Sir_Zaid_Hamid

कई दिनों से खबर आ ही रही थी की घोर भारत विरोधी पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषक लेखक ज़ैद हामिद को जो कभी अपने भारत विरोधी ब्यानो के लिए कभी सारे बड़े बड़े पाकिस्तानी उदारवादी पत्रकारों को फांसी की याचिका देने के लिए प्रसिद्ध रहे हे उनकी सऊदी अरब की उमरा यात्रा के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया था और अब खबर हे की वहा उन्हें आठ साल की सजा और 1000 कोड़े की सजा सुना दी गयी हे ये ज़ैद हामिद साहब खुद को इक़बाल साहब के सबसे बड़े प्रशंसक और दीवाना कहते रहे हे हाल ही में इक़बाल साहब पर उनकी पुस्तक ” इक़बाल पुर इसरार ” भी पब्लिश हुई थी . इक़बाल साहब की शायरी और लेखन ने इन ज़ैद साहब को दीवाना कर दिया था इक़बाल साहब पुरे भारत को मुस्लिम रंग में देखना चाहते थे इसलिए ज़ैद साहब उपमहादीप के मुसलमानो को हिन्दुओ पर फिर से एक हज़ार साल तक राज़ करने की ज़द्दोजहद में मुब्तिला होने की अपील करते रहते थे इक़बाल साहब लिखते थे ” एक हो मुस्लिम हरम की पासबानी के लिए नील के साहिल से खानकाह के काश्गर तक ” तो ज़नाब ज़ैद हामिद भी रात दिन पाकिस्तान की लीडरशिप में अमेरिका यूरो की तरह एक यूनाइटिड स्टेटस ऑफ़ इस्लाम बनाने की वकालत करते थे इसके लिए इक़बाल साहब तेहरान को मशरिक का ” जिनेवा ” बनाने को कहते थे दीवाने ज़ैद साहब भी इस सपने को आँखों में लिए जल्दी जल्दी ईरान और तेहरान के चक्कर लगाते थे .

अब हुआ ये की अब जब पुरे गल्फ में सऊदी अरब और ईरान की अदावत चल रही हे जो बहरीन सीरिया इराक यमन होते होते इस हद तक पहुंच गयी की मगरिबी देशो और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर कुछ सुलह के आसार होते देख कर इज़राइल से भी दो हाथ आगे सऊदी और अरब के सुन्नी अमीरो – हुक़ुमरानो को झुंझलाहट हो रही हे तो इसी दौरान ज़ैद हामिद जब अपने पासपोर्ट पर कई ईरानी ठप्पे और दिल में सऊदी अरबी हुक़ुमरानो के लिए गुस्सा लेकर सऊदी अरब पहुंचे तो अपने गुस्से को काबू में ना रख पाये और उन्ही के देश में उन्ही के खिलाफ ट्वीट करने लगे . ये खबर जब सऊदी ख़ुफ़िया मुखबरात तक पहुंची या पहुचाई गयी तो उसने ज़ैद हामिद को दबोचने में देर नहीं की .

सऊदी हुकूमत का आरोप यहाँ तक भी हे की वो ईरान के लिए जासूसी कर रहे थे अरबो की बुराई कर रहे थे और लोगो को सऊदी हुकूमत के खिलाफ भड़का भी रहे थे इक़बाल साहब की तरह ज़ैद हामिद को भी डेमोक्रेसी से ऐतराज़ था ( इक़बाल साहब को ऐतराज़ था की सरो को गिनते क्यों हो तौलते क्यों नहीं ) तो अपने सर को भारी तौलते हुए ज़ैद साहब पाकिस्तान की लूली लंगड़ी डेमोक्रेसी की भी जमकर आलोचना करते थे अब वही लूली लंगड़ी भी डेमोक्रेसी न होने के कारण सऊदी अरब में शाही निजाम में उन्हें अपने बचाव का कोई मौका भी न मिला और उन्हें झटपट सजा सुना दी गयी हे और लोगो को सच्चे और कच्चे मुस्लिम होने का सर्टिफिकेट देने वाले ज़ैद हामिद साहब पर सुनने में आया हे की सऊदी निजाम ने उन पर उनके लेपटोप में मिली कुछ सामग्री के आधार पर ब्लासफेमी का आरोप तक लगा दिया गया जिससे उन्हें और कड़ी सजा मिली हे ये सामग्री शायद कुछ हदीसो की उनकी व्याख्या भी हो सकती हे जिसके आधार पर सुनते हे की वो सभी मुस्लिमो से हिन्दू और हिंदुस्तान को फिर से गुलाम बनाने में सहयोग को कहते थे मतलब शायद पैसे वाले अरबो से इसके लिए चंदा इमदाद चाहते होंगे जैसे और भी बहुत से लोग पेट्रो डॉलर की बहती गंगा में हाथ धोने के लिए करते हे मगर वो भूल गए की सऊदी निजाम में वहां की सरकार पर कोई ऐतराज़ करने की या असहमति की इज़ाज़त नहीं हे मगर वो शायद खुद को बेहद खास मानते हुए मानते थे की सरकार उन पर हाथ नहीं डालेगी.

मुस्लिम सुप्रियॉरिटी की धुन में मगन रहने वाले ज़ैद हामिद के बारे में ये भी खबर आ रही हे की उन्हें पाकिस्तानी और ईरानी ख़ुफ़िया एजेंसियों से मोटी रकम मिलती हे एक पाकिस्तानी अमेरिकन डॉक्टर और मानवाधिकार कार्यकर्त्ता और शान्ति प्रेमी डॉक्टर शाज़िया नवाज़ ये भी कहती हे की ये लोग असल में हथियार कम्पनियो के एजेंट होते हे जिनकी जिम्मेदारी हमेशा भारत पाक शांति पर्किर्या का कड़ा विरोध करना होता हे ज़ैद साहब शायद इस्लाम की आड़ में अपनी दुनियावी जरूरते यानी पैसा सत्ता पावर अहमियत की लड़ाई लड़ रहे थे अब वो भूल गए की यही तो मौक़िफ़ सऊदी शाही परिवार का भी हे उसे भी अपनी सत्ता प्यारी हे और उनकी सत्ता के खिलाफ उन्ही के देश में कोई हलकी सी भी आवाज़ उठाय उन्हें बर्दाश्त नहीं हे कुल मिलाकर बात वही हे की इस दुनिया में सभी बड़े लोग मज़हब के लिए नहीं बल्कि अपनी सत्ता और उसकी हिफाज़त की ज़द्दोज़हद में लगे होते हे तो नतीजा इस्लाम और मुसलमानो के लिए बड़े बड़े सपने देखने और दिखाने वाले वाले ज़ैद हामिद को गैर मुस्लिमो और उनके देश ने नहीं नहीं बल्कि इस्लाम की ही जमीं पर वहाँ के शासको ने ही कड़ी सजा दे डाली आगे उनका क्या होगा ? पाकिस्तानी नेताऔ को वो और नेता उन्हें पसंद नहीं करते पाकिस्तान के सभी लोकतंत्र पसंद मानवाधिकार कार्यकर्त्ता उन्हें रा के एजेंट लगते थे अब सिर्फ पाकिस्तानी फ़ौज़ और आई एस आई उन्हें छुड़ा सकती हे मगर वो ऐसा करेंगे या नहीं कहना मुश्किल हे क्योकि आजकल की आर्थिक बदहाली में सऊदी इमदाद पाकिस्ता और उसकी फ़ौज़ के लिए बेहद जरुरी हे हाल हे सऊदियो ने यु ही पाकिस्तान को एक खरब रूपये की इमदाद दे डाली थी ऐसे में पाकिस्तानी फ़ौज़ भी अपने खास ज़ैद हामिद के लिए कितना दबाव डाल पाएगी कहना कठिन हे ?

ज़ैद हामिद की मूर्खता देखे तो कहा जा रहा हे की उन्होंने सऊदी हुकुमरनो पर कुछ भारतीय फौजी मदद आमद लेने पर भी इस किस्म की भी बाते की थी और ताने मारे थे की की हज़ाज़ में मुशरिकों की आमद ज़ैद साहब भूल गए की अपने आपको इस्लाम के सिपाही इस्लाम का किला बताने खुद वो और उनका पाकिस्तान उसकी फ़ौज़ उसकी आई एस आई पर चीन और चीनियो का किस कदर दखल हे और अब तो चीनी दुनिया के सबसे बड़े निवेश के साथ पुरे पाकिस्तान पर ही छाने वाले हे हिन्दू भारत मुशरिक हे तो चीनी क्या हे ? ज़ाहिर हे ज़ैद साहब की ऐसी बातो ने आजकल वैसे ही अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित सऊदी निजाम और शाही परिवार को बेहद तपाया होगा और उन्होंने उन्हें धर लिया ये घटना उन उपमहादीप के मुसलमानो के लिए सबक हे जो मुस्लिम एकता के सपनो में खोय रहते हे और इस विषय पर बेवकूफ बनने और या बनाने को रेड़ी रहते हे इस दुनिया में हर कोई सत्ता के लिए लड़ रहा होता हे ना की धर्म मज़हब के लिए सऊदी हुक़ुमरानो के लिए भी मुस्लिम यूनिटी के इक़बाल साहब के तरानों से कही अधिक जरुरी हे अपनी सत्ता की सुरक्षा इसके लिए ही उन्होंने खुद को बेहद धर्मपरायण मुस्लिम दिखाने वाले पाकिस्तान और उसके एक बड़े नाम को जेल भेज़ने में कोई दया नहीं दिखाई इस घटना से बहुत से सबक उपमहादीप के बहुत से मुस्लिम सिख सकते हे की इस्लाम के नाम पर कोई भी पॉलिटिकल या दुनियावी सपना देखने दिखाने की साइकि से दूर रहे और विरोध भी करे इस बार तो ज़ैद साहब खुद फंस गए वार्ना ये मानसिकता उपमहादीप में खुद मौज़ करते हुए गरीब मुस्लिमो के बच्चो को ही बर्बाद करती हे!