kuwait

कहा जाता है के पवित्र रमजान में एक महीने के लिए अल्लाह शैतान को क़ैद कर देता है मगर अब ये बात झूटी लगती है क्यों के जिस तरह कल रमजान के महीने के दौरान जुम्मे के दिन एक साथ तीन देशों में आतंकी हमला हुआ है। सबसे पहला हमला फ्रांस, फिर कुवैत और इसके बाद ट्यूनिशिया में हुआ। फ्रांस के ग्रेनोबल में एक फैक्ट्री में दो आतंकियों ने हमला किया है। आतंकी अरबी में लिखे झंडे लेकर फैक्ट्री में घुसे थे। इन्होंने एक आदमी को बंधक बनाकर उसका सिर कलम कर दिया। इसके अलावा दो लोग जख्मी हुए।ट्यूनिशिया, कुवैत और फ्रांस में आतंकी हमला, 44 लोगों की मौत हो गयी और सैकड़ो लोग जख्मी हो गए .दूसरी तरफ और देशो में जिस तरह लोगो की हत्या या धमाके में मजलूम मुस्लमान मर रहे है निंदनीय है .कहीं कोई कह रहा था कि आज की दरिंदगी देख क़ैद में पड़े शैतानों ने अपने क़ैद में होने के लिए शुक्राने की नमाज़ अता की और अल्लाह से दुआ मांगी कि उनकी ये क़ैद ताक़यामत तक वसीय कर दिया जाए …..पेश है इन आतंकवादी हमले पे फेस बुक पे कुछ बुद्धिजीवियों के विचार —-

From krishan kant….

चार—चार देशों में आतंकी हमला. दर्जनों लोगों का खून पीकर कौन सा ईश्वर खुश होता होगा? यह खूनी खेल ईश्वर अल्ला के न होने का पुख्ता सबूत है. इससे इतर, कठमुल्लों को यह तय करना पड़ेगा कि वे क्या चाहते हैं. यह बात सभी धर्मों के कट्टरपंथियों पर लागू होती है जो नरसंहार करके दुनिया को अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं.
इस युग में दुनिया किसी एक किताब—गीता या कुरान से नहीं चल सकती. यह सनक जितनी जल्दी त्याग दी जाए, उतना ही अच्छा है. शांति और सौहार्द अगर दूसरे के लिए नहीं है तो आपके लिए भी नहीं होंगे. जब आप दुनिया के मुसलमानों के एक होने का नारा लगाते हैं, तब बाकी दुनिया में बच रहे इंसानों के बारे में थोड़ा सोचना चाहिए. कोई समुदाय जहां अल्पसंख्यक है वहां उसके साथ अन्याय होने पर उसके लिए खड़ा होना जरूरी है, लेकिन पशुता का समर्थन नहीं किया जा सकता, चाहे कोई अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक या दुनिया का सबसे पवित्र विचार.
किसी धर्म, संप्रदाय, विचारधारा आदि की आड़ में नरसंहार किसी भी तौर बर्दाश्त नहीं किए जा सकते. आईएस जैसे वहशियों के कथित इस्लामी संगठन हर दिन जितना संभव है उतना खूनी तांडव करते हैं. एक—एक हजार लोगों को एक बार में दर्दनाक मौत मारते हैं. महिलाओं का अपहरण कर बाजार लगाकर बेचते हैं. इस पशुता का ही नतीजा है कि फ्रांस में हुआ हमला निजी रंजिश का नतीजा था लेकिन तुरंत फ्रांसुआ ओलांद ने उसे आतंकी हमला बता दिया. कुछ लोग अपनी पशुता से बाकी समुदाय को शक के घेरे में खड़ा करते हैं. जहां सिर्फ मुसलमान हैं, वहां सुन्नी शिया एक—दूसरे के खून के प्यासे हैं.
पूरी दुनिया जब अपराधियों तक के लिए मानवाधिकार की लड़ाई लड़ रही हो, तब शैतानों के लिए इस धरती पर जगह नहीं हो सकती. ऐसे खूंखार लोगों को न्यूनतम मनुष्य बनना पड़ेगा. ईश्वर अल्ला की ठेकेदारी लेने वाले किसी को जीवन नहीं दे सकते तो वे जीवन लेने का भी अधिकार नहीं रखते. हमें धर्म के वहशीपन के बारे में पुनर्विचार करना पड़ेगा. सभी धर्मों के सभ्य समाज को आतंकवाद का कड़ा विरोध करना चाहिए, वरना जहान को जहन्नुम ही बनना है. धर्म लोगों को जन्नत का फर्जी सपना दिखाकर जहन्नुम में डालता है. धर्म से मुक्ति मानवता की मुक्ति है.

From mohammed jahid ….

कल की खबरें , कुवैत में मस्जिद में धमाका 17 मरे , सीरिया में आईएसआईएस ने 130 लोगों की हत्या की ट्यूनीशिया में आतंकवादी हमले में 18 की मौत , किसने मारा ? जिसे कहा जा रहा उन्होंने मारा या बदनाम करने की साजिश है यह कुछ नहीं पता , पश्चिम मीडिया ने जो बोल दिया वही फैसला हो गया और कुछ लोग फिर सियापा करने लगे , इस्लाम और मुसलमानों को कोसने लगे सवाल पूछने लगे , उनको मौका मिल गया कि इस धर्म को फिर बदनाम करें कि रमज़ान के पवित्र महीने में यह मारकाट करने वाले इस्लाम और कुरान वाले हैं इत्यादि इत्यादि ।
आंखे खोल लो भाई और सोचो कि ऐसा करने वालों ने खुद ही यह जवाब दे दिया सबूत दे दिया कि ना तो वह मुसलमान हैं ना कुरान को मानते हैं ना हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत मुहम्मद साहब के पवित्र उसूलों को मानते हैं ।क्योंकि वो मानते तो रमज़ान के पवित्र महीने में बेगुनाहों का खून खराबा नहीं करते , धमाके नहीं करते , यह है वह सबूत पूरी दुनिया के सामने कि बगदादी हो या और कोई आतंकवादी उनका इस्लाम से कोई वास्ता नहीं जिसका सबूत उसने खुद ही दे दिया । अब अगर मस्तिष्क आंख कान खुला हो तो खुले हृदय से सोचिएगा कि इस्लाम धर्म की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले यह आतंकी इस्लाम और कुरान को ही कैसे नहीं मान रहे हैं ? रमज़ान तो वो मुकद्दस महीना है जिसमे गुस्सा तक मना है किसी को मानसिक शारीरिक तकलीफ देना तक मना है , जोर से चीखना तक मना है , कैदियों को छोड़ देने माफ कर देने तक का हुक्म है , गरीबों मजलूमों की हर तरह से मदद का हुक्म है , अपने माल को गरीबों में बाटने का हुक्म है, दूसरे की ज़मीन , माल , बहन बेटियों के साथ गलत करना तो दूर ऐसा सोचना भी मना है और ये खब्बीस की औलादें मासूमों का खून बहा रहे हैं तो मतलब साफ है कि इनका इस्लाम से कोई वास्ता नहीं वह सब अपने मकसद से गैरइस्लामिक काम कर रहे हैं इसलिये मेहरबानी करके इनको कोई इस्लाम से ना जोड़े ।
यह वही हैं जो भारत में योगी साध्वी तोगड़िया हैं जो कहते हैं कि 50 के सीने पर गोली ठोको एक्यानवाँ पाकिस्तान का नाम नहीं लेगा ।यही है वह सोच जो बगदादी की है जो कल के दिन कत्लेआम करने वालों की है ।यह भी धर्म का मुलम्मा चढ़ा कर अपना राजनीतिक हित साध रहे हैं और वह भी ।अंतर केवल जगह और धर्म का है ।डर बस यह है कि हम अपने देश की चिंता तो नहीं करते सीरिया पर सियापा करते हैं ।चेते नहीं तो देश के यह बगदादी भारत को सीरिया बनाने में देर नहीं करेंगे ।

from balendu swami…

कल मैंने जो अपने बन्दों को भूखा प्यासा देखकर खुश होने वाले अल्लाह को जालिम बताने वाली पोस्ट डाली तो मुल्लों ने गालियों से उसका स्वागत किया! अब उसके आगे:
पहली बात तो यह कि ईश्वर या देवी माता भी उतने ही क्रूर हैं जो कि व्रत करवा के खुश होते हैं! दूसरी बात यह कि ये अल्लाह या ईश्वर सच में कितने बेरहम हैं जो कि मस्जिद में अपने बन्दों को बम से मरवा देते हैं और सब कुछ देखते हुए भी मंदिरों तक में बलात्कार होने देते हैं! और मुझे तो लगता है कि अल्लाह के बन्दे उसे बहरा भी समझते हैं तभी तो रोजे रखकर माँ बहनों को याद करते हुए मुल्लों ने मेरा इनबॉक्स गालियों से भर दिया!
अरे मूर्खों मुझ नास्तिक को गालियाँ देने से क्या होगा ऐसा करो कि कुछ नमाज वमाज पढ़कर या प्रार्थना करके अपने ईश्वर अल्लाह से कहकर मेरा लिखना ही बंद करवा दो! और यदि वो तुम्हारा काल्पनिक नपुंसक इतना भी न कर सके तो आओ यहाँ आकर गोली मार दो मुझे, इसके सिवाय और कोई रास्ता नहीं है मुझे चुप करने का!
वैसे मैं जानबूझकर ऐसी पोस्ट डालता हूँ कि लोगों को पहचान कर, फ़िल्टर करके उन्हें हटा अथवा ब्लाक कर सकूँ. और हाँ हमेशा सभी संगठित धर्मों का ऐसे ही अपमान करता रहुंगा यदि आपकी भावनाएं आहत होती हैं तो कृपया मेरे पेज और प्रोफाइल से हट जाएँ! धन्यवाद

from safdar hussain rizwi….

मेरी नज़र में मुसलमानो के दो ही फिर्के हैं बस एक आतंक के समर्थन में है दूसरा आतंकियों के ख़िलाफ़ है बदकिस्मती से जो फ़िर्का संख्या में ज़्यादा है वो एकजुट नहीं है इसलिए कम संख्या वाले बहरूपिये मुसलमान दुनियां भर मैं उनकी हत्याएं कर रहे हैं।
जागो और सच के रास्ते पर आओ हम सब इंसान हैं हत्यारों को ये संदेश दे दो।नफरत करने या फैलाने वाले इंसान नहीं हो सकते हमें ये समझना होगा और ऐसे लोगों को दुत्कारना होगा।हम ख़ुद रास्ता भटक गए हैं इसलिए हम राजनीत का शिकार हैं ।अगर हम दीन के सच्चे रास्ते पर चलते तो आज हम आपस नहीं लड़ रहे होते।अल्लाह हमें सच्चे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे ।
बेकसूर लोगों को मारने वाला ,धार्मिक स्थलों या इंसानो के बीच ब्लास्ट करने वाला सही रास्ते पर नहीं हो सकता हमे ऐसे लोगों पर लानत भेजनी चाहिए और सावधान भी रहना चाहिए।

From Abdul H Khan……

अंकल सैम और उनके सहयोगियों ने सदाम हुसैन के साम्राज्य इराक की ईट से ईट बजा दी ,मास ऑफ़ डिस्ट्रक्शन का इलज़ाम लगा कर उसी इराक पर कब्ज़ा जमा लिया ,वही एक आतंकी संघटन ISIS का इराकbकुछ हिस्सों साम्राज्य स्थापित का रोज़ बरोज़ आतंकी घटनाओ का अंजाम देना ,बहुत से शक और सुब्हे को दर्शाता है !

From Ali Sohrab…..

रमज़ान का महीना है, शैतान तो कैद है,
इसलिए धर्म के ठेकेदारों ने कुवैत के एक शिया मस्जिद में वो भी जुम्मा के दिन बम ब्लास्ट कर कई दर्ज़न लोगों को डायरेक्ट जन्नत भेजा.
अरे ओ काका आप क्यों मायूस हो रहे हैं, शिया थे मर गए, आपके हिसाब से कौन से मुसलमान थे जो उनके लिए मायूस होने की ज़रूरत है….??