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जब से मुंबई ब्लास्ट के आरोपी याक़ूब मेमन को फांसी की सजा सुनाई गयी है फेसबुक फे कुछ मुसलमानो द्वारा याक़ूब मेमन को निर्दोष साबित करने की एक मुहीम चलायी जा रही है और फेसबुक लेखक दो तीन दिनों से सिर्फ मुसलमानों को ही भारत मे फांसी दिए जाने के खिलाफ छाती पीट रहे और बडे ही स्वयंभू तरीके से सुप्रीम कोर्ट समेत पूरी भारतीय संवैधानिक व्यवस्था को बज्र बेइमान हिंदू वादी और मुसलमान विरोधी घोषित कर रहे हैं.इस में भी कोई शक नहीं के मोदी सरकार में जिस तरह हिन्दू आतंकवादियों या अपराधियो को रिहा किया जा रहा है न्याय पालिका पे सवाल उठना लाजमी है . जिस तरह अमित शाह को बरी किया गया और उस जज को फिर गवर्नर बनाया गया है इस से लगता है के न्यायपालिका को भी भराष्ट्रचार में धकेलने की कोशिश है.

ये भी सही है कि अफजल गुरु के मामले में सुप्रिम कोर्ट में ने कहा था कि “हालांकि अफजल गुरु के खिलाफ कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि वह संसद पर हमले का दोषी है, मगर इस राष्ट्र की सामूहिक अंतेषणा तभी शान्त होगी जब उसे सजा ए मौत दे दी जाये।” यहां पर बाबरी मस्जिद के इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले को भी लिया जा सकता है जिसमें हाईकोर्ट ने कहा था कि “आस्था के आधार पर राम लला को वहां विराजमान किया जाये” ये कुछ उदाहरण हैं जो माननीय न्यायपालिका के दामन की तरफ उंगली उठाने पर मजबूर कर देते हैं।

आइये अब हम देखते है भारत में अभी तक कितने लोगो को फांसी दी गयी है. आजाद भारत में अब तक कुल 169 लोगों को फांसी हुयी है जिनमें से मात्र 19 मुसलमान हैं , यही नही 1955 के पहले तक तो एक भी मुसलमान को फांसी हुयी ही नही थी।जबकि सबसे ज्यादा मुसलमान विरोधी माहौल देश मे उसी दौर मे था।और तब तक 37 गैर मुसलमानों को अलग अलग जुर्म में फांसी पर लटकाया जा चुका था।

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों खास तौर से मुसलमानो के लिये न्याय नहीं है कहना गलत हो गा बल्कि मुझे लगता है के यहाँ के न्याय प्रकिर्या में आप को अपनी पूरी बात रखने का हक़ है अब देखिये कसाब पे करोड़ो रूपये खर्च किये गए , अफज़ल गुरु और याक़ूब मेमों को १५ साल से अधिक का मौक़ा दिया गया. अगर कोई इस्लामिक मुल्क होता तो कोई सुनवाई नहीं होती हुकूमत एक मिनट में फांसी पे लटका देती है. देखिये मिस्र, सीरिया, ईराक ,आदि देशो में हज़ारो लोगो को फांसी पे बगैर ट्रायल के लटका देती है.

एक नजर इस तथ्य की तरफ भी देखिये आरटीआई के जरिए पूछे गए सवाल के जवाब में मिली जानकारी के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल अपने कार्यकाल में 27 लोगों को फांसी से माफी दे चुकी थीं जिनमें एक भी मुस्लिम नहीं हैं । सब छोड़ो उस कर्नल बैसला का क्या हुआ जिसपर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज हुआ था ? गिरफ्तारी भी हुई या मुकदमा वापस हो गया ? राष्ट्रद्रोह में फांसी की सजा का प्रावधान है तो दे दिया फांसी ?आतंकवादी भुल्लर का क्या हुआ ? ,राजीव गांधी की हत्यारी नलिनी और 3 फांसी सजा पाए हत्यारों का क्या हुआ ? छोड़ दिया ? नहीं छोड़ा तो छोड़ ही दोगे । अरे उसका क्या हुआ ? 1981 में सिखों द्वारा एयर इंडिया के विमान के पायलट की गर्दन पर कृपाण रख कर हाईजैक करके लाहौर ले जाने वाले खालिस्तानी आतंकवादी गजेंद्र सिंह का क्या हुआ ? छोड़ दिया । उसका क्या हुआ आनन्द मोहन का ? गोपालगंज के डी.एम.जी. कृष्णया हत्याकांड में फांसी की सजा पाए पूर्व सांसद आनंद मोहन का ? दे दी फांसी ? या उम्रकैद में बदल दी गई सजा ? बदल दी ।उसका क्या हुआ ? धर्मपाल का अरे वही सोनीपत वाला जिसने बलात्कार किया गिरफ्तार हुआ कुछ नहीं दिया सब ऐश कर रहे हैं गिरफ्तार करने की औकात नहीं सरकार की । अजमल कसाब को दो फांसी , अफज़ल गुरु को भी दो फांसी , याकूब मेमन को भी दो भाई पर ऐसा दोगलापन मत दिखाओ कि देश का एक वर्ग पक्षपात महसूस करे । और माफ करना भाई सच तो यही है कि वह पक्षपात महसूस कर रहा है और यह देश के लिए घातक है।

अब कुछ लोगो का कहना है के मेमन को फांसी क्यों दी जा रही है . मेरा मन्ना है के मेमन को फांसी इस लिये जरुरी है के मुंबई ब्लास्ट भारत में आतंकवाद की शुरुवात कही जा सकती है इस के बाद में भारत में ब्लास्ट में तेजी आ गयी इसी से सिख कर कुछ हिन्दू ग्रुप ने भी इसी तरह मालगाओ , मक्का मस्जिद और समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट किया .ये तकनीक इन लोगो ने मुसलमानो से ही सीखी है .इन ब्लास्ट के मुजरिमो को भी फांसी होनी चाहिए . कुछ लोगो का तर्क है के पंजाब के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के हत्यारे को माफ़ कर दिया जाता है और भी बहुत से अपराधी को माफ़ कर दिया गे है तो मेमन को ममाफी क्यों नहीं . देखिये दुसरो के पाप गिनाने से आप का पाप काम नहीं हो जाता . याक़ूब मेमन मुजरिम था और उस ने कबूला भी और वह खुद फांसी की सजा को उम्र क़ैद में बदलने को कह रहा है इस से साबित है के अपराध में शामिल था . आप को याक़ूब मेमन के प्रति दया आ रही है मगर उस में मरने वाले हज़ारो लोगो के परिवार के बारे में आप नहीं सोच रहे है .आतंकवाद को रोकने के लिये मुजरिमो को सजा देना और उन के खिलाफ सख्त क़दम उठाना बहुत जरुरी है . यहाँ मेरी मुराद हर तरह के अपराध और सभी के लिये बगैर किसी दह्र्म और जात पात के भेद भाव के .

आखिर में (हज़रत उमर फारूक रज़ि ) का ये कॉल है के” जो रियासत मुजरिमों पे रहम करती है वहाँ के बेगुनाह लोग बड़ी बेरहमी से मरते हैं “. इस्लाम ने तो अपराध रोकने के लिये बड़े सख्त क़ानून बनाये है और अपराधियो से इस्लाम में कोई नरमी बरतने को नहीं कहा गया है क्यों के इस से समाज बिगड़ता है और अपराधियो को अपराध करने के लिये इस से प्रोत्स्साहण मिलता है.