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सुरेन्द्र अग्निहोत्री

लोकमन को जीतने की विधा नारे सभी को लगते है प्यारे यह बात सिर्फ आज के
चुनावी युग और प्रचार युग में ही नही प्राचीन काल में भी नारे लोकमन की
बात और लोकमन के बीच में अपनी बात को पहुॅचाने की एक सशक्त विधा के तौर
पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। संस्कृत के ‘सुभाषित’ नीति कथनों से भी
नारों का काम लिया जाता रहा है।
वीर रासो काव्य को भी इसी रुप में ले सकते है जब युद्ध के तौर पर वीरता
के लिए लोगों के मन में ललक पैदा करने की कोशिश की जाती थी। प्राचीन काल
में जब कोई बात उद्घोषणा के रुप में घोषित कीजाती थी तो उद्घोषणा के लिए
डोडी पीटी जाती थी। डोडी का मतलब ध्वनि करके लोगों को एकत्र करते हुए
राजआज्ञा या सरकारी सूचना दी जाती थी। नारे और नारेबाजी, एक पंच लाइन से
अपनी बात को कहने का एक अत्यंत सरल एवं प्रभावी तरीका है, लोकोवित
मुहावरे सुभाषित भी भाषा के यही रूप है। अंग्रेजी का एक शब्द है। स्लोगन
वास्तव में स्लो नही गन हैं। गन के धमाके की तरह किसी भी बात विचार को
चारो तरफ फैला दे। विज्ञापनों के नारे पूरा एक अलग विषय है। नारे किसी
बात,किसी भी विशेष विचार की उद्घोषणा के लिए बनते है और ये किसी भी
आन्दोलन के प्रचार-प्रसार के अंगीभूत होते है। जैसे किसी समय परिवार
नियोजन के लिए बना दीवारों पर लिखा जाता नारा हम दो, हमारे दो हैं और लाल
तिकोन जिस नारे का चित्रात्मक रूप है। बिना नारों के कोई आन्दोलन खड़ा नही
हो सकता। जन समर्थन नहीं जुटा सकता है।
शुनह मानुष भाई
शबारे उपरे मानुष-सत्य
तहार उपर नाई-चंडीदास

मनुष्य का सत्य सर्वोपरि है। मानुष-सत्य की व्याख्या करना आसान नहीं है।
मानुष-सत्य क्या है, उसे जानने की कई विधियाँ और शास्त्र बने और खारिज भी
हुए। भक्ति आन्दोलन लोक जागरण की अखिल भारतीय लहर था। कबीर वाणी
जात-पांत,साम्प्रदादिकता और कर्म काण्ड की जकड़न से मुक्ति की पहल थी तो
आजादी का आन्दोनल साम्राज्यवाद, सामन्तवाद के विरूद्ध शंखनाद था जिससे
कवि,शायरो ने जनमन को प्रेरित और प्रभावित करने के लिऐ गीतो, लोक गीतो
तथा शेरो-शायरी के माध्यम से लोक के बीच एक ऐसा वातावरण बनाया कि
अंग्रेजी साम्राज्य का पतन हो गया। 1857 की क्रान्ति की नायिका रानी
लक्ष्मी बाई ने नारा दिया था ‘‘मैं झांसी नही दूगी’’ आजादी आन्दोनल में
नेताजी सुभाष चन्द्रबोस ने नारा दिया था ‘‘तुम मुझे खून दो हम तुम्हे
आजदी देगें।’’ तिलक ने नारा दिया- स्वराज्य हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है।,
महात्मा गांधी ने नारा दिया था अंग्रेजो भारत छोड़ों’’ शब्दों के इस संसार
में नारे नुमा अभिव्यक्ति की ताकत अलग ही पहचानी जाती है।1954 में डा.
राम मनोहर लोहिया ने ‘‘नहर रेट आन्दोलन’’ का नारा दिया था। विनोबा भावे
ने निज पर शासन फिर अनुशासन नारा देकर जनता और जन नेताओं को अनुशासन और
शासन का मूल मंत्र दिया। नेहरू जी ने निरंतर सक्रिय रहने के लिए ‘आराम
हराम है’ का नारा दिया तो लाल बहादुर शास्त्रीजी ने भारत पाक युद्ध की
कठिन घड़ियों में ‘जय जवान, जय किसान नारा देकर देश की जनशक्ति का उसके मन
की भावनाओं को दो मोर्चो पर सजग रह कर जवानों और किसानों का सम्बल बने
रहने का आवाहन किया था। कांग्रेस के प्रमुख नारों में जात पर न पात पर,
इन्दिरा जी की बात पर, मोहर लगेगी हाथ पर, कांग्रेस लाओ गरीबी हटाओ, जब
तक सूरज चॉद रहेगा इन्दिरा तेरा नाम रहेगा। उठे करोड़ों हाथ है राजीव जी
के साथ है। अमेठी में कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी के लिए
नारा था अमेठी का ढंका बेटी प्रिंयका, सोनिया गांधी के लिए रायबरेली से
नारा शुरू हुआ था सोनिया नही आंधी है दूसरी इन्दिरा गांधी है।
कांग्रेस का साथ आम आदमी के साथ, 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने
नारा दिया था आम आदमी बढ़ते कदम, हर कदम पर भारत बुलन्द ने नया संसार रचा
था।
समाजवादियों ने आपात काल में नारा दिया था सन् 70 की ललकार, दिल्ली में
जनता सरकार, सम्पूर्ण क्रांति का नारा है, भावी इतिहास हमारा है। फांसी
का फंदा टूटेगा, जार्ज हमारा छूटेगा। स्वर्ग से लोहिया बोल रहा है,
परिवार वाद डोल रहा है।
देश पर इंदिरा गांधी के आपातकाल में पर नारा दिया था- इंदिरा हटाओ,
इंद्री बचाओ। नसबन्दी के तीन दलाल, इन्दिरा संजय वंशीलाल। जेपी आन्दोलन
में नारा दिया गया सिंघासन खाली करो जनता आती है। इंदिरा गांधी ने ‘गरीबी
हटाओ’ का नारा दिया था। इंकलाब जिन्दाबाद का उद्घोष अंग्रेजी शासन के
शोषण और दमन से संघर्ष को बल प्रदान करने के बाद आज भी दमन के विरूद्ध एक
हथियार के रूप सत्याग्रही आज भी उपयोग करते है। समाजवादी विचारों के
प्रेरक आन्दोलनकारी हमेशा यह नारा देते है-
हर जोर जुल्म की टक्कर में संघर्ष हमारा नारा,
कितनी ऊची जेल तुम्हारी देखी और देखेगंे।
तथा मजदूर आंदोलन में नारा दिया जाता है –
अन्याय जिधर है उधर शक्ति है।

आजादी आंदोलन में सत्याग्रह के रुप में अपनाया गया यह नारा आज भी
आन्दोलनों के अवसर पर सुनने को मिलता है-
ऐ दीवाने कहा चले जेल चले भई जेल चले।
1991 में कल्याण सिंह की सरकार बननेके पहले भाजपा ने नारा दिया था
राम-रोटी और इंसाफ तो एक दूसरा नारा दिया था राम लला हम आयेगें, मन्दिर
वही बनायेगे। रामजन्म भूमि आन्दोलन को उग्र करने के लिऐ भाजपा ने नारा
दिया था जिस हिन्दू का खून न खौले वह वेकार जवानी है। चुनावी जंग में
भाजपा नये-नये नारे गढ़कर सबसे अलग दिखने की जुगत करती रही है। भारतीय
जनता पार्टी एक नारा मजबूत नेता निर्णायक सरकार जनता के मन में अलग जगह
बना चुका है। इस चुनाव में बनारस से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार
नरेन्द्र मोदी को घर-घर तक नारों के बल पर ले जाने के लिए नारों का नया
संसार रचा है। जिसमें ठेठ बनारसी नारें को चुना है। हर हर मोदी, घर-घर
मोदी अब देखना यह है कि यह नारा कितना कारगर होता है। इसके पहले 1996 में
लोकसभा के चुनाव में व्यक्तिवादी नारा अटल बिहारी वाजपेयी के लिए भारतीय
जनता पार्टी ने गढ़ा था। नारे के बोल थे -अब की बारी अटल बिहारी उस समय एक
और नारा चर्चित हुआ था सबको परखा बार-बार, हमको परखों एक बार। सन्
2004में भारतीय जनता पार्टी के महासचिव प्रमोद महाजन ने भाजपा के लिए
इण्डिया शाईनिंग का नारा गढ़ा था। यह नारा भाजपा के लिए खतरनाक साबित हुआ।
1998 में पोखरण विस्फोट के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने नारा दिया था जय
जवान जय किसान, जय विज्ञान। लालू प्रसाद ने बिहार में एक नारा दिया था-जब
तक रहेगा समोसे में आलू तब तक रहेगा बिहार में लालू।
बहुजन समाज पार्टी ने अपनी पार्टी का ताना-बाना बुनते समय नारा दिया था –
तिलक तराजू और तलवार
इनको मारो, जूते चार फिर इस नारे से मुकरते हुये सत्ता प्राप्ति के लिए
एक नया नारा दिया-
ब्राहमण शंख बजायेगा
हाथी बड़ता जायेगा। बहुजन समाज पार्टी ने सपा पर हमला बोलते हुए एक नारा
दिया था -चढ़ गुण्डों की छाती पर, मुहर लगाना हाथी पर। समाजवादी पार्टी ने
उत्तर प्रदेश में मायावती के शासन काल को समाप्त करने के लिए नारा दिया
था-गुण्डे चढ़ गये हाथी पर गोली मार रहे छाती पर तथा दूसरा नारा दिया था –
उम्मीद की साईकिल जो उन्हें सत्ता सिंहासन पर बैठाने में कामयाब हुआ।
सातवी लोकसभा के चुनाव परिणाम निकलते इंदिरा कांग्रेस के समर्थकांे ने
अपने दल की विजय के उपलक्ष्य में जुलूस निकाला, जिसमेें दो बैनर इस
प्रकार थे –
‘‘इंदिरा गांधी गद्दी में,
जतना पार्टी रद्दी में..
‘‘जनता पार्टी जपा जपा,
28 माह में रफादफा,’’
1977 के विधानसभा चुनाव मंे रायपुर (मध्यप्रदेश) जिले के राजिस क्षेत्र
से जनता पार्टी केे उम्मीदवार पवन दीवान विजयी हुए थे। तब जनता पार्टी ने
यह प्रचार करवाया था।
‘‘पवन नहीं यह आंधी है,
छत्तीगढ़ का गांधी है,’’
1979 में पवन दीवान ने जनता पार्टी से इस्तीफा दे कर पृथक छततीसगढ़ पार्टी
का गठन किया और सातवीं लोकसभा का चुनाव लड़ा। उस समय नगर की दीवारों पर
लिखा था।
‘‘पवन नहीं, यह झांेका है,
छत्तीगढ़ को धोखा है’’
कवि नागार्जुन ने 1975 में लिखा था
सत्य को लक्वा मार गया है
वह लम्ब काठ की तरह
पड़ा रहता है सारा दिन, सारी रात
वह फटी -फटी ऑखों से
टुकुर टुकुर ताकता रहता है सारा दिन, सारी रात
इस सारे दिन और सारी रात को सुनहरा बनाने के लिये किये प्रयासों,
परिकल्पनाओं के मूल्यांकन का समय एक वर्ष पर्याप्त होता है।एक बर्ष-कितना
हर्ष! एक ऐसा नारा बन गया है जो हर सरकार को अपने शासन के एक वर्ष पूरे
होने पर उसके लिए लगाया जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव हेतु समाजवादी
पार्टी ने नारा गढ़ा है। ‘मन से है मुलायम, इरादे हैं लोहा’ तो भारतीय
जनता पार्टी ने नारा गढ़ा है हर -हर मोदी, घर-घर मोदी’, वही आम आदमी
पार्टी नारा दे रही है ‘झाड़ू चलेगा पाप पे, मोहर लगेगी आप पे’ तथा एक
दूसरा नारा दिया है लगाओ झाड़ू … हटाओ धूल, फिर न कहना हो गयी भूल’ के
सहारे अरविंद केजरीवाल पूरे देश में आम आदमी पार्टी के पक्ष में हवा
चलाने के प्रयास में है।

 

सुरेन्द्र अग्निहोत्री

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