arvind-kejriwal-pm-modi-meeting

एक पुरानी कहावत है “बार – बार गाय की पूँछ उठा कर देखने से गाय गोबर जल्दी नहीं करती” , इस प्रकार की भदेस (Weird) कहावत से लेख की शुरआत करने पर मुझे माफ़ कीजिये लेकिन यही हाल आज-कल मिडिया का है। चाहे मोदी सरकार हो या केजरीवाल सरकार मिडिया के मेंढक पीछे पड़े है बार-बार पूछ रहें है ” विकास हुआ की नहीं, 100 दिन हो गए विकास हुआ ? 1 साल हो गया विकास हुआ ? ”
विकास क्या है, कोई गाय का गोबर है जो रात में चार खिलाओ और दूसरे दिन सबेरे टोकरा भर के विकास उठा लो ?

केजरीवाल और मोदी दोनों सरकारे अच्छा काम कर रही है। केजरीवाल सरकार का तो दिल्ली वाले ज्यादा अच्छे से आकंलन कर पाएंगे, पर मोदी सरकार अपने वादे निभाने में जी-जान से जुटी है इसमें कोई शक नहीं है।
जन-धन योजना हो या , अटल पेंशन योजना, कृषि बीमा योजना, गरीबो के लिए मेडिक्लेम हो या पेट्रोल – डीज़ल को सस्ता करना हो या विदेशी पूंजी निवेश बढ़ाने की बात हो, या विदेशो से काला धन वापस लाने के लिए STC का गठन हो, या मेक इन इंडिया अभियान हो या सवच्छ भारत अभियान, सब ही सही तरीके से चल रही और मोदी सरकार की कुशल और तजुर्बेकार नीतियों का ही गुणगान कर रही है।

जन-धन योजना में जहाँ 15 करोडो गरीबो का खाता बैंक में खुल गया और बैठे बिठाये सरकारी बैंको में 1500 करोड़ भी जमा होगये, वही अटल पेंशन योजना और बीमा योजना में अब तक 7 करोड़ खाता धारको ने पॉलिसी ली है। दो लाख रुपये का जीवन बीमा हमारे जैसे , फेसबुक और व्हाट्स एप्प यूज़ करने वालो के लिए कोई मायने नहीं रखता। इससे ज्यादा लाइफ कवर तो हम लोग को क्रेडिट कार्ड के साथ मुफ्त ही मिल जाता है, लेकिन हमारे घरो में काम करने वाली बाई के लिए, जिसने कभी बैंक में कदम भी नहीं रखा और जिसका पति रोज शराब पीता है उसके लिए ये दो लाख शायद पूरे जिंदगी की कमाई से भी ज्यादा होगा।
सरकार जल्द ही स्वर्ण ब्याज योजना भी चालू करने वाली है, सोना खरीदिए और सरकार के पास जमा कर दीजिये। उस सोने पर सरकार आपको ब्याज भी देगी और इनकम टैक्स पर छूट भी मिलेगी। इससे जहाँ मंदिरो में पड़ा हुआ हज़ारो टन सोना सरकार खजाने में जमा हो जाने की संभावना है , वही सरकार को भारतीय बाजार में सोने की आपूर्ति करने के लिए विदेशों से सोना आयत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जनता और सरकार दोनों के लिए विन-विन स्थिति होगी।

पिछले एक साल में मोदी सरकार ने 300 योजनाओ की शुरुवात की, तक़रीबन रोज एक नयी योजना उस पर भी अभी तक कही से एक भी घोटाले की खबर नहीं सुनाई दी। जो विपक्ष मोदी सरकार के पीछे पड़ा है की एक साल होगया कुछ काम नहीं हो रहा है, अगर उसी विपक्ष से पूछा जाये की एक साल हो गया कोई घोटाला भी सुनाई नहीं दिया, तो अचानक वही विपक्ष पलटी मार के उल्टा सुर लगा देता है और बोलता है की अभी तो सिर्फ्र एक साल ही हुआ है आगे आगे देखिये। अजीब गिरगिटी रंग बदलने वाली, दोगली बातें !

सिर्फ योजनाये बनाने की बात ही नहीं है हम सब ने कश्मीर की बाढ़ में, यमन में और नेपाल में मोदी सरकार का युद्ध स्तर पर किया गया और कूटनीतिक सफलता वाला बचाव कार्य भी देखा है, जिसकी तारीफ़ पूरे विश्व ने मुक्त कंठ से की।

जो विपक्ष मोदीकी 12 महीनो में की गयी 17 देशो की यात्रा का मजाक उड़ाते नहीं थकता वो भी जानता है की ये सब विदेश यात्रा का उद्देश मोदी को पर्यटन करना नहीं है। इन यात्राओं का एकमात्र उद्देश विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करना और विश्व कूटनीति में भारत का स्थान मजबूत करना ही है। मोदीजी ने अपनी दूरदर्शिता का लोहा तो तब ही मनवा लिया था जब प्रधान-मंत्री बनने के बाद सब से पहली यात्रा भूटान की, कि थी, उसके तत्काल बाद ही भूटान ने चीन को अपने देश में दूता-वास खोलने से मना कर दिया था। आप खुद सोचिये की कहा चीन जैसा हाथी और कहा भूटान जैसा चीटी, भूटान में चीन को मना करने की हिम्मत कहाँ से आई ? जब उसे लगा की मेरे साथ भारत खड़ा है, तभी तो उसमे इतना जोश आया। और यहाँ ये भी जान लीजिये की चीन को अचानक भूटान में दूतावास खोलने का कोई दिव्य सवप्न नहीं आया या रातो-रात अचानक भुटानियो से भाई-चारा सुझा है, ये सब चारो तरफ से भारत को घेरने की चीनी चाल के अलावा और कुछ नहीं है। सालो पहले चीन को राष्ट्र मंडल (United Nations) का स्थाई सदस्य बनाने में भारत ने पूरा योगदान दिया था और अब ये ही चीन भारत की स्थाई सदस्यता को पुरजोर विरोध करता है। चीन नहीं चाहता की एशिया में कोई भी देश उसका मुकाबला करने के बारे में भी सोचे। अगर हमें विश्व कूटनीति में आगे बढ़ना है, राष्ट्र मंडल में स्थाई वीटो पावर चाहिए तो ये सब विदेश यात्राये भी जरूरी है, नहीं तो किसीने आप को रोका नहीं है अपने अंधे कुएँ में दीपक जला कर बैठे रहिये। जैसे की पिछले दस सालो से कर रहे थे हम।

और अंत में एक सन्देश मोदीजी के लिए ” मोदीजी जैसे देश की जनता ने आपको बहुमत से चुन कर प्रधान-मंत्री बनाया है उसी प्रकार से दिल्ली की एक करोड़ बीस लाख जनता ने चुन कर केजरीवाल जी को दिल्ली का मुख्य-मंत्री बनाया है। हम जानते है उनको आप जैसा तजुर्बा नहीं है, तजुर्बा तो छोड़िये आपके सामने तो नौसिखिये हैं, लेकिन जो भी हो जनता के प्रतिनिधि है। राज्यपाल या उप-राज्यपाल कभी भी लोक-तंत्र में जनता के द्वारा चुने हुए मुख्य-मंत्री से बड़ा नहीं हो सकता, ये तो आप भी जानते है। किसी भी प्रदेश के राज्यपाल को प्रधान-मंत्री , राष्ट्र-पति की सहमति से हटा सकता है लेकिन मुख्य-मंत्री तो हटाने के लिए पूरे मंत्रीमंडल को बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ता है। तो अगर उप-राज्यपाल (Lieutenant Governor) या मुख्य-मंत्री में से एक को चुनना पड़े तो कृपया राजनीती से ऊपर उठ कर स्वयं विवेक से निर्णय ले। हमें पूर्ण विश्वास है आप का निर्णय सही और देशहित में ही होगा” ।