Vande-Matram-Punjabi

देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है.एक ऐसी ही प्रतिभा हैं फ़िरदौस ख़ान. उन्होंने अमर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का पंजाबी में अनुवाद कर जता दिया है कि वाक़ई वह लफ़्ज़ों की शहज़ादी ही तो हैं. दरअसल, फ़िरदौस ख़ान को लफ़्ज़ों के जज़ीरे (द्वीप) की शहज़ादी के नाम से जाना जाता है. वह पत्रकार, शायरा और कहानीकार हैं. वह कई भाषाओं की जानकार हैं. उन्होंने दूरदर्शन केन्द्र और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में कई साल तक सेवाएं दीं. उन्होंने अनेक साप्ताहिक समाचार-पत्रों का संपादन भी किया. ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन केन्द्र से समय-समय पर उनके कार्यक्रमों का प्रसारण होता रहा है. उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो और न्यूज़ चैनलों के लिए भी काम किया है. वह देश-विदेश के विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और समाचार व फीचर्स एजेंसी के लिए लिखती रही हैं. उत्कृष्ट पत्रकारिता, कुशल संपादन और लेखन के लिए उन्हें अनेक पुरस्कारों से नवाज़ा जा चुका है. वह कवि सम्मेलनों और मुशायरों में भी वह शिरकत करती रही हैं. कई बरसों तक उन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम भी ली. उर्दू, पंजाबी, अंग्रेज़ी और रशियन अदब (साहित्य) में उनकी ख़ास दिलचस्पी है. वह मासिक पैग़ामे-मादरे-वतन की भी संपादक रही हैं और मासिक वंचित जनता में संपादकीय सलाहकार हैं. वह स्टार न्यूज़ एजेंसी में संपादक हैं. ‘स्टार न्यूज़ एजेंसी’ और ‘स्टार वेब मीडिया’ नाम से उनके दो न्यूज़ पॉर्टल भी हैं.

वह रूहानियत में यक़ीन रखती हैं और सूफ़ी सिलसिले से जुड़ी हैं. उन्होंने सूफ़ी-संतों के जीवन दर्शन पर आधारित एक किताब ‘गंगा-जमुनी संस्कृति के अग्रदूत’ लिखी है, जिसे साल 2009 में प्रभात प्रकाशन समूह ने प्रकाशित किया था. वह अपने पिता स्वर्गीय सत्तार अहमद ख़ान और माता श्रीमती ख़ुशनूदी ख़ान को अपना आदर्श मानती हैं. क़ाबिले-ग़ौर है कि सबसे पहले फ़िरदौस ख़ान ने ही कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी को ’हिंदुस्तान का शहज़ादा’ कहकर संबोधित किया था, तभी से राहुल गांधी के लिए ’शहज़ादा’ शब्द का इस्तेमाल हो रहा है.

वह बलॉग भी लिखती हैं. उनके कई बलॉग हैं. फ़िरदौस डायरी और मेरी डायरी उनके हिंदी के बलॉग हैं. हीर पंजाबी का बलॉग है. जहांनुमा उर्दू का बलॉग है और द पैराडाइज़ अंग्रेज़ी का बलॉग है.

उनकी शायरी किसी को भी अपना मुरीद बना लेने की तासीर रखती है. मगर जब वह हालात पर तब्सिरा करती हैं, तो उनकी क़लम तलवार से भी ज़्यादा तेज़ हो जाती है. जहां उनकी शायरी में इश्क़, समर्पण, रूहानियत और पाकीज़गी है, वहीं लेखों में ज्वलंत सवाल मिलते है, जो पाठक को सोचने पर मजबूर कर देते हैं. अपने बारे में वह कहती हैं-

मेरे अल्फ़ाज़, मेरे जज़्बात और मेरे ख़्यालात की तर्जुमानी करते हैं, क्योंकि मेरे लफ़्ज़ ही मेरी पहचान हैं.

ग़ौरतलब है कि वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है. इसकी रचना बंकिमचंद्र चटर्जी ने की थी. अरबिंदो घोष ने इस गीत का अंग्रेज़ी में और वरिष्ठ साहित्यकार मदनलाल वर्मा क्रांत ने वंदे हिन्दी में अनुवाद किया था. भाजपा नेता आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने इसका उर्दू में अनुवाद किया. गीत के प्रथम दो पद संस्कृत में तथा शेष पद बांग्ला में हैं. राष्ट्रकवि रबींद्रनाथ ठाकुर ने इस गीत को स्वरबद्ध किया था. भारत में पहले अंतरे के साथ इसे सरकारी गीत के रूप में मान्यता मिली है. इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा कर इसकी धुन और गीत की अवधि तक संविधान सभा द्वारा तय की गई है, जो 52 सेकेंड है.

वंदे मातरम का पंजाबी अनुवाद

ਮਾਂ ਤੈਨੂੰ ਸਲਾਮ…

ਤੂੰ ਭਰੀ ਹੈ ਮਿੱਠੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ਼

ਫਲ ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਮਹਿਕ ਸੁਹਾਣੀ ਨਾਲ਼

ਦੱਖਣ ਦੀਆਂ ਸਰਦ ਹਵਾਵਾਂ ਨਾਲ਼

ਫ਼ਸਲਾਂ ਦੀਆਂ ਸੋਹਣੀਆਂ ਫ਼ਿਜ਼ਾਵਾਂ ਨਾਲ਼

ਮਾਂ ਤੈਨੂੰ ਸਲਾਮ…

ਤੇਰੀਆਂ ਰਾਤਾਂ ਚਾਨਣ ਭਰੀਆਂ ਨੇ

ਤੇਰੀ ਰੌਣਕ ਪੈਲ਼ੀਆਂ ਹਰੀਆਂ ਨੇ

ਤੇਰਾ ਪਿਆਰ ਭਿੱਜਿਆ ਹਾਸਾ ਹੈ

ਤੇਰੀ ਬੋਲੀ ਜਿਵੇਂ ਪਤਾਸ਼ਾ ਹੈ

ਤੇਰੀ ਗੋਦ ‘ਚ ਮੇਰਾ ਦਿਲਾਸਾ ਹੈ

ਤੇਰੇ ਪੈਰੀਂ ਸੁਰਗ ਦਾ ਵਾਸਾ ਹੈ

ਮਾਂ ਤੈਨੂੰ ਸਲਾਮ…

-ਫ਼ਿਰਦੌਸ ਖ਼ਾਨ

वंदे मातरम का पंजाबी अनुवाद (देवनागरी में)

मां तैनूं सलाम

तू भरी है मिठ्ठे पाणी नाल

फल फुल्लां दी महिक सुहाणी नाल

दक्खण दीआं सरद हवावां नाल

फ़सलां दीआं सोहणिआं फ़िज़ावां नाल

मां तैनूं सलाम…

तेरीआं रातां चानण भरीआं ने

तेरी रौणक पैलीआं हरीआं ने

तेरा पिआर भिजिआ हासा है

तेरी बोली जिवें पताशा है

तेरी गोद ’च मेरा दिलासा है

तरी पैरीं सुरग दा वासा है

मां तैनूं सलाम…

-फ़िरदौस ख़ान

वंदे मातरम का पंजाबी अनुवाद (रोमन में)

Ma tainu salam

Tu bhri hain mithe pani naal

Phal phulaan di mahik suhaani naal

Dakhan dian sard hawawaan naal

Faslan dian sonia fizawan naal

Ma tainu salam…

Tarian raatan chanan bharian ne

Teri raunak faslan harian ne

Tera pyaar bhijia hasa hai

Teri boli jiven patasha hai

Teri god ‘ch mera dilaasa hai

Tere pairin surg da vasa hai

Ma tainu salam…

-Firdaus Khan