MOTHER-TERESA

मदर टेरेसा एक महान व्यक्तित्व, जिसका कोई सानी नहीं | चेहरे पर हमेशा ममता का भाव और मन मे हमेशा गरीबों और मज़लूमों की सहायता करने का जज़्बा | मदर टेरेसा भारत आयीं तो थी एक लोरेटो सिस्टर के रूप में लेकिन आज वो पूरी दुनिया मे ‘मदर’ यानि माँ के नाम से जानी जाती हैं | 1946 से लेकर आज तक ना जाने कितने लावारिसों , गरीबों और मज़लूमों ने इस महान विभूति मे खुद की माँ को देखा | आज मदर टेरेसा विश्व भर के लिए आदर्श हैं | भारत एक बहुत खुशनसीब मुल्क है क्यूंकी इस देवी स्वरूपा स्त्री ने इस देश को अपनी कर्मभूमि बनाया | मदर टेरेसा ने अपनी समाज सेवा उस समय शुरू की जब इस देश को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी | 1946 मे कलकत्ता दंगो की आग मे झुलस रहा था तब मदर ने एक घायल हिन्दू लड़के का इलाज किया | चूंकि दंगे हिन्दू मुस्लिम के बीच मे थे और मदर टेरेसा एक हिन्दू थी इसी नाते लोरेटो हाउस मे उनकी सीनियर सिस्टर को यह लगा की कहीं मुस्लिमो में इस वजह से ये संदेश ना जाये की लोरेटो हाउस हिन्दुओ के पक्ष में है , इसीलिए उन्होने मदर को यह करने से रोका लेकिन मदर की सेवा किसी के पक्ष में नहीं थी अगर वो किसी के पक्ष मे थी तो वो था इंसानियत और मानवता का | जब मदर ने ऐसा करने से मना कर दिया तो उनकी सीनियर सिस्टर ने उन्हे कलकत्ता से बाहर किसी दूसरे केंद्र पर जाने का आदेश दिया | जब मदर रेल्वे स्टेशन पहुंची तब उन्होने वहा उस गरीब भारत को देखा जो उन्होने अपने 20 साल के भारत प्रवास में कभी नहीं देखा हर तरफ बेसहारा और मज़लूमों का मजमा था हर तरफ गरीबी थी | उसी भीड़ मे उन्हे एक बीमार आदमी दिखाई दिया जो वही जमीन पर बेसुध सोया था | जब मदर उसके पास पहुची और उसे देखा तो पाया की वह आदमी अपनी ज़िंदगी के अंत की ओर था | मदर ने उसका सर अपनी गोद मे रखा और उस आदमी ने ‘मैं प्यासा हूँ’ कह कर अपने प्राण त्याग दिये | मदर ने उस बीमार व्यक्ति में अपने आराध्य जीसस यानि येशु को देखा क्यूकी जब जीसस को सूली पर चढ़ाया जा रहा था तो उनके भी यही शब्द थे ‘I THIRST’ जिसका हिन्दी रूपान्तरण है ‘ मै प्यासा हूँ’ | उसके बाद मदर ने कलकत्ता से बाहर जाने का विचार त्याग दिया और कलकत्ता की गरीब बस्तियों मे आकर बेसहारा और गरीबों की मदद करने लगी और उस समय खुद सिस्टर अगनेस को यह पता नहीं लगा की वो मदर टेरेसा बन चुकी हैं |

लोरेटों हाउस को जब इस बात का पता चला तो उन्होने मदर को बुला कर उनसे बात की लेकिन उनकी जिद को देखते हुए उन्होने वैटिकन को मदर टेरेसा के इस काम को इजाजत देने के लिए पत्र लिखा और 1950 में वैटिकन ने मदर टेरेसा को इसकी इजाजत दे दी | मदर ने तब मिशनरीस ऑफ चेरिटी नामक संस्था की स्थापना की | उन्होने 4 महीने पटना मे रह कर दवाइयों के बारे मे जाना ताकि वो लोगो की मदद कर सके | उसके बाद मदर ने अपनी पूरी जिंदगी कलकत्ता की झुग्गियों में गरीबों को समर्पित कर दी |

1952 मे मदर ने अपना पहला केंद्र एक खाली हिन्दू मंदिर मे खोला जो हिन्दुओ के एक पवित्र तीर्थ कलकत्ता के काली मंदिर से बिलकुल सटा हुआ है | मदर ने इसका नाम कालीघाट , निर्मल हिर्दय रखा, यह केंद्र उन लोगो के लिए है जो लावारिस है तथा अपने जीवन के आख़री समय मे है| इस वजह से इस केंद्र को ‘होम ऑफ डाईङ्ग’ अर्थात मरने वालो का घर कहा जाता है | इस केंद्र को स्थापित करने के मुख्य वजह यह थी को जो लोग सड़कों पर तड़प तड़प कर लावारिसों की मौत मरते हैं और उन्हे कोई पूछने वाला नहीं होता उनके लिए एक जगह का होना जहा वो एक बेहतर, दर्दरहित और आत्मसम्मान की मौत मर सके | इसके बाद मदर ने कलकत्ता के टीटागढ़ में शांतिनगर (सिटी आफ पीस ) की स्थापना की यह केंद्र कुष्ठ रोगियों के लिए खोला गया जहा उनका इलाज कर उन्हे आत्मनिर्भर बनाया जाता है | मदर की संस्था की सारी 4500 सिस्टर्स और दुनिया भर के केन्द्रो के मरीज़ इन कुष्ठ रोगियों द्वारा बुनी गयी साड़ियों और कपड़ो को पहनते हैं| इन केन्द्रो पर इस्तेमाल कि जाने वाली चादरें और पर्दे भी इन्ही रोगियों द्वारा बुने और बनाए जाते हैं| मदर ने और भी कई केन्द्रो की स्थापना की जैसे प्रेम दान यहा बेसहारा , बीमार और लावारिस लोगो को रखा जाता है , यहा उनका इलाज किया जाता है और उन्हे आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जाती है | प्रेम दान मे स्त्री और पुरुषों दोनों के लिए केंद्र हैं | मौजूदा समय में यहा 450-500 लोग रहते हैं | दया दान ,नबो जीबोन, शांति दान जिसे महिलाओं के लिए बनाया गया , शिशु भवन यह केंद्र नवजात लावारिस शिशुओं के लिए खोला गया है | यहाँ उन बच्चो को भी रखा जाता है असाध्य बीमारियों और शारीरिक कमजोरियों से ग्रस्त होते हैं जिनका कोई ख्याल रखने वाला नहीं होता |

मदर टेरेसा ने टीबी रोगियों केलिए कलकत्ता से 35 किलोमीटर दूर बरुईपुर मे एक टीबी केंद्र की स्थापना की| यहा कलकत्ता की म्यूनिसिपल कार्पोरेशन की मदद मिशनरीस ऑफ चरिटी के ब्रदर्स उन रोगियों का ख्याल रखते हैं | इन केन्द्रो ने आज तक लाखों लोगो की जिंदगी सँवारी है | कलकत्ता कों एक बेहतर जगह बनाने मे मदद की है |

मदर टेरेसा एक महान देवी थी गरीबों और बेसहारा लोगो के लिए भगवान और उन सभी के लिए भी जो उन्हे अपना आदर्श मानते हैं | मदर टेरसा मिशनरिस ऑफ चरिटी की 4500 सिस्टर्स , 300 ब्रदर्स और उन हजारों स्वयं सेवकों के लिए आदर्श हैं जो मदर के दुनिया भर मे फैले केन्द्रो मे लोगो की सेवा करते हैं | मदर टेरेसा को पद्म विभूषण और वरिष्ठ भारतीय नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया , इसी के साथ उन्हे शांति का नोबल पुरस्कार भी दिया गया | इसी के साथ अनेक छोटे बड़े सम्मान और पदक मदर टेरेसा को दिये गए |

मदर टेरेसा तो 5 सितंबर 1997 के दिन चीरनिद्रा मे लीन हो गईं, लेकिन उनकी जलायी हुई मानवता की सेवा की अलख आज भी जागृत है | 1997 के बाद सिस्टर निर्मला जोशी ने मिशनरीस ऑफ चरिटी का कार्यभार संभाला | सिस्टर निर्मला जोशी मूल रूप से रांची की रहने वाली हैं ये जन्म से हिन्दू थी परंतु 1958 मे इनहोने ईसाई धर्म ग्रहण कर लिया और अपनी पूरी जिंदगी मानवता की सेवा मे समर्पित कर दी | सिस्टर निर्मला जोशी ने मदर टेरेसा के सम्मान मे ‘मदर’ शब्द को अपने नाम के आगे लगाने से मना कर दिया | सिस्टर निर्मला जोशी 2009 मे मिशनरीस ऑफ चरिटी के प्रमुख पद से रिटायर हो गयी | इस समय सिस्टर निर्मला का स्वस्थय ठीक नहीं है और वो गंभीर रूप से बीमार हैं | मै ईश्वर से सिस्टर निर्मला की दीर्घायू और अच्छे स्वस्थ्य की कामना करता हूँ |

सिस्टर निर्मला को 26 जनवरी 2009 को भारत सरकार ने मानवता की सेवा करने के लिए पद्म विभूषण के सम्मान से अलंकरत किया जो की भारत का दूसरा सबसे बड़ा भारतीय नागरिक सम्मान है | सिस्टर निर्मला जोशी के बाद संस्था की प्रमुख हैं सिस्टर मेरी प्रेमा पीएरीक्क जिनका जन्म जर्मनी मे हुआ है|

खराब स्वास्थ्य के कारण मेरी मुलाक़ात सिस्टर निर्मला से तो नहीं हुई लेकिन मै सिस्टर प्रेमा से मिलने मे सफल रहा उन्होने अपने व्यस्त समय मे कुछ समय मुझ जैसे साधारण और निक्रष्ठ मनुष्य के निकाले मै इसके लिए उनका आजीवन आभारी रहूँगा | सिस्टर प्रेमा मे मैंने मदर टेरेसा की झलक देखि , वही प्यार वही ममता देखी जो कई वर्ष पहले मदर के चेहरे पर देखि थी | कुछ सेकेंडो मे ही उन्होने मुझे अपना बना लिया इतना प्यार दिया की मै उसे जीवन भर नहीं भूल पाऊँगा |

मदर टेरेसा और उनकी संस्था पर उंगली उठाने वालो के लिए मै सिर्फ एक शब्द कहना चाहूँगा की वो मूर्ख हैं तथा सस्ती लोकप्रीयता के भूखे हैं | साथ ही यह कहना चाहूँगा की किसी के धर्म को देख कर उसके कर्म का अंदाज़ा नहीं लगाना चाहिए | मै काफी दिनो से मदर की संस्था के केन्द्रो पर स्वयं सेवा कर रहा हूँ और मैंने कभी यह महसूस नहीं किया की यहा धर्म परिवर्तन करने के लिए उकसाया या बाध्य किया जाता है | मदर हाउस मे सभी धर्मो का आदर और सम्मान किया जाता है | मै खुद एक हिन्दू हूँ और हर रोज मदर हाउस के प्रार्थना कक्ष मे प्रार्थना के लिए जाता हूँ | सिस्टर्स द्वारा गायी जाने वाली प्रार्थनाओ को सुनकर बरबस ही मेरी आंखो से आँसू आ जाते है | किसी वयक्ति का धर्म उसके कर्म का स्रोत नहीं होता | मदर टेरेसा एक महान इंसान है , वो देवी हैं उन पर उंगली उठाकर आपने कई लोगो की भावनाओ को ठेस पाहुचाई है जिनमे हिन्दू भी शामिल हैं ,क्यूकी हिन्दू धर्म मे सबका आदर और सम्मान करने की परंपरा रही है | तथा मै इसी के साथ विश्व हिन्दू परिषद तथा आरएसएस से यह विनती करना चाहूँगा की पहले वो हिन्दू धर्म के नाम पर लोगो को ठगने , उनकी भावनाओ ठेस पाहुचने वालो और इज्जत कों लूटने वाले पोंगा पंथियों और झूठे गुंडे मवाली बाबाओं पर रोक लागाए तत्पश्चात मदर टेरेसा जैसी महान विभूति पर उंगली उठाए क्यूंकी आप एक धर्म की सेवा कर रहे हैं और मदर टेरेसा ने पूरी मानवता की सेवा की है |

साथ ही मदर टेरेसा के केन्द्रो पर रोगियों की सेवा के स्तर पर उंगली उठाने वाले लोगो से भी यह कहना चाहूँगा की यह करने से पहले भारतीय सरकारी अस्पतालों पर भी नज़र डाल ले अंतर साफ पता चल जाएगा |

मदर टेरेसा एक महान विभूति हैं , सभी के लिए आदर्श मानवता की देवी | ईश्वर ने मदर टेरेसा के रूप मे अपना ही अंश भेजा है | जिसने मानवता की सेवा की और आज भी लोगों कों मानवता की सेवा के लिए प्रेरित कर रही है | मै इस महान विभूति कों शत – शत नमन करता हूँ |