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आधुनिक छापे-संदर्भों में, हास्य व्यंग्य की सर्जना करने के उद्देष्य से बनाए जाने वाले रेखांकनों और चित्रों के लिए ये शब्द रूढ हो गया. 1883 में पञ्च ने राजनैतिक व्यंग्यात्मक रेखांकनों का यह सिलसिला चालू किया था. भारत में कार्टून कला की शुरुआत ब्रिटिश काल में मानी जाती है और केशव शंकर पिल्लै जिन्हें शंकर के नाम से भी जाना जाता है, को भारतीय कार्टून कला का पितामह कहा जाता है. शंकर ने 1932 में हिन्दुस्तान टाइम्स में कार्टून बनाने प्रारम्भ किए. 1946 में अनवर अहमद हिंदुस्तान टाइम्स में कार्टूनिस्ट शंकर की जगह पर नियुक्त हुए. शंकर के बाद भारत में धीरे धीरे कार्टून कला का विकास हुआ और आज भारत में हर प्रान्त और भाषा में कार्टूनिस्ट काम कर रहे हैं. शंकर के अलावा आर.के. लक्ष्मण, कुट्टी, मेनन, रंगा, मारियो मिरांडा, अबू अब्राहम, सुधीर तैलंग और शेखर गुरेरा अदि पचासों ऐसे नाम हैं जिन्होंने कार्टून-कला को आगे बढ़ाया है. आज प्रायः हर अखबार और पत्रिका ससम्मान व्यंग्यचित्रों को प्रकाशित करती है क्यों कि पाठकों का सबसे पहले ध्यान आकर्षित करने वाली सामग्री में कार्टून-कोने की अपनी खासमखास जगह जो है!

पहले गणतंत्र से दो दिन पूर्व हिंदुस्तान टाइम्स में अनवर अहमद काकार्टून जिसमे नवजात गणतंत्र को डॉ .आम्बेडकर अपने गोद में लिए प्यार सेनिहार रहे हैं साथ में जवाहर लाल ,राजेन्द्र प्रसाद और वल्लभ भाई पटेल आदि हैं.