modi54

जितेंदर कुमार (जितेन ठाकुर)

पहाड़ की फिजाओं मे एक जानी पहचानी सी महक घुलती जा रही है |देशी ज़मीन ,विदेशी नशल की जड़ों को सींच कर जो कमाल कर रही है उस से कई मालामाल हैं तो कई बेहाल |अपनी खूबशूरत वादियों के लिए जाना पहचाना हिमाचल अब हशीष की खेती के लिए जहाँ देश मे बदनाम हो रहा है वहीँ विदेशों मे खूब नाम कमा रहा है|प्रदेश के कुल्लू मे मलाना नाम का जो गाँव लगभग डेढ़ दशक पहले खोजा गया था तब सभी हैरान हो गये थे |इन लोगों को सिकंदर महान के वँसज के रूप मे भी देखा जाता है |लेकिन यहाँ का लोकतंत्र सबसे पुराना माना जाता है |लेकिन यही मलाना काले सोने की खेती के लिए भी जल्दी ही बदनामी का दामन ओढ़ता नज़र आया | विदेशी लोग यहाँ आकर कई कई महीने सिर्फ़ इशी काले सोने के लिए बिता देते हैं |

मलाना काले सोने की अपनी विशेष किश्म के लिए पश्चिमी देशों मे बहुत जल्द अपनी पहचान बना गया “मलाना क्रीम” |आज न्यूयार्क जैसे शहर मे अधिकतर रेस्तराँओं मे चरस के मेनू मे मलाना क्रीम सबसे महंगी बिकती है |बेसक भारत मे चरस पर पाबंदी हो लेकिन पश्चिम के देश ना सिर्फ़ मलाना मे डेरा डाले रहते हैं, बल्कि ये खेती भी उन्ही के सिर पर चल रही है |मलाना क्रीम ,काले सोने यानी चरस की ही एक किसम होती है लेकिन मलाना गाँव मे उपजने बाली इस खेती की कीमत सबसे अधिक होती है बल्कि कई गुना अधिक |इसकी वजह है यहाँ की मिट्टी |

एक पत्रकार होने के नाते कई बार मैने मलाना गाँव के इस रहश्य के बारे मे पिछले 7 वर्षों मे बहुत कुछ जाना |बहुत कुछ ऐसा था जो दुनिया जानती है और बहुत कुछ ऐसा जो सबके लिए चौंका देने बाला सच है |

मलाना गाँव हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले मे आता है और माना जाता है की सिकंदर महान जब यहाँ आया था तो उसके कुछ बीमार सैनिक उसके साथ नहीं जा पाए थे और ये गाँव उन्ही से बसा हुआ है | समंदर तल से लगभग 13000 फीट उपर इस गाँव मे बर्फ भी जमकर पड़ता है और 1999 तक किसी को इस गाँव के बारे मे पता तक नही था |यहाँ के लगभग 3000 लोग सिर्फ़ अपने मे ही मशगूल थे |यहाँ सब कुछ गाँव का ही है, गाँव की ही पुलिस गाँव की ही संसद और गाँव की ही ऊपरी और निचली अदालतें |इसे सबसे पुराना लोकतंत्र भी माना गया है |

गाँव के आस पास बहुत ही उँचे उँचे पहाड़ हैं कई कई किलोमीटर का बीराना और बेतहाशा बर्फ |बीच बीच मे जंगल भी हैं |यहाँ उगने बाली चरस इतनी तेज होती है की पूरी दुनिया इसकी दीवानी हो गई |माना जाता है कि साधारण चरस से यहाँ की चरस कई सौ गुना तीखी और तेज होती है |उसको विशेष तरीके से बनाया जाता है जिसे मलाना क्रीम कहते हैं और इसकी दुनिया भर मे सबसे अधिक माँग है |विदेशियों को जब मलाना की मिट्टी की इस खूबी का पता चला तो इस धंधे से जुड़े कई विदेशियों ने अपना पैसा यहाँ झोंक दिया |आज नौवत ये है की हिमाचल पुलिस चरस की खेती को नष्ट करने के लिए कई प्रयास करी है लेकिन इस धंधे ने अपनी जड़ें इतनी मजबूत कर ली हैं की सारा सरकारी तंत्र उसके आगे फेल हो जाता है|

एक आंकलन के मुताबिक मलाना मे काले सोने का ये ब्यापार प्रतिवर्ष लगभग 500 लाख करोड़ का है |लेकिन ऐसा नही है की यहाँ के लोग अमीर हो गये हैं |लोग आज भी खानावदोस हैं और अधिकतर लोग तो मज़दूरी ही करने लगे हैं |यहाँ का सारा धंधा नेपानी मूल के लोग और विदेशी लोग ही चलाते हैं |दूर दराज के पहाड़ों मे बर्फ हटने के साथ ही विदेशों से आया विशेष किस्म का बीज फैला दिया जाता है |जहाँ तक पहुँचने के लिए 3 से 4 दिन पैदल चलना पड़ता है |ऐसे मे प्रदेश पुलिस तमाम कोसिसों के बाबजूद इस खेती को ढूँढ नही पाती है |नेपाली मूल के मजदूर इतने कार्य कुशल होते हैं की अपने साथ इतना समान लेकर चल पाते हैं कि रास्ते मे आने बाले नदी नालों पर लकड़ी के पुल डाल लेते हैं और नदी पार करने के साथ ही उन्हे फिर से अपने साथ लेकर चले जाते हैं ,जबकि पुलिस ऐसा नही कर पाती |

विदेशों से आया विशेष किस्म का बीज और यहाँ की मिट्टी के कारण मात्र 15 से 20 दिनों मे चरस के पेड़ 30 फुट तक बढ़ जाते हैं जबकि आमतौर पर चरस का पौधा 7-8 फुट से बड़ा नही होता |और अगर लोगों की बातों को सच मान लिया जाय तो निजी हेलीकाप्टर इन जंगलों से ही इस खेती को उठा कर ले जाते हैं |इस खेती को नष्ट करने के तमाम सरकारी प्रयासों के बाद भी प्रति वर्ष इस खेती का दायरा बढ़ता ही जा रहा है |
चरस की खेती नष्ट करने तो दूर, अभी बिभाग यही पता नही लगा पा रहे की ये खेती कब और कहाँ पर हो जाती है |उसकी सबसे बड़ी वजह ये भी है की विदेशों से आने बाली चरस के पौधे अलग किसम के होते हैं और अधिकारी उन्हे पहचान तक नही पाते |

जितेंदर कुमार (जितेन ठाकुर)

c/o shiva garment , ghumarwin
Bilaspur ,HP
98161 61373
jiten373@yahoo.com