Indian-Army

भारतीय सेना ने मंगलवार सुबह म्यांमार की सीमा में घुसकर मणिपुर हमले के जिम्मेदार लगभग 20 उग्रवादियों को मार गिराया। उग्रवादियों के दो अड्डे ध्वस्त कर दिए गए। म्यांमार सरकार के समन्वय से सेना ने यह सफल कार्रवाई की। इस घटना के बाद भारतीय सेना की यह सफलता देश में सोशल मीडिया पर छाई हुई है। आज INDIANARMYROCKS ट्रेंड कर रहा है।लेकिन खुश उस समय फीकी पद गयी जब म्यांमार ने कहा ऐसी कोई करवाई नहीं हुई है , ऊपर से जो फोटो दिखाया जा रहा था सोशल मीडिया ने उस का भी भेद खोल दिया क्यों के फोटो एक साल पुरानी थी . इस से पहले भी भारत पाकिस्तान नौका उड़ाने पे अपनी खिल्ली उडा चूका है . भारत सरकार की बेवकूफी के कारण आज पुरे विशव में भारत की जगहंसाई हो रही है और भारत की छवि को धक्का पहुंचा है . पेश है सोशल मीडिया पे कुछ महत्वपूर्ण लोगो के कमेंट —

( OM THANVI )
जवाबी कार्रवाई में सही, आतंकवादियों को पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र में सबक सिखाया गया यह काबिले-तारीफ है। लेकिन भारत के सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने गुड़ को गोबर क्यों किया? उन्होंने कहा कि म्यांमार में की गई भारतीय सेना की कार्रवाई पाकिस्तान समेत उन दूसरे देशों को एक संदेश है, जहाँ भारत विरोधी चरमपंथी बसते हैं। लेकिन म्यांमार सरकार ने तो कहा है कि जो हुआ है वह भारत की सीमा के भीतर ही हुआ है! सच्चाई क्या है?

दूसरी बात, सीमा की फौजी कार्रवाई पर राजनेताओं का बड़बोलापन और प्रचार-यश-प्रार्थी होना और पड़ोस के अन्य देशों को हड़काना कूटनीतिक स्तर पर कितना वाजिब है? या मोदी सरकार ने दक्षिण एशिया के लिए नई रणनीति तैयार कर ली है? अगर यही अंदाज रहा तो अच्छे दिन अर्जित न होने पर, या किसी चुनाव में आसार बिगड़ने की आहट पर, डर नहीं कि मोदीजी के उत्साही मंत्री कहीं सचमुच युद्ध का बिगुल न बजा दें? ‘वतन की आबरू खतरे में है आवाज दो’ का उदघोष जन-जन में अपार राष्ट्रबोध जगाता आया है और जो इसका विरोध करता है वह तुरंत देशद्रोही कहलाता है। उन्मादी विस्फोट का यह आजमाया हुआ फार्मूला है। इसका भविष्य अब क्या है, यह भविष्य ही बताएगा।

पहले म्यांमार की सीमा के भीतर जाकर फौजी कार्रवाई करने का केंद्रीय मंत्री का दावा झूठ निकला (म्यांमार का कहना है कि कार्रवाई भारत में ही हुई होगी), अब कल से टीवी पर और आज अखबारों में छाई तसवीरों का ‘सच’ उजागर हुआ है! विश्वव्यापी प्रचार के बाद पोल खुलने पर सरकार ने बस यह बयान दिया है तसवीरें रक्षा मंत्रालय ने जारी नहीं की थीं!

बहरहाल उचित सैनिक कार्रवाई हुई, और सरकार की सम्मति से हुई, इसमें किस को शक होगा। पर सौ की तादाद में आतंकवादी मारे गए और जो मारे गए उनमें प्रमुख नाम कौन-से हैं, यह भी तो आधिकारिक तौर पर सामने आना चाहिए – अगर गोपनीयता इसमें आड़े नहीं आती।टीवी चैनल तो कल पुराने फोटो दिखा-दिखा कर मुदित हुए; पुराने फोटो आज हिन्दू और टाइम्स ऑफ इंडिया के पहले पन्ने पर भी शोभित हैं! मतलब यह कि सौ आतंकवादी दूसरे देश की सीमा में घुसकर-न-घुसकर मारने की ‘खबर’ ने बावला कर रखा है सयानों तक को!!

( TONY RAJA)

कहा है बड़बोली सरकार ,भाड़ मीडिया और भगतगण ! म्यांमार के राष्ट्रपति कार्यालय के निदेशक जाव हते ने इन खबरों का फ़ेसबुक पोस्ट के जरिए खंडन करते हुए कहा, ‘हमारी सेना की ओर से दी गई सूचना के मुताबिक भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई हमारे देश में घुस कर नहीं, बल्कि भारत-म्यांमार सीमा के नजदीक भारतीय इलाके में ही की गई।’ —कहा है वो राठोड जो ५६ ” सीना और मजबूत सरकार की बात कर रहा था ,दे अब जवाब ? ये कार्रवाई म्यांमार के हमारी सेना को बताने पे हुवी की यहाँ आतकी छुपे है और वो सीमा भारत की थी तो फिर ये बिना काम को हो हल्ला मचा के ये देश की नाक क्यों कटवा रहे हो ! पहले पाक बोट जो गुजरात में आई थी उसके बारे में भ्रामक प्रचार किया गया और फिर जब उस सैनिक अफसर ने सच बोला तो उसे दबा दिया गया —ये सिर्फ लोगो का १७००० एकड़ जमी जो बांग्लादेश को दी गयी है उससे धयान हटाने की कुचेस्टा है और कुछ नहीं और भगतो को खुस करने का ड्रामा और देश में जो हालत पैदा हो रहे है उससे लोगो का ध्यान बाटने की कोशिस –कुछ तो सरम करो -डूब मरो-डूब मरो .

( Nilesh Takre )

Shame media is using old army pictures to justify so called Mayanmar fake strike

जैसे गुजरात में बोट धमाका हुआ वैसे हे तो कुत्च हुआ होगा म्यांमार में क्यो भक्तो , बोट धमाके का आज तक खुलासा नहीं हुआ.

भाजपाई हमें देशभक्ति सिखाने आते है, अरे जाओ जरा अपने आका को भी सिखाओ देशभक्ति कम से कम देश और सेना को बदनाम ना करे।

( Umesh Diwedi )

इस सरकार की प्रत्येक कार्यवाही अगले दिन संदेहो को जन्म क्यों देने लगती है ? पिछली बार पाकिस्तानी बोट को उड़ाने के मामले भी सरकार और अधिकारीयों के बयान अलग अलग थे . मुश्किल ये है की ये सरकार हर चीज़ का तुरंत श्रेय लेना चाहती है और देश को ये बताना चाहती है की उसके जैसी सरकार आज तक इस देश में नहीं आई है और यही से गड़बड़झाला शुरू हो जाता है यदि मनोविज्ञान से सरकार को समझा जाए तो ये लगता है की सरकार के पास अभी तक दिखने लायक कुछ नहीं है ईसलिये जब भी इस तरह की घटना होती है सरकार तुरंत इसका श्रेय लेने कूद पड़ती है . परिपक्वता की बहुत कमी है.

( Mohammed Anas )

ऐसे सौ उग्रवादी मार गिराए गए दूसरे देश में जो अत्यंत दुर्गम भागौलिक स्थिति वाला है। टीवी वाले कह रहे हैं हमारे 160 फौजी उस पार गए थे। खरोंच तक नहीं आई। ज़मीन में उतर कर मार गिराए।
फुटेज में बार्डर पिच्चर की लड़ाई दिखाई जा रही है। एकदम वो समझ रखा है क्या जनता को। वो समझते हैं न? नहीं। चार साल है अभी तो,समझ जाएंगे।अगर म्यांमार के भीतर भारतीय फौज नहीं घुसी और न तो उन्होंने ऐसा कोई ऑपरेशन वहां अंजाम नहीं दिया तो इस बात की जांच होनी चाहिए की सेना पर किन लोगों का दबाव था ऐसी बात मीडिया से कहने के लिए। आज देश शर्मसार है। जो भी है वह साफ होना चाहिए। यदि कार्यवाई नहीं हुई है तो अब होनी चाहिए। नरेंद्र मोदी जी पर मुझे पूरे एतबार है। उनके 56 गुणे 0 सीने पर पूरा गर्व है मुझे। वे देश नहीं झुकने देंगे। दुनिया को दिखा दें कि म्यांमार तो क्या चीन में घुस जाएंगे हम। अब पूरी दुनिया के सामने लंका लगा दें मोदी जी शत्रुओं का।
वंदे मातरम।

(wasim akram tyagi)

अजब हमला है म्यांमार कहता है कि कोई कार्रवाई ही नहीं हुई और अखबार के पहले पन्ने इस हमले से इस कद्र खुश हैं कि मानो गोली उनकी खबर को लिखने वाले की -बोर्ड ने चला दी हो। रक्षा मंत्री पता नहीं क्यों और किस वजह से नहीं बोल पा रहे हैं ? क्या उन्हें भी भारतीय सीमा में घुस आये घुसपैठियो को मार गिराने की खबरों पर यकीन नहीं है ? उधर अखबार नवीश हलवाई की दुकान पर लड्डू बुकिंग कराने की तैयारी कर रहे हैं, एक साहेब तो इससे बड़े साहेब की ब्रांडिंग करने पर उतारू हो गये है। अगर यह सच है कि सेना ने वाकई घुसपैठिये मार गिराये हैं तो उनकी लाशें कहां भी तो कहीं पर गिरी होंगी वे लाशें कहा हैं ? या फिर वे गोली लगने के बाद वापस म्यांमार की सीमा में घुस गये होंगे ? हां इतना तो जरूर है कि इस ‘फर्जी’ हमले से जितनी खुशी अखबारों के संपादकों को हो रही है उससे लगता है यहां एक विशेष वर्ग जो च्यूंटियों को आटा खिलाने में यकीन रखता है उसी वर्ग के डीएनए में हिंसा नफरत और खून खराबा है। उसी वर्ग का मीडिया पर कब्जा है बाबा साहेब ने इस वर्ग को तथाकथित उच्च वर्ग और ब्राहम्णवादी वर्ग बताया है।

( DHRUV GUPTA )

हमारी सरकार की प्रचंड प्रचारप्रियता और भारतीय मीडिया की मूर्खता के कारण नेपाल में भारतीय वायुसेना और एन.डी.आर.एफ द्वारा किए गए प्रशंसनीय राहत और बचाव कार्य के बावज़ूद देश की नेपाल में इस क़दर भद्द पिटी कि अपमानित नेपाल सरकार को आख़िर में भारतीय मीडिया को अविलंब नेपाल से निकल जाने को कहना पड़ा। अब भारतीय सेना और वायुसेना द्वारा मणिपुर और नागालैंड में आतंकियों के ख़िलाफ़ चलाए गए साहसिक और बेहतरीन अभियान को पडोसी देश म्यांमार में घुसकर आतंकियों को मारने का अभियान बताकर मीडिया और सरकार ने एक संप्रभु देश को इस क़दर अपमानित किया कि अंततः म्यांमार की सरकार को भारत के दावे का खंडन करना पड़ा। म्यांमार के राष्ट्रपति कार्यालय के डायरेक्टर ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि भारतीय सेना का अभियान म्यांमार की सीमा के भीतर नहीं, म्यांमार की सीमा से लगी भारतीय ज़मीन पर की गई थी। यह अभियान म्यांमार की ज़मीन पर ही अगर चलाई गई थी तो इसे गोपनीय रखने के बजाय एक ज़िम्मेदार सरकार द्वारा अपने एक सहयोगी पडोसी राष्ट्र की संप्रभुता का मखौल उड़ाना क्या जायज़ कहा जाएगा ?

हमारी यह दंभपूर्ण प्रचारप्रियता कहीं हमें हंसी का पात्र तो नहीं बना रही ?