hindu-terrorists

by — मोहम्मद अनस

आज इंडियन एक्सप्रेस ने मालेगांव आतंकी हमलों के असली गुनाहगारों जिनको मुंबई टेरर अटैक में शहीद हुए एटीएस चीफ हेमंत करकरे ने पकड़ा था को लेकर ख़बर लगाई है। अख़बार के मुताबिक सरकारी वकील पर मोदी सरकार के आने के बाद से लगातार दबाव डाला जा रहा है कि वह इस केस में आतंकियों के खिलाफ नरमी बरते।

यह देश के साथ ही नहीं बल्कि संविधान और न्यायपालिका पर सरासर सीधा हमला है। गुजरात में हाईकोर्ट से वे सारे दंगाई जमानतों पर छूट गए हैं जिन्होंने मासूम बच्चों के गले में टायर बांध जला दिया था। वे लोग भी धीरे धीरे छूट गए जिन्होंने औरतों के साथ विभत्स यौन हिंसा की थी।
ये सारे लोग हिंदू हैं। इनका धर्म हिंदू है। इनकी किताब गीता और रामायण है। इनके तीज त्यौहार होली और दिपावली है।

लेकिन ये लोग हिंदू, गीता, रामायण, होली और दिपावली के प्रतिनिधित्वकर्ता नहीं हैं। ये लोग असल में आतंक और हिंसा के नेतृत्वकर्ता हैं। इनकी सोच, इनकी विचारधारा आम हिंदूओं से बिल्कुल अलग है। हमें इस अंतर को पहचानना होगा। खुद हिंदुओं के बीच में से ऐसे हिंसक और खूंख्वार चलन के लोगों का बॉयकाट करना होगा और बड़ी मात्रा में लोग करते भी हैं। कल दिल्ली विवि के एक कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर मसीजीवि हिंदी ने ईराक में कत्लोगारत कर रहे आईएसआईएस की आलोचना के बजाए कुरान, इस्लाम और रमज़ान को लेकर बेहद भद्दी टिप्पणियां की गई। मैंने मसीजीवि और मसीजिवी जैसों को बहुत करीब से देखा है। ये वह वर्ग है जो तमाम वैचारिक आवरणों से खुद को ढक कर अपनी कुंठित और पूर्वाग्रही मानसिकता को खाद पानी देते हैं। हमें पता है मालेगांव हो अथवा समझौता एक्स्प्रेस या फिर अजमेर दरगाह विस्फोट। इन जगहों पर पूरा का पूरा हिंदू समुदाय हमला करने नहीं गया था। यह उन चंद कट्टरपंथियों की हरकत थी जो लोगों को उलझाए रखना चाहते हैं।

आतंक का वैसे कोई धर्म नहीं होता लेकिन आतंकवादियों द्वारा धर्म के नाम का इस्तेमाल मात्र बरगलाने के लिए किया जाता है। दुनिया भर में मुसलमानों ने आतंक के इस चलन के खिलाफ फतवे दिए हैं और हर रोज़ हजारों ट्विट एवं पोस्ट के माध्यम से ऐसी विभत्स वारदातों की निंदा किया करते हैं। यदि कुरान और इस्लाम पर विश्वास रखने वाला हर मुसलमान आईएसआईएस अथा दूसरे किसी आतंकी समूह का सदस्य होता तो दुनिया बची रह जाती? नए उभरते आतंकी समूह हो या फिर पुराने, इन्होंने क्या कम मुसलमानों को नुकसान पहुंचाया है? बल्कि सबसे ज्यादा यदि किसी ने इस्लाम और मुसलमान की हानि की है तो वह यही लोग हैं। भारत में इंडियन मुजाहिदीन के नाम पर ब्लॉस्ट होते रहे और करने वाले लोग ईमेल भेज कर ज़िम्मेदारी लेते रहे। पकड़े कौन लोग जाते रहे? मुसलमान। ये कैसे मुस्लिम संगठन हैं जो खुद मुसलमानों को फंसा और पकड़वाने का इंतज़ाम कर देते रहे।

मसीजीवि जैसे लोग ‘पैरलर क्रिटिसीज्म’ के शिकार हैं। वे हिंदू धर्म की आलोचना करने के लिए पांच सौ शब्द इस्तेमाल करेंगे तो तीन सौ शब्द इस्लाम के खिलाफ भी लिखेंगे, अब वह बे सर पैर की हो या फिर बेवजह। चूंकि ऐसे लोगों की अपनी एक महत्वाकांक्षा होती है। वे समाज में खुद को बनाए रखना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि लोग उन्हें पसंद करते रहे। जो जनभावना के आधार पर अपने मुद्दे सेट करने लगे वह भला आलोचक कहां? वह तो फिर कुछ और ही कहलाएगा। मुझे इस्लाम, कुरान और अल्लाह से कोई खास सरोकार नहीं लेकिन राजनैतिक आधार पर जब किसी वर्ग, उसके अराध्य और उसके विश्वासों के साथ कोई बर्बरता करे तो मैं चुप नहीं रह सकता। मैंने नास्तिकों को बहुत करीब से देखा है, नारीवादियों को भी। मुझे घुमा देना उतना आसान नहीं है। फेसबुक पर लोग मुझे क्रूरता की श्रेणी में रखते हैं। मैं असल में क्रूर हूं और निर्मम भी। मसीजीवि जैसे घोषित बौद्धिक ठेकेदारों से निपटना अच्छे से आता है। क्योंकि मैं जानता हूं पर्दे की आड़ में यह क्या साध रहे हैं।