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मुलायम सिंह जी के नाती और लालू जी के बेटी की शादी की तैयारी मे पूरा सैफई डूबा हुआ है | दो दिन पहले हुए तिलक मे कई हाइ प्रोफ़ाइल लोग शामिल हुए जिनमे प्रधानमंत्री भी शामिल थे | ये पूरी तरह से शाही शादी है | शाही शादी इसीलिए क्यूंकी इसमे सिर्फ एक लाख पच्चीस हज़ार मेहमान आमंत्रित किए गए हैं , जिनमे से 550 के ठहरने के लिए उत्क्रष्ट किस्म के स्विस काटेज़ मे तथा , 250 साधारण काटेज़ की व्यवस्था है , इटावा के सभी होटल बूक हैं , आगरा ,फीरोजाबाद , मैनपुरी के भी काफी होटल बुक किए गए हैं | खाने मे सिर्फ 100 तरह के व्यंजनो की व्यवस्था की गयी है | भोजन की व्यवस्था 80000 वर्गफीट के मैदान मे चार जर्मन हैंगर्स मे की गयी है ( ये होता क्या है मुझ जैसे साधारण इंसान को नहीं पता ) व्यवस्था देखने के लिए 5 सुपर एम्ब्युलेन्स , 500 सरकारी गाड़िया , 12 आईपीएस, 16 एएसपी, 32 सीओ, 60 इंस्पेक्टर , 250 एस आई , 1500 कान्सटेबल, और 12 कंपनी पीएसी लगी है|

इतनी भव्य व्यवस्था खुद को समाजवादी बोलने वाले मुलायम सिंह यादव के नाती की शादी मे की गयी है | वाह रे मुलायम का समाजवाद , इस समाजवाद को देख कर तो आज लोहिया और जनेश्वर मिश्रा की आत्मा भी तड़प उठी होगी | ये कैसा समाजवाद है कोई नहीं बोल सकता , समाजवाद का सीधा सा अर्थ है वो व्यवस्था जहा सभी के पास समान संपत्ति या धन हो ,कोई ना बड़ा हो और ना कोई छोटा ,सब साथ हो और सभी का विकास एक सा हो | लेकिन मुलायम का समाजवाद इससे उल्टा है , उनका समाजवाद सिर्फ यादव परिवार के विकास को लेकर केन्द्रित है | मुलायम और लालू उस भानुमती के कुनबे के रोड़े हैं जिसका निर्माण बीजेपी और मोदी के विजय रथ को रोकने के लिए हुआ है | इस कुनबे की नीव को मजबूत करने के लिए मुलायम और लालू समधी भी बन गए | कुनबे की नीव मजबूत हो ना हो लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता दूसरी शाही शादी देख रही है | पहली तो मेरे ख्याल से राम जी की होगी |

मुलायम का समाजवाद बड़ा ही निराला है क्यूकी कभी वो अपने रक्षक के जन्मदिन पर विक्टोरिया बग्घी मे बैठ जाता है तो कभी अपने कथित रक्षक के नाती की शादी की शोभा बनता है | मुलायम के समाजवाद मे सभी ऊचे दर्जे के समाजवादियों को जगह मिलती है | गरीब के हित का समाजवाद आज मुलायम के ड्राइंग रूम की शोभा है | आखिर मुलायम के इस समाजवाद के पैदा होने की वजह क्या है ? दरअसल मुलायम ने कभी भी समाजवाद को केंद्र बनाया ही नही मुलायम की राजनीति की नीव समाजवाद नहीं है , इसकी नीव तो बाबरी मस्जिद है | मुलायम खुद को सेकुलर तथा समाजवादी बोलते हैं लेकिन मेरी समझ मे वो एक मौकापरस्त कट्टरपंथी हैं जिसने समाजवाद का मुखौटा लगाया हुआ है | जिस तरह का समाजवाद मुलायम की समाजवादी पार्टी मे है उस तरह के समाजवाद की तुलना लोहिया ने अपने सपने मे भी नहीं की |

ये लोहिया का समाजवाद नहीं है ये मुलायम का समाजवाद है जो सिर्फ यादव परिवार , उन हित चिंतको , चाटुकारों आदि के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है जहा किसी गरीब,मज़लूम, बेसहारा की कोई जगह नहीं | इस हाइ क्लास समाजवाद का हिस्सा बनने के लिए आपको सैफई के यादव परिवार मे जन्म लेना होगा | यदि इसे आप असंभव समझ रहे हैं तो आपके लिए एक आसान सा रास्ता ये है की आप अपने आत्मसम्मान को खत्म कर दे और इस परिवार के चाटुकार बन जाये | अब आप पूछेंगे की मैंने मुलायम के समाजवाद को तो बता दिया लेकिन लोहिया के समाजवाद के बारे मे नहीं बताया| तो मै कहूँगा की लोहिया का समाजवाद उन्ही के साथ ख़त्म हो गया और बचा खुचा जनेश्वर मिश्र के साथ चला गया | रह गया तो सिर्फ मुलायम समाजवाद | लोहिया समाजवाद को तो आगे ले जाने वाला कोई नहीं रहा लेकिन मुलायम के समाजवाद को आगे ले जाएंगे उनके सुपुत्र तथा अभागे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव |

उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होने के नाते मै जानता हूँ की आज उत्तर प्रदेश कहा पर है | उत्तर प्रदेश मे अगर कही विकास हुआ है तो वो सैफई, मैनपुरी और इटावा मे हुआ है | लखनऊ चूंकि राजधानी है तो उस पर ध्यान देना ही है | इन जगहो के अलावा अगर आप कही जाएंगे तो आपको वो विकास नहीं देखने को मिलेगा जो आप एक छोटे से गाव मे देख कर आए हैं | कानून व्यवस्था लाचार है , गांवो को छोड़िए शहरों मे पर्याप्त बिजली नहीं है , स्कूल कालेज आदि नहीं है , सड़के नहीं है | कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश आज एक ऐसे युग मे है जिसे हम पाषाड युग कह सकते हैं |

दरअसल उत्तर प्रदेश का दुर्भाग्य यह है उसे दो महान नेता मिले एक हैं समाजवादी मुलायम तथा एक हैं महादलित मायावती , इन दोनों ने उत्तर प्रदेश की जनता का जाति और धर्म के नाम पर भरपूर फाइदा उठाया | जहा मुलायम का समाजवाद विक्टोरिया बग्घी पर घूमता है वही मायावती का दलित उत्थान लाल पत्थर के हाथियो की सवारी करता है | दोनों का काम सिर्फ जनता को लूटना है और उत्तर प्रदेश की जनता का काम खुद को लुटवाना |

मै मुलायम सिंह यादव तथा लालू दोनों से यह प्रश्न पूछना चाहता हूँ की क्या इस विवाह समारोह मे इतना खर्च आवश्यक था ? क्या ये जनता के पैसे की बरबादी नहीं है? मुलायम और लालू दोनों ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांशा की पूर्ति के लिए ये सब किया| इस पूरी व्यवस्था मे खर्च होने वाले करोड़ो रुपये जनता के है | जिसे ये दोनों जोड़ी दार दोनों हाथो से उड़ा रहे हैं | मुलायम शायद भूल रहे हैं की उनकी पार्टी सत्ता मे है तथा उनके पुत्र मुख्यमंत्री हैं | जनता उनकी हर हरकत को देख रही है| मै अखिलेश तथा मुलायम दोनों से यह निवेदन करूंगा की इस प्रकार के समाजवादको बढ़ावा ना दे क्यूकी ये उन्ही के लिए हानिकारक होगा | बाकी लोहिया समाजवाद तो खत्म हो चुका है और वो अब तभी जीवित होगा जब मुलायम का समाजवाद खत्म होगा, ये एक ऐसा समाजवाद है जो खुद तो बदनाम है साथ ही लोहिया समाजवाद को बदनाम कर रहा है क्यूकी इसने लोहिया समाजवाद का मुखौटा पहना है | इस मुलायम समाजवाद को खुद मुलायम को ही ख़त्म करना होगा क्यूकी अगर कोई और इसे ख़त्म करेगा तो वो मुलायम तथा उनके परिवार की राजनीति का समूल नाश कर देगा |