modi-israel

गोधराकांड एक अपराधिक घटना थी और यह प्रशासन और रेलवे के सुरक्षा की विफलता थी,ट्रेन की दो बोगी को घेर कर चला दिया जाता है और उसमे 55-60 लोगों की निर्मम हत्या कर दी जाती है , यह भारत में घटा जघन्यतम अपराध था जिसकी तिव्रता के साथ विवेचना करके अदालत से दोषी करार दिये लोगों को फांसी देनी चाहिए थी जिससे सबक मिल सके और ऐसे अपराध पुनः ना हों।

गोधराकांड में मृतकों की लाशों को पूरे अहमदाबाद में घुमाया गया सनसनी फैलाई गई , विश्व हिन्दू परिषद के सदस्यों और पदाधिकारियों द्वारा उत्तेजक भाषण दिये गये और माहौल खराब किया गया , और इस सबकी अनुमति दी वहाँ की भाजपा सरकार ने जिसके मुख्यमन्त्री नरेंद्र मोदी थे।भारत के इतिहास में शवों का ऐसा प्रदर्शन कभी देखा नहीं गया कि 56 शव अलग अलग अहमदाबाद के एक एक इलाके में घुमाए गये धार्मिक उत्तेजना फैलाई गई और फलस्वरूप दंगे भड़काये गये ।भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद द्वारा एक वर्ग को निशाना बनाने के लिए इन शवों का प्रदर्शन किया गया बल्कि यह कहें कि इस्तेमाल किया गया ।शवों को ससम्मान पंचतत्व में विलीन ना करके उनके प्रदर्शन भाषणबाजी और राजनैतिक प्रयोग करने की अनुमति किसने दी ? स्पष्ट था कि माहौल और कानून व्यवस्था टूटती तो कौन थे ऐसे लोग जिन्होने इसे नजरअंदाज किया ? निश्चित ही नरेंद्र मोदी । संघ की प्रयोगशाला गुजरात कही जाती है और उसने अपने एक गुर्गे नरेन्द्र मोदी से यह अंतिम प्रयोग किया।फलस्वरूप दंगे भड़के और कई हज़ार लोगों को मारा गया , काटा गया , महिलाओं से बहन बेटियों से बलात्कार किया गया और गर्भवती महिलाओं के पेट चीरकर नवजात शिशुओं को तलवार से काट डाला गया , और मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी इसे क्रिया की प्रतिक्रिया बता कर बचाव करते रहे , भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री और मुखौटे अटलबिहारी वाजपेयी सरकार को बर्खास्त करने की बजाए राजधर्म की याद दिलाते रहे तो यह संघ का वह दबाव ही था कि अपने सफल प्रयोग कर चुके गुर्गे की रक्षा करे।
यहां से उदय होता है एक कट्टर हिन्दू हृदय सम्राट और मुसलमानों के वधकर्ता नरेंद्र मोदी का जिसका नाम ही एक सनसनी बन गया ।
अदालतों और कानूनी प्रक्रिया को वैश्या की तरह इस्तेमाल करके मैनेज किया गया और संघ ने अपने इस नायक को बाईज्जत बरी करा दिया।
मासूम नौजवानों के हृदय में विष भरा और लम्पट लोगों की एक फौज खड़ी की जिसे राष्ट्रवादी नाम दिया गया और जो धीरे धीरे अपने नायक नरेंद्र मोदी के पीछे लामबंद होता गया , नरेंद्र मोदी भी अपने को कट्टर हिन्दू हृदय सम्राट दिखाने का हर संभव प्रयास करते रहे और कभी टोपी ना पहन कर तो कभी घृणित बयान देकर इन तथाकथित राष्ट्रवादियों के हीरो बनते रहे और कुछ वर्षों में ही वह अपने समर्थकों के लिए भगवान के रूप में पूजे जाने लगे , एक ऐसा भगवान जो भारत में हिन्दू हितों की रक्षा करने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकता है , सनसनी का सफल परिवर्तन विकास का तड़का लगा कर लोकसभा चुनाव में प्रयोग किया गया और जो पार्टी अटलबिहारी वाजपेयी अडवाणी जैसे नेताओं के नेतृत्व में बहुमत ना पा सकी उसने बहुमत को प्राप्त किया तो उसके पीछे सनसनी और संघ के समर्थक और प्रचारित झूठे विकास के लालच में आए अन्य लोगों के मत थे ।
अब एक अध्याय समाप्त हुआ ।प्रयोग सफल रहा और देश प्रदेश की सत्ता संघ के हाथों में आ गई जो कि उसका एकमात्र मकसद था , राज्य के मुख्यमन्त्री हों या देश के प्रधानमंत्री , इतनी औकात नहीं इनकी कि संघ के एक आदेश की अवहेलना कर दें ।
दिल्ली चुनाव में विकास के नाम पर मिले वोट दरकने लगे और संघ और सनसनी के पास केवल अपने समर्थकों के वोट बचे जिससे सत्ता पाना असंभव था और दिल्ली की जनता ने वो झटका दिया कि संघ और सनसनी को सत्ता पाने की रणनीति बदलनी पड़ी ।
अब उसका टारगेट देश का वो मुसलमान है जिससे नफरत कराकर वह इस स्थिति तक पहुँचा है , यहां तक पहुंचने के लिए , कितनी हजार लाशों के ढेर लगाने घरों में आग लगाने के बाद सत्ता प्राप्ति हुई और सत्ता प्राप्ति के बाद यही भाजपा और संघ अपने मूल मुद्दे से ही पलट गये , कट्टर हिन्दू हृदय सम्राट अब मुसलमानों को आकर्षित करने में लग गया जिससे उसे कुछ वोट मिले तथा मुस्लिम वोटों के बिखराव से उसे चुनाव में लाभ हो ।संघ रोजा अफ्तार पार्टी कराने लगा और उसके नरेंद्र मोदी इस्लाम की तारीफ करने लगे , भारत को इस्लामिक सिद्धांतों से बंधा हुआ बताने लगे , मंगोलिया जैसे देश की यात्रा पर देश की जो भाड़ मीडिया 24×7 लाईव टेलीकास्ट करती रही वही मीडिया 5 मुस्लिम देशों की यात्रा पर अपने आका के निर्देश पर चुप रही तो केवल इसलिए कि वहाँ नरेंद्र मोदी जो कहेंगे करेंगे उससे कट्टर हिन्दू कहीं नाराज ना हो जाएं । दो नाव पर पैर रख कर सवारी करने की कोशिश में यह तस्वीर जो आई है तुर्कमेनिस्तान से वह यह स्पष्ट करती है कि सत्ता के लिए दोगलेपन की कौन कौन सी हद पार कर सकते हैं यह ।
इस्लाम में आप टोपी पहनने से मुसलमान नहीं हो जाते , अफ्तार करने से भी धार्मिक स्थिति पर कोई अंतर नहीं पड़ता बल्कि देश में भाईचारा ही बढ़ता है परन्तु जमात में नमाज़ और दुआ ऐसा तरीका है धार्मिक दायित्व निभाने का जिसमें कुरान की आयतें पढ़ी जाती हैं और ऐसा विश्वास है कि जमात में शामिल किसी एक व्यक्ति की दुआ भी कुबूल हुई तो पूरी जमात की दुआ कुबूल हो जाती है, दुवाओं में भी कुरान की आयतें भी होती हैं और यह पूरी तरह एक धार्मिक कार्य है जो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहाँ जमात में शामिल होकर कर रहे हैं ।
मुझे आपत्ति नहीं है कि हिन्दू हृदय सम्राट अफ्तार पार्टी करे , ईद मनाए , इस्लाम की तारीफ करे या जमात में इस्लामिक तरीके से दुआ मांगे। मेरा उद्देश्य बस इतना बताने से है कि भाईयों इन ढोंगी नेताओं की बातों में आकर आपसी विश्वास , प्रेम और भाईचारे पर चोट मत पहुंचाओ ।इनका उद्देश्य केवल सत्ता पाना है जो कुछ भी करके पा सकते हैं , कभी एक दुसरे से लड़ा कर तो कभी दोनो को फुसलाकर ।