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भारत में आजकी राजनीती और क्रिकेट के रिश्तों पर आधारित एक कटाक्ष

मोहम्मद शारिक

सोलहवीं लोकसभा की घोषणा के बाद मानो भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया हो.रात को जो एक पार्टी में था सुबह आँख खुलते ही वो दूसरी पार्टी में शामिल हो गया.किसी को आंधी बहा कर ले जा रही है तो किसी को सत्ता जाने का दर सता रहा है,कोई अपने वोट बैंक (समुदाए ) की दुहाई देकर दूसरी पार्टी में जा बैठा है,चुनाव के समय वंशवाद याद आ रहा है तो कोई पार्टी में नज़रंदाज़ किये जाने से पार्टी बदल रहा है,किसी को अमुक पार्टी में अपना भविष्य अन्धकार में नज़र आ रहा है……देश के भविष्य की किसी को चिंता नहीं है. सालों का साथ लम्हों में बिखर जा रहा है…..किसी को बेटे के दूसरी पार्टी में जाने की सजा मिल रही है तो कहीं चाचा भतीजी का झगडा है,कहीं कोई अपनी सीट छोड़ने को तैयार नहीं है. रूठने मानाने का सिलसिला जारी है.ऐसा नहीं है है की ऐसा पहले नहीं हुआ,होता रहा है और आगे भी होता रहेगा. मगर विचारों के सीने पर चढ़ कर शायद नहीं हुआ और होना भी नहीं चाहिए. सत्ता की भूख ने इनमें विचार और आदर्श नाम की चीज़ को ख़त्म कर दिया है.

इन सब के बीच सब से ज्यादा असमंजस में भारतीय वोटर है जिसे अपने अमूल्य अधिकार(वोट) के बेकार जाने का दर सता रहा है. भारत की राजनीति में राजनितिक पार्टियों का गठन विचारों पर होता रहा है इसी की बुनियाद पर वोटर मतदान करता रहा है मगर इस बार विचार ताश के पत्तों की तरह बिखर गए हैं और मतदाताओं को मुश्किल में डाल दिया है. इस बार तो इसकी टोपी उसके सर का खेल जारी है.

एक विचार जो मेरे दिमाग में आ रहा है ,क्यूँ न आईपीएल की तर्ज़ पर भारतीय चुनाव को इंडियन पोलिटिकल लीग का नाम दिया जाए ,जिस में सभी राजनेताओं की बोली लगाई जाए और हर गठबंधन के मालिक अम्बानी,अदानी,मल्ल्या,रॉय जैसे उद्योगपति चलाएं. अगर ऐसा हो तो एनडीए के पाले में राहुल गाँधी जा सकते है और यूपीए में मोदी, एनडीए में कपिल सिब्बल तो यूपीए में अडवाणी. एनडीए में केजरीवाल नज़र आयेंगे तो यूपीए में जयललिता … अगर ऐसा हो तो हम जैसे विचारों वाले मतदाताओं के लिए अपना प्रतिनिधि चुनना बेहद आसान हो जायेगा और सब से बड़ी बात इस में पारदर्शिता होगी जिससे चुनाव आयोग का सिर दर्द भी कम होगा. और सब से बड़ी बात इससे सभी में सदभाव और एकता देखने को मिलेगी और वंशवाद, परिवारवाद ,जातिवाद,समाजवाद जैसी चीज़ों से निजात मिलेगी.

अगर ऐसा हुआ तो आप सब तैयार रहिये भारतीय राजनीति के नए अवतार इंडियन पोलिटिकल लीग के लिए जहाँ भुखमरी ,अशिक्षा ,महेंगाई ,भ्रष्टाचार, चियर्स गर्ल बनकर नाचेंगी और तालियाँ बजाई जायेंगी.

( लेखक पेशे से पत्रकार हैं और शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय है )
एक दशक का इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता में सक्रिय और ४ साल का पत्रकारिता के शिक्षक