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जैसा के हम सभी जानते है के सोशल मीडिया आजकल हमारे समाज में अपनी पैठ बना चूका है और आने वाले दिनों में प्रिंट और टीवी के लिए खतरा भी बनता जा रहा है . मगर सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल भी हो रहा है और समाज में नफरत और भरमकता भी फैला रहा है खासतौर से भारत में .भारत में सोशल मीडिया का जुनून लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है. मन की भड़ास निकालने का यह एक मजबूत हथियार साबित हो रहा है मगर अभिव्यक्ति की आजादी का दायरा तोड़ने वालों के लिए यह मंहगा भी साबित हुआ है. अगर हम देखे तो यही सोशल मीडिया ने लीबिया और मिस्र में क्रान्ति लायी और वह के निरंकाश बादशाह की गद्दी भी छीन ली .

इधर कुछ दिनों से सोशल मीडिया में १०-१२ फोटो बहुत प्रचलित हो रहे है जो बर्मा के मुसलमानो पे हो रहे जुल्म के बताये जा रहे है जिस में कुछ तस्वीरें जली हुई , क़त्ल की हुई , बच्चो पे जुल्म की हुई है है . लोग इसे बिना सोचे समझे और प्रमाणिकता के बगैर बर्मा के मुसलमानो पे हुए जुल्म को समझ कर लोग उसे शेयर कर रहे है जिस से समाज में नफरत फ़ैल रही है .

उनमें से अधिकांश, नहीं तो सब, इंटरनेट से बेतरतीब ढंग से उठाया और टिप्पणियों को उकसाने के साथ शेयर किया जा रहा है है। तस्वीरों में से एक में, एक गाली चीनी बच्चे को एक रोहिंग्या बच्चे अत्याचार किया जा रहा है, के रूप में एक और तस्वीर चीन में एक घातक भूकंप के शिकार लोगों की बड़े पैमाने पर दाह संस्कार की तैयारी को तिब्बती भिक्षुओं के तौर पे प्रस्तुत किया है।

लेकिन हम इस सच्चाई से भी आँख नहीं बंद कर सकते है के बर्मा के मुसलमानो पे जुल्म नहीं हो रहा है.रोहिंग्या नरसंहार मानव अधिकार और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की एक कब्र उल्लंघन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एक सक्रिय भूमिका निभाने के की जरूरत वास्तव में है। हालांकि, मरोड़ा चित्रों के साथ प्रसार झूठ ही संकट से ध्यान दूर ले जाता है।

नीचे फेसबुक पर वायरल हो रहे नकली रोहिंग्या तस्वीरों का सच आप भी देखे .

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इस तस्वीर को चीन में 2010 में एक विनाशकारी भूकंप के पीड़ितों के लिए बड़े पैमाने पर अंतिम संस्कार के लिए तैयारी तिब्बती को तिब्बत भिक्षुओ को बर्मा के मुसलमानो के हत्या के तौर पे दिखाया जा रहा है.

burma-2इस तस्वीर को बर्मा के मुस्लिम बच्चो पे हो रहे जुल्म के तौर पे पेश किया जा रहा है जब के ये तस्वीर बिहार के एक बाबा चिल्ला यादव की है जो बच्चो का इलाज या तरह करते है लोगो की मान्यता है के बाबा के ऐसे करने से बच्चे भुत, प्रेत आत्मा से दूर रहते है .

image-3तस्वीर कई प्रकाशनों और समाचार चैनलों में इस्तेमाल किया गया है जो गाजा युद्ध के शिकार लोगों से पता चलता है।

bangaladesh-1 ये तस्वीर हिफाज़त-ए-इस्लाम और बांग्लादेशी पुलिस की है इस सीएनएन ने चित्रित किया है।

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burma-3यह एक शिक्षक के द्वारा भारत में छात्रों के हाथ पर अपनी मोटर साइकिल चालन से एक स्टंट है यह एएफपी तस्वीर है। इसे भी बर्मा के मुस्लमान पे हो रहे जुल्म के तौर पे पेश किया जा रहा है .