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दिल्ली सल्तनत का एक ऐसा सनकी सुल्तान हुआ है जिसका जन्म सन 1300 इस्वी में हुआ इसने योजनाएँ तो कई बनाईं पर उसकी योजनाएँ असफल रहीं। उसकी योजनाओं से चिढ़कर ही उसे मूर्ख कहा जाता है। वहीं कुछ का मानना है कि उसकी योजनाएँ बहुत अच्छी थी और इसलिए तुगलक विद्वान था परन्तु कार्य क्षमता नही थी कि उसे सफलता पुर्वक लागू किया जा सके। ‍इतिहास में यह अकेला सुल्तान है जिसे एक ही समय पर ‘विद्वान-मूर्ख’ कहकर बुलाते हैं। कुछ भी हो सुल्तान था बड़ा दिलचस्प और उसकी हरकतें भी वैसे ही दिलचस्प।उसकी कई बातों में कुछ के बारे में जानकर किसी को भी हँसी आ जाएगी।

राजधानी बदल कर दौलताबाद करने की उसकी सनक ने दिल्ली वासियों को आदेश दिया कि जाए। लोग रास्ते की तकलीफें उठाकर दौलताबाद के लिए निकले। यात्रा में बहुत से लोग बीमार पड़ गए और मारे गए। यात्रा की कठिनाई देखकर तुगलक ने लोगों को वापस दिल्ली लौटने का आदेश दे दिया। लोग लौटे तो, पर उनमें से कई रास्ते में दम तोड़ गए। तुगलक ने अपने समय में सोने की ‘दीनार’ और चाँदी की ‘अदली’ चलाई थी। फिर सोने-चाँदी की कमी हो गई। तुगलक को मालूम था कि चीन में कागज और फारस में चमड़े का सिक्का चला है तो उसने राज्य में ताँबे का सस्ता सिक्का चलाया था। चाँबे के सिक्के बनाने के लिए राजकीय टकसाल नहीं थी। ताँबे के सिक्के की खबर आई तो लोगों ने घर पर ही सिक्के ढाल दिए और बाजार में इतने सिक्के हो गए कि ताँबे का सिक्का बंद करना पड़ा। जनता को ताँबे के सिक्के की जगह सोने के सिक्के दिए गए और खजाना खाली हो गया।

इतिहासकार इन योजनाओं के कारण ही उसे सिरफिरा कहते हैं। इन योजनाओं के अलावा भी तुगलक में कई खासियत थी। काम को टालना उसे पसंद नहीं था। वह तुरंत किसी भी काम को पूरा करने में विश्वास रखता था।सनकीपना ऐसा कि दिन प्रतिदिन जनता पर कुछ ना कुछ करने का आदेश , दिन प्रतिदिन के उसके सनकादेश से जनता आजिज़ आगई थी ।
नरेंद्र मोदी के रूप में भारत के लिए उसी सनकी तुगलक का जन्म हुआ है ।मैं जब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नये नये उनके पसंद के शो को देखता हूँ मुझे सहसा ही तुगलक याद आ जाता है , पिछले 13 महीने में एक एक करके जारी सनकादेश केवल बिलावजह की उतियापंती के अतिरिक्त कुछ नहीं , प्रचार माध्यमों में वह सफलता के कुछ भी प्रचार कर लें परन्तु सच यह है कि जमीनी स्तर पर डब्बा गोल है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बद से बदतर ।सरदार वल्लभ भाई पटेल के लिए पूरे देश से लोहा मांगा गया कि कोई पुराना हल दे खुर्पी दे फरुहा दे , क्या हुआ उसका किसी को नहीं पता , कितना लोहा इकट्ठा हुआ ? स्टेचू आफ यूनिटी कितनी बनी कहां तक बनी नरेन्द्र तुगलक भूल गये।

कभी बीमा की सनक तो कभी खाता खुलवाने की सनक जैसे इस देश में ना कभी किसी ने बीमा कराया ना खाता खुलवाया , सच यह है कि आकड़ों के अनुसार 70% खाते एक रूपये के ट्रांजक्शन हुए बिना पड़े हैं , इसके संचालन पर बैंकों के होने वाले खर्च बैंकों पर ही भारी पड़ रहे हैं, अटल पेंशन योजना फुस्स हो चुकी है ।

सफाई की सनक चढ़ी तो 9-9 रत्न बनाए गये झाडू के साथ फोटो खिचवाए गये वो भी फुस्स, नरेंद्र तुगलक को अब उसकी चिंता नहीं कि कितनी सफाई हुई , और उनके 9 रत्न क्या कर रहे हैं उनका शो समाप्त हुआ खेल खत्म, योगा की सनक चढ़ी तो दो हजार करोड़ खर्च करके उसका शो हुआ अब वह भी शांत हो गया ।मतलब यह कि उनको जो जो पसंद है वह सब हो और उससे उनके चहेतों की तिजोरी भरे जनता जाए भाड़ में ।

नई सनक देखिए “सेल्फीविदडाटर”।किसी का सुझाव पसंद आ गया सुल्तान को और देश को सनकादेश दे दिया कि “सेल्फीविदडाटर” लें सबलोग , अजीब उतियापंती है ,इसके पहले तो कोई अपनी बेटियों से प्रेम करता नहीं था जो अब नरेंद्र तुगलक बताएंगे कि अपनी बेटियों से कैसे प्रेम किया जाए , सेल्फी ही बेटी से प्रेम का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है या सेल्फी ही बेटियों की सभी समस्याओं का अंत है ? हमारी बेटियों से इतना ही स्नेह है तो उतियापंती छोड़कर यह बताएं कि 13 महीने में उन्होंने क्या किया इन बेटियों के लिए ? सेल्फी से बेटियों के साथ हो रहे रेप गैंगरेप रुक जाएंगे ? बेटियों की सुरक्षा हो जाएगी ? बेटियों के भविष्य उज्ज्वल हो जाएंगे ? बेटियों की शिक्षा और रोजगार की समस्या का अंत हो जाएगा ? क्या हो जाएगा इस सेल्फी से नरेंद्र तुगलक जी बता ही दें । होगा ये कि उनकी सनक का भक्त लोग पालन कर रहे हैं इनसे उनके अहं को संतुष्टि मिल जाएगी । सेल्फीविदडाटर ना हो गया अमृत हो गया कि पी लो सभी समस्याओं का अंत हो जाएगा ।

भाई “सेल्फीविदडाटर” से बेटियों की सुरक्षा पर और खतरा हो सकता है क्योंकि कटुभाव रखने वाले लोग सोशल मीडिया से चित्र सेव करके उसका गलत प्रयोग कर सकते हैं , सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखें तो यह उचित नहीं कि बेटियों के चित्र दिखाकर पहचान कराई जाए जिससे असमाजिक तत्वों को कोई अवसर मिले । मै तो हैरान हूँ कि लोग यह समझ क्यों नहीं रहे हैं कि बेटियाँ अकेले आती जाती हैं और पिता कि किसी से खुन्नस से उसपर समस्याएं आ सकती हैं ? नरेंद्र तुगलक जी बेटियों की इतनी चिन्ता है तो कुछ करिए कि उनका भविष्य सुरक्षित हो । चुकि एक परिवार विहीन व्यक्ति को इस जिम्मेदारी का आभास नहीं होता इसलिए उसे सेल्फी ही सबसे उचित लगेगा बेटियों के लिए ।
आगे नरेन्द्र तुगलक के सनकादेश के लिए तैयार रहें , “सेल्फी विद इधरुधर”