kashmir

इस विषय पर खबर की खबर.कॉम में हर्ष सिंह जी द्वारा लिखे लेख ‘कश्मीर,कश्मीरियत और इंसानियत ‘ और उसपर मिली प्रतिक्रियाओं से विवश होकर मैं इस विषय की वर्तमान धरातल तक सबको लाने के लिए यह लेख लिख रहा हूँ ! इसीलिए पाठकों से अनुरोध है की सन्दर्भ के लिए पहले उपरोक्त लेख को प्रतिक्रियाओं सहित पढ़ लें तो मुझपर और कश्मीर पर कृपा होगी ! क्यूँ की इस लेख के लेखक सबकुछ बयान कर के सारी जिम्मेदारी सरकार पर डाल रहे हैं प्रतिक्रिया में पाठक श्रीमान शरदजी कश्मीर के लिए देश की जनता की चाहत की बात कर रहे हैं ! और कश्मीर को लेकर यही दोनों बातें अपना महत्व और वजूद आज भी रखती हैं ! इसीलिए इनपर मैं कुछ और रौशनी डालना चाहूँगा !

मैं ये पूछना चाहता हूँ की क्या भारत में रही सरकारे नहीं जानती की कश्मीर को लेकर जनता क्या चाहती है ?
क्या पाकिस्तान की सरकार नहीं जानती की पाकिस्तानी कश्मीर को लेकर क्या चाहते हैं ?
अब इन दोनों जनता के बिच अलग से कश्मीर की जनता की कोई हैसियत होने को हम भारत की जनता होने के नाते जाने अनजाने ख़ारिज कर चुके हैं ! चलो ठीक है , भारत की जनता का यह स्पष्ट मत हम सभी को एक भारतीय होने के नाते मानने में भी कोई ऐतराज नहीं ! ठीक ? तो अब पाकिस्तानी अवाम क्या चाहती है ये हमें और दुनिया को आधिकारिक रूप से कैसे पता चलता है ? पाकिस्तानी सरकार के बयानों और नीतियों द्वारा ही न ? या और कोई जरिया है ?? हाँ एक है, जो दोनों देशो के पत्रकार सीमापार की जनता की आवाज को कहीं छुटपुट सी पत्रिका में छापकर छुट पुट आवाज देने की कोशिश करते है उसीकी एक कड़ी देश के हिन्दू राष्ट्रवादी जमात के एक पत्रकार ने सीधे लखवी से मुलाक़ात कर आगे बढाई थी ! लेकिन वो भी कुछ बवाल के बाद अंत में छुट पुटि ही साबित हुई ! तो तात्पर्य यह की जिसकी दुनिया दखल ले ऐसी आधिकारिक वाणी कश्मीर के लिए सिर्फ दोनों तरफ की सरकारों की ही होती है !
अब कश्मीर पर पाकिस्तान सरकार और अवाम की वाणी एक ही है ये कहा जा सकता है की नहीं कहा जा सकता ? एक तो ये सवाल और दूसरी तरफ भारत में इतिहास से लेकर वर्तमान सरकार तक की कथनी और करनी को देखते हुवे भी क्या यही कहा जा सकता है की कश्मीर को लेकर जो तल्खी भारत की जनता की वाणी में है वही सरकार की वाणी में भी है ? दुनिया की तो छोडो खुद हम नहीं कह सकते !
इसीलिए कश्मीर समस्या पर किसी को एकदम से देशभक्त बनने से पहले अपने सरकारों की भी देशभक्ति को नाप लेना चाहिए !
अब इसमें कांग्रेस ,बी जे पी वाली बात से किसी की देशभक्ति को कम या ज्यादा आंकना फिर से रोटी के साइज अनुसार समान बंटवारे के लिए दो की लड़ाई में तीसरे के मजे होने वाली बात होगी और दोनों भूखे के भूके नजर आयेंगे ! क्यूँ की पाकिस्तान में चाहे जो भी सरकार में हो वह पाकिस्तान में, दुनिया में और इतना ही नहीं भारत में भी आकर हमारे ही मुंह पर कश्मीर समस्या को बेबाक होकर उठाते हैं ! लेकिन हमारे सरकार में चाहे जो भी हो उनकी कश्मीर को लेकर दुनिया के सामने सारी बातें सिर्फ इशारों में ही होती है , और पाकिस्तान में हुई भी तो उतनी खुलकर और जोश से नहीं होती जीतनी भारत के चुनावों में एक दुसरे पर आरोप लगाते वक्त इस्तमाल करने में होती है ! तो क्या दुनिया ये समझे की भारत की सरकारें कश्मीर को लेकर भारत की जनता से इत्तेफाक नहीं रखती ?? या फिर कश्मीर और उसकी वजह से होता आतंकवाद भी भारत के नेताओं के लिए भारत का अंतरिम मामला है ? ,एक मात्र चुनावी मुद्दा है ?

अब भारत में सरकार में आनेवाले हरेक का कश्मीर को लेकर ऐसे हो जाने में कहाँ पेंच फसा है ये भी अब कोई अन्दर की बात नहीं रही ,ये वही जनमत संग्रह का पेंच है जिसपर गौर करने की बात कहना भी भारत की जनता के लिए देशद्रोह हो जाता है ! फिर इसी पेंच के डर से पाकिस्तान के आतंकवाद को उसके असली कारण सहित दुनिया के सामने रखने से कतराने वाले सरकार के नुमाइंदों की देशभक्ति को क्या कहा जाए ?

असल में कश्मीर समस्या को कोई सुलझाना ही नहीं चाहता बस उसे बने रहने देना चाहते हैं और इसके लिए दोनों सरकारें बराबर का योगदान देती आ रही है ! क्यूँ की पाकिस्तान सरकार चाहे जनमत संग्रह का हथियार उठाती हो लेकिन उसे भी कॉन्फिडेंस नहीं की इससे कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा | और न भारत सरकार को है की इससे कश्मीर भारत का अभिन्न अंग होने का निर्णायक ठप्पा लग जायेगा !
इसीलिए अंत में जब यही आकर एकमत होता है की सब अपने अपने हिस्से में रहो ! तो फिर शांति से या जैसे भी रहो इससे दुनिया को क्या फर्क पड़ता है ! और जिन्हें पड़ता है वो सिर्फ हमारी तरह कहकर चुप हो जाते हैं ! और आगे भी चुप ही हो जाना पड़ेगा ! क्यूँ यूँ कहते कहते जो कुछ करने लायक हो जाते हैं वह भी वहां आखिर भुत देख ही लेते हैं जहाँ पर कोई भुत न होने का आजीवन दावा करते हैं ! और उस भुत से डरने का आरोप दूसरों पर लगाते हैं !
फिर तो यही कहना पड़ता है :-

तू अँधेरे को ही बक्श दे ऐ खुदा

ये रौशनी हमें रास नहीं आती !

जो भी जिन्दा गया कब्रिस्तान … वो डरा है ,

तेरे होने की कोई मिसाल….कायम नहीं होती !