ganga
by — राष्ट्रीय, हर्ष सिंह

जी हाँ कहाँ गयी हमारे हिंदुस्तान की गंगा जमुनी तहजीब ? शायद किसी को भी इस सवाल का जवाब मालूम नहीं है और शायद जानना भी नहीं चाहते क्यूंकी आज लोगो के मन मे इतनी नफरत और घृणा भर गयी है दूसरे धर्मो के प्रति की रोज दंगे होना आम बात है | ये दंगे बहुत मामूली बातों पर हो जाते है | इस धार्मिक अशहिष्णुता का फायदा राजनीतिक दलो को होता है और तब शुरू होता है हिन्दू मुस्लिम तुष्टीकरण | जिसका बिलकुल ताज़ा उदाहरण है उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर मे हुआ 2013 का दंगा जो बिलकुल छोटी सी बात पर हुआ था | बात ये थी की एक हिन्दू लड़की को दो मुस्लिम भाई रोज़ छेड़ते थे एक दिन आजिज़ आकार उसने अपने भाइयों से इस बात की शिकायत की तो लड़की के दो भाई उनसे बात करने पहुचे लेकिन वहा मारपीट हो गयी और उन दो हिन्दू लड़को को पीट कर मार डाला गया | इसके बाद वहा इलाके के नेता पहुचे फिर सांसद , विधायक आदि | दोनों तरफ क लोगो ने थाने मे एफ।आई।आर दायर की और उन दो भाइयों की हत्या मे शामिल दो मुस्लिम युवको को गिरफ्तार कर लिया गया और बाद मे छोड़ दिया गया लेकिन उस समय के थानेदार ने एक चैनल के स्टिंग ऑपरेशन मे ये भी कबूला की उनको छोडने का आदेश ऊपर से आया था | उन युवको के छूटने के बाद माहौल बिगड़ने लगा लेकिन प्रशासन और पुलिस ने लगातार एक ही पक्ष का समर्थन किया | इधर सरकार ने लगातार वहा के डीएम और एसएसपी को बदलना शुरू किया कुल 3 डीएम और 4 एसएसपी इस बीच बदले गए जब तक कोई अधिकारी माहौल समझने की कोशिश करता उसका तबादला हो जाता | ये सर्वविदित है की लगातार एक पक्ष का समर्थन और एक पक्ष की अनदेखी इस दंगे का कारण बनी | धीरे धीरे वहा की स्थिति इतनी विस्फोटक हो गयी की सितंबर के पहले हफ्ते मे वहा दंगा हो गया और 60 लोग मारे गए गाँव के गाँव तबाह हो गए और हजारो लोग शरणार्थी शिविरो मे आ कर रहने लगे जिनको दिसंबर मे सरकार ने जबरन हटा दिया ताकि लोग वापस जा सके |

ये तो सिर्फ एक घटना है इसी दिवाली मे दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके मे दंगा हुआ “ अभी इसी साल बरेली मे सांप्रदायिक तनाव हुआ , पिछले साल राम नवमी के दिन राम बारात निकालने के दौरान उत्तर प्रदेश के कानपुर मे सांप्रदायिक माहौल खराब हुआ , कल बिहार के मुजजफरपुर मे हुई सांप्रदायिक हिंसा मे 3 लोग मारे गए |2001 ,1992, 1988 , 1984 के दंगे तो हिंदुस्तान के इतिहास का वो स्याह पहलू हैं जिनहे ना खोलना ही मुनासिब होगा |

अगर हम आंकड़ो पर नज़र डाले तो 2014 मे उत्तर प्रदेश मे 247 सांप्रदायिक झड़पे हुई जिनमे 140 लोग मारे गए 10000 घायल हुए और 1 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए | और अगर इन घटनाओ के घटने का पैटर्न देखे तो आप ये पाएंगे की इनमे ज़्यादातर घटनाए तब हुई जब देश मे चुनावी सरगरमिया तेज़ थी और चुनावो का समय नजदीक आ रहा था मुजफ्फरनगर का दंगा 2013 मे हुआ था और 2014 मे लोक सभा चुनाव थे | इन चुनावो मे बीजेपी के उम्मीदवार संजीव बालियान भारी मतो से जीते | इन पर भी दंगे भड़काने का आरोप था | कानपुर मे सांप्रदायिक हिंसा तब हुई जब चुनाव चल रहे थे और इसका असर ये हुआ की कानपुर मे मुरली मनोहर जोशी जो बीजेपी के उम्मीदवार थे उन्होने पिछले 15 सालो से सांसद और केन्द्रीय कोयला मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल कों 1 लाख वोटो से हरा दिया | त्रिलोकपुरी दंगो के वक़्त झारखंड और जम्मू कश्मीर के चुनाव होने थे और इसी साल हो रहे बिहार चुनावो से पहले मुजफ्फरपुर कादंगा इस बात की पुष्टि भी करता है की ये दंगे खुद नही होते , करवाए जाते हैं गढ़े जाते है ताकि वोटो का ध्रुवीकरण किया जा सके |उसे एक लहर बनाया जा सके |

भारत एक ऐसा देश है जहां धर्म और जाति का राजनीति मे गहरा दखल रहता है और ये चिंताजनक होने के साथ साथ विस्फोटक मिश्रण है | भारत की मूल भावना सर्व धर्म समभाव की है । भारत एक मिश्रित आबादी का देश है विभिन धर्मो , जातियो, समप्रदायों के लोग यहा रहते है | भारत अपने इसी सर्व धर्म समभाव की भावना के कारण ही विश्व प्रसिद्ध है | हिन्दू , मुस्लिम, सिख ,ईसाई सब आपस मे भाई भाई हर भारतीय का नारा होना चाहिए | हिन्दू और मुस्लिम दोनों ने कंधे से कंधा मिलाकर कर इस देश की आज़ादी मे अपना योगदान दिया | इस हिन्दू मुस्लिम एकता के कारण ही डर कर अंग्रेज़ो ने इस देश को बाँट दिया लेकिन तब भी इस देश के सर्व पंथ संभाव की भावना जीवित रही | यही भावना गंगा जमुनी तहज़ीब है | दो अलग नदिया जिस तरह से मिलकर संगम जैसे पवित्र स्थान की रचना करती हैं उसी प्रकार से हिन्दू और मुस्लिम आपस मे मिलकर हिंदुस्तान का निर्माण करते हैं | जितना योगदान इस देश को आगे ले जाने मे हिन्दू का है उतना ही योगदान मुस्लिम का भी है| धर्म और राजनीति का मिश्रण बिलकुल भी नही होना चाहिए |धर्म और राजनीति का आपस मे कोई संबंध नहीं और ये भी सत्य है की एक राज नेता का कोई धर्म नहीं होता | ये सोचना की ये उस धर्म का है तो उसका साथ देगा और इसके खिलाफ होगा ये मूर्खता है| एक नेता अपने फायदे को देख कर बदल जाता है |

धार्मिक गुरुओ और मौलानाओ को भी ये बात ध्यान मे रखनी होगी और बार बार अपने अनुयाइयों को किसी के पक्ष वोट देने की अपील को बंद करना होगा चाहे वो शाही इमाम हो, चाहे शंकराचार्य हो, चाहे रामदेव हो या श्री श्री रविशंकर | इनका काम लोगो को धर्म की शिक्षा देना है उन्हे ईमान के रास्ते मे भेजना है बाकी वोट तो वो खुद ही दे देगा उसकी चिंता आपको करर्ने की आवश्यकता नहीं |

हम भारतियों को इन नेताओ और राजनीतिकदलो की चाल और साज़िश को समझना होगा बात बात पर लड़ना बंद करना होगा क्यूकी इन झड़पो और तनावों से हमे कुछ नहीं मिलता कोई फायदा नहीं होता नुकसान ही होता है फ़ायदा तो सिर्फ नेताओ का होता है क्यूकी लोगो की भावनाए वोट मे बदल जाती हैं | हम भारतीय एक हैं अनेकता मे एकता हमारी पहचान है | भारत की इस स्थिति मे मुझे राहत इंदौरी साहब का एक शेर याद आता है –

“अगर खिलाफ हैं होने दो , अगर खिलाफ हैं होने दो,

जान थोड़ी है | ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है ,

लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद मे,

यहा पर सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है |

जो आज साहिबे मसनद हैं , जो आज साहिबे मसनद हैं,

कल नहीं होंगे | किराये दार हैं, ज्याती मकान थोड़ी है |”

इसे सभी कों याद रखना होगा दंगे फसाद देश की संप्रभुता , एकता, और अखंडता पर सवालिया निशान लगाते हैं| जागिए , देखिये और समझिए बाकी जो है सो हइए है | जय हिन्द , जय भारत