हर्ष सिंह

कश्मीर , कश्मीरियत और इंसानियत

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Kashmir_Dal_lake_boat

कश्मीर को हम भारतीय अपना गौरव कहते है | कश्मीर को हमने हिंदुस्तान का मुकुट कहा है लेकिन क्या हमने कश्मीर के साथ वो व्यवहार किया जिसका वो अधिकारी है ? शायद नहीं , क्यूकी कश्मीर को हमने हमेशा एक जीती हुई वस्तु के समान माना और समझा है | कश्मीर को कभी समझा ही नहीं कश्मीर और दिल्ली की दूरी कभी नहीं मिटी |1947 से लेकर आज 2015 तक 68 साल हो गए कश्मीर आज तक हमारे लिए एक पहेली ही बना रहा | कश्मीर क्या चाहता है न तो नेहरू जी ने समझा , ना इंदिरा ने , ना राजीव ने और ना ही मोदी उसे समझ पा रहे हैं | 1947 मे हमने राजा हरी सिंह से ‘इन्स्ट्रुमेंट आफ एक्सेसन’पर दस्तखत तो करा लिए लेकिन कश्मीर को संभाल नही पाये और ना ही पाकिस्तानी कुचक्र को समझ पाये | ये तो 100 फीसदी सही है की कश्मीर का आतंकवाद पाकिस्तान की देन है और वो भाषण जो पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने 88 मे पाक अधिकृत कश्मीर मे दिया और जिसने हिन्दुस्तानी कश्मीर मे कश्मीरी अवाम को हिंदुस्तान के खिलाफ भड़का दिया और यहा हिंदुस्तान के खिलाफ एक ऐसा माहौल बना दिया जिसने अब तक कुल 1 लाख लोगो की बली ले ली | कश्मीर मे 88 से अफस्पा लगा हुआ है जो उस समय बहुत ज़रूरी था क्यूकी उग्रवाद और अलगाववाद अपने चरम पर था जेकेएलएफ़ , लश्कर , हिजबुल और हुर्रियत कान्फ्रेंस जैसे उग्रवादी और अलगाववादी संगठनो ने वहा आतंक फैला रखा था | स्थिती तब और विस्फोटक और चिंताजनक होने लगी जब वहा कश्मीरी पंडितो और सिखों को निशाना बनाया जाने लगा | उनकी हत्या होने लगी औरतों और लड़कियों की इज्ज़त लूट कर उन्हे मारा जाने लगा| इतना ही नही मस्जिदों से नमाज़ के दौरान भी भड़काऊ नारे लगने लगे | इन सब घटनाओ के कारण वहा पाए रह रहे कश्मीरी पंडितो मे डर का माहौल व्याप्त हो गया और ऊपर से रोज मिल रही धमकियो और हो रही हत्याओ से वे सहम गए , और 19 -20 जनवरी 1990 को लाखो कश्मीरी पंडितो ने रातो रात अपने घर बार छोड़ दिये और भाग कर जम्मू या दिल्ली आ ज्ञे |4 लाख से ज्यादा पंडित कश्मीर छोड़ कर भाग गए |वो आज तक अपने ही देश मे विस्थापन का दंश झेल रहे हैं |

इसी बीच आंशिक अफस्पा को पूरी तरह से लागू कर दिया गया और जम्मू कश्मीर मे राज्यपाल शासन लागू हो गया | इसके बाद शुरू हुआ सेना और अर्धसैनिक बलों का आतंकवाद और अलगाववाद का दमन करने का अमानवीय कदम | 1991 मे आरआर 15 के जवानो ने कश्मीर के कुनोन पोशपोरा गाँव मे धावा बोल कर वहा की 100 से ज्यादा महिलाओ का सामूहिक बलात्कार किया जिनकी उम्र 13 से 80 साल के बीच थी उनमे से कई बीमार थी और कई गर्भवती | कई महिलाओ ने इसके बाद आत्महत्या कर ली थी| सेना ने पहले तो इसे उग्रवादियो द्वारा बता कर पल्ला झाड लिया लेकिन बाद मे दबाव पड़ने पर पूरी पलटन का तबादला कर दिया गया| सेना के इन दमनकारी फैसलो का नतीजा ये हुआ की कश्मीर मे भारत के खिलाफ असंतोष बढ़ने लगा | 1994 मे जेकेएलएफ़ के प्रमुख यासीन मलिक ने ये घोषणा की वो अब शांति पूर्वक विरोध करेंगे यानी जेकेएलएफ़ ने एक तरह से बंदूक का सहारा छोड़ दिया था| यासीन मलिक कश्मीर की पूर्ण स्वतन्त्रता की मांग करते हैं वही हुर्रियत कान्फ्रेंस के प्रमुख सईद शाह गिलानी कश्मीर का पाकिस्तान मे विलय चाहते हैं|

सेना ने उग्रवाद को ख़त्म करने के लिए कई बार मानवाधिकारों का हनन भी किया बिझेबेझारा नरसंहार (1993) ,सोपोर नरसंहार (1993), प्रमुख है जिनमे सेना को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया | सेना ने वहा पापा 2 जैसे कई इंटेरोगेशन सेंटर खोले थे जहा ले जा कर लोगो से पूछताछ की जाती थी और इसके लिए वहा बहुत अमानवीय तरीको का इस्तेमाल किया जाता था | इन्हे बाद मे बंद कर दिया गया | कश्मीर मे अब तक 40000 लोग लापता हो चुके हैं जिनको सेना पूछ ताछ के लिए ले गयी थी | सेना का कहना है की वो सीमा पार आतंकवादी कॅम्पस मे हैं | कश्मीर मे स्थित मानसिक रोग अस्पताल मे 10000 से ज्यादा लोग भर्ती हैं , 20000 से ज्यादा लोगो ने आत्महत्या कर ली जिनमे महिलाए ज्यादा हैं | अब तक कश्मीर मे कुल 1लाख लोग मारे जा चुके हैं | सरकारी आंकड़ो की अगर माने तो अब 20000 नागरिकों की मौत सेना की कार्यवाही मे हुई इन्हे कोलेटेरल डैमेज बोला गया | 16000 आतंकवादी और 7000 सेना के जवान इन 25 सालो मे मारे गए | सेना और उग्रवादियो द्वारा वहा भारी तौर पर मानवाधिकारो का हनन किया गया है | अभी अक्तूबर 2014 मे वह आरआर 15 द्वारा 3 किशोरों को आतन्क्वादी बता कर मर दिया गया बादमे सेना का ये दावा ग़लत निकला | सेना ने इस पर माफी मांगी और इस घटना मे शामिल जवानो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनका तबादला कर दिया | नवंबर मे सेना के कुछ जवानो को 2010 मे हुई 3 निर्दोष युवको की हत्या मे सेना कोर्ट द्वारा उम्र कैद और कोर्ट मार्शल की सज़ा दी गयी | ये सच है की वहा आतंकवाद और अलगाववाद है जिसे दबाने के लिए कठोर कदमो की ज़रूरत है लेकिन इसका मतलब ये नही की इंसानियत को दरकिनार कर दिया जाये | उग्रवादीयो का काम है हत्या करना उन्हे इसके लिए कितना भी कोसाजाए कम है | सेना को वहा स्थिति को सामान्य करने और मुसीबतों को ख़त्म करने भेजा गया है ना की वहा जा कर इसे और गंभीर करने | भारत की सेना बहुत महान है हम देश वासियों पर हमारी सेना के बहुत उपकार हैं जिनहे भुलाया नहीं जा सकता | लेकिन कश्मीरी भी अपने है इसी देश के निवासी हमारे भाई और बहन | सेना एक बहुत जिम्मेदार संगठन है जिससे ये उम्मीद नही की जा सकती की वो इन अमानवीय क्रत्यो मे उलझे |

दिल्ली कोकश्मीर पर ध्यान देने की ज़रूरत है सब सेना और राज्य सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता क्यूकी किसी के पास सीमा रहित अधिकारो का अर्थ है उन अधिकारो का दुरुपयोग | यही कश्मीर के लिए अच्छा होगा और भारत के लिए भी | कश्मीर की आवाम को मोदी जी से बहुत उम्मीदे हैं जिनहे मोदी जी को समझना होगा | मोदी जी ने इसकी शुरुआत कश्मीर बाढ़ पीड़ितों को 100 करोड़ की सहायता देकर कर भी दी | मोदी पर मुस्लिम विरोधी होने के जो आरोप लगे है इसकी वजह से देश का एक मात्र मुस्लिम बहुल राज्य उन पर भरोसा करने मे हिचकिचा रहा है जिसका ताजातरीन उदाहरण बी.जे.पी का कश्मीर मे एक भी सीट ना जीतना है | अभी प्रधानमंत्री जी को कश्मीर के लिए बहुत कुछ करना होगा और हम ये आशा करतेहैं की वो इसमे सफल होंगे और अपने पूर्व प्रधानमंतरिओ द्वारा की गयी ग़लतियो को नहीं दोहराएंगे | बाकी कश्मीर तो हमारा है और हमारा ही रहेगा , भारत का गौरव और मुकुट |

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48 thoughts on “कश्मीर , कश्मीरियत और इंसानियत

  1. wahab chishti

    पहली बार कश्मीर के ऊपर एक अच्छा लेख पड़ने को मिला है . हर्ष सिंह को मुबारकबाद एक अच्छा लेख लिखने के लिए – हर पहलु से कश्मीर पे नजर डाली है .

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  2. afzal khan

    कश्मीर में आतंकवाद की शुरुवात पाकिस्तान के शासक जियाउल हक ने शुरू करायी और कश्मीर को सब से ज्यादा डिस्टर्ब किया . जियाउल हक का ने पंजाब में खालिस्तान आतंकवादियों को पूरी मदद की और इस हद तक पहुँच गया था के अगर इंदरा गांधी ने ब्लू स्टार ऑपरेशन न किया होता तो शायद पंजाब भारत से अलग हो जाता और एक अलग मुल्क बन जाता . जियाउल हक ने सिर्फ भारत में ही नहीं अपने मुल्क में भी मुहाजिर क़ौमी मूवमेंट को पैदा कर कराची को बर्बाद किया इसी तरह फिलिस्तीन में भी हजारो फिलिस्तीनी को मार कर उन की जमीं पे कब्जा कर कर जॉर्डन को दिया .

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    1. Harsh Singh

      बिल्कुल सही कहा आपने, जनरल जिया ने ही पाकिस्तान के संविधान में संशोधन कर के उसमें शरियत कानून को शामिल किय। ईशनिंदा कानून उसी का लागू है । जनरल जियाने पाकिस्तानी पाठ्यक्रम में भी काफी बदलाव किये जो अल्पसंख्यको के खिलाफ थ। जनरल जिया ने खालिस्तान आंदोलन को समर्थन दिया ताकि हिंदुस्तान को बांट कर 71 का बदला लिया जाए पाकिस्तान को इस हालत में पहुचाने का एक जिम्मेदार ह। 84 के बाद से ही पाकिस्तान ने कश्मीर में गड़बड़ी शुरू कर द।

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    2. विशाल

      भारत में इस्लामकैंसर का रूप लेता जा रहा है।।इसका इलाज़ जरुरी हो चूका है

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  3. sharad

    यकीन नही होता कि कोई कश्मीर के बारे मे इतना घटिया लेख भी लिख सकता है ??

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    1. Harsh Singh

      जी आपके फीडबैक के लिए धन्यवाद लेकिन क्या मैं जान सकता हूं कि आपको इसमें क्या घटिया लग।

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      1. sharad

        1947 मे देश आज़ाद हुआ और आपने किसी घटना का जिक्र किया जो 1991 मे हुई ((बात आगे बढाने के लिये एक मिनट के लिये इसे सही मान भी ले तो) तो आपके विचार से 1947 से 1991 तक कश्मीर मे कोई समस्या नही थी ?? ….वैसे काश्मीरी लड़कियॉ का बलात्कार तो कई बार पाकिस्तानी और अफ़गानी आतंकवादियो ने भी किया है वे बाते आपको किसी ने नही बताई या जानबूझ कर उनको लिखना नही चाहते 🙂

        मानवाधिकारों का हनन ?? मुट्ठी भर आतंकवादियो को छिपने के ठिकाने और उनकी जरूरते बिना स्थानीय सहयोग के संभव ही नही है इसके लिये अगर उन उग्रवादीयो के सफाये के लिये भारतीय सेना उन आतंकवादियो के कुछ “सफेदपोश” हिमायतीयो को निशाना बनाती है तो इसमे गलत क्या है ??

        करीब 5 लाख हिन्दुओ को कश्मीर से उनकी ना जाने कितनी बहू बेटियो की इज़्ज़त लुट कर उन परिवारो पर हमला बोल कर उनको अपने घरो से निकाल कर कश्मीर से विस्थापित कर दर-दर की ठोकरे खाने के लिये जिम्मेदार लोगो के खिलाफ भी कोई मानवाधिकार आपकी समझ मे आता है क्या ?? आप 3 को रोना रो रहे हो और दूसरी तरफ 5 लाख ?? इतनी बेशर्मी भी ठीक नही ब्लॉगर?? महोदय….

        इतना लम्बा ब्लॉग लिखा है और सेना और केन्द्र सरकार को “ये नही करना चाहिये, वो नही करना चाहिये” की नसीहते देने के साथ-2 दो लाइने इस पर भी लिख देते की ….
        1-आखिर सेना और केन्द्र सरकार को क्या करना चाह्ये और कैसे करना चाहिये ?? ए के-47 लिये सामने से आते फिदायीन आतंकवादियो को आप शान्ति की भाषा समझाने का ग्यान बांट रहे हो 🙂
        2-उन 5 लाख कश्मीरी हिन्दुओ पर अलग से ब्लॉग लिखने का कलेजा है आपके पास जिनकी कोई गलती ना होते हुए भी उनकी जिंदगी जहन्नुम बना दी गयी ?? ….नही लिख पाओगे (क्योकि ऐसी पत्रकारिता की वजह अब कोई राज नही रह गयी है)….

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        1. Harsh Singh

          Agar aatankwaadiyon aur ugrawadiyon ki tulna aap bharat ki sena se kar rahe to bahut ghalat kar rahe kyuki aatankwaad ka koi iman nhi hota lkin sena ka hota hai..sena desh hit. Rajya hit me karya karti hai..agar sena bhi ugrawadiyon ki tarah ki tarah logo ko marna shuru kar de toh sena aur aatankwaadiyon kya fark..kya 100000. Kashmiri aatankwaad k himayati the..jo kashmiri pandito k sath hua wo ghalat hai kya muthi bhar aatankwaadiyo ki wajah se aap poore rajya ko dosh detehai

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        2. Harsh Singh

          Aur agar aap chahte hain to mai un par bhi lekh likhunga kyuki wo log meri nazar me nirdosh hain..aur ek baat mai aur khna chahunga ki kashmir ka bharat me vilaya ek sabse badi ghalti hai jise hm ab tak bhugat rahe hain..aur ise sudharana hi pdega aur kashmiri pandito ko agar wapas basana hai toh pahle Kashmir k halat sudharne honge..Kashmir bharat ka ang hai hmara hissa

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        3. Harsh Singh

          Aur sharad ji hm desh k nagrik hote hue sarkar ko sirf yahi bata sakte hain ki unhe kya nhi karna chahiye ye nhi ki kya karna kyuki neti nirman ka kaam sarkar ka hai..ab wo kaisi neeti bnati hai hm uspar kch nhi kh sakte aur shayad hmse aur aapse zyada gyaan sarkar ko hoga Kashmir k mudde pa hm sirf ye bata sakte hain ki ye neeti shi nhi.. Ye nhi ki ye kaam sarkar ko karna chahiye

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        4. Harsh Singh

          Aatankwaadiyo aur fiddling se mera koi yarana nhi hai..unhe toh khtm hi karna hoga un par kisi tarah ka manavadhikar nhi lagoo hota..mera ye lekh un logo ke liye hai jo bekasoor the..

          Reply
        5. Harsh Singh

          Aatankwaadiyo aur fidaiyon se mera koi yarana nhi hai..unhe toh khtm hi karna hoga un par kisi tarah ka manavadhikar nhi lagoo hota..mera ye lekh un logo ke liye hai jo bekasoor the..

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    2. harsh singh

      शरद जी कृपया बताइये की इसमे मैंने क्या ग़लत लिखा या घटिया जो आप को पसंद नही आया |

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      1. sharad

        ईमानदारी से कहे तो आपने इतने सारे कॉमेंट्स लिखे मगर उनकी भाषा हमारी समझ से बाहर है, स्कूल मे हमने अंग्रेज़ी भी पढी है और हिन्दी भी और दोनो ही भाषाओ मे लिखने का विकल्प भी मौजूद है फिर इस सांभर सरीखी भाषा की खोज करने की कौन सी मजबूरी आपके सामने थी:)

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        1. Harsh Singh

          मैं इस के लिए क्षमा मांगता हू। मैं यह कहना चाहताहूं की सेना और आतंकवादी कि तुलना नहीं की जा सकत। सेना राष्ट्रीय हित के लिए काम करती है और उसे इतना ध्यान देना होगा कि गुनाह गार कौन है और बेगुनाह कौन, कश्मीर हमारा है उसके हितों केलिए हमें बोलना होग। हम सिर्फसरकार को ये बता सकतेहैंकी क्या सही है क्या गलत हम नीति निर्माता नहीं ह

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  4. pramod sharma

    Bina Kashmiri Pundito ko unki jameen jayjad mullo se mukt kar basaye bina Kashmir Bharat ka ang nhi Pakistan hai.. Nehru & Abdulla ne Bharat & Kashmir ko bapauti jaise banta bhoga.. Kashmir ko kitna paisa preference diya wo Govt ki taksal nhi Bharat Tax payer ka paisa tha. Ab bhi muftkhoro ko santosh nhi. Kashmiri Pundit shahar shahar bheekh mang rhe, mulle mauj kr rhe aur ISIL ka jhand dikha rhe.. Shame !!!! Kaha ka swarg hai ye Kashmir????

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    1. Harsh Singh

      Kashmir bharat ka ang hai..aur ek rajya hone ke naate Kashmir ko saare adhikar prapt hain jo doosare rajyo ko..aur agar dekhe to Kashmir me bane baandho se bijli banti hai wo punjab aur delhi me bhi bheji jaati hai…

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    2. harsh singh

      कश्मीर का भरोसा जीतना होगा हमे

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      1. sharad

        कैसे ?? मुद्दे पर लिखते समय आपको विकल्प और तरीको को स्पष्टता से लिखना चाहिये ……माफी चाहते है मगर अपने मौजूदा तरीके से तो आप बात को उलझा जयदा रहे हो ??

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  5. ramesh kumar

    लेख मे बस ये कमि है के कश्मिरि ब्रह्मन का जिक्र नहि किया गया है .

    Reply
    1. harsh singh

      किया ह सर पह्ले उनकी ही दर्द का ज़िक्र किया है | और ये लेख कश्मीर पर है और कश्मीरी पंडित भी कश्मीरी ही हैं

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  6. sharad

    हर्ष जी आपके मन मे रह-2 कर सवाल उठ रहे होंगे कि आपके इतनी मेहनत से लिखे ब्लॉग पर हमारी तरफ से “बिना वजह” असहमति क्यो जताई गयी. आपके दिमाग मे उठ रहे सवालो पर जानने का मौका आपको अवश्य मिलेगा क्योकि डिस्कसन का मतलाम कि डिस्कसन करने वाले सभी पक्ष किसी एक बात पर सहमत होकर ही वहा से निकले (बशर्ते वे अडियल नही है तो)….शुरु करते है….

    1-कश्मीर नाम का कौन सा देश कभी इतिहास की किताबो मे रहा है ??

    2-जो कभी देश ही नही रहा वह ग़ुलाम कैसे हुआ ??

    3-जो कभी ग़ुलाम ही नही हुआ तो उसकी आज़ादी की बात क्यो ??

    4-पाकिस्तान के पास कश्मीर का भाग कैसे पहुँचा जिसे पी ओ के कहते है ?? क्या हवा मे उड़ कर ??

    5-पाकिस्तान ने किस हक से अपने कब्जे वाले कश्मीर के हिस्से मे से भी एक हिस्सा चीन को गिफ्ट कर दिया ?? पाकिस्तानियो के बाप का माल था वो भूभाग ??……….

    जिस दिन कश्मीर की शुरुआत आप शुरु से करेंगे हम सबसे पहले आपकी तारीफ करेंगे मगर सिर्फ भारत के हिस्से वाले कश्मीर पर ब्लॉग लिखने पर कभी नही 🙂

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    1. Harsh Singh

      कश्मीर एक समय पंजाब राज्य का हिस्सा था जिसे टैक्स ना जमा करने पर अंग्रेजों ने छीन लिया था जिसे बाद में जम्मू के राजा ने 7 करोड़ रुपये में खरीद। जबभारत में आजादी की लड़ाई हो रहीथी तब कश्मीर की जनता भी राजा हरी सिंह के खिलाफ थी। जब देशआजाद हुआ तब राजा ने आजाद रहना चुना क्योंकि वहहिंदुस्तान और पाकिस्तान से दोनों से मदद ले सकतेथ लेकिन जब पाकिस्तान ने हमला किया तो उनका सपना टूट गया औरउनकी अपनी सेना कि एक टुकडी गिलगित स्काउट कबाइली लडाको से मिल गई तब वह हिंदू होने के नाते भारत में शामिल हो ग। औरभारत की सेना नेवहाँ मोर्चा संभाल कर 2/3 कश्मीर को मुक्तकराय। नेहरू के संयुक्त राष्ट्र में जाने कीवजह से 1 जनवरी1949युद्व विराम हो गय। जो 1/3 कश्मीर पाक के पास हैवो पी ओ के ह। संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर में जनमत संग्रह कराने कीबातकी और कहा कि पाकिस्तानगैर कश्मीरीयो को वापसबुलाये भारत सिर्फ उतनी सेनारखे जितनीजरूरत हो

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    2. Harsh Singh

      लेकिन ना पाकिस्तान ने माना न हिंदुस्तान न। क्योंकि कश्मीर की अवाम आजादमुल्क का सपना देखचुकी थी लेकिन यह नहीं हो पाया

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    3. Harsh Singh

      कश्मीर का वो हिस्सा पाक का है चाहे वह उसे चीन को दे या अमेरिका को हमे इससे क्या क्योंकि भारत सरकार के मुताबिक 49 के बाद का कश्मीर भारत का अभिन्न अंग ह। तभीLOC पर फेंसिंग भारत नेकी पाक ने नही

      Reply
      1. sharad

        क्या भाई सारी रामायण खत्म हो गई और आप सीता का केरेक्टर पूछ रहे हो :)….

        आपने सहेी कहा कि पाकिस्तान अपने हिस्से का जो चाहे करे किसी को कोई ओब्जेक्शन् नही मगर हमारे हिस्से के बारे मे कुछ यासिन मालिको, शब्बीर शाहो, लोनो, गनीयो, 35 पार्टीयो वाली हुर्रियत की बात क्यो उठायी जाती है कि वो क्या चाहते है ?? कल को ये पैसे खाकर अफ़ग़ानिस्तान मे मिलने की जिद पकड ले तो क्या ऐसा करना चाहिये ??

        कश्मीर भारत मे है और रहेगा ….क्या किसी ने कश्मीर पर देश की जनता की राय जानने केी कोशिश की है कि देश की जनता क्या चाहती है ?? कल अगर असम के किसी ज़िले के लोग बांग्लादेश के साथ रहने का जनमत संग्रह करवाने की बात करेंगे तो मान लेना चाहिये क्या ?? जन्मान्ट संग्रह देश की जनता का होता है …….जिसको इससे ऐतराज है वो अपने तर्क लेकर सामने आये कि क्यो कश्मीर को पाकिस्तान को दे देना चाहिये या आज़ाद देश बना देना चाहिये?? ….

        वैसे.पाकिस्तान वाले कश्मीर को भारत मे मिलाने की बात कश्मीरी नेता क्यो नही करते ??

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        1. Harsh Singh

          देखिए दिक्कत यह है कि ये पाकिस्तान के पाले हुए हैं चाहे गिलानी हो या मलिक इनके मन में यह जहर भरा गया है कि हिंदू देश मुस्लिम समुदाय का ध्यान नहीं देते, कश्मीर हमारा है और हमारा ही रहेग। जो जहर पाक ने भरा वो इंहोने जनता में बांट दिया,, अब इनकी पकड़ कम हो रही है, इन्हें दिक्कत हिंदुस्तान से है, इन्हें हिंदुस्तान को काटने के लिएपैदा किया गयाह। औ जनमत संग्रह 49 की बात थी जो अब औचित्य हीन है

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        2. Harsh Singh

          और मेरे पूरे लेख में कहीं भी कश्मीर को अलग करने की बात नहीं है और ना ही समर्थन और ना मैंने कहा की गिलानी और मलिक को मैं समर्थन देता हू। ये लेख कश्मीर की अवाम के लिए है जो पिस रही है

          Reply
          1. sharad

            ऐसे कुछ अलगाववादी हर राज्य मे है , इन्ही सब के लिये पुलिस और सेना रखी जाती है….अब रोज-रोज तो युध लदे नही जाते मगर ऐसे आस्तीन के साँपो को काबू करने के लिये कश्मीर (या दूसरे अशान्त इलाको मे) सेना को तैनात किया जाता है जो उचित कदम है …

            पाकिस्तानियो के पास अपनी जनता को रोजमर्रा की जरूरतो को मुहैया करवाने के लिये पेट्रोल तक नही है….उनकी राष्‍ट्रीय हॉकी टीम के पास भारत मे टूर्नमेंट मे शिरकत करने के लिये फ्लाइट के टिकटो तक के लिये धरने करने पड़े थे….

            पाकिसतानेी एकोनॉमी की हालत ऐसी है कि अमेरिका से 100 करोड़ डॉलर का लोन लेते है और फिर अमेरिका उनको हथियार देकर 70 करोड़ डॉलर वापस ले लेता है 20 करोड़ डॉलर पाकिस्तानी फ़ौज़ की जेब मे चले जाते है बचे 10 करोड़ डॉलर मे वहा के राजनेता और विकास कार्य ?? इसके बाद 100 करोड़ डॉलर का ब्याज चलता रहता है…..

            पाकिस्तानियो की कमर टूटी हुई है इसीलिये अपनी भूके पेट जनता (अवाम) को धर्म की अफीम के सहारे कश्मीर की तरफ धयान भटका दिया जाता है क्योकि कश्मीर का मुद्दा नही उठाएंगे तो पाकिस्तानी अवाम रोटी, कपड़ा मकान मांगेगी जिसे देने की नियत और औकात पाकिस्तानी हुक्मरानो की नही है…..

            वैसे आपको पाकिस्तानी अवाम की इतनी फिक्र क्यो है:) कभी भारतीय अवाम की मुशकिलो भी तरफ नज़रे इनायत कर लिया कीजिये !!

          2. sharad

            हर्श भाईजान अपने गाँधी जी जिंदगी भर पाकिस्तान पाकिस्तान करते रहे मगर उसी पाकिस्तान की स्कूली किताबो मे गाँधी जी का कोई जिक्र नही है ?? ऐसे एहसानफरामोश पाकिस्तानियो के लिये आपकी फिक्र की कोई एक वाजिब् वजह ??

    4. Harsh Singh

      भारत तो loc को सीमा बनाने की बात करता है जिसका सीधा मतलब है कि pok से भारत ने दावा खत्म कर दिया

      Reply
      1. sharad

        जी नही !! इसका ये मतलब है की “जियो और जीने दो” और जो जिसके पास है उसी मे खुश रहो क्योकि 1947 को 2015 मे उसी रूप मे लाने वाली टाइम मशीन मशीन ना भारतीयो के पास है और ना ही पाकिस्तानियो के पास …..

        .इसलिये एच ओ सी का मतलन है कि इस तरह हमारा हिस्सा और उस तरफ वाला आपका और अब अपने-2 हिस्से मे शान्ति से रहो 🙂

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        1. Harsh Singh

          हाँ ठीक लेकिन पाकिस्तान माने तब नी

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        2. Harsh Singh

          और इसी का मतलब दावा खत्म करना है

          Reply
          1. सिकंदर हयात

            हर्ष भाई आपका इस साइट पर बहुत बहुत स्वागत हे मगर बार बार एक एक लाइन के कॉमेंट ना करे प्लीज़ ये ठीक नहीं हे कमेंट बहुत ही महत्वपूर्ण होते हे आजकल लोग लेख के साथ साथ कमेंट भी जरूर ही और बड़े ध्यान से पढ़ते हे बार बार बेहद छोटे कमेंट ना करे इससे पाठक निराश होगा उमीद हे आप बात समझेंगे

  7. Harsh Singh

    शरद जी मैंने कब कहा कि मैं पाकिस्तान के जनता के लिए बोल रहा हू। अब कश्मीर की अवाम पाकिस्तानी हो गई, कश्मीर कीजनता भी हिंदुस्तान कीहै मैं अपने देश केहित की बात कर रहाहू। और धन्यवाद सिकंदर जी और मैं इसका ध्यान रखूंगा

    Reply
    1. sharad

      जो बार-2 पाकिस्तानियो की जुबां बोले क्या उनको पाकिस्तानी नही कहा जाना चाहिये ?? पाकिस्तान ने आखिर भारत वाले कुच् कश्मीरियो को ऐसा क्या दे दिया है ??
      अभी बाढ़ भी कश्मीर के दोनो भागो (भारत और पाकिस्तान वाले) मे आई थी , 12 फुट पानी खड़ा हो गया था मगर भारत की सेना ने अपने कश्मीर के लाखो नागरिक बचा लिये (वे लोग जिनमे से कई उसी सेना पर पत्थर मारते थे) जबकि पाकिस्तानी भाग वाले कश्मीर की दुर्दशा किससे छिपी है ??…..जो अपने नही संभाल सकता वो दूसरो के संभालेगा ??….

      और वैसे भी पाकिस्तान का भारतीय मुसलमानो के प्रति नकली प्रेम का एक ही मतलब है ….भारत मे रह कर ही तोड-फोड़ करो, पाकिस्तान मे मत आना ….पाकिस्तान आये तो ट्रीटमेंट . “मोहाज़िर” वाला यानि दो कौड़ी का सिर्फ नाम वाला नागरिक जिसे पाकिस्तान की अच्छी जगहो पर जमीन तक खरीदने तक का हक नही है ??…..पाकिस्तानी अवाम का सॉफ-2 मतलब है कश्मीर के वे लोग जो अपने देश मे रह कर पाकिस्तान की गाते है ??

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      1. harsh singh

        शरद जी अपने ही देश के नागरिकों के हित मे बोलने वाली ज़ुबान को अगर आप पाकिस्तानी करार दे दे तो कोई क्या कर सकता है | एक तरफ आप ये कहते घूमते हैं की कश्मीर हमारा है और वही अगर कोई इंसान कश्मीर के नागरिकों के हित मे बात करे तो वो पाकिस्तानी | मेरे लेख को पढ़िये समझिए , मैंने काही भी पाकिस्तान का समर्थन नहीं किया, न काही वाहा पर व्याप्त अलगाववाद और आतंकवाद को किसी भी तरह से सही बताया | आप 4 लाख कश्मीरी पंडितो के लिए बोल रहे जो बहुत अच्छा है क्यूकी वो भी इस देश के निवासी हैं | उन्के साथ अच्छा नाही हुआ इसका मतलब ये तो नहीं की आप 5000000 लोगो के हितो , उनके मानवाधिकारों , उनकी आज़ादी को कुचल कर रख दे | आप महातमा गांधी का ज़िक्र कर रहे हैं गांधी ने ही बोला की आँख के बदले आँख का नियम अगर सही होता तो आज पूरी दुनिया आंधी होती | एक बार कश्मीरी हिन्दू और कश्मीरी मुसलमान को एक नज़र मे रखिए तब आप इस लेख का अर्थ समझ पाएंगे | सेना मणिपुर और नागालैंड मे भी लगातार यही करती आयी है | महोदय , हमारी सेना राम की सेना नहीं है जो कभी कोई ग़लती नहीं कर सकती और भाई मर्यादा पुरुषोत्तम राम की सेना ने जब लंका पर हमला किया तो राम के सैनिको ने रक्षसियों को बाल से घसीट कर निकाला उनके जन्मे बच्चो को पटक कर मार डाला ऐसा तो श्री राम चरित मानस के लंका कांड मे साफ लिखा हाईऊ | भाई ये भारत की सेना है जब राम की सेना मनवाधिकारों का हनन कर सकती है तो हमारी क्यू नहीं | कश्मीर के मुद्दे पर जब तक आप दो आँख रखेंगे उसे समझ नहीं पाएंगे | गुजरात के दंगे किसी से नहीं छुपे भारत सरकार तक ने माना ने इन मे 2000 मुसलमान मार दिये गए | तो बहस का कोई अंत नहीं | आप इस लेख को फिर से पढे और समझे |

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        1. sharad

          ये हमारा पहला डिस्कसन नही है और कश्मीर ही नही बल्कि हम हर मुद्दा एक ही सोच के साथ डिस्कस करते है….और वह नज़रिया है खुला डिस्कसन !! जो आपके मन मे है वो आप सामने रखिये और जो हमारे मन मे है हम सामने रखेंगे….हम दोनो और बाकी पाठक मित्रो के महत्वपूर्ण योगदान से कुछ ही कॉमेंट्स मे “जयदा सही” वाली सोच सबके सामने आ जायेगी ….अब इससे जयदा इस मुद्दे मे डिस्कसन करने लायक बचा नही है क्योकि आप पाकिस्तान परस्तो के खिलाफ बोलने मे अगर-मगर कर रहे हो

          गुजरात मे 2000 बाद मे मारे है पर उससे पहले 59 को जिंदा भी जलाया गया है और उन को जिंदा इसलिये जलाया गया क्योकि उनमे से एकाध की किसी धर्म विशेष के चाय वाले के साथ मामूली कहासुनी हुई थी…..एक चाय वाले के साथ मामूली कहासुनी पर 59 निर्दोषो को आग मे जला कर भुन देने पर आप खामोश रहते हो ?? चाय वाले के साथ मामूली कहासुनी की प्रतिक्रिया अगर 59 निर्दोष मौतो की हो सकती है और आप तब खामोश रहते हो तो तो 59 मौतो की प्रतिक्रिया मे 2000 निर्दोषो की मौत पर कम से कम आपको सवाल उठाने का कोई हक नही बनाता !!….फर्क क्या था निर्दोष तो दोनो ही बार थे ?? पर आप पहली घटना पर चुप रहेंगे और डिस्कसन दूसरी से करने की कोशिश करना चाहेंगे तो कम से कम हमसे इसकी इस सोच की सहमति की उम्मीद मत ही रखिये….ईमानदार बनिये सामने वाला आपसे जयदा ईमानदार मिलेगा !!

          आप कश्मीर भी बीच से शुरु कर रहे हो और गुजरात भी ??

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  8. harsh singh

    शरद भाई आप पाकिस्तान परस्तों पर चर्चा तो कीजिये आप तो हमे ही पाकिस्तानी बनाए दे रहे हैं 🙂 और देखिये साहब जान जान होती है चाहे 59 की हो या 2000 की और गोधरा कांड के सभी आरोपियों को सज़ा ए मौत मिल चुकी है तो 2000 मुसलमानो के मारे जाने का तो कोई औचित्य ही नहीं क्यूकी वो बेकसूर थे |यही बात कश्मीर पर भी लागू होती है मई अफस्पा हटाने को भी नहीं कह रहा मेरे लेख का सिर्फ ये मतलब है लोगो को कश्मीर का दूसरा पहलू भी पता चले | पूरा कश्मीर आतनवादी नहीं न हो सकता | सेना की इन ग़लतियों की ओर इंगित करना इसीलिए आवश्यक है की सभी को कश्मीर की दिक्कतों के बारे मे पता चले | अब जो 40000 लोग लापता हैं सेना को उनके बारे मे उनके घर वालो को तो बताना चाहिए की वो आतंकवादी थे या उनसे मिले थे या ग़लती से मारे गावे | सेना कुछ नहीं कहती सिवाए इसके की वो सीमा पार हैं अब अगर वो सीमा पार होते तो अपने परिवार वालो से संपर्क करते कभी न कभी |
    और मैंने जिन घटनाओ की चर्चा यहा की है भाई उनपर तो संग्यान खुद भारत सरकार ने लिया और राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग ने भी लिया है | और ऐसे तामाम घटनाए है जो रेड क्रॉस सोसाइटी और एम्नस्टी इंटरनेशनल ने खुद संगयान ली और रिपोर्ट भी भेजी जिसे सरकार ने खारिज कर दिया | कश्मीर मे 350 जगह पर बने कब्रिस्तानों का क्या सच है जिनमे 10000 से ज्यादा कब्रे हैं और ये कब्रिस्तान समाज के नहीं है बिलकुल दूर दराज़ के निर्जन स्थानो पर है | क्या एमनेस्टी इंटरनेशनल भी पाकिस्तानी जुबान बोलती है | भारत गांधी का मुल्क है शांति पसंद और मानवता से भरपूर एचएम तभी किसी देश की वहशीयत पर उंगली उठा सकते हैं जब हमारे यहा भी वहशीयत न हो और जो वहशीयत करने वालो कोप सज़ा हो

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    1. sharad

      हा हा हा अरे नही हर्ष भाई आपको क्या किसी को भी लेकर हमारे दिलो दिमाग मे कुछ नेगेटिव रखने की हमारे पास जगह ही नही है….इसी साइट पर एक से बढ़कर एक महारथियो (हयात भाई, राज भई, सचिन परदेसी साहब, अफ़ज़ल साहब …लम्बी लिस्ट है) से कभी ना कभी हमारा आमने-सामने का जोरदार डिस्कसन हो चुका है और होता रहता है मगर फिर कभी किसी दूसरे ब्लॉग किसी और मुद्दे पर पर एक दूसरे से सहमति का रंग भी उतना ही गाढ़ा मिलेगा 🙂 ऐसा इसलिये हो पाता है कि हम सब मुद्दे डिस्कस करते है जो अलग होते है इसीलिये कभी सहमति और कभी असहमति !!….

      सारे सहमत होंगे तो डिस्कसन होगा ही नहीः)

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      1. Harsh Singh

        बिल्कुल शरद जी चर्चा का यही फायदा होता है

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  9. muni

    kashmir me kabhi kabhi sena ki jayadtiya hui hai no doubt but sena kin haalato me vaha kaam kerti hai ye sayad aapko maloom nahi. m gaya tha vaha flood relief operation me unko rescue kerne aur unko food supply kerne. badle me mujhe kya mila? hamare helicopters pe pathar mare gaye.jab jaan khatre me padti hai toh sara Gandhi Gyaan ek taraf rakha reh jata hai. yaha baithker pravachan kerna bahut aasaan hai.
    tum kaise react keroge aase haalat me

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  10. harsh singh

    जी मै इस बात से पूरी तरह से सहमत हूँ की सेना के लिए वह के हालत ठीक नहीं है | बहुत मुश्किल होती है लेकिन हमे ये भी मानना होगा की इन परिस्थितियो से सेना को जूझना पड़ेगा और इस स्थिति मे सामान्य बने रहना होगा | कश्मीर बाढ़ के दौरान सेना का काम काबिले तारीफ था और हमारी सेना तो वैसे भी महान है मै सेना को न तो कश्मीर के हालत का जिम्मेदार ठहराता हूँ और ना अपनी सरकार मै सेना को वहा मानवाधिकार हनन का दोषी बता रहा हूँ |

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  11. Dani

    Puri tarah se bakwas hai.
    .
    Jub hinduo ko khdeda gya to lagbhag waha ke sabhi musalmano ki sahmati thi.
    Hajaro Hindu balikao aurto ko balatkar ke badd maar dala gya.
    Sena Na hoti to Kashmir kab ka Pakistan ho chuka hota.
    Wampanthi lekhko jaisa lekh hai.
    Jo dilli aur Sena pr aarop lagate hai.
    Ghtiya aur bekar lekh.

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  12. prasad joshi

    गणित हर सवाल का जवाब देता है…..चलो पता लगाते है..

    (१) आप कहते है १ लाख लोगो को सेनाने मार दिया. हम ये समझकर चले २ लाख लोगो के सेना ने मार दिया. आप के दिये आकडो से दुगने लोग.
    (२) १९८९ से २०१७ यानी कि २८ साल. २ लाख ÷ २८ साल. हर साल मे सेनाने ८००० लोगोको मारा है.
    (३) मान लो कश्मिर के १० जिल्हे मे ये हत्याए हुवी है. यानी की ८००० ÷ १० = ८००.
    (४) मानलो की ३ लाख आबादी है किसी district की. तो तीन लाख कि आबादी मे ८०० (actual ४००) लोग आतंकवादीयोका साथ देरहे है directly or indirectly ऐसा संदेह सेना को नही होना चाहीये क्या?
    (५) कश्मिर कि १०% जनता अगर separatists के साथ है और ऊनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से मदत कर रही है. तो १ करोड २५ लाख कि जन संख्या मे १२ लाख separatist लोगो मे ८०० लोगो कि हर साल पुछताछ और संदेह मे ४०० लोग को सेना द्वारा मार दिया जाना. क्या सेना इतनी भी कारवाई ना करे?
    (६) सेना के द्वारा मानवाधीकार का हनन होता होगा, मै इस fact को नकार नही रहा हु. पर ऊसका प्रतीशत ५% तक सिमीत होगा. आप तो सेना को ही आतंकवादी बोल गये.
    (७) बलात्कार किसी वैश्या पर भी होता है तो ऊसका समर्थन नही किया जा सकता. जिन सैनीको द्वारा बलात्कार किया गया है उन्हे कठोर शिक्षा होनी चाहीये. पर इससे पुरी सेना को दोष नही दिया जासकता है.

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