तुषार अरोड़ा

गूगल आज बता रहा है कि मोदी मुर्ख प्रधानमंत्री है मैं ने तो बहुत पहले बता दिया था!

Category: तुषार अरोड़ा, राष्ट्रीय 95475 views 68

 

Narendra-Modi

गूगल आज बता रहा है कि मोदी सर्वाधिक मूर्ख प्रधानमन्त्रियों में से एक हैं, मैं तो बहुत पहले से बता चुका हूँ, पढ़ देखिये मेरा लेख

“मोदी”

मैंने समय समय पर मोदी भाई जी के बारे लिखा है, कुछ उनके प्रधान मंत्री बनने से पहले, कुछ बाद………कहा तो उन्होंने यही था कि प्रधान संत्री बनेंगे…….लेकिन बने हैं परिधान मंत्री……..लेकिन लोग आज भी अभिमंत्रित हैं, आप सादर आमंत्रित हैं, देखिये मैं कितना सही हूँ, कितना नहीं हूँ….शुरू करता हूँ उनके प्रधान सेवक बनने से पहले के समय से ——

(1) मोदी हैं कौन..

a) भक्त जन अंधे हैं…….
बहुत तो इसलिए मोदी मोदी भजते हैं कि कांग्रेस ने सेकुलरिज्म के नाम पर मुसलमानों की फेवर ही की है…….उनको लगता है कि मोदी कम से कम हिन्दू हितों की रक्षा तो करेंगे…..लेकिन नहीं, यदि हिन्दू , मुस्लिम ही बन कर सोचते रहेंगे तो कभी भी निष्पक्ष सोच ही नहीं पायेंगे……जो सोचेंगे, कहेंगे वो असंतुलित ही होगा….वकत आ चला है, सिर्फ इंसान बनो, उतार फेंको यह सब गुलामियाँ……फिर आपको समझा आएगा कि आपके धार्मिक और सियासी नेता कितने बकवास हैं

b) मोदी हैं कौन….जो लोग मोदी को बहुत बढ़िया स्टेट्समैन मानते हैं शायद भूल जाते हैं कि गोधरा काण्ड में ट्रेन में हिन्दू जलाए गए मोदी के ही राज्य में, मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में

मोदी के ही राज्य में मुस्लिम के खिलाफ दंगे भड़के थे गुजरात में…..कोर्ट न साबित कर पाया है कुछ..लेकिन एक बात तो साबित होती है कि मोदी बढ़िया मुख्यमंत्री होते तो दंगे काबू करते
और एक हत्या भी कोई कर दे तो फांसी तक हो सकती है..लेकिन हज़ारों लोगों की हत्या हो जाए अगर किसी नेता के कार्यकाल में तो उसे प्रधान मंत्री बना दें….This can happen only in India.

और मोदी हैं आरएसएस की पैदवार…वो आरएसएस जिस की हिन्दू संस्कृति की, हिंदुत्व की अपनी ही परिभाषा है…….जो जैन, बौद्ध और सिख आदि को बिना उनसे पूछे, बिना उनकी सहमती के हिन्दू घोषित करता आया है…

और मोदी हैं आरएसएस की पैदावार जिसके किसी भी बड़े नेता ने शायद ही जनसँख्या की वृद्धि के खिलाफ ठीक से बोला हो, अभी कुछ ही दिन पहले जिसके बड़े नेता हिन्दुओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए आह्वान कर रहे थे….चाहे कुत्ते बिल्ल्यों की तरह जीयें लेकिन आबादी बढ़नी चाहिए, जो भाजपा को सपोर्ट करती रहे

मोदी है आरएसएस की पैदावार, वो आरएसएस जो राष्ट्रवाद का दम भरता है लेकिन जब बाल ठाकरे और उनके वंशज उत्तर भारतीयों को मुंबई में पीटते है, उनके साथ गुंडागर्दी करते हैं तो कभी विरोध नहीं करता..बल्कि उनके साथ हमेशा राजनीतिक गांठ जोड़ में रहता है

मोदी है आरएसएस की पैदावार, जो आरएसएस अपनी शाखायों में व्यक्ति निर्माण का दम भरता है लेकिन जिसकी offshoot राजनीतिक पार्टी भाजपा के प्रधान बंगारू लक्ष्मण कैमरा में करेंसी नोट रिश्वत में लेते पकडे जाते हैं, जिनके दुसरे बड़े नेता गडकरी पता नहीं कैसी कैसी असली नकली कंपनी चलाते पकडे जाते हैं..जिनके तीसरे बड़े नेता अपने नौकर के साथ यौन क्रियायों में लिप्त पाए जाते हैं

और मोदी हैं आरएसएस की पैदवार…वो आरएसएस जो पार्क में बैठे प्रेमी जोड़ों की पिटाई करवाता रहा है, उनके साथ गुंडई करता रहा…..बिना यह समझे कि भारतीय संस्कृति में लिंग का पूजन होता है, खजुराहो के मर्दिरों में मैथुन मूर्तियाँ गढ़ी गयी हैं, भारत में Valentine डे जैसा ही वसंत उत्सव मनाया जाता था, इसे आसानी से समझने के लिए शूद्रक द्वारा लिखित संस्कृत नाटक “मृच्छकटीकम” आधारित हिंदी फिल्म उत्सव देखी जा सकती है , बिना यह समझे कि भारत में ही वात्सयान ने काम सूत्र रचा था , जिसे पूरी दुनिया में पढ़ा जाता है, बिना यह समझे कि यहीं पर पंडित कोक ने कोक शास्त्र रचा था, यहीं पर राजा भर्तृहरी ने शृंगारशतक लिखा था, बिना यह समझे कि भारत में वैश्य/गणिका/नगरवधू रामायण काल में भी होती थी और बुद्ध के काल में भी

और मोदी हैं बीजेपी की पैदावार, जो कल तक राम मंदिर बनवाने को ही राष्ट्र की उन्नति का आधार माने बैठी थी…….और आरएसएस को तो बस अपनी ही गलत सलत धारणायों का पोषण करना है, उसे गहराई में तो जाना नहीं है…उसे क्या मतलब कि राम कहाँ गलत है कहाँ सही इसका विवेचन किया जाए…उसे तो मतलब बस यह कि राम पूरे भारत में पूजे जाते हैं….राम के नाम पर हिन्दू को जोड़ा जा सकता है, राम के नामपर राजनीती की जा सकती है….सो कसम राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनायेंगे…जैसे मंदिर बनने से ही हर गरीब अमीर हो जायेगा, भारत सुपर पॉवर बन जाएगा, भारत में ज्ञान विज्ञानं पसर जाएगा….बिना यह समझे कि राम के अपने समय में भी भिखारी थे…..खैर वाल्मीकि रामायण यदि पढ़ भर लें एक बार तो बहुत कुछ अनदेखा सामने आ जाएगा ….ध्यान रहे मैं वाल्मीकि रामायण कह रहा हूँ पढने को, तुलसी का मानस नहीं

कल कोई कह रहा था कि ये जो मोदी साब बच्चों को भाषण सुनवा रहे हैं न अपना…वो असल में भविष्य के वोटरों में अपनी फेस-वैल्यू पैदा करने की एक ट्रिक है …….

c) हिन्दू का दुश्मन मोदी, मुस्लिम का ओवेसी, सावधान —

कोई आपको कहे आप मूर्ख हो, उल्लू के पट्ठे हो, आप मान लोगे क्या? गले से लगा घूमोगे इन तमगों को?

लड़ पड़ोगे क्या, यदि किसी ने आपको सयाना, बुद्धिमान कह दिया?……. आपकी भावनाएं आहत हो जायेंगी क्या….पवित्र, धार्मिक भावनाएं? आप मरने, मारने पर उतारू हो जायोगे क्या?

नहीं न…फिर काहे हिन्दू, मुस्लिम, इसाई बने घूम रहे हो….. वह भी सिर्फ कहा गया है आपके कानों में ..कहा गया है कि आप हिन्दू हो या सिख या मुस्लिम आदि ….और हज़ार बार कहा गया है, बारम्बार कहा गया है कि आपका धर्म सर्वश्रेष्ठ है..कहा गया है कि आपके धर्म से जुड़ी भाषा, साहित्य, लिपि, गीत-संगीत सब सर्वश्रेष्ठ है ..और आप माने बैठे हो…….

कहीं पढ़ा मैंने कि बार बार बोला गया झूठ सच हो जाता है…असल में इंसान समझता ही नहीं आम तौर पे सच क्या है, झूठ क्या है…वो बड़ी जल्दी सम्मोहित हो जाता है…..उसकी चेतन बुद्धि बहुत थोड़ी देर ही अनर्गल बातों का विरोध करती है…यदि बोलने वाला ढीठ हो, धूर्त हो, शब्द जाल बुन सकता हो तो वो फंसा ही लेगा लोगों को …और यही वजह तो है कि पैदा होते बच्चे को पता है पेप्सी कोक क्या है, फिर भी पेप्सी कोक दिन रात चिल्लाये जाती हैं, टीवी पे, अखबारों में, रेडियो पे …..सबके दिमागों में भरे चले जाती हैं कि पेप्सी पीओ, कोक पीओ वरना आपका जीवन असफल हो जाएगा, आपका पृथ्वी पे आना निष्फल हो जाएगा…ये कंपनियां जानती हैं बार बार बोलते चले जाने का फ़ायदा

मेरी माँ अक्सर कहती हैं कि व्यक्ति को दूसरों के कहने पे नहीं चलना चाहिए, अपनी अक्ल लगानी चाहिए.

एक अमेरिकन कंपनी है “लैंडमार्क वर्ल्डवाइड” …इनका एक शैक्षणिक प्रोग्राम है “लैंडमार्क फोरम” नाम से …जो कुछ भी सिखाया जाता है इस प्रोग्राम में उसका निष्कर्ष यह है कि आप को किसी ने कह दिया जीवन में कभी कि आप मूर्ख हो, सयाने हो, मज़बूत हो, कमज़ोर हो, ये हो , वो हो ….. और यदि उस परिस्थिति की वजह से, उस व्यक्ति के प्रभाव की वजह से, या किसी भी और वजह से आप ने हृदयंगम कर ली वो बात….तो आपका जीवन चल पड़ेगा उस व्यक्तिगत टिपण्णी को सच करने की दिशा में……सारा का सारा जीवन मात्र किसी और की कोई कही बात मान लेने का नतीजा ….यह है सम्मोहन….और उसका नतीजा

और सारी मानव जाति इसी तरह के अलग-अलग सम्मोहनों से ग्रस्त है ..और सबसे बड़ा सम्मोहन है धर्म का, मज़हब का….व्यक्ति कोई और आड़ी-टेड़ी बात सुन भी लेगा लेकिन उसके धर्म के बारे में कह भर दो कुछ, चाहे कितना ही तर्कयुक्त हो, चाहे कितना ही वास्तविक हो, कितना ही उचित हो, कोई फर्क नहीं..व्यक्ति रिश्ते ख़राब कर लेगा…..मरने मारने पे उतारू हो जाएगा. …इतना ज़्यादा जकड़ा है धर्मों के सम्मोहन ने इंसानियत को….इंसान की आत्मा को…असल में इस तरह की मान्यतायें इंसान की आत्मा ही बन चुकी हैं

मैंने कहीं पढ़ा था कि ईश्वर इंसान के पिछवाड़े पे लात मार के जब उसे पृथ्वी पे भेजता है तो उससे पहले एक मज़ाक करता है उसके साथ…वो हरेक के कान में कहता है कि मैंने तुझ से बेहतर इंसान नहीं बनाया आज तक…तू सर्वश्रेष्ठ कृति है मेरी..बाकी सब निम्न….गधे..उल्लू के पट्ठे…..अब होता यह है कि बहुत कम लोग उम्र भर के सफ़र में समझ पाते हैं कि उस खुदा ने, ईश्वर ने यह सब मज़ाक में कहा था……ज्यादातर इंसान उस मज़ाक को सीने से लगा घूमते हैं सारी उम्र …और उम्र गवां देते है अपने आप को दूसरों से बड़ा, बेहतर साबित करने में……इतना धन दौलत इकठा करेंगे जिस का कभी उपयोग नहीं कर सकते…सुना नहीं एक नेता सुखराम के घर छापे पड़े तो गद्दों में करेंसी मिली …एक और नेत्री जय ललिता के यहाँ से जूते चप्पल का अम्बार मिला… ..और बाकी सब लोग भी यही करते रहते है सारी उम्र, मिलता जुलता …..

ईश्वर मज़ाक करता है या नहीं, वो तो पता नहीं लेकिन वैसा ही मज़ाक हम सब के साथ हमारे माँ बाप, रिश्तेदार, परिवार के लोग, शिक्षक, नेता गण, सब करते हैं.. सब फूंकते जाते हैं शुरू से ही बच्चे के कानों में…..तुम अमुक धर्म के हो, अमुक जाति के, अमुक प्रदेश के, अमुक शहर के….. और तुम्हारा धर्म, जाति, प्रदेश, शहर सबसे महान हैं ….

अब कोई बोल भर दे इस सम्मोहन के खिलाफ़……आपकी धार्मिक, पवित्र भावनाएं आहत हो गयी……आप समझ ही नहीं रहे…..आपको आगाह किया रहा है कि आप मूर्ख बनाये गए हो, गधे बनाये गए हो… उल्लू के पट्ठे बनाये गए हो

एक कहानी सुनी होगी बचपन में आपने भी…एक लकडहारे ने नेवला पाल रखा था…..वो गया बाहर…पीछे पालने में उसका बच्चा सो रहा था…..और एक सांप आया उस बच्चे की ताक में …..लेकिन नेवले ने देख लिया उसे……घमासान युद्ध हुआ….नेवले ने काट दिया सांप को..सांप खतम……अब थोड़ी देर में वापिस आया लकडहारा…..नेवला भाग के गया अपने मालिक का स्वागत करने…..लकडहारे ने नेवले के मुंह पे खून लगा देखा तो समझा कि नेवला खा गया उसके बच्चे को……आव देखा न ताव, नेवले को काट दिया कुल्हाड़ी से….जब अन्दर गया तो हँसते खेलते बच्चे को देख और पास पड़े मरे सांप को देख सब माजरा समझ गया …लगा मत्था पकड़ के रोने..जिसे दुश्मन समझा वो मित्र निकला….अपनी जान पे खेल के उसके बच्चे की रक्षा करने वाला निकला

अब बात यह है कि जिसे आप दुश्मन समझते हैं ..वो ही सबसे बड़ा मित्र हो सकता है…वो ही सब से बड़ा खैरख्वाह हो सकता है …लेकिन आप उस नेवले की तरह उसे मारने को दौड़ते हैं….उसे दुश्मन समझते हैं….और जिसे आप अपना दोस्त, शुभचिंतक समझते हैं वो ही आपका सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है…..

अब आज आरएसएस हिन्दुओं की, तालिबान मुसलमानों की, पोप लीला ईसाओं की सबसे बड़ी दुश्मन है …ये चाहते हैं कि आप लोग हिन्दू, मुस्लिम, इसाई वगैहरा बने रहें….आप उल्लू के पट्ठे बने रहें…ये आपके हर तरह के अंधविश्वासों को पोषित करते रहेंगें…..आपको धर्म के नाम पे लड़वाते, मरवाते रहेंगें…धर्म के नाम पे आप से वोट लेते रहेंगें…धर्म के नाम पे आपकी जनसंख्या बढ़वाते रहेंगें…..

और यदि खुद को हिन्दू मानते हैं तो आपको मुस्लिम का डर दिखाते रहेंगें और यदि मुस्लिम मानते हैं तो हिन्दू का डर दिखाते रहेंगें …….

और आप भी सोचते हैं कि बात तो ठीक है, इनके सिवा कौन है जो हिन्दुओं की रक्षा करेगा, हिन्दुओं का हित सोचेगा और ऐसा ही कुछ मुस्लिम भी सोचते हैं या कहें कि उनसे सोचवाया जाता है ……हिन्दू, मुस्लिम, इसाई सबसे ऐसा ही कुछ सोचवाया जाता है …….

आप यह सोच ही नहीं पाते कि आप हिन्दू, मुस्लिम आदि हैं ही नहीं

याद है वो मशहूर डायलाग नाना पाटेकर का, जिसमें वो बताता है कि यदि हिन्दू का खून और मुस्लिम का खून निकाल लिया जाए तो दुनिया की कोई ताकत नहीं बता सकती कि हिन्दू का खून कौन सा है, मुस्लिम का कौन सा ……..

बच्चा क्या हिन्दू, मुस्लिम की तरह पैदा होता है, हिन्दू घर में जन्मा बच्चा यदि मुस्लिम घर में पाला जाए तो वो निश्चित ही मुस्लिम होगा…मतलब आपका हिन्दू, मुस्लिम होना बस सिखावन है, ऊपर से थोपी गयी चीज़ है …….

ध्यान रहे मुस्लिमों के सबसे बड़े दुश्मन हैं ओवेसी जैसे लोग और तालिबान, हिन्दुओं के सब से बड़े दुश्मन हैं मोदी जैसे लोग और इसाईओं के सबसे बड़े दुश्मन हैं पोप जैसे लोग

ये आपको सिखाते रहेंगें कि गर्व से कहो आप हिन्दू हैं, ये हैं, वो हैं …इनका असल मकसद है आपकी लगाम अपने हाथों में थामे रखना ….सो ये तमाम कोशिश करेंगें कि आप में बुद्धि का कोई अंश जागृत न हो पाए…..चूँकि यदि ऐसा हो गया तो इनका सब मायाजाल ख़त्म हो जाएगा….इनका सम्मोहन आप पे से टूट जाएगा……और आप रोबोट से असल इंसान बन जायेंगें……और तब आप गर्व नहीं, शर्म करेंगें कि आप अब तक हिन्दू, मुस्लिम, सिख वगैहरा बने रहे ..

और आपके दोस्त हैं ..तसलीमा नसरीन जैसे, मलाला युसुफजई जैसे…नरेंदर दाभोलकर जैसे लोग..लेकिन आप इन्हें सम्मान कहाँ देंगें?….वो याद है न नेवले सांप वाली कहानी…इन्हें तो आप गाली देंगें या गोली

चाहे ओवेसी हो, चाहे नरेंदर मोदी, चाहे तालिबान, चाहे चर्च, इनके हाथ में कभी कोई सत्ता नहीं आनी चाहिए…..

एक समय था सारी शक्ति मंदिर, चर्च के पास थी..सियासी, क़ानूनी, मज़हबी…सब….धीरे धीरे सब अलग अलग हुआ…..न्याय पालिका अलग हुयी, सियासत अलग, मज़हब अलग…

लेकिन पूरी तरह से अलग कुछ भी नहीं हुआ.. ..मज़हब सब पहलुओं पे हावी है…..

और मज़ा यह है कि मज़हब बस पीढी दर पीढी चलने वाला सम्मोहन है….चालाक, धूर्त लोगों द्वारा पोषित किया जाने वाला सम्मोहन, और कुछ भी नहीं

आज ज़रुरत है इस सम्मोहन को तोड़ने की..
हिन्दू, मुस्लिम के केंचुल को छोड़ने की…..
और शक्ति में ऐसे लोगों को लाने की जो अच्छे प्रबंधक हों, जो कुछ काबिलियत रखते हों….आविष्कारक बुद्धि रखते हों..

ओवैसी और मोदी जैसे लोग एक दूसरे के पूरक हैं…..तालिबान और आरएसएस जैसे संगठन एक दूसरे को कॉम्पिलमेंट करते हैं….आरएसएस हिन्दू तालिबान है और तालिबान मुस्लिम आरएसएस….आरएसएस थोड़ा सॉफ्ट है, लेकिन कब मुर्दा इमारतों पर जिंदा लोगों की लाशों का कारोबार खड़ा कर दे कुछ नहीं पता…..

(2) दो बड़ी धाराएं हैं राजनीतिक…..कांग्रेस और भाजपा …दोनों प्रदूषित…..
कांग्रेस ने बेईमान और अकर्मण्य सरकारें दी हैं…

भाजपा कट्टर हिन्दुवादी है ….साम्प्रदायिक है…हिंदुत्व से जुड़े हर अंधविश्वास, हर बकवास की पोषक है …..

मोदी यदि प्रधानमंत्री बन गए, जिसकी बहुत आशंका है बनने की चूँकि जो माहौल कांग्रेस के खिलाफ अन्ना टीम और बाबा राम देव ने खड़ा किया था उसका फायदा मोदी को मिलना निश्चित है, तो होगा यह कि हिन्दू कट्टरता और उजागर होगी, समाज में वैमनस्य बढ़ेगा
प्रयास किया जाना चाहिए कि किसी भी एक धारा के लोगों के हाथ में सत्ता न आये …सरकारें मिली जुली हों…और ज़्यादा मिली जुली..पहले से भी ज़्यादा मिली जुली तो फिलहाल और अच्छा….तब तक जब तक कोई और बेहतर विकल्प न आये सामने

(3) किसी मित्र ने कहा गुजरात में मुस्लिम हत्याओं का ही ज़िक्र करना गलत है …उसके साथ गोधरा भी याद किया जाना चाहिए…..

मेरा उत्तर था,”असल में तो मोदी साब गोधरा के लिए भी ज़िम्मेदार हैं……किसी भी प्रधान सेवक के होते हुए कोई भी मारा काटा जाए तो वो व्यक्ति उस ओहदे के लायक ही नहीं …..नहीं?”

(4) आरएसएस सिर्फ एक मरी मरी मराई सोच का पोषक है और कुछ नहीं…और मोदी एक थर्ड क्लास संस्था का पैसे के दम पर खड़ा किया गया प्रोडक्ट

(5) यह मोदी उसी आरएसएस की पैदावार है जिससे जुड़े बंदे ने ओशो पर जहर बुझा छुरा फेंका था…और पूछ लीजिये चाहे अगेह जी से….ओशो को आरएसएस कभी पसंद नहीं था…आरएसएस को ओशो हमेशा खतरनाक मानते थे

(6) नस्त्रदमस को ले आया गया है और साबित किया जा रहा है कि उसने मोदी के आने की भविश्यवाणी कर दी थी…..मित्रवर नस्त्रदमस की किताब CENTURIES सांकेतिक भाषा में लिखी है,जिसका कोई मतलब नहीं या यूँ कहें कि कुछ भी मतलब निकाल सकते हैं …जैसा आप की मर्ज़ी हो………

(7) मोदी “जी” को लोगों ने वोट दिए हैं या उन्होंने बड़े बैनर लगा, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया खरीद, फेसबूकिया फ़ौज खडी कर लोगों से वोट लिए हैं ?
कमेंट प्लीज……….

(8) जिस मुल्क में “नमो नमो” और “हर हर” के जाप के साथ वोट बटोरे गए हों, उस मुल्क के निजाम को प्रजातंत्र

कहना प्रजातंत्र का अपमान है.

यह षड्यंत्र था, धामिक उन्माद का यंत्र था, यह भयंकर था, तंत्र मन्त्र छू उड़नतर था.

यह जो कुछ भी था, लेकिन हरगिज़ प्रजातंत्र न था, न है

(9) श्री मोदी जी का पैसा है जो शपथ ग्रहण पर बर्बाद करना है..उन्हें एक नौकरी दी गयी…तुरंत बिना ताम झाम, बिना हील हुज्जत काम शुरू करना था…यह सब शपथ ग्रहण का इतना बड़ा ताम झाम क्या है?
जनता(मालिक) से पूछना नहीं चाहिए नौकर को इस तरह का खर्च करने से पहले

(10) !!!! मेरा इनकार है, इस लोकतंत्र को और इस तरह बने प्रधान मंत्री मोदी को !!!!

असल मुद्दों के आगे गौण मुद्दों को कैसे फैलाया जाता है इसकी जिंदा मिसाल है अमरीका की मोदी विजिट….राजदीप सरदेसाई वाला किस्सा…….

कर क्या रहे हैं श्रीमान मोदी, क्या फर्क पड़ा आम जन-जीवन में, सरकारी निजाम में…..?
अगर कोई कांग्रेस के राज में सोया हो और आज उठे तो समान्य जन जीवन देख कर बता नही पायेगा कि फर्क कहाँ है?

और यहाँ मोदी जी के चमचे लगे हैं दिन रात बात का बतंगड़ बना बना पेश करने.हैरानी तो तब होती है जब कोई मोदी का विरोध करे, आरएसएस का विरोध करे तो ये महान लोग फटाक से उसे देशद्रोही का खिताब दे देते है, इन मूर्खों को यह तक नही पता कि किसी भी तरह की राजनितिक, सामजिक विचारधारा रखने का हरेक को हक़ है

कुछ तो शर्म करो, जा के बाहर देखो,
गरीब आज भी गरीब है,
स्त्री कल भी असुरक्षित थी, आज भी असुरक्षित है,
काला धन कल भी बाहर था आज भी बाहर है,
सरकारी कर्मचारी कल भी हरामखोर था, रिश्वतखोर था, आज भी है.
भाई जी, न तो यह लोकतंत्र कोई लोकतंत्र है, न ही इस तरह से बने मंत्री संतरी कोई लोगों का भला कर सकते हैं, अरबों रुपये खर्च कर के बने प्रधान मंत्री आम जनता का क्या भला करेंगे?

मैं इस तरह के लोकतंत्र को इनकार करता हूँ,
मैं इस तरह के सरकारी तंत्र को इनकार करता हूँ,
मैं इस तरह से बने संतरी, मंत्री, प्रधान मंत्री को इनकार करता हूँ

(11) सुना है नरेंदर मोदी ने कोई फॉर्म ज़ारी किया है जिसमें पूछा गया है कि आप राष्ट्र के क्या काम आ सकते हैं….ठीक है मोदी जी, मैं आपसे बेहतर प्रधानमंत्री साबित हो सकता हूँ, मेरे पास आपसे बेहतर प्लान और समझ है राष्ट्र की बेहतरी के लिए जिसे मैं खुले में राष्ट्र के सामने रखना चाहता हूँ, आप अपना प्लान रखें , मैं अपना रखता हूँ,,,देखते है राष्ट्र किसी चुनता है

(12) सुना है मोदी नेपाल के पशुपति मंदिर को बड़ा दान कर आये हैं…..और वो भी सरकारी खजाने से
एक फूटी कौड़ी नहीं जाने देनी चाहिए…न मन्दिर को ..न मस्जिद को…..न किसी भी और धर्म को….धर्म खुद की खोज है बाक़ी सब गिरोह्बाज़ी है…पूरा इतिहास खून से लाल कर दिया इस मजहब बाज़ी ने….

(13) वह भाई वाह, मोदी ने करोड़ों रूपया दे दिया कश्मीर बाढ़ राहत के लिए, जवान लगा दिए लोगों को बचाने के लिए……वाह!
इडियट्स, कमी नहीं है तुम्हारी.
मोदी ने करोड़ों दिए हैं अपने घर से दिए हैं, मेरा तेरा पैसा है…..
और
जो जवान लगाये हैं, उनको भी सैलरी मिलती है, और जिस पैसे से मिलती है, वो भी मेरा तेरा पैसा है

(14) यदि आज हमारे फ़ौज द्वारा कश्मीर में लोगों की जान बचाए जाने का श्रेय श्री मान मोदी भाई गुजराती को जाता है तो फिर गुजरात में उनके कार्यकाल में हुए क़त्ल-ए-आम का श्रेय भी उनको जाना चाहिए.
नहीं?

(15) चलो मैं घोषित करता हूँ कि मोदी का स्वच्छता अभियान मात्र शिगूफा है, बकवास है, उथला है और इसका नतीज़ा लगभग सिफर आने वाला है….कारण लिखता हूँ, मुलाहिजा फरमाएं
(a) यदि सच में ही गन्दगी दूर करने का मोदी का इरादा होता तो दशहरे पर यह जो पुतले दहन करने की सामाजिक बकवास है इसका भी विरोध करते, पार्क, सड़क सब गंदे होते हैं, हवा गन्दी होती है…लेकिन यहाँ तो हिम्मत ही नही बोलने की….
(b) यदि सच में ही गन्दगी दूर करने का मोदी का इरादा होता तो दीवाली पर जो पैसों को आग लगाने की कुप्रथा है इसका विरोध करते….पार्क, सड़क सब गंदे होते हैं, हवा गन्दी होती है…लेकिन यहाँ तो हिम्मत ही नही बोलने की….
(c) यदि सच में ही गन्दगी दूर करने का मोदी का इरादा होता तो होली पर जो पार्क, सड़क, गली सब गंदे होते हैं,इसका भी विरोध …लेकिन यहाँ तो हिम्मत ही नही बोलने की….
(d) यदि सच में ही गन्दगी दूर करने का मोदी का इरादा होता तो दुर्गा और गणेश मूर्ती विसर्जन से जल प्रदूषित होता है , इसका भी विरोध …लेकिन यहाँ तो हिम्मत ही नही बोलने की….
(e) यदि सच में ही गन्दगी दूर करने का मोदी का इरादा होता तो जो मुर्दे जलाए जाते हैं, हर लाश के साथ कितने ही पेड़ों को शहीद होना पड़ता है जो, उसका विरोध करते……..प्रदूषण फैलता है…….वातावरण ख़राब होता है उसका विरोध करते……लेकिन यहाँ तो हिम्मत ही नही बोलने की….
(f) यदि सच में ही गन्दगी दूर करने का मोदी का इरादा होता तो पहले खुले खत्ते बंद करवाते
(g) यदि सच में ही गन्दगी दूर करने का मोदी का इरादा होता तो लोगों को सडक पर कूड़ा न फेंकने की शपथ दिलाने से पहले उचित इंतज़ाम भी किया होता कि सडक पे चलता आदमी कूड़ा फेंके तो कहाँ फेंके…अक्सर सडक पे पेशाब करते आदमी का मजाक उड़ाया जाता है, ……लेकिन भय्ये ये भी तो बताओ कि क्या उचित इंतज़ाम है कि आदमी यदि शौचक्रिया से निपटना चाहे तो कैसे निपटे…अव्वल तो सार्वजनिक शौचालय पाए नही जायेंगे जल्दी…और मिल भी जाएँ तो दुर्गन्ध और गन्दगी से बुरा हाल…और औरतें तो बेचारी सफर में डर के मारे पानी ही नही पीती क्योंकि सरकारी इंतज़ाम की असलियत उनको आदमीयों से भी भारी पड़ती है
(h) यदि सच में ही गन्दगी दूर करने का मोदी का इरादा होता तो बजाये हरेक के हाथ में झाडू पकडाने के, कचरे के निपटान में हरेक की भागीदारी सुनिश्चित करने का कोई प्रोग्राम पेश करते
लेकिन ऐसा कुछ नही है, तभे मैं घोषित करता हूँ कि मोदी का स्वच्छता अभियान मात्र शिगूफा है, बकवास है, उथला है

(16) सफाई दिवस—— सुना है कोई सफाई दिवस है मोदी सरकार की तरफ से……मोदी जी, हर रोज़ सड़क सफाई करेंगे, फिर कभी नाली भी साफ़ करेंगे, फिर कभी सीवर भी………हां, आप बिलकुल फोटू शोटू ले सकते हैं….सच है क्या?

खैर, मज़ाक नहीं करता.

लेकिन यह सफाई दिवस है मोदी जी की सतही सोच का नमूना ……कहता ही हूँ थर्ड क्लास लोगों को सत्ता दोगे तो कभी समस्या के गहरे में न जा पाओगे और जब समस्या न समझोगे तो हल कहाँ से लाओगे, जो लाओगे हल के नाम पर, बस झुनझुना होगा

अरे इस मुल्क में सिर्फ सफाई की समस्या है क्या? कभी सोचा है कि गंदगी है क्यों, चूँकि सारा निजाम गंदा है, चूँकि सारा समाज गंदा है, क्योंकि सारी सोच समझ गन्दी है….वहां है हिम्मत कूदने की…चले हैं हाथ में झाडू पकड़ सफाई करने

जनसंख्या कम करो और जो है उसे शिक्षित करो और पहले तो शिक्षा को ही शिक्षित करो, तुम्हारी शिक्षा ही अशिक्षित है.

गरीबी कम करो, देखो कैसे नहीं गन्दगी कम होती.

इस तरह के बचकाने कामों से कुछ नहीं होने वाल, नहीं यकीन तो देख लेना नतीज़ा, कल ही तुम्हें पता लग जाएगा कितनी गंदगी घट गयी है

मैं देता हूँ कुछ सुझाव, हो सके तो प्रयोग कर देखो और फिर फर्क भी देखो, पहले के लिखे हैं इस लिए बिन कांट-छांट ऐसे ही पेश कर रहा हूँ.

IPP के एजेंडा में शामिल हाँ, उठा लाया हूँ, जिन मित्रों को नहीं पता IPP क्या है, थोड़ी झलक मिल जायगी-

Agenda#1— सिर्फ रिश्वत लेना ही नहीं होता…जिम्मेवारी लेकर न निभाना भी भ्रष्ट-आचार है…
यदि पब्लिक को लगे कि सड़कों पर गड्ढे हैं, नालियाँ साफ़ नहीं, कूड़े के ढेर जमा हैं….विडियो बनाएं…….जिम्मेवार कार्यवाहक और नेता को काम करना सिखाया जाएगा, समझाया जाएगा….नहीं मानते तो हटा दिया जाएगा |

AGENDA #75—सभी के द्वारा निम्नतम श्रेणी की नौकरियाँ बारी-बारी से किया जाना !!!
(DIRTY JOBS TO BE DONE BY ALL ON ROTARY BASIS)
सदियों से भारतीय समाज में दलितों / शूद्रों शोषण होता आया है. इन लोगों को जानबूझ कर अनपढ़ रखा गया, गरीब रखा गया, ताकि वे समाज का कचरा उठाते रहें, शौचालय और गन्दी नालियां साफ करते रहें, और चमड़े के जूते चप्पलें बनाते रहें. ये सब सत्ता की धूर्तता थी जो अभी भी चल रही है। आपने मुश्किल से ही कभी किसी ब्राह्मण को किसी के घर का शौचालय और गन्दी नालियों या सड़क की सफाई करते देखा होगा । इन सभी नौकरियों को तथाकथित नीच या छोटी जातियों (दलितों/शूद्रों) के लोगों द्वारा किया जाता है। IPP व्यावहारिक रूप से इस प्रणाली को खत्म कर देगी | समाज के सभी वर्गों के सदस्यों, अमीर या गरीब, किसी को भी, इन गंदी नौकरियों को एक रोटरी-प्रणाली के आधार पर यानी कि बारी बारी से करना होगा । भला क्यों कोई अन्य हमारे लिए ये गंदे कार्य करता रहे? नहीं, अब और नहीं. अब से हम सबको एक-दूसरे के लिए इस प्रकार के कार्य करने चाहिए |
Dirty जॉब से मुक्ति सही तकनीक से संभव है|
आजकल ऐसी मशीने उपलब्ध हैं जो सीवर साफ़ कर देती हैं.. किसी व्यक्ति को अन्दर उतरने की जरुरत नहीं |
विज्ञानं और तकनीक ने ही बहुत तरह की आजादी दी है |
IPP सोसायटी की पूरी संरचना को बदल देगी ।

AGENDA#11— फुटपाथ चलने के लिए होते हैं न कि दुकानें सजाने के लिए…….पदयात्रियों का तो जैसे हक़ ही छीन लिया गया सडक पर चलने का………फुटपाथ की सब दुकानें हटा दी जायेंगी, उन्हें आस पास पक्की दुकाने दी जायेंगी, सस्ती मासिक किश्तों पर …….साफ़ सुथरे फुटपाथ दिए जायेंगे, पदयात्रियों का हक़ वापिस लौटाया जाएगा |

AGENDA #68—मेरे मोहल्ले में झाड़ू लगाने वाली ने आगे लड़के रखे हैं…….मुझे पता लगा ऐसा लगभग हर जगह है……सरकार तनख्वाह देती है पच्चास हज़ार रूपए महीना और खुद काम न करके इन सरकारी मातहतों ने आगे पांच दस हज़ार रूपए महीना पर कामगार रखे हैं….

इसका मतलब…. यह कि सरकारी कर्मचारियों में से बहुत को दस गुना ज्यादा तनख्वाह मिल रही है

और मैंने तो ऐसे भी सरकारी कर्मचारी देखें हैं जो लगभग फुल टाइम अपना बिज़नस करते हैं…उनकी सेटिंग है…वहां एक दूसरे की हाजरियां लग जाती है.

इसका मतलब …..यह कि सरकार ने जितना स्टाफ रखा है शायद उससे आधे से काम चल जाए..

IPP देखेगी यह सब कुछ…..ठीक करेगी यह सब कुछ….

हम वोट लेने के लिए खामख्वाह तनख्वाह या भत्ते बढाने के पक्ष में बिलकुल नहीं हैं…

(17) मोदी साब ने…कहा था कि उनकी सरकार बन जाए बस…वो विदेशों से काला धन वापिस ला देंगे.. पन्द्रह-बीस लाख हरेक भारतीय को मिल ही जाएगा
कोई मित्र मुझे मात्र पांच लाख दे दे अभी और मेरे हिस्से का 15-20 लाख वो ले सकता है…हर लिहाज से फ़ायदे का सौदा ..मेरी ऑफर मोदी जी के असीम भक्तों को तुरत स्वीकार कर लेनी चाहिए…..
अकाउंट नम्बर इनबॉक्स में ले सकते हैं

(18) जैसे कांग्रेसिये हर तरह से दुष्प्रयोग करते थे सरकारी मशीनरी का, वही मोदी सरकार कर रही है….
दूरदर्शन पर संघ प्रमुख मोहन भगवत का भाषण का प्रसारण इसी का उदाहरण है
फिर कोई कह रहा था कि मोदी संघ के नही, भारत के प्रधानमंत्री हैं….यदि ऐसा है तो बताएं किस अधिकार से श्रीमंत भागवत की भागवत कथा दूरदर्शन पर प्रसारित की?
भैया, इस मुल्क में बहुत तरह की विचारधाराएं बहती हैं, पी एम् तुम्हें अच्छे गवर्नेंस के लिए बनाया है न कि मुल्क को संघी बनाये जाने के लिए……

(19) मोदी का भाषण सुना, ताज़ा वाला, रामलीला मैदान वाला….रामलीला का रावण याद आ गया, स्टेज पर दहाड़ता हुआ,”सीते तुम मेरे पंजे में हो, हहहहहह्हा”
लग रहा था, मोदी भाई गुजराती कह रहे हों, “इंडिया, तुम मेरे पंजे में , अगले सवा चार साल तक तो बिलकुल हो, हाहहहा ”
इतना आत्म -विश्वास
चेहरे से तेज टपक रहा था
पर शायद कसूर मेरा ही है, खोट मेरी ही सोच में है ..मुझे शेक्सपियर के शब्द याद आ रहे थे ….Much Ado About Nothing

(20) मोदी जी गए हैं विदेश, विश्व युद्ध में मारे गए भारतीय सैनिकों को श्रधान्जली देने…. यदि नहीं जाते तो उनकी आत्माएं अनन्तकाल तक यूँ ही भटकती रहतीं

(21) ये जो संघी मित्र गोडसे को श्रधा सुमन अर्पित करते फिर रहे हैं, इनको कोई याद दिलाओ यार अभी थोड़े दिन पहले ही मोदी भाई गुजराती गांधी को नमन कर रहे थे

(22) जब पट्रोल डीज़ल का रेट अंतर-राष्ट्रीय रेट से घटता बढ़ता है तो फिर मोदी ने इस मामले में क्या करना था? क्या कर लिया?

(23) आरएसएस मतलब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ. स्वयंसेवक होने का सही मतलब मोदी जी ने प्रधान मंत्री बनते ही साकार कर दिखाया. जो स्वयम की सेवा करे, वो स्वयम सेवक. प्रधान से परिधान मंत्री बन गए. देश से विदेश मंत्री बन गए. सारे जहाँ का दर्द हमारे ज़िगर में है. सौन्दर्य कपड़ों से ढकी हमारी फिगर में है. जय हो

जिस बंदे को कल तक पहनने की तहजीब नहीं थी….एक अजीब सा कुरता पहनता था अक्सर…उसे आज कपड़े पहनने का शऊर आ गया….आज तो भाई लोग मजाक में उसे “परिधान मंत्री” कहते हैं….जैसे PM बनते ही अपनी दबी इच्छा पूर्ती करने का जूनून हो….अच्छे कपड़े पहनने का….घूमने का , फिरने का……नहीं?

(24) किसी भी मुल्क के लीडर द्वारा कोई भी जंगी सामान की खरीद से पहले पब्लिक से पूछा जाना चाहिए, न सिर्फ अपने मुल्क की बल्कि पड़ोसी मुल्क की पब्लिक से भी, बल्कि पूरी दुनिया की पब्लिक से…..वक्त बदल चुका है, इन्टरनेट का ज़माना है………विश्व बन्धुत्व, वसुधैव कुटुम्बकम साकार हुआ ही जाता है…….इसलिए बजाए जंगी सामन खरीदने के जंगी सामान को दुनिया से दफा करने की दिशा में कदम बढाए जाने चाहिए…
सन्दर्भ —मोदी जी का जंगी जहाज खरीदना

(26) ये जो आज Presstitute कहते लिखते फिर रहे हैं, इनको पूछिए तो ज़रा मोदी साहेब पॉवर में आये कैसे थे……..तब तो मीडिया का हर रूप इनको माँ दुर्गा लग रही थी

(27) कभी आपने फुकरे टाइप लड़के देखें हैं जो अपनी महबूबा को पहले तो आसमान पर बिठाते हैं, फूलों से तौलते हैं, उसके लिए चाँद सितारे तोड़ लाने के हिम्मत दिखाते हैं, उसके साथ जीने मरने की कसमें खाते हैं और काम निकल जाए तो फिर उसी को “साली, रंडी, कुतिया” आदि कहते हैं
नहीं, नहीं, मैं आपके किन्ही दोस्तों की बात नहीं कर रहा…मैं मोदी जी की बात कर रहा हूँ…सन्दर्भ भारतीय मीडिया है

(28) मोदी शेर हैं, वाह, वो सिर्फ मिटटी के शेर हैं, किया क्या है जब से आये हैं ?
काला धन, काल धन लायेंगे…ले आये?
रिश्वत कम करेंगे…कर ली?
महंगाई कम करेंगे…..कर ली?
बलात्कार रोकने के लिए टास्क फाॅर्स बनायेंगे, बलात्कार लगभग खत्म कर देंगे, शायद याद होगा मित्रों को चंद महीने पहले के मोदी भाषण और बड़े बड़े होर्डिंग….बलात्कार तो मेरे ख्याल से मुल्क में हुआ ही नहीं जब से मोदी जी ने गद्दी सम्भाली है, नहीं?
बुलेट ट्रेन लायेंगे…..एक भूखे नंगे मुल्क की प्राथमिकता रोटी कपड़ा और मकान और शिक्षा और स्वास्थ्य और जन संख्या कण्ट्रोल होना चाहिए…..न कि फ़िज़ूल के काम…?
कश्मीर बाढ़ से त्रस्त लोगों को बचाया है…बढ़िया……खुद जा के बचाया होगा न बारिश में भीगते हुए, नहीं

(29) अच्छे दिन!!
क्या किसी को कांग्रेस वाले और मोदी वाले दिनों में कोई फर्क दिखता है?
क्या चौराहे पे खड़ा पुलसिया, आज भी रिश्वत नहीं ले रहा?
क्या सब्जियां आज भी मंहगी, पहले से भी महंगी नहीं हैं?
क्या सरकारी आदमी आज भी बदतमीज़ नहीं है?
क्या सरकारी कम्पनी का फ़ोन, इन्टरनेट आज भी बुरी तरह से ख़राब नहीं रहता?
क्या सरकारी मशीनरी में आज भी जंग नहीं लगा?
क्या महिलाओं के बलात्कार घट गये हैं?
क्या महिला अकेले सुरक्षित हैं?
अच्छे दिन!!

(30) “एक कहानी- अच्छे दिन की ”

एक डॉक्टर के क्लिनिक के बाहर बोर्ड लगा था,” एड्स, कैंसर, पागलपन और दुनिया की हर बीमारी का मात्र बीस हज़ार रूपए में मात्र दो महीने में इलाज. फायदा न होने पर पैसे वापिस”

दूर से लोग आ गए, लाखों लोगों ने बीस बीस हज़ार दिए, फिर दो महीने बाद लोगों की भीड़ वापिस आयी , किसी को कोई फायदा नहीं हुआ था .

केस कोर्ट में चला गया, सबने मुद्दा बनाया कि साहेब इस डॉक्टर ने लिखा था फायदा न होने पर पैसे वापिस. अब दे नहीं रहा वापिस.

डॉक्टर बोला साहेब, बिलकुल लिखा था, लेकिन फायदा किसका यह तो किसी ने पूछा नहीं. देखिये, मेरे पास ढंग के कपड़े नहीं थे, मैं एक मात्र आधी बाजू का कुरता पहनता था, लोग अक्सर मजाक में मोदी कुरता कहते हैं इसे…..अब मैं दस लाख का सूट पहनता हूँ, विदेशों में घूम आया हूँ….चेहरे पर लाली आ गयी है और ये लोग कहते हैं कि फायदा नहीं हुआ …साहेब केस गलत है…इनको फायदा हुआ न हुआ मुझे तो हुआ, मेरे तो न सिर्फ दिन अच्छे आये, बल्कि रातें भी अच्छी हो गयी

(31) !!! मोदी सरकार की साल भर की उपलब्धियां !!!

किसी ने आर टी आई से मोदी साहेब की एक साल की उपलब्धियां प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से पूछी हैं, जवाब नदारद.मैंने कुछ ही दिन पहले यह आर्टिकल लिखा था, कृपया जिन्होंने न पढ़ा हो पढ़ लें और जिन्होंने पढ़ा हो दुबारा पढ़ लें, शायद अब और भी संदर्भित लगे. सुस्वागतम.

“सूटनीति, बूटनीति, कूटनीति”

जिसे समाजनीति पता नहीं, जिसे घर सम्भालना आता नहीं….वो विदेश नीति समझा रहे हैं, वो कूट नीति समझा रहे हैं…..अबे, वो सिर्फ दुनिया घूम रहा है, मौज मार रहा है, उसे पता है दुबारा मौका मिले न मिले …..

और यह कूटनीति होती क्या है?….कोई coded नीति. मतलब ऐसी छुपी हुई नीति जिसे सामने वाला न समझ सके. मूर्ख है न सामने वाला? तुम जो अपना मुल्क सम्भाल नहीं पा रहे….जहाँ आधे से ज़्यादा लोग गरीब हैं…..तुम ज़्यादा अक्ल वाले हो? अगले जो तुम्हारे मुल्क से मीलों आगे हैं, वो गधे हैं, अक्ल के अंधे हैं, घोंचू हैं?

या इसे आम भाषा में कहा जाए, “सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे”……”तेरी भी जय, मेरी भी जय”……”You Win, I Win”, a “Win Win Game”.

चलो ठीक है, लेकिन रुपैया तुम्हारा दम तोड़ रहा है, GDP हांफ रही है…….गरीब आत्महत्या कर रहा है, मध्यम वर्ग महंगाई से त्रस्त है, उच्च वर्ग को वैसे ही कोई फर्क नहीं पड़ता, “कोई हो नृप हमें क्या हान”…..

खैर कूटनीति है भाई, coded नीति….. आसानी से पल्ले थोड़ा न पड़ जायेगी, दुनिया के महानतम कोड ब्रेकर बुलवाने पडेंगे

यह कूट नीति मात्र अच्छा समय कूटने की नीति है….तुम्हारा नहीं, अपना

अच्छे दिन, तुम्हारे नहीं, अपने

तुम्हारे तो पहले भी दिन कच्चे थे और कच्चे ही रहेंगे
तुम पहले भी कच्छे में थे …कच्छे में ही रहोगे
सूट बूट, बढ़िया चश्मा न तुम्हारे हिस्से में पहले था, न आगे रहेगा

और तुम्हें तो अगले की सीधी सीधी नीति समझ न आ रही होगी…. सूटनीति, बूटनीति न समझ आ रही होगी, कूट नीति कैसे समझ आयेगी?

मुल्क चाहे आधा भूखा नंगा हो, लेकिन विदेशों में प्रधानमंत्री चमकता दमकता दिखना चाहिए, बेइज़्ज़ती थोड़ा करवानी है दूसरों के सामने, आखिर इतनी भी ग़रीबी नहीं कि मुल्क एक दर्शनीय प्रधानमंत्री अफ्फोर्ड न कर सके ….समझे सूटनीति ….या बूट नीति से समझाया जाए फिर?

अबे, सीधी नीति ही इतनी कूट है, कूट नीति तो और ज़्यादा कूट है, क्या खा कर समझोगे?

यह सब समझने के लिए फ्रांस का पानी पीना पड़ता है, अमरीका का पिज़्ज़ा खाना पड़ता है, कनाडा का टोस्ट खाना पड़ता है….चीन की चीनी खानी पड़ती है ..आया कुछ समझ में? ..इडियट!

तुम साले दाल रोटी खाने वाले, नमक प्याज़ से रोटी खाने वाले, हैण्ड पंप का पानी पीने वाले तुम समझोगे कूट नीति?

अभी तो वैसे भी नहीं समझोगे, लगेंगे तकरीबन चार साल समझने में, चुनाव के आस पास तुम्हें स्पेशल क्लासें लगा आकर समझाया जायेगा …..तुम्हें चाय पर भी बुलाया जायेगा…चाय पर चर्चा होगी….तुम्हें सूट बूट और कूट नीति विस्तार से समझाई जायेगी

तब तुम्हें समझ आएगा कि कूटनीति क्या होती है? नहीं समझोगे तो टीवी पर समझाया जायेगा, रेडियो से बतिया जायेगा, अख़बार से पढवाया जाएगा, कैसे नहीं समझोगे, तुम्हें समझना ही होगा….हर दीवार, हर खम्बा तुम्हें समझाएगा……खैर, अभी फ़ालतू बातों के लिए वैसे ही समय नहीं है.

अभी तो जहाँ कूटे जा रहे हो वहां मलहम लगाने की नीति पर अमल करो, तुम्हारे लिए कूट नीति का बस इतना ही मतलब है

(32 ) “साहेब जी को प्रणाम”

हम ठहरे निपट आम लोग
बस निपटे निपटाए हुए लोग

हमें कहाँ समझ कि आप क्या डील कर रहे हैं
हमें तो बस लग रहा कि आप ढ़ील कर रहे हैं

शुरू में ही बता देते प्रभु, कि अगले दो चार साल तक
या कि आशा न रखी जाए अगले पांच साल तक

न रखते आशा
न होती निराशा

आपने कहा अच्छे दिन आने वाले हैं
हमें लगा बस आने ही वाले हैं

बस थोड़ा गलतफहमी हो गयी सरकार
करेंगे, साहेब, करेंगे, अगली बार, सुधार

अगली बार
कोई नई सरकार

(33) अंधेर नगरी, चौपट राजा
टके सेर भाजी, टके सेर खाजा
(ओनली इन संसद कैंटीन)

(34) एक सीक्रेट वोटिंग करवा लो कि यदि मौका दिया जाए तो कितने लोग अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया के नागरिक बनना चाहेंगे……आपको पता लग जाएगा कितने लोगों को आज भी मोदी जी के “अच्छे दिन” वाले नारे में यकीन है

(35) तगड़े को मंदे की मदद करनी चाहिए, अच्छी बात है…लेकिन तगड़ा

खुद तगड़ा हो तभी न….खुदे आधा भूखा हो,नंगा हो, बीमार हो, अधमरा

हो और भागा फिरे दूसरे की मदद को…..क्या कहेंगे इसे? क्या? यह

महान आध्यात्मिकता है!

एक बार अपनी जनता से भी पूछ लेते प्रभु, जिसने आपको वोट खुद के

अच्छे दिनों के लिए दिए थे न कि पड़ोसियों के

(36) “मन की बात ”

क्या कोई बात बिना मन की भी होती है? मन का मतलब ही है बात,

विचार

या शायद यह कहना चाहते हों कि आज सच में ही जो मन में है, वो कह

रहे हैं तो फिर शायद बहुत कुछ ऐसा भी कहते होंगे जो मन की बात नहीं

होता होगा, मन होता कुछ और होगा कहते कुछ और होंगे

या कहना चाहते होंगे कि मन में जो सच है, उसे कह रहे हैं, जो झूठ है वो

छोड़ रहे हैं

खैर साफ़ है कि अपनी बात कहने के लिए ठीक ठीक शब्दावली भी नहीं चुन

सकते

(36) मैं मोदी सरकार को खुली चुनौती देता हूं……मोदी या उनके कोई भी नुमाइन्दा……मुझ से खुली बहस कर कर सक

Related Articles

68 thoughts on “गूगल आज बता रहा है कि मोदी मुर्ख प्रधानमंत्री है मैं ने तो बहुत पहले बता दिया था!

  1. asheet

    Salo chutiyo des ke gaddar ho tum
    Khabrandiyo.
    Sale harmi log
    Tum log paiso ke liye apne ma behno ko randi sabit krdo.

    Reply
  2. praphulla kumar

    अगर मोदी मुर्ख है तो देश की जनता ने उन्हें प्रधानमंत्री क्यों बनाया? मुर्ख और गधा तो तू है चूतिये

    Reply
    1. पराशर

      अरे ज्यादा गुस्सा मत करो भाई ! शायद आप नहीं जानते कि यह लेखक तो खुद भी केजरीवाल की तरह किसी रंडी और उसके किसी मुल्ले पड़ोसी के नाजायज़ रिश्तों की पैदाइश है, जिनका हिन्दु धर्म और देशभक्ति से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है। इसकी इस हकीकत से केवल इसका कागज़ी बाप ही नहीं, बल्कि इसका सारा मोहल्ला बखूबी वाकिफ है।इसलिए यह अच्छे लोगो के खिलाफ अक्सर इस प्रकार के लेख लिखकर अपने मन की भड़ास निकाला करता है। अभी तक आप जैसे लोग इसकी हकीकत को नहीं जानते हैं, इसलिए आज आप भी इस बात को जान लीजिये कि जो व्यक्ति खुद अपने बाप का भी न हो, उसके अंदर देशभक्ति की भावना भला कहाँ से आएगी? और जिसके अंदर देशभक्ति न हो, वो आर एस एस को गालियाँ ही तो देगा, वरना आप में से क्या किसी एक भी आदमी ने कभी किसी भी देशभक्त को आर एस एस को गालियाँ देते हुए देखा या सुना है? जाहिर है कि केवल गद्दारों के पिछवाड़े में ही आर एस एस और बीजेपी के नाम से मिर्ची लगती है।

      Reply
  3. vishal pratap singh

    अबे ये एक और चूतिया कहाँ से निकल पड़ा ….साले आजकल गली के कुत्तो को एक बुरी लत लगी है …जिसे भी पब्लिसिटी चाहिए होती है मोदी जी के खिलाफ बोल देता है …अबे साले पहले अपनी औकात तो देख …साला आजकल हर चुतिया अपने आपको लेखक समझने लगा है ..

    Reply
    1. Narendar

      Koi bhi Insan perfect nahi hota Sabhi mein kuch na kuch kharab hai kharab hai

      Reply
  4. vinod pitliya

    मुर्ख लोगो को सब अपने जैसे ही लगते है

    अब केजरीवाल को ही ले लो झूटे वादे तो ढेर सारे कर दिये अब पूरे नही कर पा रहा तो कभी LG को तो DSP को गाली देता रहता है

    लोग सब जानते है कौन मूर्ख है और कौन महा मूर्ख है वैसे केजरी ने कोई पद का लालच दे दिया होगा खबर की खबर के एडिटर को

    आज कल अखबार दारू मूर्गी मे खरीद लेता है केजरीवाल ,बजट जो 575 करोड रखा है अपनी मूर्खता छिपाने का

    Reply
  5. hayat sabri

    बिहार बीजेपी घोषणापत्र के संभावित बिंदू-
    1. गिरिराज के मार्गदर्शन में पटना में ही पाकिस्तानी दूतावास की स्थापना।
    2. बिहार की खूबसूरत सड़कों को एडवेंचरस स्पॉट का दर्जा।
    3. गली-गली बुलेट ट्रेन के लिए पटरियां, जिस पर हर घंटे लोकल पैसेंजर चलाई जाएगी।
    3.बिहार के हर गांव को एयरपोर्ट के रनवे से सीधे जोड़ा जाएगा।
    4. रेल मंत्रालय पटना में रेल म्यूजियम खोलेगा जहां पूर्व रेल मंत्रियों के जीवित पुतले रखे जाएंगे।
    5. बिहार के हर मोहल्ले को स्मार्ट शहर का दर्जा।
    6. हर एक बिहारी को पर्सनली विशेष राहत पैकेज।
    7. हर प्राइमरी स्कूल को केन्द्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा ताकि बिहार एजुकेशन हब बनें।
    8. आईआईटी में साइंस जैसे फिजूल सब्जेक्ट की जगह हिंदू गौरव का पाठ। सुबह शाम शाखा में छात्रों के ब्रेन विकास का कार्यक्रम।
    9. बिहार की हर छोटी डिस्पेंसरी को एम्स का दर्जा।
    10. कोसी में बार बार बाढ़ के मद्देनजर नदी के रुट को अंडरग्राउंड किया जाएगा।
    11. किसानों की मर्दानगी बढ़ाने की राधामोहन कृषि योजना।

    Reply
  6. धर्मवीर

    इतना घटीया और पकाऊ लेख मैने बहुत कम पढ़ा है । मोदी के विरूद्ध जहर उगलते उगलते ये हिंदु धर्म और संस्कृति के विरूद्ध भी जहर उगलने लगे । श्री राम पे उंगली उठा रहे हैं । श्री राम का जीवन एक आदर्श है । शायद इनको पता नहीं है कि उत्तरकांड वाल्मिकी ने नहीं लिखी है । इसे धुर्त लोगों ने बाद मे रामायण मे बाद मे जोड़ी है । सीता बनवास, शंबुक बध आदि कहानियाँ झूठी और शेष रामायण से विरोधाभासी हैं । जिस तरह ये खुलेआम श्री राम पर उंगली उठा रहे हैं उसी तरह जरा मुहम्मद साहब के बारे मे बात कर के दिखाएँ ।

    हिंदु इश्वर को लिंग(सृजनकर्ता के प्रतिक) मे भी पुजा करते हैं । वो इनके या किसी और इंसान के लिंग की पुजा नहीं करते । इनके हिसाब से सारे दोष हिंदु संस्कृति मे है । मुर्दे जलाना गलत है तो कब्र बनाना क्या सही है ? क्या इसमे भुमि बर्बाद नहीं होती ?

    खुद को मोदी से बेहतर प्रधानमंत्री साबित करने की बात करते हैं ! पहले अपने मुहल्ले का प्रधान तो बन जाइए ।

    Reply
    1. YOGESH

      GUJARAT ME PICHALE 5 SE 7 SALO ME 15 LAKH GAYE KAT GAYI HAI TO TUMHARE BHAGVAN RAM AUR KRISHNA KYA RADHA AUR SITA KO DUDHANE GAYE THE?

      Reply
  7. surendra

    chutiye …..aisa h main tujhe chunoti deta hu……..debate ki…..kuch secular kutte kuch jayada hi bhonkne lage h…..

    Reply
  8. sharad

    तुषार जी, आप अजेय है क्योकि “बहसबाजी” मे आपको कोई नही हरा सकता !!

    Reply
  9. BABLU

    गूगल से भी बहुत पहले आपने बता दिया था की मोदी मुर्ख प्रधानमंत्री है! पर इस लेख में तो आपने उनको मुर्ख प्रधानमंत्री कब बताया था इसका कोई लिंक ही नहीं है ! पकाऊ लेख !

    Reply
    1. sharad

      बबलू भई अब जब लेखक खुद ही कह रहे है कि . भूत भविष्य सबके ग्याता है तो आप उनसे बहस क्यो कर रहे हो, जीत तो पाओगे नही:) उनके ग्यान से लाभ लीजिये और विनम्र निवेदन कीजिये कि हमारे देश की विदेश नीति कैसी हो !! अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा ?? क्लीन-इंडिया मिशन कैसे आगे बढेगा के बारे मे ठोस सुझाव माँगिये (मोदी जी नही बल्कि इनके सुझाओ को सुनिये….पर ये मोदी जी को कोसने के साथ-2 अपने सुझाव भी तो दे??

      मूर्टीयो के विसर्जन से पानी हवा दूषित होते है पर त्योहारो पर लाखो जानवर काटने के बाद उनकी अँतदिया, खून हड्डियो से हवा पानी दूषित होते है या नही इस पर कुछ प्रवचन का अनुरोध कीजिये…..गोधरा मे जरा सी बात पर मुसलमान 59 हिन्दुओ को जला कर फ्राइ कर दे तब भी नफरत की प्रतिक्रिया मुसलमानो के खिलाफ होने पर वे कातिल मुसलमान जिम्मेदार नही बल्कि मोदी जिम्मेदार है:) क्या कॉमेडी करते हे भाई ??

      Reply
      1. सिकंदर हयात

        ”त्योहारो पर लाखो जानवर काटने के बाद उनकी अँतदिया, खून हड्डियो से हवा पानी दूषित होते है या नही इस पर कुछ प्रवचन का अनुरोध कीजिये ” बकरीद पर पर अलग से कुछ स्पेशल नहीं होता हे होता ये हे की जो जानवर बूचड़खाने में कटने होते हे वो कही और काटते हे बूचड़खाने फिर कई दिनों तक बंद रहते हे ये खाना और प्रोटीन ही होता हे जो बहुत से गरीबो के पेट में पहुचाया जाता हे मेरा हिन्दू माली कहता हे की पुरे साल सिर्फ बकरीद पर उसके परिवार को मटन खाने को मिलता हे अब आप बताइये की मूर्तियों से किसका पेट भरता हे ? और मुर्दे को पानी में बहाने से तो प्रदूषण होता हे मगर ”अँतदिया, खून ( खून अलग से तो नहीं पुरे साल का ही औसत ) हड्डियो से कैसा प्रदूषण होता हे में समझ नहीं पा रहा हु अधिकतर तो सब इस्तेमाल होता हे बाकी मिटटी की चीज़े मिटटी में ही मिल जाती हे ? और गोधरा के आधार पर गुजरात का स्कोर बराबर नहीं माना जा सकता हे मोदी जिम्मेदार थे सारी दुनिया जानती हे फिर से वही सब दोहराने की आवशयकता नहीं ”

        Reply
        1. sharad

          हयात भाई दोहराया तो इस लेख मे भी वही सब है पर प्रकाशित आपकी वेबसाइट ने ही किया है हमने नही अब जो लिखा है उसी पर तो चर्चा होगी जिस पर आप नाराज है ः)

          चलिये नही कहते कुछ …..पर असलियत आपकी जानकारी मे नही है कि अनगिनत जानवर बल्कि खुले मे भी काटे जाते है जिनकी सांख्या बुचड़खाने से जयादा होती है !! स्कोर की बात तब होती जब दो टीमे आमने सामने खेल रही हो, एक के बाद दूसरी घटना को क्रिया-प्रतिक्रिया का नाम दिया जाता है जिसमे स्कोर की बात बेमानी है ?? 59-0 से शुरु हुए पहले बेहद शर्मनाक हाफ का दूसरा हाफ भी कम शर्मनाक तो नही ही हुआ होगा.

          Reply
        2. सिकंदर हयात

          मोदी जी गुजरात में दोषी ही थे दुनिया जानती ही हे वर्ना इज़्राइलपरसत अमेरिका को क्या पड़ी थी उनका वीसा रोकने की भला ? बल्कि इसी कारण ( दंगो में मिली खुली छूठ ) से वो तभी बरसो से” हिन्दू बिस्मार्क ” की राह देख रहे हिन्दू कठमुल्लाओं की निगाह में चढ़ गए उसी चढ़ाई से उनमे पि एम बाने की महत्वाकांक्षा जगी अटल तो मोदी जी को हटाना चाहते थे मगर आडवाणी अड़ गए क्योकि तब ये आडवाणी के खास थे और आडवाणी इन्हे अपनी पि एम की योजना में महत्वपूर्ण समझते थे खेर कुदरती इन्साफ की अटल आडवाणी दोनों के राजनितिक कॅरियर का दुखद अंत मोदी जी के कारण ही हुआ वर्ना तो अटल के करम ऐसे तो थे ही की वो 2004 में चुनाव जित्त्ते और कांग्रेस सरकार के करम से आडवाणी जी का भी 2014 में गठबंधन सरकार में पि एम बन जाना आसान था दंगो की जांच में मोदी जी बच गए इसकी वजह हो सकता हे की कांग्रेस – भाजपा में 84 और 2002 को लेकर कोई अंदरुनी सेटिंग हुई हो?

          Reply
          1. sharad

            हयात भाई अगर अमेरिका ने मोदी जी का वीसा रोका तो फिर उस रोक को हटाने की अमेरिका की कौन सी मजबूरी थी ?? देशो की विदेश नीतिया एमोशन्स से नही बल्कि अपने फायदे के हिसाब से चलती है अन्यथा एक जमाना था जब रूस के रूबल की दुनिया भर मे कीमत कौडियो की थी तब भी हमारा देश दुनिया से अलग चल कर रूस के प्रति अपनी दोस्ती निभा कर खुद का आर्थिक नुकसान झेलता था ?? और अब रूस का चेहरा ?? वैसे हमारा देश भी अब अपना फायदा देखना सीख रहा है !!

            मोदी जी गुजरात में दोषी ही थे बेशक दुनिया जानती हो मगर हमारे देश की हर जांच एजेंसी के एक से एक तेजतर्रार ऑफिसर्स जब उनके खिलाफ कुछ नही पा सके, किसी कोर्ट मे उनको गुनाहगार साबित नही किया तो दुनिया मे कुछ लोग उनके खिलाफ क्या हल्ला मचाहते है क्या फर्क पड़ता है:)

      2. YOGESH

        NEPAL ME VAHA JO SAMVIDHAN LAGU KIYA USME GAY KO NATIONAL PASHU JAHER KIYA AUR GAY KI HATYA KARNE VALE KO FANSI KI SAJA TAK KA ELAN KAR DIYA HAI TO YAHA PE KYU NAHI JAHA TA GUJARAT KI BAT HAI PRADHAN MANTRI NARENDRA MODI JAB YAHA KE CHIEF MINISTER THE TO 15 LAKH GAYE KAT GAYI HAI, AGAR INFORMATION CHAHIYE TO POLICE STATION SE R.T.I KARVA LENA AGAR NAHI LE SHAKTE HO TO SAMJO KI SARE BHRAHMA AUR BANIYE AUR RAJPUT SAB LOG GAY KA MATAN KHATE HAI.

        Reply
  10. Tejus

    ये एक निहायत ही घटिया मानसिकता का घटिया प्रदर्शन शब्दों द्वारा है!
    कोई भी व्यक्ति हो लेकिन उस पद का आदर करना तो सिख लो पहले श्रीमान!
    विरोध तक तो ठीक है लेकिन उसे भी व्यक्त करने का सलीका होना चाहिये!

    Reply
  11. umakant

    ये देखिये महाविद्वान लेखक नोलेज भि दे रहे है एक फ्लाप हिंदी फिल्म उत्सव से
    आप जैसे योग्य और महाविद्वान लेखक से तो कोइ महा मुर्ख हि बहस कर सकता है

    Reply
  12. राहुल शर्मा

    लेखक को इतना बोलने का मोका मिला क्योकी ये मोदी प्रधानमंत्री ह!
    देस के pm ko मूर्ख कहने वाले लेखक को ये सोचना चाहिये की वो किसे और क्या क्ह्ह रहे हे
    आप कि samchdari इसी बात से झ्लक्ती हे की आप अछी दिन को केसे देखते हे

    Reply
  13. Tushar Cosmic

    लेख पूरा नहीं छपा है या मुझे पूरा नहीं दिख रहा है, समझ नहीं आया, मित्रवर.
    कहते हैं अधूरी जानकारी खतरनाक होती है. लेकिन मेरा तो अधूरा लेख भी कईओं की नाक के लिए खतरा है.

    खैर, उमाकांत जी, हिंदी फिलन उत्सव जो है न , वो संस्कृत नाटक मृच्छ कतिकम पर आधारित है, जो उस समय का हमें थोड़ा आभास कराता है और वसंत उत्सव का आपको और भी कई जगह ज़िक्र मिल जाएगा

    Reply
  14. Tushar Cosmic

    Tejas जी, मेरा मानना है कि हमारे यहाँ कोई लोकतंत्र नाम की चीज़ नहीं है…यह जो लोकतंत्र है न अभी यह लोकतंत्र का मजाक है…न मेरा इस तन्त्र के प्रति कोई सम्मान है और न ही इसका मज़ाक उड़ा के बने किसी प्रधान मंत्री के प्रति कोई सम्मान है

    Reply
  15. Tushar Cosmic

    धर्मवीर जी, लोकतंत्र समझते हैं आप क्या होता है..दिक्कत यह है कि अधिकाँश लोग बस सुने हैं लोकतंत्र शब्द…इसका मतलब नहीं समझते…..प्रधानमन्त्री पड़ किसी पार्टी-विशेष, किसी व्यक्ति -विशेष की जागीर नहीं है….जो सर्वश्रेष्ठ हो उसे मिलना चाहिए……..कर लें मोदी बहस मुझ से…..मैं पण प्लान पेश करता हूँ , वो अपना पेश करें….लिखित में दे देते हैं……मुल्क वोट प्लान को दे….नाम/शक्ल को नहीं…….नाम/शक्ल तो पता भी नहीं लगने चाहियें….बात खत्म…..आप भी तो मुल्क की बेहतरी ही चाहते होंगे न….क्या बुरा है इसमें?

    और मैं से मतलब मात्र मैं नहीं यहाँ, वो मैं कोई भी हो सकता है, आप भी हो सकते हैं

    Reply
    1. अजय

      हर नंगे लुच्चे से मोदी बहस नही करते है।तेरे लिए में ही काफी हूँ।
      आ जा हो जाये बहस।
      सार्थक हो बकचोदी न हो।

      Reply
  16. jeewan lal

    भाई हम सब हिंदुस्तानी हैं और अगर कोई अपराधी अपराध करता है तो बह पूरी कॉम का ही अपराधी होता है किसी एक धर्म और जाती बिशेष का नहीं आजकल हम सब एक ऐसे बहाब में बह रहे हैं जो देश को बाटने बाली साजिस की तरफ इशारा करता है देश और देश की रैयत के खिलाफ जो आतंक बम्ब कांड में सहयोग करे या साजिश में शिरकत करे बो न हिन्दू न मुस्लिम न शिख्ख् न जैन न बौध्ध न पारसी न क्रिश्चियन बो तो आबाम का गुनहगार हे उससे मुहबत कैसी ये थोड़ी सी तकलीफ बाली बात मिडिया क्यों उछाल रहा है आखिर इस सब से देश का कुछ हित होना है हाँ अगर हमारा देश भी उस दिशा की तरफ चले जिस तरफ पाकिस्तान चल रहा हे अच्छा आतंक और बुरा आतंक तो ये सब बातेे ठीक लगेंगी मगर आप सब रास्ट्र भक्त है ये बिषय देश को गलत दिशा की और ले जाने बाले बिषय हैं जो रबर की तरह हम सब मिलकर खीच रहे है यह खबर तो हो सकती हे मगर भेद भाब को दरसाने बाले समाचारो को चटपटा बनाने के लिए ही खबर नही बनना चाहिए ये मेरा व्यक्तिगत मत है सुझाब नहीं अगर सुझाब समझ कर कोई अमल में लाता हे तो रास्ट्र उस भारत माँ के लाल से प्रसन्न होगा जय हिन्द किसी की भाबनाये आहत काना मेरा कतई इरादा नहीं है यदि कोई ऐसा महसूस करता हे कृप्या छमा किजिगा ।
    जय हिन्द जय भारत ।

    Reply
    1. Arun Kumar

      हम सब सदियों से यही तो करते आ रहे है, एक दूसरे पर दोषारोपण, हर किसी को अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है, सच हमेशा कडवा होता है।
      चलो मान लेते है लेखक ने जो लिखा या कहा वो सब झूठ और बकवास है,
      लेकिन जितनी अभदृ भाषा का इसतेमाल आप लोग कर रहे हैं, ये सब किसी सजजन को पढा लो(जो राजनिती, धरम, जात-पात से ऊपर ऊठकर सोचता हो) वो बता देगा कि चू………कौन है।
      सभी राजनितीक दल एक ही हैं, सदा से कभी थरम के नाम पर और कभी जात-पात के नाम पर हमसे खेलते आये है, और हम उनके कहे पर आपस मे लड़ते आये हैं,
      किंतु अब तो इन सबसे ऊपर उठ कर सोचो, कोई कुछ कह देता है तो चले हाथों मे डंडे, भाले, करपान या जो हाथ मे लगा लेकर, एक दूसरे से लडने, ये नही सोचते कि नुकसान तो हमारा ही हो रहा है, कभी उनके बारे मे सोचा है, जिनका इस दौरान घर उजड़ा था, दंगे किसी का भला नही करते, नुकसान दोनों तरफ का होता है, फरक सिरफ इतना होता है कि , ये नुकसान किसी का जयादा और किसी का कम, लेकिन होता दोनो का है।
      रही बात मोदी की तो, हमने भी उनहे वोट दिये थे, लेकिन थोड़ा ठंडे दिमाग से सोचना कि हमने उनहे वोट कयों दिये थे ?
      हम सभी राजनिती की बातों से ऊब चुके थे, और इनसे कुछ नये की उमीद मे धे। लेकिन इनके भाषणों को ले लो, ये भी वही एक दूसरे पर दोषारोपण की राजनिती कर रहेंं हैं, ये सूनत-सूनते तो कान पक गये, आपको बोलने के लिये नहीं , कुछ करने के लिये वोट दिये थे, पर बोलने में तो इनहोने सबका नंबर काट दिया ।
      बातें दूसरी दिशा मे मड़ रही है, यहीं बंद करता हूँ, वरना आप लोग लेखक को भूल कर मुझे गालियों की गद्दी पर बैठा दोगे ।
      इस सबका कहने का बस एक ही मतलब था की, दिमाग हम सभी मे है, कोई काम किसी के कहने पर भेड़ चाल मे नही, सोच समझ कर करें ।
      ये किसी को कोई reply देने के लिए नही लिखा , आप सभी की बातें पढकर थोड़ा दखी था, सोचा कुछ लाईने मैं भी लिख दूँ ।
      धनयवाद दोसतों

      Reply
  17. ABHISHEK

    Ye jo bhi hai na SAALA awwal Darze ka Chutiya hai..
    Hum Indians ko Ghonchu aur Pagal aur Saala aur pta nhi kya kya bola isne..
    Tune America, Canada Australia jaane ki baat karte ho.. To mai tumhe bta du ki aise logo ki sankhya bahut hi jyada hai jo apne jism ki Boti-Boti kra lenge par out of the country nhi jayenge.. Aisa nhi hai ki aisa karne wale sirf Indian hi hain.. Har koi ki pahli pasand uska mulk hota hai.. Fark nhi padta ki wo American hai ya Pakistani hai ya Talibani hai ya phir kisi bhi country ka ho..
    Are Zaahil insaan, Aalochna karna achchhi baat hai, Use Apni Opinion dekar behtar bnana aur bhi achchi baat hai , lekin Aalochna ke naam par Amaryadit ho jana ye kabhi sahi nhi ho sakta..
    Tumhare likhna ka salika kuchh aisa hi hai Jaise lakho ke gahne aur aabhushan pahankar bhi bina kapdo ke koi aurat Maryadahin hi kahi jayegi..
    Mai kabhi kisi chij pe comment nhi karta aur na hi mera koi proper political agenda hi hai..
    Bas maine late night Facebook on kiya aur kya Jabardast ki heading diya hai tumne ki click karke padhna hi padha..
    Padhne ke baad kuchh aisa lga jaise kisi bachche ka baap mar gya ho aur wo apne baap ko dekhne aur pyar ko pagal ho, aur phir log btaye ki tum to nazayaz aulad ho.. Phir to uske dukh ki koi sima nhi..
    Tumne Indian Army ko bhi nhi chhoda.. Are Murakh Unhone Vardi pahan li hai to theka le rkkha hai ki sirf whi marenge..
    Are nzara to wo hoga jab humare 5 sainik ke laash ke saath saath hum 5 civilians ki chitayen bhi jalegi.. Tumne mujhe rula diya.. Meri aankho me abhi itne aanshu hain ki sayad likhne mai mai kuchh galti kar du. Tumhe kya lga ki Desh ke naam pe marne wale sirf whi hain.. Dusre pe ungali utha dena aasan hai par jab karne ki baat aati hai to log chehra chhipate phirte hain.. Tumne sahi kaha ki koi tumse bahas nhi kar sakta kyuki tumse bahas karna tauhin hai apne bahwnao ki, apne mitti ki, apne mulk ki..!!
    Modi Modi to tumne itne jaap kar liye ki unka name lekar Pandit ban gye..
    Hum Modi ke supporter nhi lekin PM hone ke karan unki Ijjat karte hain aur ye tumhe sikhne ki jarurat hai.. Rote ho ki adhikari corrupted hain to shaan tumhari tab hoti jab aise corrupted officers ko gireban pakad ke road pe khada kar dete.. Hum bhi kahte ki aaj ek deshbhakt aa gya aur inke pair chhu lena chahiye but tumne sirf ungali hi uthaye..
    Imaandaari se kahu to mujhe tum Modi jee se bade jumlebaaj lge.. par antar yha bhi hai ki log unhe sunte hain aur ye chij tumhare hisse me filhaal to nhi hai..
    Rhi baat Religious views ki to kuchh mayne me mai tumhe support arta hu..
    Kisi bhi religion ko sabse jyada khatra aur haani aaj agar koi pahucha sakta hai to ye aur koi nhi balki us dharm ke follower hi hain.. kya Hindu kya Muslim sabne milkar apne religion ko dubaa hi rhe hain..
    T. V par dekha to ek jo kisi serial me Devi ka role play kar rhi hai , advertise aane pe chhote kapdo me Bra aur Panti ka Add kar rhi hai.. Ye bahut dukhad hai..

    Modi ke videsh yatra pe kisi ko koi aapatti nhi honi chahiye,
    Tum khud mante ho ki Desh ke sthiti thik nhi hai to tumhe ye bhi smajh lena chahiye ki Modi ke pass koi magic stick nhi hai ki ghumaya aur saare sapno ko pura kar diya., Black money tumhare pocket me nhi hai ki tumhare jeb se nikala aur logo me bant diya.. Wo videsh me hai aur uski apni rules and regulations hain.. Aur wo apne anusar hi chalega..!

    Modi ke dress code pe tumne baat ki ,
    Pahle aisa pahanta tha ab aisa pahanta hai..
    To meri tumhe salah hai ki pahle ki baato se bahar niklo kyuki agar pahle ki baat hone lgi to hume aur tumhe nange ghumna padega kyuki hmare purwaj nange hi the..
    Logo ko smay ke anusar chalne ka haq hai..
    Wo us Chair pe hain ki Desh ka koi bhi nagrik ye to kabhi nhi chahega ki unka PM phata hua kurta pajama pahanke America ghum aaye.. Mai to bilkul bhi nhi..

    Safai abhiyan se tumhe kya lagta hai ki Modi aake tumhare darwaje pe jhadu lgaye tab hogi safai..
    Are tum desh ke jimmewar nagrik ho tumhe khud pta hona chahiye ki kuda kachra kaha dalna chahiye.. Bedroom me bed pe sote waqt kyu nhi khayal aata ki bed pe hi kuda fenk de.. ye sab ghatiya sonch hai ki kuda kaha dale.. Modi ne tinn ka dabba nhi diya..

    Society me rahte ho to tumhe khud se bhi kosish karni chahiye ki kuda kaha dalna behtar hoga..
    Sab kuchh achanak se nhi ho sakta mere bhai..
    Nepal me earthquake aaya to tum nhi gye the logo ko lane aur bchane but naam hua ki India e bahut support kiya aur ab ye mat kahna ki tum indian nhi ho..
    Kashmir me bardh aaya to Modi kaise jayenge mere dost., unhone whi kiya jo unhe karna chahiye. , Wo order de sakte the aur unhone diya, wo bta sakte hain ki ghar ke bahar safai kro, tum agar is chij ki ummid karte ho ki wo khud kre to ye to beimaani hogi..

    Hum kachchhe me the aur kachchhe me hi rahenge jab tak hum khud kapde pahan ne layak kaam na kre…
    Modi to kya tumhe agar PM bna diya jaye to tum bhi sabko kapde nhi dila sakte..

    Roti kmani padti hai haath failaoge to Dhikkar hai tumpe agar tum saririk roop se sakshm ho..

    Desh ke Neta kuchh nhi kar sakte mere bhai wo hume rasta dikha sakte hain jo sachche mayne me ek Neta ka kaam hota hai.. Baaki to hume hi karna hai..

    Tumne parliament canteen ki baat ki to Modi hi wo hain jinhone is baat pe jor diya ki parliament canteen ki subsidy khatam honi chahiye aaj congress bhi support me hai aur ummid hai jaldi hi ye dekhne ko mile..

    Mujhe tumse koi personally matter nhi.. So request ye hai ki ise personal issues mat smajhna..
    Maine apni Opinion kahi jo meri soch hai..
    Mai har wo word wapas leta hu jo personally tumhe taklif dengi..

    I’m a law binding citizen..
    I always respect the Indian constitution….
    Mujhe pyar hai yha ke har insan se.. yha ki mitti se yha ke hwaon se..
    Mujhe kabhi parwah nhi ki uska religion kya hai..
    Sirf hindustani hai to hum uske ho gye..
    Baki apna kahne ko to puri duniya hai..

    Reply
  18. BABLU

    दंगे सिर्फ गुजरात में ही नहीं हुए है इसके अलावे भी बहुत सारे दंगे हुए है ! मोदी जिनको पूरा देश दंगाई(खास कर एक विशेष वर्ग ) मानता है उसको न्यायलय ने बरी कर दिया है ! तो फिर मोदी कैसे कसूरवार है ! सुप्रीम कोर्ट का फैसला सबके लिए सर्वमान्य है ! सिकंदर सर, आप बोलते हो की कांग्रेस और बीजेपी में 84 और 2002 को लेकर कोई अंदरुनी सेटिंग हुई हो? अगर अंदरुनी सेटिंग होती तो सोनिया जी मोदी को ”मौत के सौदागर” जैसे उपनामों से अलंकृत नहीं करती ! मोदी को कोर्ट में बरी होने के बाद ही विपक्ष के मुह पर ताले लगे है ! वरना मोदी रोज नए नए नाम से पुकारे जाते थे !

    Reply
    1. YOGESH

      BHAIYA, AAP LOGO KO JANKAR HAIRANI HOGI INDIA KE ANDAR 52% O B C, .22.50 % S.C, S.T HAI, 15% MUSLIM HAI, TOTAL HUE 85 SE 90% AUR IS DES ME JO BHI BADI PARTY HAI JAISE CONGRESS, B.J.P, COMMUNIST, MARKSVADI COMMUNIST, TRUNUMUL CONGRESS SARI PARTY O KE MALIK BHRAHMAN HAI, AUR SARE RAJYO KE MUKHYMANTRI 1 YA 2 KO CHHOD KAR SARE BHRAHMAN BANIYA AUR RAJPUT HAI, AAPNE KITABO ME STORY PADHI HOGI EK GARIB BHRAHMAN THA YE GARIB BHRAHMAN TO SARE DESH KI MUKHY JAISE PARLIAMENT, IAS- IPS OFFICER, SACHIV, SARE UNIVERSITY KE CHANCELLER, VICE CHANCELLER, KOI BHI IAS OFFICER DEKO SALE GARIB BHRAHMAN HI HOTE HAI,

      Reply
  19. amit

    Bus me ye hi kahna chahuga ye jo bhi hai hai harami ki hi olad kyoki mulayza farmaye mulayza farmaye aap sab log samjh gaye hoge ki ye kon hai

    Reply
  20. jai mishra

    Bhai yo se ki modi Ji mere nahi balki pure desh ke pm hain rahi Gandhi ki baat to tu bata tune aaj tak kya kya saaf kiya hai there to Baal hi saaf nahi hain aaya hai bhasan dene tu kya chahta hai .and tune saale Hindu tyoharon ke baare main hi gandgi failane ki baat kyon ki hai saale tune to pahle hi saampradayikta faila di aur Jo tu pm banna caah raha hai to jaan le ki modi Ji ko desh be chuna hai saala dimag kharab kar diya harami…….

    Reply
  21. सिकंदर हयात

    Nirendra Nagar
    11 August at 22:09 ·
    नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों कहा कि उन्हें आलोचना से कोई दिक़्क़त नहीं है। उनके मुताबिक़ अगर पब्लिक फ़िगर हैं तो आलोचना सहने की आदत होनी चाहिए। लेकिन गवर्नर रघुराम राजन हैं कि मोदी के बारे में कुछ भी बोलने से कतरा गए। कहा, कुछ बोलूंगा तो समस्या हो जाएगी। यह बताता है कि देश में कैसा आतंक का माहौल है कि हर कोई डरता है कि वह यदि मोदी या बीजेपी के ख़िलाफ़ बोलेगा, तो देशद्रोही घोषित हो जाएगा। मीडिया के एक बड़े वर्ग ने जिस तरह से लंबलेटासन किया है, उससे कई बार तो लगता है जैसे देश में अधोषित इमर्जेंसी आ गई है।

    Reply
  22. सिकंदर हयात

    Sheetal P Singh : मोदी जी का तीसरा पन्द्रह अगस्त और हमारा सत्तरवां… मोदी जी ने आज लालक़िले से अपना २०१९ के लोकसभा चुनाव का एजेंडा पेश किया। वे जानते हैं कि उनके समर्थक उनसे काले धन, दो करोड़ सालाना नौकरियों, मंहगाई कम करने पर तो कुछ पूछने से रहे… अब वक़्त है कि उन्हे नया एजेंडा दे दिया जाय! बलूचिस्तान और गिलगित अगला चुनाव लड़ेंगे! हम जानते हैं कि सिवाय इसके कि हमारे या उनके क़ब्ज़े के कश्मीर में कुछ और लोग मार डाले जांय, कुछ और सुरक्षा कर्मी राष्ट्रीय झंडों में लपेट कर अपने गाँव वापस किये जांय, कुछ और दिन कर्फ़्यू रहे… कुछ बदलने वाला नहीं है! पर चुनाव में देशभक्ति की फ़सल काटने का यह बेहतर औज़ार है, तब जब दाल के भाव नीचे आने नहीं हैं और प्रापर्टी के ऊपर जाने नहीं हैं! तो आज के पन्द्रह अगस्त को भगत मंडली के भजन का मुखड़ा कुछ यूँ है “क्वेटा और गिलगित में दिया पाकिसतान को ललकार ……”। ये लाइनें आलोचक जोड़ेंगे- “विकास” वाले मोदी करो देस बंटाधार….। चलिये पतंग उड़ाते हैं। जै हिन्द।

    Reply
    1. सिकंदर हयात

      Om Thanvi : लोग पूछ रहे हैं प्रधानमंत्री ने नई योजनाओं के सपने नहीं दिखाए। जब पुराने सरेआम धुल रहे हों, नए कैसे गढ़ेंगे! कहाँ गया मेक इन इंडिया? नीति आयोग? आदर्श ग्राम? शौचालय और जन-धन गिनाते थक जाएँगे तो रेल टिकट और एलईडी बल्ब से ही न गुज़र होगी! और बलूचिस्तान? देश के स्वाधीनता दिवस पर लाल क़िले की प्राचीर से? निपट अजूबा। उधर, राष्ट्रपति ने दलितों पर अत्याचार का मामला अपने सम्बोधन में उठाया और विभाजनकारी ताक़तों की निंदा करते हुए देश में बढ़ती असहिष्णुता की बात की। यह उन लोगों लोगों सीधा सम्बोधन है जो तमाम गोरखधंधे अंजाम देकर भी पूछते फिरते हैं कि कहाँ है असहिष्णुता, कहाँ है? प्रधानमंत्री ने दलितों पर हमलों की आख़िरकार मलामत की है। क्या लेखकों, कलाकारों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों पर हो रहे हमलों पर भी वे आज मुख खोलेंगे?

      Reply
  23. zakir hussain

    अगर हम इस सरकार के बनने के बाद की स्थितियों मे तुलना करे तो, देश मे अविश्वास का माहौल बढ़ा है, और उसको, एक खास मानसिकता की भीड़ का देश के अनेक हिस्सो मे, किसी ख़ास समुदाय पे हमलो से समझा जा सकता है.
    एक भावक और उग्र राष्ट्रवाद को महिमा मंडित किया जा रहा है. कश्मीर के हालत पे मैने हन्नान अंसारी जी के लेख पे कट्टरपंथियो की आलोचना की. लेकिन ये भी सत्य है कि पूर्ववर्ती सेकुलर सरकारों ने अनेक नाज़ुक मौको पे स्थिति को बेहतर तरीके से काबू किया है.

    Reply
  24. सिकंदर हयात

    बिलकुल ऐसा ही हे वास्तव में ये तो होना ही था कश्मीर में जब लोग अंधे हो रहे थे तब सोशल मिडिया की मोदी आर्मी इस पर चियर्स कर रही थी भाजपा की पत्रिका का संपादक और बहुत ही घटिया विचारो का आदमी —– कुमार झा तो हवाई हमलो की मांग कर रहा था कल का सौम्य लेखक संपादक संजय तिवारी आज बिलकुल सड़कछाप लोगो की तरह कमेंट करता हे रविश कुमार जैसे टीवी पत्रकारिता के लीजेंड के ये ”लोग खून के प्यासे” से हे लगता यही हे की इन्ही सब बातो से कश्मीर में ठंडी पड़ चुकी आज़ादी की लड़ाई को अचानक से इतना जोश मिल गया की महीनो से ये लोग डटे हुए हे कुछ लोगो का कहना सही हे की अगला चुनाव में हार को देखते हुए मोदी जी युद्ध भी करा सकते हे जिसमे उन्हें लगातार लोकतान्त्रिक सरकारों से दुखी पाक सेना का भी पूरा सहयोग मिलेगा सभी हालात इसी और इशारा कर रहे हे

    Reply
    1. zakir hussain

      जब पाकिस्तान भारत से 4 बार लड़ा, लेकिन भारत को नही हरा पाया तो उसके वीर रस के योद्धाओ ने अपने देश मे भारत से संबंध सुधारने की वकालत करने वाली, सेकुलर जमात को भारत का एजेंट घोषित कर, निशाने पे ले लिया.

      अब छद्म-युद्ध से हमारी नींदे हराम करने वाले पाकिस्तान नामक रोग का स्पष्ट इलाज नही मिलने पे, राष्ट्रवादी, बहादुर अब अपने देश मे ही सॉफ्ट टारगेट ढूँढते है. कायर और हताश लोगो के यही लक्षण होते हैं.

      Reply
      1. सिकंदर हयात

        बिलकुल जाकिर भाई ये घटिया कायर और पिटे हुए जिंदगी से हारे हुए लोग उग्रता कट्टरता कठमुल्लावाद उग्रराष्ट्रवाद के सहारे अपनी सड़ी हुई जिंदगी में रंग भरते रहते हे हालांकि हार हमने भी बहुत देखि हे मगर हम हारे हुए लोग नहीं हे . खेर हिमांशु कुमार मानवाधिकार कार्यकर्ता हमारे मुज्जफरनगर के ही हे लिखते हे ” नवाज़ भाई ,जी मोदी भाई ,यार चार छ्ह लड़के भेज देना असलाह ले के ,वो मेरी सेक्स सीडी दिल्ली विधान सभा मे पेश हो गई है ,पब्लिक का ध्यान बटाना ज़रूरी है ,कुर्सी चली गई तो अम्बानी भाई को क्या जवाब दूंगा ?चुनाव मे उनसे काफी कर्जा लिया था ,और हाँ नवाज़ भाई लड़के कश्मीर बार्डर पर ही भिजवाना ,गुजरात , राजस्थान या पंजाब बार्डर पर भेजोगे तो पब्लिक को शक हो जायेगा ,पिछली दफा आपनेपठानकोट पर हमला करवाया था ,बादल साहब ने आपके लड़कों को आर्मी के अड्डे तक लाने के लिये अपना एक एसपी भेज दिया था ,बात खुल गई तो एसपी को हिफाजत के साथ पब्लिक की नज़र से दूर रखा हुआ है ,आप फिकर ना करें मोदी साहब, चार छ्ह लड़कों को अल्लाह और सबाब के नाम पर बहका कर भिजवाता हूँ ,देखियेगा कल के बाद पब्लिक आप की रंगरेलियों वाली सीडी की बात बिल्कुल भूल जायेगी ,बस आप हमारा ख्याल रखिये ,हम आपका ख्याल रखेंगे ,इस बेवकूफ पब्लिक को लड़ने दीजिये ,शुक्रिया नवाज भाई ,खुदा हाफिज़ मोदी भाई ”

        Reply
  25. DJ

    जिसने भी ये लिखा है साला १ नम्बर का चुतिया है. | ये गन्दी नाली का किडा ही हो सकता है. तु क्या चुनोती देता है बे?
    चुनोती तो तेरे मा-बाप को मिल गयी है कि किस नालायक को पैदा कर दिय उन्होने.

    Reply
  26. zakir hussain

    मैं तो शुरू से मोदी का आलोचक रहा हूँ, लेकिन जब चुनाव से ठीक पहले, उन्होने हमारे देश के सैनिको की शहादत का हवाला देके, और विदेशी राष्टाधयक्षो के ज़रिए पाकिस्तान को घेरने की कूटनीति का मज़ाक उड़ाया, और पाकिस्तान मे घुस के सीधे लड़ाई जैसी बातो पे सस्ती वाहवाही, और वोट बटेरे, तो बहुत पीड़ा हुई.

    उनकी इन बातो पे ताली पीटने वाली, वो मध्यम वर्गीय जनता थी, जो अपने बच्चो को आर्मी मे केरियर बनाने से इसलिए रोकती है, क्यूंकी वहाँ जान का ख़तरा है, अपनी बेटियों की शादी सैनिको से नही करते. लेकिन आज और उस वक्त भी पाकिस्तान से युद्ध की हुंकार भरती वीर रस की कविताओ को सोशल मीडिया पे शेयर करते वक्त, मोदिजी को वोट देने के अपील कर रहे थे.

    राजनीति मे विरोधी दलो की आलोचना, इतनी बड़ी बात नही, लेकिन सैनिको को राजनीति के चारे के तौर पे इस्तेमाल करने की नीच हरकत इससे पहले नही हुई थी.

    ये बात मोदीजी को भी पता थी कि पाकिस्तान से सीधे युद्ध करने के विकल्प की क्या सीमाए और जटिलताए हैं. वो भी मनमोहन सरकार की तरह ही अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के ज़रिए पाकिस्तान को घेरने की रणनिति पे काम करेंगे. पाकिस्तान से बातचीत भी करेंगे. अंतरराष्ट्रीय मंचो पे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठा के उसपे दवाब बनाने की कोशिशे करेंगे.

    फिर सत्ता का ऐसा लालच क्या कि कुर्सी की खातिर शर्म बेच खाए?

    Reply
  27. सिकंदर हयात

    जाकिर भाई बात ये हे की हिन्दू कट्टरपंथ एक बेहद दुष्ट विचारधारा हे मुस्लिम कटरपंथ और हिन्दू कट्टरपंथ में सिर्फ एक फर्क हे की मुस्लिम कट्टरपंथ एक” क्रूर ” सोच हे तो वही हिन्दू कटरपंथ एक” कमीनी ” विचारधारा हे और इनमे कोई फर्क नहीं ह हे क्रूर लोग पाकिस्तान से आकर खून पि गए अब इधर के कमीने लोग खून चूसेंगे अब ये जो चेनलो में बैठ कर पाकिस्तान के टुकड़े टुकड़े कर रहे हे ये सब हथियारों के दलाल हेऔर ये सोशल मिडिया के लोग ये टुकड़ाखोर हे एक शायद एक मुम्बई का जेन पत्रकार———–परिहार था शायद कई बंगलो का मालिक वो मनमोहन सरकार में शहीद हेमराज की घटना पर लिखता था की इस सर्कार को चार जूते लगाने का मन करता हे ऐसी ही सेकड़ो नमूने थे अब ये सब चुप हे तब सिर्फ मोदी को लाने के लिए बकवास करते थे जबकि बहुत पहले से किसी भी निष्पक्ष आदमी को अच्छी तरह पता हे की जब तक पाकिस्तांन के पास चीन और एटम बम हे तब तक पाकिस्तान और कश्मीर समस्या का कोई सैनिक हल नहीं हे फिर भी मोदी जी ने अपने टुच्चे सपोटरो की खातिर बार बार बातचीत तोड़ी इसी का खामियाजा सरहद के आर पर हज़ारो लोग भुगत रहे हे बहुत अफ़सोस सोचिये हमारा कोई अपना इस तरह चुनाव जितने की सनक में मारा जाए तो हम पर क्या बीतेगी —– ?

    Reply
  28. Raaj

    Haraam ki aulad,hamare desh ke prime minister ke bare me bolne se pahle apni khud ki aukaat dekh,samne aa gaya toh tujhme itne tamache padenge ki tu teri soorat khud bhool jayega,sharm kar desh ke behtreen pm ke bare me bolne se pahle.

    Reply
  29. deva

    गोूग्ले पागल पागल हे गोूग्ले का मालिक पागल हे

    Reply
  30. राजीव सिंह

    अमन बेंच देंगे चमन बेंच देंगे कलि बेंच देंगे सुमन बेंच देंगे कमल के सिपाही ( मोदी जी ) अगर तुम सो गए तो ये वतन के पुजारी वतन बेंच देंगे

    इन्कलाब जिन्दाबद

    Reply
  31. Nandkishor Ishwar Hatewar

    Countless stranger’s max. male and some female knowingly all over any type vehicle’s horn and to shout and very dirty to abuse 3activities very more loudly only for me because my no concern or completely on one’s owned initiative or any type not to beg or pure self dependent proof

    Reply
  32. Astitva vajpayee

    Swami vivekanand ji ke bad mujhe shri Narendra damodar dad modi ji ka hi desh prem or kabiliyat acchi lagti hai ve aise PM hain jinko popra desh hi nahi balki World main log pas and karte hain isliye main tumse keh raha hoon ki ye sab faltoo ke message bhejna band Karo or apna chootiyapan apne hi paas rakho or suno desh tumhare chootiyapan ko nahi or dekhega chootiye no.१

    Reply
  33. akbar

    यहा दो वक्‍त की रोटी कमाने में गाड फट जाती और तुम लो कमरे में बैठ कर सिर्फ मां चुदा रहै हैा अबे घर के बाहर निकल कर देखों मुहचौदी करने से कुछ नहीं होता मादर चौदों देश सुधर रहै हैंा

    Reply
    1. अरुण

      मोदी का बिरोध करने वालो
      पहले अपने अन्दर छिपे शैतान का बिरोध करना सीखो
      देशद्रोह की भावना रखने वाला ही मोदी जी का बिरोध कर सकता है ।

      Reply
  34. Abhishek Singh

    Sala dogla hai kyare .
    Najayaj aulad hai kyare.
    Najane kaise is paksaf dharti par tujh jaisa dogla napak aulad there ma bap ne paida kar diya.

    Reply
  35. कमल मस्तानी

    अरे माधरचोद, बहन की लोड़े हिसाब से लिखा कर, नहीं तो तुम्हारे गांड में शिवा जी तलवार देखा है घुसा दून्गा कोई कटुवा बचाने नही आएगा……अगली बार हिसाब से लिखियो….नहीं तो तू रहेगा लेकिन तेरा कटा हुआ हथियार नही रहेगा…….

    Reply
  36. Renoir

    Ye kon hai chutiya jo modi ji ke bare me galt bol rha hai beta tu tera dhyan rak modi ke bare me galt mt bol chutiye nhi to utalunga

    Reply
    1. afzal khan

      रेनियर जी
      खबर की खबर में आपका स्वागत है ! आपके कमेंट , लेख या सुझाव का हमें इंतजार रहेगा !

      Reply
  37. thakur saab

    हलाला जब हुआ था तेरि अम्मि का त्ब तेरे जैस ह्र्र्र्र्रआम का पिला पैदा हुआ था

    Reply
    1. prasad joshi

      how much time you have spend to type this large article?

      When we shows the figure to other rest three turns to you

      Reply
  38. pappu

    Tu gaddar hai desh ka sale Shreeram ko bhikjari BTa RHA hai kutte harami ई aulad gadha sale

    Reply
  39. KDSingh

    Comment एक निवेदन है
    जिनके सपने मोदी जी पूरा नही कर रहे वो लोग अगले लोकसभा चुनाव में मोदी को वोट न दें

    मुलायम मायावती राहुल केजरीवाल लालू आदि उनके कई आप्सन हैं

    Reply
  40. prasad joshi

    ये लोकतंत्र है, और लेखक महोदय ये आपकी अभिव्यक्ती कि आझादी है जो आपने निभायी. १२५ करोड जनता मे से आप एक हो, आप अकेले ही १२५ करोड जनता नही हो. तो ऐसे अकेले अकेले सही गलत के फैसले करना आपके आधीकार क्षेत्र मे नही आता है.
    लोकतंत्र का आदर करते हुवे जनता ने जिस किसीको अपनी ईच्छासे चुनकर दिया है ऊस जनता कि ईच्छा का तो आदर करो. मोदी को मुर्ख कहने के चक्कर मे आप जनता को मुर्ख कह रहे हो.
    महोदय ये धर्म और जाती के नाम पर बाटे जाने कि Theory बहोत बचकानी है. भारत मे रोज १००० से जादा हत्याए होती है. पोलीस जब कातीलो की तलाश मे ढुंढने निकलती है तो ऊनका पहला शक घर वाले, रिश्तेदार, दोस्तो पर होता है. किसी दुसरे जाती या दुसरे धर्म के ईन्सान पर नही. आपके दंगो मे आज तक जितने लोग मारे जा चुके है ऊससे सौ गुना जाने हर साल पारिवारीक विवाद के बली चढते है. जो एक ही धर्म और ऐक ही जाती कि पैदाइश होते है.
    और एक सत्य कहना चाहुंगा, मोदी को आप जैसे लोगो ने ही बडा किया है. दिल की गहराइसे आप लोग मोदी को गालीया देते हो. और ये branding और campaigning कि क्या Theory है. मोदीजी अगर खुदकी branding और promotion करते है, लोगोको hammer करते है खुद के बारे मे तो ये सोनीयाजी, राहुलजी भी कर सकते है ना. ऊन्हे किसने रोका है. ये Theory रविश कुमार भी बता रहे थे. हर राज नेता के पास पैसा होता है हर कोइ करे खुद की branding और promotion.
    राजनैतीक सत्तांतरन के ईस दौर मे पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि राजनेताओसे से जादा बत्तर बुद्धीजिवीयो का बर्ताव हुवा है. आगे चलकर अगर इस देश मे दंंगे और फसाद होते है तो उसकी जिम्मेदार आप लोग भी होगे. आग दोनो तरफ से लगायी जारही है.

    Reply
  41. prasad joshi

    और एक बात,
    ये गुगल क्या है? ये एक सर्च इन्जीन है. दुनीया भर के सर्व्हर के एक्सट्रानेट पर जो डाटा है वो उसे ढुंढता है और हम तक पोहौंचाता है.
    गुगल कोइ इन्टरनँशनल ऑथारिटी नही है जो लोगो को होषीयारी और मुर्खता के सर्टीफिकेट देनेवाली.

    ये ऐसे ही किसी वेब साइट पर किसीने लिखा होगा और गुगल वो सर्च करके देता होगा.

    Reply
  42. कमल सक्सेना

    समझ मे ही नहीं आया कि ऐसी बकबास करने वाला आखिर है कौन, अनेकों बार फ़ोटो को देखा – कभी आंखें कहतीं कि आदमी है कभी कहतीं औरत है फिर दिमाग में ख्याल आया कि ऊपर वाले के सांचे में कभी कभी गड़बड़ हो जाती है ,हो न हो यह भी उसी गड़बड़ी का नतीजा है , इसलिए माफ़ किया
    क्योंकि –
    ‘क्षमा बड़न को चाहिए किन्नर को उत्पात’
    इसलिए हे तुषार कुत्ता सॉरी गुप्ता मौका मिले तो किसी मानसिक चिकित्सालय में इलाज़ करवा लेना

    Reply
  43. हरीश राम आर्या

    ईश्‍व माफ करें, कोढ़ी को कोढ़ी कहना लंगड़े को लंगड़ा कहना और अंधे को अंधा कहना भारतीयता के विपरीत है।ठीक इसी प्रकार से हमारे प्रधान सेवक को मूरख कहना हम 125 करोड़ जिंदे लोगों का अपमान है । कोई भी किसी को अपशब्‍द कहे यह शोभा नहीं देता।मूल में इस विचार हीन लेखक की बातों को बिना किसी टीका-टिप्‍पणी के छोड़ दिया जाए। किसी के अपमान करने से किसी की महत्‍ता कम नहीं होती है। भारत को बनाने में 15 अगस्‍त 1947 से पहले के युवक और युवततियों की जरुरत है न कि ऐसे लोगों की जो अनाप सनाप कुछ भी बोलने में अपनी बहादुरी दिखाते हैं ।यदि बहादुरी दिखानी है तो पाक और चीन की सीमाएं आज हमें याद कर रही हैं ।है दम वहा जाने की या फिर ऐसे ही …………

    Reply
  44. ravi

    Es likhna wala ki maa chod do
    Sala Randi ka Pakistani hoga jarur mulla agar ya lakhak Musalman nahi hoga to es ka bàap pakka Musalman hoga sala Musalman ki oolad

    Reply

Add Comment