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दिल्ली सरकार ने मुगल शहंशाह औरंगज़ेब के नाम की एक मात्र सड़क का नाम बदलकर डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के नाम से कर दिया तो उसे बधाई , मेरी नज़र में उसने एक बहुत अच्छा काम किया ।क्योंकि एक तो दक्षिण और वाम इतिहास कारों द्वारा इसी भारत में औरंगजेब को खलनायक बना दिया गया और ऐसी नफरत भर दी गई कि उनके नाम की सड़क पर चलने वाले या उस औरंगजेब रोड को कागज़ों पर लिखने वालों से कम से कम रोज रोज मिलने वाली नफरत और गालियों से तो औरंगजेब को छुटकारा मिला ।

इतिहासकारों में वामपंथी इतिहास कारों को औरंगजेब इसलिए पसंद नहीं थे क्योंकि वह अपने धर्म के कट्टर अनुयायी थे और वामपंथी धर्म पसंद ही नहीं करते , उन वामपंथी इतिहासकारों की बनाई ज़मीन पर फसल उगा कर काटी दक्षिणपंथी संघी इतिहासकारों ने क्योंकि औरंगजेब कट्टर इस्लामिक व्यक्ति थे और दक्षिणपंथियों को इस्लाम से ही चिढ़ ।इस तरह लगभग सभी इतिहासकारों की गलत लेखन से औरंगजेब इस देश के खलनायक हो गये , और उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल वी एन पांडे जैसे सच लिखने वाले इतिहासकार नक्कारखाने की तूती बन कर रह गये ।

औरंगजेब इस देश को तब याद आएंगे जब पता चलेगा कि इस देश के शासक आज हज़ारो हज़ार करोड़ रुपये अपने उपर खर्च कर रहे हैं वहीं इस देश में एक ऐसा मज़बूत बादशाह भी हुआ था जिसने अपने व्यक्तिगत खर्च के लिए शाही खज़ाने से एक रुपया भी नहीं लिया और अपने हाथों से कुरान लिखकर उसकी हदिया और टोपी बुनकर उससे मिली रकम अपने उपर खर्च किया करते थे।

औरंगजेब तब और याद आएंगे जब इस देश के नेता अपने खानदान और पुत्र पुत्री और भ्राता मोह में इस देश को बर्बाद करेंगें वहीं जब पता चलेगा कि इस देश में एक ऐसा बादशाह भी हुआ था जो इस देश को बर्बादी से कंगाली से बचाने के लिए अपने शराबी ऐय्याश पिता को कैद कर देता है और ऐय्याश शराबी भाईयों को कत्ल कर देता है ।औरंगजेब तब और याद आएंगे जब लोग यहाँ एक एक मंदिर मस्जिद के लिए खून बहा रहे हैं वहीं मज़ारों में लूटपाट और बलात्कार की घटनाओं पर औरंगजेब हजारों हजार मजारों को उखाड़ फेंकते हैं और यदि हज़रत गरीब नवाज़ अजमेर की मजार से औरंगजेब के सलाम का जवाब ना मिलता तो यह संख्या और बढ़ सकती थी ।

यह देश याद करेगा तब जब अत्याचार होगा और कैसे इसी अत्याचार के खिलाफ औरंगजेब ने एक ब्राह्मण की बेटी की इज्ज़त बचाने के लिए दिल्ली से बनारस आकर अपने मुस्लिम सेनापति के दोनों पैरों को हाथियों से बंधवा कर बीच से चिरवा दिया था , और यह देश जब उसी जगह ब्राह्मणों द्वारा बनवाकर औरंगज़ेब को तोहफे में दी गई वाराणसी की घनेडा मस्जिद देखेगा तो औरंगजेब के न्याय को याद करेगा कि औरंगजेब ने अपने न्याय के सामने धर्म को कभी आने नहीं दिया ।

यह देश तब औरंगज़ेब की निष्पक्षता को और याद करेगा जब उसे पता चलेगा कि मुग़लों के इतिहास में सबसे अधिक 368 हिन्दू मनसबदार ( वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ) औरंगज़ेब ने अपने शासनकाल में नियुक्त किए ।यह देश औरंगज़ेब को तब और याद करेगा जब उसे पता चलेगा कि हिन्दू धर्म की सबसे बड़ी कुरीति सती प्रथा पर रोक लगाने की शुरुआत करने वाले बादशाह औरंगजेब थे ।जब देश अखंड भारत की कल्पना में खोएगा तो उसे औरंगज़ेब याद आएंगे जिन्होने काश्मीर से लेकर कर्नाटक तक और तिब्बत से लेकर अफगानिस्तान तक भारत का विस्तार किया ।बताने को बहुत कुछ है पर दशकों से भरे विष को एक पोस्ट से निकाल दूँ संभव नहीं ।

दरअसल चेतन भगत ने एक बार एक पोस्ट किया था कि संघ कुछ हिन्दूओं के मन मस्तिष्क में यह झूठ बैठाने में सफल रहा कि मुग़लों ने उनके पुर्वजों पर बहुत अत्याचार किये और अब उसका बदला लेने का समय आ गया है । चेतन भगत सही थे पर यह ना कह सके कि औरंगज़ेब को उस अत्याचार का प्रतीक बना दिया गया जो कभी हुआ ही नहीं , औरंगजेब अत्याचारी थे ही नहीं हाँ कठोर कह सकते हैं जो अन्याय , जुर्म या राज्य विरोधी गतिविधियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई में विश्वास करते थे , हो सकता है कि उनके आदेश से मंदिर टूटे हों पर संघी चरित्र उन आदेश के कारणों को बताता तो अधिक उचित होता और यह भी बताता कि उनके ऐसे ही आदेश से कितनी मस्जिदों मज़ारों को तोड़ दिया गया ।राज्य हित में यदि ऐसा करना गलत है तो नरेन्द्र मोदी और वसुंधरा राजे सिंधिया तो औरंगजेब से भी बड़े अत्याचारी हैं जिन्होंने अपने शासनकाल में सैकड़ों मंदिरों को तोड़ दिया और फिर इंदिरा गांधी को क्या कहेंगे जिन्होंने स्वर्ण मंदिर में गोली चलवा दी ? दरअसल औरंगजेब वामपंथी और दक्षिणपंथियों के साजिश का शिकार हो गये जो उन्होने अपने राजनैतिक जमीन को बनाने में प्रयोग किया ।

जज़िया एक ऐसा कर था जिसकी आड़ में इन झूठे इतिहासकारों ने औरंगजेब को घृणित बादशाह बना दिया जबकि हकीक़त यह थी कि जज़िया भी उनके न्याय का ही एक उदाहरण है जिसमें यह राजकीय कर केवल हिन्दू धर्म की प्रजा पर लगाया गया क्युँकि मुस्लिम ज़कात के रूप में पहले से ही कर देते थे और इस कर के लगने के बाद 64 तरह के छोटे छोटे कर माफ कर दिये गये थे। कट्टरता और अन्याय तो तब होता जब ज़कात को हिन्दुओं के उपर भी अनिवार्य कर दिया जाता परन्तु औरंगजेब ने ऐसा नहीं किया और कोई ईमानदार मुसलमान ऐसा कर नहीं सकता , एक बात और महत्वपूर्ण है कि जज़िया की दर ज़कात से बहुत कम थी।

औरंगजेब को आज के विष भरे दौर में समझना आवश्यक है और समझने के लिए उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल वी एन पांडे की पुस्तक सर्वश्रेष्ठ और निष्पक्ष है ।और अरविंद केजरीवाल या एमएनसीडी ऐसी सड़क तुम्हें ही मुबारक जिसपर जूते चप्पल गंदगी फैलाकर तुम एपीजे अब्दुल कलाम को इज्ज़त देना चाहते हो । नाम बदलने के लिए पुनः धन्यवाद ।

औरंगजेब काश किसी ब्राह्मण की बहन बेटी से तुमने दबाव और जजबरदस्ती शादी की होती तो इस देश में तुम आज भी प्रिय होते ।