे ही होता है . खैर आप को समझ में नहीं आये ग.

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      1. sharad

        चिश्ती साहब, औरंगजेब के डिस्कसन मे आपको अशोक का हवाला देने की जरूरत किसलिए पड़ती हे जनाबः) बात औरंगजेब की हो रही हे तो उसी पर डिस्कसन करने का जिगरा रखिए ?? अगर औरंगजेब मे खूबिया होंगी तो सामने आ जाएंगी ??

        कोई सादगी पसंद इंसान अगर हमारे किसी परिजन पर बिना वजह जुल्म ढाये, उसके धरम्स्थ्लों को तोड़े तो ऐसी सादगी पर हमारी क्या प्रतिकृया होनी चाहिए….एक बार अपने दिल की आवाज़ बताइये जरूर, इंतजार रहेगा !!

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  19. सिकंदर हयात

    अच्छा कमाल ये हे की वो मुस्लिम जिन्हे औरंगजेब बहुत ही ज़्यादा महान लगता हे ज़रूरत से बहुत ज़्यादा वो ही हमारे वर्तमान” औरगजेब ” से बहुत चिढ़ते भी हे दोनों ही अच्छे और कठोर प्रशासक बताय जाते हे दोनों ही पेसो के मामले में हाथ साफ़ रखने वाले बताय जाते हे औरंगजेब ने पचास साल राज किया था इनकी भी अवचेतन इच्छा लगभग पचास साल तक हमारी छाती पर मूंग दलने की ही हे देखे अल्लाह मालिक हे आगे औरंगजेब ने भी भारत उपमहादीप की एकता और सेकुलरिज़म की नीव हिला दी थी और ये साहब भी भारत की एकता और सेकुलरिज़म की जड़ो में मठ्ठा डालने को कमर कसे हे औरंगजेब ने भी शाहज़हां को जेल में डाल दिया था जहा से ये अपने बनाय ताज का दीदार कर करके आंसू बहाते थे तो हमारे आज के औरंगजेब ने भी अपने बानी और कुछ साल पहले की रक्षक ——-नी जी की हालात यही कर रखी हे वो भी लगभग खुली कैद में हे और अपने बंगले के रोशनदान से अपनी राख से उठाई बनाई पार्टी और उसकी सरकार रूपी ताज़महल का दीदार कर करके आंसू से ही बहा रहे हे

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  20. wahab chishti

    शरद साहब चलिए औरंगज़ेब में कोई खासियत नहीं थी , मगर ये है के उस ने जनता का पैसा का गलत इस्तेमाल नहीं किया , शाहजह को भी इस लिए जेल में डाला के जनता का पैसा का मकबरा बना रहा था . औरंगज़ेब की सादगी के बारे में मुस्लिम, हिन्दू और उरोप के इतिहासकार पूरी तरह सहमत है के उस ने भी सादगी की तरह पूरी ज़िन्दगी गुजारी . उस की सादगी के बारे में कोई बात क्यों नहीं कहते ——-

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    1. sharad

      चिश्ती साहब, किसी की सादगी से उसके द्वारा किए हुए कुकर्मों पर पर्दा नहीं डाला जा सकता आप गलत नंबर डायल कर रहे हे

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  21. sharad

    क्या बात के औरंगजेब की निष्पक्षता की जिसने 368 हिन्दू मनसबदार ( वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ) अपने शासनकाल में नियुक्त किए !! हालांकि ये कोई ऐसी उपलब्धि हे तो नहीं जिसे इतना बढ़ा-चढ़ा कर बता रहे हे फिर भी आपकी आंखे खोलने के लिए इतना बताना काफी होगा की इस कसौटी पर भी औरंगजेब अंग्रेज़ो के सामने कुछ भी नहीं क्योकि अंग्रेज़ो की व्यवस्था संभालने वाले 98% भारतीय ही थेः) ….

    तो क्या ज़ाहिद साहब के अगले ब्लॉग मे अंग्रेज़ो की तारीफ जैसा कुछ उम्मीद कर सकते हेः)

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  22. amit

    वाह, क्या बोला है, वह रोज ५० किलो जनेउ जला कर सोता था वो कहा से आता था? १ जनेउ ५० ग्राम का भेी नहि होता है. सोचो कित्नो को मार दाला होगा और कितने उसके भय से मुस्लिम नबन गये होन्गे, तबाहि मचा देी थेी, और आप उसकेी चमचा गिरि कर रहे हो?

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    1. afzal khan

      अमित जी

      में इस मुद्दे पे कुछ नहीं बोलना चाहता था , मगर आप ने लिखा है के वह ५० किलो जेनऊ जल कर सोता था , आप ने ५० किलो लिखा है कुछ लोग इसे ५० क्विंटल लिखते है अगर उस हिसाब से देखा जाए तो १६५५-१७०५ के दरम्यान ५० साल में एक भी हिन्दू नहीं बचता , अगर कुछ इतिहासकार जो ५० क्विंटल लिखता है उस समय पुरे भारत की आबादी भी पूरी नहीं थी.एक पड़े लिखे आदमी को समझदार होना चाहिए.

      चलिए विरोध सही है आप का हक़ है , मार बात वही हो जो के जोक्स की शक्ल हो जाए . इसे सुन कर लोग हंसने लगे

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      1. सिकंदर हयात

        अफज़ल भाई ये संघी लोग लोग इसी तरह तथ्यों और इतिहास के साथ रेप करते रहते हे इन संघियो के एक थे पि एन ओक वो शायद ओक ( अफीम ) पीकर इतिहास लिखते थे उन्होंने ही ये सब लम्बी लम्बी फेक रखी हे ऐसे ही पाकिस्तान में भी इतिहास की यही दुर्गत करते हे आपने देखा ही होगा की ज़ैद हामिद हमेशा विभाजन में मारे गए भारतीय मुस्लिमो की संख्या हमेशा पचास लाख बताते हे जबकि दोनों तरफ का ही अधिकतम से अधिकतम आंकड़ा ही दो से दस लाख के बीच का हे

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    2. dr muzaffar

      यह जनेऊ वाला चुटकुला कहाँ से उद्धरत है कोई प्रमाण है आपके पास या फिर यूँ ही टाइम पास करने चले आए. ऐसी ही बातें पढ़ कर आप जैसे विद्वान समाज मे ग़लत फ़हमिया पैदा करते हैं. आपका कोमेंट पढ़ कर सहज ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है की आप किस स्कूल से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं …

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    3. rajk.hyd

      जैसे कोइ व्यक्ति २-४ ज्होले सब्जेी बजार से ले आये तो घर् वाले यह उप्मा देदेते है कि क्या बजार केी सारेी सब्जेी खरेीद लाये ! वैसे हि उपमा जनेऊ पर लग्ति है ! यह् भि सम्भव है उस जमाने मे जनेऊ मोतेी रस्सेी कि धारन केी जातेी हो !

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  23. rajk.hyd

    ओरन्जेब् भेी एक सदक का मोहताज नहेी है अगर उस्के नाम केी सदक नहि रहेगि तब भेी उस्का नाम इतिहास मे है और आगे भेी रहेगा ! उस्को भेी सभेी अलग अलग धन्ग से याद भेी करेन्गे ! यह रोद तो बहुत पाह्ले समाप्त हो जानि चहिये थेी जो आज हुई है ! उस्के नाम कि सदक पर गुरु गोविन्द सिन्घ जि के दो बच्हे जो जिवित दिवारो मे चुन्वा दिये गये थे उन्के नाम केी सदक होनि चहिये थेी !

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  24. dr muzaffar

    औरंगज़ेब रोड विवाद ने औरंगज़ेब के जिन को बोतल से बाहर निकाल दिया. अनगिनत लेख औरंगज़ेब पर लिख डाले गये. हज़ारों सोशियल मीडीया पर share भी किए गये. खूब बहस मुबाहसे हुए(अब भी हो रहे हैं). सब से ज़्यादा पॉपुलर इतिहासकार बी एन पांडे जी के लेख हुए जिन्हों ने औरंगज़ेबके बारे मे काफ़ी ग़लत फ़हमियों को दूर किया. उनकी पुस्तक ”इतिहास के साथ यह अन्याय” इंटरनेट पर मौजूद हैं कोई भी साहब उन्हें आसानी से पढ़ सकते हैं.
    औरंगज़ेब अच्छा था या बुरा था जैसा भी था मुझे इस विवाद मे नहीं पड़ना लेकिन मुझे दुख इस बात का हुआ की कलाम साहब से प्यार का दिखावा करने वालों को क्या एक विवादित रोड की उतरन ही मिली थी उन को श्रद्धांजलि देने के लिए. उनके नाम पर कोई इन्स्टिट्यूट या बिना नाम वाले इन्स्टिट्यूट जैसे देल्ही यूनिवर्सिटी इत्यादि को उनका नाम दिया जा सकता था लेकिन हाय री सियासत ..एक सीधे साधे इंसान को मरने के बाद एक विवादित इंसान की उतरन पहना दी गयी. जीते जी कलाम साहब शायद इस बात की कभी इजाज़त ना देते ..विरोध का ये तरीका तो उचित नहीं की जिस से विरोध हो उसकी जड़ ही काट दो. फिर तो यह ना ख़त्म होने वाला सिलसिला है. कल को कुछ और रोड और इन्स्टिट्यूट के नाम बदले जाएँ गे. ये कोई स्वस्थ परंपरा की श्रुआत तो नहीं…

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    1. rajk.hyd

      देश मे अनेक रोदो के नाम बदले गये है कलाम जेी उसि रोद मे राह्ते थे इस्लिये वह रोद उन्के नाम रखेी गयेी है !

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  25. Harsh Singh

    ये देश बेवकूफों का टोला है जो कई महत्वपूर्ण मुद्दों को छोड़कर एक सड़क के नाम पर बहस कर रहा है, अच्छा बुरा सब भूल गया है , हर जगह मजहब भक्त खाली संघी नहीं है, भक्त तो वहाब जी जैसे अतिवादी भी हैं, इनमें और संघीयों में कोई अंतर नही।

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  26. qutubuddin ansari

    औरंगजेब एक बेहतरीन शासक था।उसने मुस्लिम राज्य गोलकुण्डा और बीजापुर को मुगल साम्राज्य में मिलाकर भारत का विस्तार कर उसकी अखण्डता को मजबूत किया। हाँ वह अन्य बादशाहों से ज्यादा नियमित मुसलमान था,यही बात आज उसे खलनायक बना देती है।चूँकि इतिहासकारों ने आजादी की लड़ाई के दौरान राष्ट्रीयता को भड़काने के लिए शिवाजी के विरुद्ध औरंगजेब को बुरा दिखाया।जबकि जहाँगीर और शाहजहाँ के समय ज्यादा धर्मान्तरण हुआ।शाहजहाँ के समय भयंकर आकाल में लाखों मर गये,फिर भी ताजमहल बनता रहा।जहाँगीर नशे में डूबा रहा और काबूल -कांधार फारस ने छीन लिया। औरंगजेब ने बेजागीरी से निपटने के लिए सोने-चाँदी के बर्तन,सिंहासन आदि को गलाकर साम्राज्य की सुरक्षा में झोंक दिया।प्रतिदिन 16 घण्टे काम करने वाला पहला बादशाह भारत को औरंगजेब के ही रूप में मिला ।उसे संगीत सुनने का समय नहीं मिलता था,इसलिए संगीतज्ञों ने वाद्ययन्त्रों का जनाजा निकाला और कहा कि संगीत मर गया है।इस पर औरंगजेब ने कहलवा दिया कि कह दो कि खूब गहरे में इन वाद्ययन्त्रों को दफनायें जिससे फिर कभी इनकी आवाज न निकले। औरंगजेब की अच्छाईयाँ उसकी राजनीतिक मजबूरी में उठाये गये बुरे(?) कदमों से कहीं ज्यादा और बेहतरीन हैं।फिर इतिहासकारों ने उसके साथ न्याय न किया।आज यह सुनकर बड़ा दुख हुआ कि औरंगजेब के नाम की सड़क का नाम बदल दिया गया।

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  27. sahbaz khan

    औरंगजेब / मैं शीशा था, मुझे क्यों आपने पत्थर बना डाला ? दिल्ली की एक सड़क का नाम हरदिलअजीज अब्दुल कलाम सर के नाम पर रखने का सरकार के फैसला एक सराहनीय क़दम है, लेकिन यह नामकरण औरंगजेब रोड का नाम बदल कर किया जानाअच्छा नहीं लगा। यह दोष शायद हमारी एकांगी और थोपी हुई इतिहास- दृष्टि का है। मुग़ल सम्राट औरंगजेब भारतीय इतिहास का सबसे गलत समझा और समझाया गया पात्र रहा है। अंग्रेज इतिहासकारों ने उसे एक कट्टर, धर्मांध, शुष्क और हृदयहीन शासक के रूप में चित्रित किया और हिन्दुवादी इतिहासकारों ने उनका अंध अनुगमन। इसके विपरीत दृष्टि रखने वाले इतिहासकारों की भी कमी नहीं है। सच्चाई बहुत उलझी हुई है, लेकिन इतना तो सब मानते हैं कि वह एक बेहद ईमानदार और धर्मभीरु शासक रहा। अथाह राजकोष के बावजूद उसने अपने और अपने परिवार के जीवन-यापन के लिए राजकोष से कभी एक फूटी कौड़ी नहीं ली। अपने हाथों से टोपी बुनकर और कुरआन लिखकर अपने खर्च के लिए पैसे इकट्ठे किए। वह प्रशासक इतना कुशल था कि राज्य से अपराधी लगभग विलुप्त हो गए थे। उसपर सबसे बड़ा इल्ज़ाम हिन्दुओं पर जजिया कर थोपने का लगाया जाता है, लेकिन यह इल्ज़ाम लगाने वाले यह भूल जाते हैं कि उसने उसी अनुपात में मुसलमानों से ज़कात भी वसूला था। जजिया और ज़कात के रूप में वसूले गए धन से निर्धनों की आर्थिक सहायता की जाती थी। उसने जनता द्वारा लगाए गए महिलाओं के साथ अनाचार के आरोप में कुछ मंदिरों का विध्वंश किया तो कुछ मंदिरों के लिए जमीन भी दान में दी। लोग यह भूल जाते हैं कि ठगी के आरोप में उसने बहुत सारे मज़ारों का भी विध्वंस करवाया था। व्यक्तिगत जीवन में औरंगज़ेब एक विलक्षण संगीतप्रेमी और एक भावुक कवि था। उसे ध्रुपद संगीत प्रिय था और उसके दरबार में खुशहाल खां, बिसराम खां, सुखीसेन, किशन खां, हयात रंग खां, मृदंग राय जैसे विलक्षण ध्रुपद गायक मौजूद थे। लेखक निकोलो मनुक्की ने अपनी किताब ‘स्टोरिया डि मोगोर’ में औरंगजेब की संगीत सभाओं का वर्णन किया है। इस किताब के अनुसार बादशाह खुद एक कुशल वीणावादक थे। वे संगीतज्ञ शेख मुहीउद्दीन याहिया मदनी चिश्ती के भक्त थे जिन्हें वे प्रति माह एक हजार रुपए भेजते थे

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    1. rajk.hyd

      अगर कोइ व्यक्ति अपने बच्हे कोपालता है तो उस्कि सामन्य तारिफ् भि हो जातेी है लेकिन जब वह एक भेी बच्हे कि हत्या करता है तो उस्को अजिवन के लिये हत्यारा भेी कहा जाता है १ अगर औरन्गजेब ने एक भि मन्दिर तुद्वाय तो हमेशा के लिये उस्को मन्दिर तोदक भेी कहा जायेगा ! औरन्ग्जेब् कित्ना भेी अच्ह होगा जब अप्ने पालन् हार पिता को कैद करे अप्ने भाईयो केी हत्या कर्वये तो सरि खुबि को भुल्ते हुये सिर्फ हत्यरा हेी कहा जायेगा अगर एक माता अप्ने अनेक बच्हो के पालन् के लिये वेश्या गिरि करे तो उस्को आप सभेी क्या कहेन्गे य वेश्या कहेन्गे या और कुच यह् सभि तय् कर लिजिये
      रावान के पास भि कफि खुबिया थेी ! फिर भेी सामाज उस्को गलत कहता है केवल सिता का अपहरन कर्ने से!

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  28. sharad

    अगर जजिया इतना हेी अच्चा हे तो इतिहास मे किसेी एक भेी मुसल्मान शासक द्वारा मुसलमानो पर जजिया लगाने का कोइ एक भेी उदाहरन आपकेी नजर मे हे ??

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  29. sharad

    मुस्लिम पाठको से विनम्र निवेदन हे कि इसी तरह औरंगजेब के बारे मे अपने दिमाग से उपजने वाले हर बचाव को सामने रखते रहिए ताकि हम अपने स्तर पर इस डिस्कसन को लोगो के सामने ल सके कि देखिये ऐसे होते हे आक्रमणकारियो और आतंकवादियो के समर्थक और तथाकथित सच्चे मुसलमानः)

    औरंगजेब कि तर्ज पर किसी सादगी-पसंद गैर मुस्लिम ने मुसलमानो पर औरंगजेब द्वारा गैर-मुस्लिमो पर किए गए जुल्मो के आधे भी जुल्म किए होते तो क्या मुसलमान उसे गले लगाते ??

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  30. umakant

    एक सवाल मुस्लिम समाज से –क्या इस देश का मुस्लिम तथाकथित बाबरी मसजिद तोडने के लिये बिजेपी और सन्घ को माफ कर पायेगा ???
    यदि नहि तो फिर हिन्दु समाज से ये आशा क्यो -की वे मन्दिर तोड्ने वाले मुस्लिम आक्रान्ताओ को सम्मान के नजरिये से देखे|

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  31. संजीव

    औरंगजेब, टीपू सुल्तान जैसे नर पिशाचों का समर्थन करते ये वैचारिक दलिद्र लेखक कल कसाब, अफजल गुरु का समर्थन करते नजर आयेगे.
    तो क्या हम कसाब और अफजल को हीरो मानलेगें.?
    जिसने सत्ता के लिए अपनों का कत्ल कर दिया हो उसे क्या याद करना?
    और ये तुम दलिदर लोग जो हर बात में ब्राह्मणों को घसीट लेते हो.? क्या बिना ब्राह्मणों के तुम लोगों का लेख पूरा नहीं हो पाता हैं.?
    तुम कुकुर लोग ब्राह्मणों से ईतना जलते क्युं हो.?
    ब्राह्मण जो है जैसा है अपने दम पर है तुम लोगों की तरह आरक्षण की बैसाखी पर नहीं झूलता है ।
    समझे चिरकुट लाल.

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  32. prasad joshi

    मुस्लिम ईतीहास कारोने ईतीहास मे मुसलमानो का तुष्टी करण किया है. हिंदु ईतीहास कारो ने हिंदुओ का तुष्टी करण किया है. ब्रिटीश ईतीहास कारोने इतीहास ऊनकी दृष्टीसे लिखा है. लेखक महोदय औरंगजेब से प्रभावित है, आपको ये पुरा आधीकार है. हिंदु शिवाजी, संभाजी, महाराणा प्रताप से प्रभावीत है, ऊन्हे भी पुरा आधीकार है.
    गलत बात ये है कि आप हिंदुओ से औरंगजेब के चरित्र से प्रभावित होने की अपेक्षा नही रख सकते. या फिर हिंदु आपसे ये मुसलमानो पर संभाजी, शिवाजी या महाराणा प्रताप थोप नही सकते हो.
    किससे प्यार करना है किससे नफरत करनी है ये हर किसी का जाती मामला है.

    हमे ईतिहास को अच्छाई बुराई के दृष्टीसे नही बल्की सभी लोगोके दृष्टीसे पढना सिखना होगा. तभी हम एक दुसरे को समझ पायेंगे.

    कोई भी घटना को सभी दृष्टीसे देखने से ही हम निष्पक्ष बन सकते है.

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