अफ़ज़ल ख़ान

वहां भुट्टो है, यहां गांधी है…

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दिल्ली के सिंगर राहुल राम ने इस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘ऐसी-तैसी डिमॉक्रेसी’ नाम से एक म्यूजिक विडियो यूट्यूब पर शेयर किया है। इस गाने के बोल हैं, ‘मेरे सामने वाली सरहद पर…’

इंडियन ओशियन बैंड के गायक राहुल राम ने अपने एलबमों के अलावा कई फिल्मों के लिए गीतों की रचना की है इंडियन ओशियन ने ‘‘ब्लैक फ्राइडे’’, ‘‘सत्याग्रह’’, ‘‘गुलाल’’, ‘‘पीपली लाइव’’ और हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘‘मसान’’ के लिए गीत तैयार किया. राहुल ने कहा कि वह उस प्रकार की फिल्मों का चयन करते हैं जो उनके नाम के अनुरूप हो.

इंडियन ओशियन बैंड का ये नया वीडियो यूट्यूब पर शेयर होते ही हिट हो गया और कुछ ही देर में देखने वालो की तादाद लाखो में पार कर गयी . लीजिये आप भी देखिये और सुनिए ——

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5 thoughts on “वहां भुट्टो है, यहां गांधी है…

  1. सिकंदर हयात

    काफ़िया मिलाने के लिए भुट्टो के साथ गांधी नाम जोड़ दिया गया वार्ना कम से कम आज तो यहाँ की आम जनता की सबसे बड़ी समस्या और खतरा गांधी नाम नहीं नमो नाम हे नमो के तवलीन सिंह जैसे बचकाने समर्थक एक आरोप अब लगा रहे हे की मोदी को रोकने के लिए राहुल अब आर्थिक विकास की गाडी को ही रोकना चाहते हे अगर ऐसा हे भी तो भी कोई हर्ज़ नहीं हे मोदी जी को रोकने और हटाने के लिए ये कीमत भी आम आदमी आसानी से चूका सकता हे क्योकि वैसे भी आर्थिक विकास का जो जरमरा लाभ होता भी हे तो वो भी विकास का अनिवार्य तत्व मेह्गाई लील लेती हे तो फिलहाल तो मोदी हटाओ देश बचाओ में ही हमें सबको जुट जाना चाहिए वास्तव में विकास तो एक बहाना हे वार्ना तवलीन हो या डॉ रंजन सर जैसे मोदी समर्थक इन्हे असल ख़ुशी मोदी जी से ये हे की मोदी गाहे बगाहे मुसलमानो को नीचा दिखाते रहते हे ये मानसिकता बहुत ही घातक हे

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  2. Ranjan

    आदरणीय हयात भाई,

    कभी कभी हमें शक होने लगता है कि अपनी पूरी बुद्धिमत्ता व तार्किकता के बावजूद आप कुछ पूर्वाग्रहों से जबरदस्ती जुड़े बैठे हैं. जिनमें सबसे पहला तो यह है कि हम किसी भी व्यक्ति के समर्थक नहीं हैं. हाँ, हर व्यक्ति के बारे में धारणा बनाने का व उसे मर्यादित रूप से सार्वजनिक करने का हमारा संवैधानिक अधिकार है. फिर भी, हम किसी भी राजनैतिक व्यक्तित्व के भक्त या समर्थक नहीं हैं.

    दूसरे, जो व्यक्ति देश का निर्वाचित प्रमुख है, उसके प्रति असम्मान प्रकट करना हमें अच्छा नहीं लगता. इसी प्रकार देश के प्रतीकों के प्रति असम्मान भी हमें नागवार गुजरता है, फिर वह भले हमारे एक आदरणीय ब्लॉगर मित्र का महात्मा गाँधी को अपशब्द कहना हो, चाहे इसी वेबसाइट पर भारत का नक्शा गलत दिखाना हो. हमने अपनी असहमति स्पष्ट ही सदा जाहिर की है, यहाँ तक कि कुछ समय पहले किसी ब्लॉगर ने डा. मनमोहन सिंह के बारे में गलत लिखा तब भी हमने उन्हें टोका था. तो चयनित प्रधानमंत्री के प्रति असम्मान का भाव अनुचित है. आप नीति रीति का विरोध करें, आपका स्वागत है, पर “आम जनता की सबसे बड़ी समस्या और खतरा गांधी नाम नहीं नमो नाम हे” जैसे वाक्य ना लिखें तो बेहतर.

    यह लिखने के पीछे आपको आगाह करना भी है कि अब आप सिर्फ टिप्पणीकार ना होकर इस वेबसाइट के संपादक मंडल के सदस्य भी हैं, यानि आप जो लिख रहे हैं उसमे स्पष्ट उत्तरदायिता निहित है. अतः अपने लेखन को मर्यादित, शालीन व उदार बनाये रखें, मतभेद भी मीठे हों, तल्ख ना हों और मनभेद तो बिल्कुल ना हो. अगर कुछ गलत लिखा गया हो तो क्षमा याचना सहित…

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  3. सिकंदर हयात

    जो मेने लिखा सर मुझे ऐसा लगा वार्ना कोई कारण नहीं हे की आप जैसे विद्वान आदमी ने अभी तक एक भी बार मोदी जी की आलोचना नहीं की जबकि बहुत बाते हे जिससे वो आपके निशाने पर होने चाहिए थे ? मोदी जी ने जान बुझ कर मुख्तार अब्बास जैसे पुराने नेता वो भी शिया वो भी कुछ ”चमचे ” टाइप आदमी तक को केबिनेट में नहीं लिया ईरानी को लिया मुजफरनगर दंगे के आरोपी को लिया ? बकरीद की तो बधाई तक नहीं देते इफ्तार पार्टी देना तो दूर जान बुझ कर राष्ट्रपति की इफ्तार पार्टी तक में नहीं जाते ताकि मुसलमानो को नीचा दिखाने की अपने घोर समर्थको की प्यास बुझा सके और भी अपुष्ट बाते हे जो यहाँ लिखना उचित नहीं होगा मुझे पूरी उमीद हे की एक दिन एक आयोग बनेगा जो जांच करेगा की कैसे नेहरूवादी भारत की आत्मा पर सबसे बड़ा हमला हुआ कैसे एक गैर नेहरूवादी पी एम भारत को मिला ? कौन हे इसके जिम्मेदार ? उमीद करता दुआ करता हु की में भी इस आयोग के सामने गवाही दूंगा और अपनी लिस्ट दूंगा और इस लिस्ट में बहुत से मुस्लिम नाम भी होंगे

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  4. सिकंदर हयात

    गाने में गायो का भी जिक्र हे में तो खेर फिलहाल दिल्ली में एक थोड़े उच्च मध्यमवर्गीय से इलाके में रहता हु लेकिन यहाँ से कुछ किलोमीटर दूर एक निम्न मध्यमवर्गीय सा इलाका हे अब जब से ये लफ़्फ़ाज़ सरकार वज़ूद में आई हे पता नहीं पर मुझे तो यही लगता हे की वहा सड़को पर गायो की तो भरमार सी हो रही हे अब बेचारी गायो का क्या दोष वो तो बिना भेदभाव के सभी ठेलो पर मुह मारती रहती हे और झिड़की जाती हे बहुत से मुस्लिम ठेले वाले भी हे देख देख कर मुझे इतना तनाव होता हे की कही किसी दिन बज़रंगी यहाँ भी कोई मुद्दा ना बना दे उफ़

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  5. afzal khan

    सभी पाठको और लेखको से

    हमारे वेब पोर्टल ( खबर की खबर ) को मेन्टेन करने वाले इरफ़ान साहब की तबियत ख़राब है , इस लिए न्यूज़ पोर्टल अपडेट नहीं हो रहा है , उम्मीद है इसे जल्द ही अपडेट क्या जाये गा, आप को हो रही असुविधा के लिए हमें खेद है . उम्मीद है आप का सहयोग हमें मिलता रहे गा.

    धन्यवाद

    अफज़ल खान

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